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50 की उमà¥à¤° में महिलाओं और पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ का कितना होना चाहिठबीपी?
हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° जिसे साइलेंट किलर के नाम से à¤à¥€ जानते हैं। ये à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ बीमारी है जो तनाव, बिगड़ते लाइफसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² और खराब डाइट की वजह से पनपती है। बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° दो तरह का होता है हाई और लो बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤°à¥¤ हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° में सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• – 130 से 139 mm Hg के बीच और डायासà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• – 80 से 90 mm Hg के बीच होता है। लो बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° में सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• – 90 mm Hg से कम और डायासà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• – 60 mm Hg से कम होता है।
सामानà¥à¤¯ बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° 120/80 mmHg तक होता है। 140/90 से अधिक बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° को हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° के रूप में माना जाता है। बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° का कम और जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होना दोनों सेहत के लिठखतरनाक होता है।
जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° लोग हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° के शिकार होते हैं। बीपी हाई होने पर बॉडी में उसके लकà¥à¤·à¤£ दिखना शà¥à¤°à¥‚ हो जाते हैं। बदन दरà¥à¤¦, सिर में दरà¥à¤¦, नजर धà¥à¤‚धली होना और चकà¥à¤•र आना हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° के समानà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ है। पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° की समसà¥à¤¯à¤¾ अधिक होती है। वहीं, महिलाओं में लो बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° की परेशानी होने की आशंका अधिक रहती है।
हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ बीमारी है जो खराब लाइफसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤², थकान, खराब डाइट और नमक और तेल के अधिक सेवन से बढ़ती है। हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° को कंटà¥à¤°à¥‹à¤² नहीं किया जाठतो इससे दिल, मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤•, किडनी, आंखों को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चा सकता हैं।
बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° का बढ़ना हारà¥à¤Ÿ अटैक और सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤• का कारण बन सकता है। हर उमà¥à¤° में बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° का कंटà¥à¤°à¥‹à¤² होना जरूरी है। उमà¥à¤° बढ़ने पर बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° का नॉरà¥à¤®à¤² रहना बेहद जरूरी है। बीपी की रोजाना जांच करके बीपी के घटने और बढ़ने का पता आसानी से लगाया जा सकता है। आइठजानते हैं कि उमà¥à¤° के 50 वे साल में महिलाओं और पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ का बीपी कितना होना चाहिà¤à¥¤
51 से 55 साल: SBP 125.5 mm Hg और DBP 80.5 mm Hg
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