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प्रेग्नेंयी में कितना खून होना चाहिए
सामान्य महिला के शरीर में 12 से 16 ग्राम हीमोग्लोबिन होना नाॅर्मल होता है। जबकि प्रेग्नेंट महिला के लिए शरीर में 11 से 15 ग्राम हीमोग्लोबिन सामान्य होता है, क्योंकि प्रेग्नेंसी के समय आरबीसी यानी लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या कम हो जाती है।
आयरन की कमी वाले एनीमिया के क्या लक्षण हैं?
एनीमिया के कुछ सामान्य लक्षण हैं:
थकान, कमजोरी और ऊर्जा में कमी
श्वासहीनता
अत्याधिक तेज या अनियमित धड़कन (धकधकी)
चक्कर आना
सिरदर्द
चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत
होंठों, पलकों के अंदरुनी हिस्से और मुंह के अंदर की जगह का फीका पड़ जाना
टांगों में ऐंठन
भुरभुरे या चम्मच के आकार के नाखून
बाल झड़ना
भूख कम हो जाना
एनीमिया के कुछ ऐसे लक्षण भी हैं, जो इतने आम नहीं होते, जैसे कि:
जीभ में दर्द
सामान्य से ज्यादा ठंड लगना
कानों में घंटी की आवाज या गूंज सी सुनाई देना
भोजन के स्वाद में बदलाव
खाली बैठे हुए टांगें हिलाने की तीव्र इच्छा महसूस होना (रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम)
मुंह के किनारे फटना या दर्दभरे छाले से होना
निगलने में दिक्कत
खुजलाहट
खाने की असामान्य लालसा या इच्छा (पाईका) भी एनीमिया का एक लक्षण है। पाईका से ग्रस्त महिलाओं को ऐसी चीजें खाने की लालसा होती है जो खाने योग्य नहीं होती जैसे कि मिट्टी, गीली मिट्टी, साबुन, बर्फ, तारकोल, चॉक, राख या सिगरेट बट आदि।।
क्या एनीमिया के कारण मेरे बच्चे के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके एनीमिया का स्तर क्या है। आपका शरीर यह सुनिश्चित करता है कि पहले आपके शिशु को उसके हिस्से का आयरन मिले, उसके बाद आपको। आपके शिशु को विकसित होते दिमाग और तंत्रिका तंत्र के लिए आयरन की जरुरत होती है। इसलिए, शिशु तब तक इससे प्रभावित नहीं होगा, जब तक आपका आयरन का स्तर बहुत ही कम व गंभीर स्तर पर न पहुंच जाए।
अगर गर्भावस्था में गंभीर एनीमिया का उपचार न किया जाए, तो कुछ और परेशानियों का जोखिम बढ़ जाता है, जैसे:
समय से पहले प्रसव का दर्द उठना
अपने विकास के चरण से छोटा शिशु या फिर जन्म के समय शिशु का कम वजन
शिशु में जन्म के समय आयरन का कम स्तर, जिससे उसका शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है।
गर्भावस्था में संक्रमण हो जाना
मृत शिशु के जन्म (स्टिलबर्थ) या नवजात शिशु की मृत्यु का खतरा बढ़ जाना
आपकी डॉक्टर डिलीवरी के दौरान अतिरिक्त एहतियात बरतेंगी। आपके प्रसव के तीसरे चरण में प्लेसेंटा को बाहर निकालने के लिए शायदचिकित्सकीय विकल्पों की मदद ली जाएगी। इससे डिलीवरी के बाद अत्याधिक रक्तस्त्राव की आशंका कम रहती है, वरना इससे आयरन की कमी और बढ़ सकती है।
एनीमिया का प्रभाव शिशु के जन्म के बाद भी बना रह सकता है। बहुत सी नई माएं शिशु के जन्म के बाद पहले कुछ हफ्तों और महीनों तक काफी व्यस्त और थकी हुई सी रहती हैं। बहरहाल, यदि आपको आयरन की कमी हो तो नवजात शिशु की देखभाल करने में भी आपको मुश्किल हो सकती है। इससे आपको प्रसवोत्तर अवसाद होने की आशंका भी बढ़ जाती है।
आप चिंता न करें, यदि आपके एनीमिया का समय पर पता चल जाए और उपचार हो जाए तो ऐसी समस्याएं होने की आशंका काफी कम होती है।
आयरन की कमी वाले गंभीर एनीमिया का इलाज कैसे किया जाता है?
एनीमिया से बचने के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह है कि सभी गर्भवती महिलाओं को आयरन अनुपूरक लेना चाहिए। इस अनुपूरक में 0.5 मि.ग्रा फॉलिक एसिड के साथ 100 मि.ग्रा एलीमेंटल आयरन होता है। इसे दूसरी तिमाही की शुरुआत से रोजाना लेना होता है। आपको गर्भावस्था के अंत तक और स्तनपान के दौरान इसे लेना जारी रखना होगा।
यदि आपको एनीमिया है, तो प्रतिदिन सुबह व शाम एक-एक गोली खाने के लिए कहा जा सकता है। आपको आयरन की यह उच्च खुराक हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य आने तक लेने को कहा जाएगा।
एक बार हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य होने पर, आपकी डॉक्टर रोजाना एक गोली लेने की सलाह दे सकती है। यह एनीमिया को दोबारा वापिस आने से रोकने के लिए किया जाता है।
अगर आपको हल्का एनीमिया है, तो अपने आहार में सुधार करने से मदद मिलेगी। इसके बावजूद, आपको आयरन की खुराक भी लेनी ही पड़ेंगी।
कैल्शियम आयरन के समाहन में बाधा डालता है। इसलिए आपको कैल्शियम और आयरन की गोलियां एक ही समय पर नहीं लेनी चाहिए।
डॉक्टर आपके आहार के बारे में पूछताछ करेंगी। मांस के स्त्रोतों में पाया जाने वाला आयरन अन्य खाद्य पदार्थों की तुलना अधिक आसानी से अवशोषित होता है। अगर आप शाकाहारी हैं, तो आपको अपने आहार में आयरन की वृद्धि के लिए आयरनयुक्त आहार शामिल करने होंगे।
चाहे आप शाकाहारी हों या गैर शाकाहारी, आपके लिए बहुत से आयरन से समृद्ध खाद्य पदार्थ उपलब्ध हैं। आपको उन्हें अपने हर भोजन में शामिल करने का प्रयास करना पड़ेगा। आयरन से भरपूर भोजन के साथ विटामिन सी (जैसे कि एक गिलास नींबू पानी आदि) का सेवन आयरन का अवशोषण करने में शरीर की मदद करता है।
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