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प्रेग्नेंसी में अल्ट्रासाउंड करवाना नॉर्मल बात है। इस दौरान आप गर्भ के अंदर पल रहे शिशु को देख पाते हैं। अल्ट्रासाउंड से नन्हे शिशु के पैर, हाथ और मूवमेंट को देखना बहुत खुशी देता है। वहीं कुछ पेरेंट्स को यह डर सताता है कि क्या शिशु के लिए अल्ट्रासाउंड की तरंगें सुरक्षित हैं या नहीं।
अगर आप प्रेगनेंट हैं और अल्ट्रासाउंड को लेकर आपको टेंशन हो रही है तो अब रिलैक्स हो जाइए। अल्ट्रासाउंड को लगभग 30 साल हो चुके हैं और अब तक इसका कोई भी साइड इफेक्ट सामने नहीं आया है। यहां तक कि अध्ययनों में भी सामने आया है कि अल्ट्रासाउंड शिशु के लिए सुरक्षित होता है।
कैसे काम करता है अल्ट्रासाउंड
अल्ट्रासाउंड साउंड वेव्स का इस्तेमाल करता है और इसमें किसी हानिकारक रेडिएशन का प्रयोग नहीं होता है। इसमें पेट के अलग-अलग हिस्सों की तस्वीरें पाने के लिए ट्रांसड्यूसर नामक डिवाइस को पेट पर लगाया जाता है। ये पेट के अंगों की तस्वीरों को मॉनिटर पर दिखाता है। साउंड वेव की आवाज गर्भ में पल रहे शिशु तक को नहीं सुनाई देती है।
कितनी बार करवा सकते हैं अल्ट्रासाउंड
प्रेगनेंट महिला को 18वें और 22वें हफ्ते के बीच अल्ट्रासाउंड के लिए बुलाया जाता है। इस दौरान शिशु के आसपास जमा एम्निओटिक फ्लूइड की मात्रा, प्लेसेंटा की पोजीशन और अम्बिलिकल कॉर्ड की वाहिकाओं और शिशु के अंगों की मूवमेंट को मॉनिटर किया जाता है।
3डी और 4डी अल्ट्रासाउंड
3-4-
3डी और 4डी अल्ट्रासाउंड 2डी की तुलना में ज्यादा स्ट्रांग होते हैं लेकिन ये भी शिशु के लिए सुरक्षित होते हैं।
किस हफ्ते में बेहतर रहता है अल्ट्रासाउंड करवाना
अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्सटेट्रिशियन एंड गायनेकोनोलॉजिस्ट का कहना है कि महिलाओं को दूसरी तिमाही में कम से कम एक बार तो सोनोग्राम करवाना चाहिए। आप प्रेग्नेंसी के 18वें और 22वें सप्ताह में सोनोग्राम करवा सकती हैं। इसके अलावा गर्भावस्था की पहली तिमाही में 14वें सप्ताह से पहले अल्ट्रासाउंड करवा सकती हैं।
पहला अल्ट्रासाउंड कब करवाएं
कुछ डॉक्टर प्रेग्नेंसी के 6 से 8वें हफ्ते में पहला अल्ट्रासाउंड करवाते हैं। वहीं अगर हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का कोई लक्षण हो जैसे कि ब्लीडिंग, पेट में दर्द या पहले मिसकैरेज होना, कोई जन्म विकार या प्रेग्नेंसी में कॉम्प्लिकेशन आने पर डॉक्टर इस समय अल्ट्रासाउंड करवाने की हिदायत देते हैं।
क्यों करवाया जाता है अल्ट्रासाउंड
प्रेग्नेंसी कंफर्म करने, शिशु की उम्र और ग्रोथ के बारे में जानने, डिलीवरी डेट का पता लगाने, शिशु की दिल की धड़कन, मसल टोन, मूवमेंट और विकास के बारे में जानने के लिए अल्ट्रासाउंड करवाया जाता है।
अल्ट्रासाउंड से पता चलता है कि गर्भ में एक बच्चा है या जुड़वा शिशु पल रहे हैं। वहीं डिलीवरी से पहले शिशु की पोजीशन जानने के लिए और ओवरी और यूट्रस की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड किया जाता है।
प्रेग्नेंसी में अल्ट्रासाउंड करवाना बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि इससे आपको शिशु की सेहत और विकास के बारे में काफी कुछ जानने को मिलता है। साथ ही यह भी पता चलता है कि आपकी प्रेग्नेंसी हेल्दी है या नहीं और इसमें कोई कॉम्प्लिकेशन तो नहीं है।
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