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शिशॠकी 12 जरूरत की चीजें जो आपको चाहिà¤
जब आप नवजात शिशॠको हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² से घर लेकर आते हैं, तो कà¥à¤› सामान à¤à¤¸à¥‡ होते हैं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जरूरत सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है। नीचे हमने कà¥à¤› à¤à¤¸à¥€ चीजों के बारे में बता रहे हैं :
शिशॠके लिठकà¥à¤› आरामदायक कपड़े
शिशॠके लिठडायपर
मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® कपड़े से बना कंबल
आरामदायक कपड़े से बनी टोपी
मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® तौलिया
डायपर रैशेज कà¥à¤°à¥€à¤®
बेबी वेट वाइपà¥à¤¸
शिशॠके लिठपालना या à¤à¥‚ला
बचà¥à¤šà¥‡ को नहलाने के लिठबेबी टब
बचà¥à¤šà¥‡ के लिठसाबà¥à¤¨ और शैंपू
हाथ के दसà¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥‡ और मोजे
बचà¥à¤šà¥‡ के लिठफीडिंग बोतल
आगे जानिठबचà¥à¤šà¥‡ की देखरेख के जà¥à¥œà¥€ कà¥à¤› अनà¥à¤¯ बातें।
नवजात शिशॠकी देखà¤à¤¾à¤² के लिठटिपà¥à¤¸
पहली बार माता-पिता बनने वाले कपल के लिठअपने नवजात शिशॠको संà¤à¤¾à¤²à¤¨à¤¾ चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€à¤ªà¥‚रà¥à¤£ हो सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में नीचे बताई गई बातों को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखने से उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कà¥à¤› हद तक मदद मिल सकती है।
1. सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨
हर बचà¥à¤šà¤¾ अलग होता है और सà¤à¥€ की जरूरतें à¤à¥€ अलग होती हैं। यह इस बात पर निरà¥à¤à¤° करता है कि बचà¥à¤šà¤¾ कितना बड़ा है और उसे कितने दूध की जरूरत है। कà¥à¤› दिनों के शिशॠको हर à¤à¤• से तीन घंटे में सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाना जरूरी होता है। इस समय वह दूध को चूसना और निगलना सीखता है। बचà¥à¤šà¥‡ को बार-बार दूध पिलाने से इसका अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ होता है। इसके साथ ही जैसे-जैसे बचà¥à¤šà¤¾ बड़ा होता है, उसका पेट और दूध की जरूरत à¤à¥€ बà¥à¤¨à¥‡ लगती है। कà¥à¤› हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ या महीने के बचà¥à¤šà¥‡ को हर चार से पांच घंटे में दूध पिलाना जरूरी होता है। इसके बाद जब बचà¥à¤šà¤¾ छह महीने का हो जाता है, तो आप बचà¥à¤šà¥‡ को साबà¥à¤¨ आहार खिलाना शà¥à¤°à¥‚ कर सकते हैं। छह महीने से दो साल के बीच आप जरूरत के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° बचà¥à¤šà¥‡ को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवा सकते हैं और फिर बचà¥à¤šà¥‡ से सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ छà¥à¥œà¤¾à¤¨à¥‡ के उपाय à¤à¥€ अपना सकते हैं।
2. डकार दिलाना
अगर बचà¥à¤šà¥‡ को दूध पिलाने के बाद ठीक तरह से डकार न दिलवाई जाà¤, तो उसे गैस या पेट में मरोड़ की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है। इससे पेट में दरà¥à¤¦ उठसकता है (2)। ठीक तरह से डकार न दिलाने पर शिशॠमà¥à¤‚ह से दूध बाहर à¤à¥€ निकाल सकता है। इस कारण शिशॠको सही तरीके से डकार दिलवाना जरूरी है। इसके लिठउसकी पीठअपनी तरफ करके, उसे अपने घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ पर बैठाà¤à¤‚ और उसके सिर को आगे से पकड़ें। इस दौरान उसकी कमर को आगे की ओर थोड़ा सा à¤à¥à¤•ाà¤à¤‚ और पीठपर थपथपाà¤à¤‚। इस पोजीशन से उसके पेट पर दबाव पड़ेगा और उसे डकार आ जाà¤à¤—ी। इसके अलावा, शिशॠको छाती से लगाकर व पेट के बल गोदी में लेटाकर à¤à¥€ डकार दिलाई जा सकती है।
3. नाà¤à¤¿à¤°à¤œà¥à¤œà¥ के बचे हà¥à¤ à¤à¤¾à¤— की देखà¤à¤¾à¤²
जब डिलीवरी के बाद गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² को काटकर शिशॠको मां से अलग किया जाता है, तो गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² का छोटा-सा हिसà¥à¤¸à¤¾, जिसे ठूंठकहते हैं, बचà¥à¤šà¥‡ की नाà¤à¤¿ पर रह जाता है। बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के 5 से 15 दिन के बीच यह हिसà¥à¤¸à¤¾ à¤à¥€ सूखकर गिर जाता है। हालांकि, जब तक वह हिसà¥à¤¸à¤¾ गिर नहीं जाता, तब तक शिशॠके ठूंठकी देखà¤à¤¾à¤² करना जरूरी होता है। à¤à¤¸à¤¾ न करने से बचà¥à¤šà¥‡ को संकà¥à¤°à¤®à¤£ हो सकता है (4)। ठूंठके आसपास के हिसà¥à¤¸à¥‡ को पानी से अचà¥à¤›à¥€ तरह साफ करें और फिर साफ कपड़े से सà¥à¤–ाà¤à¤‚। बचà¥à¤šà¥‡ के डायपर को ठूंठसे नीचे बांधें और उस हिसà¥à¤¸à¥‡ को खà¥à¤²à¤¾ रखें। इस हिसà¥à¤¸à¥‡ को हमेशा सूखा रखें। किसी à¤à¥€ तरह का असामानà¥à¤¯ बदलाव दिखने पर तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करें।
4. डायपर से जà¥à¥œà¥€ देखà¤à¤¾à¤²
नवजात शिशॠकी देखà¤à¤¾à¤² में डायपर महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ हिसà¥à¤¸à¤¾ होता है। अगर बचà¥à¤šà¤¾ अचà¥à¤›à¥€ तरह दूध पी रहा है, तो वह बार बार डायपर गीला कर सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में अगर समय रहते डायपर न बदला जाà¤, तो उसे डायपर रैश हो सकते हैं। इसमें बचà¥à¤šà¥‡ के नितंब के आसपास की तà¥à¤µà¤šà¤¾ लाल, जलनशील और पपड़ीदार हो सकती है। इससे बचने के लिठबचà¥à¤šà¥‡ के गीले डायपर को जितनी जलà¥à¤¦à¥€ हो सके बदलें। बचà¥à¤šà¥‡ के गà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾à¤‚ग के हिसà¥à¤¸à¥‡ को साफ व सूखा रखें और हर दो घंटे में या शौच करने के बाद डायपर बदलें। डायपर बदलते समय उसे गरà¥à¤® पानी से साफ करके, अचà¥à¤›à¥€ तरह से पोंछकर ही नया डायपर पहनाà¤à¤‚। अगर रैश जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो जाà¤à¤‚, तो रैश कà¥à¤°à¥€à¤® लगाà¤à¤‚ और समसà¥à¤¯à¤¾ गंà¤à¥€à¤° होने पर तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करें।
5. शिशॠको नहलाना
नवजात शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ बहà¥à¤¤ नाजà¥à¤• और कोमल होती है। इस कारण उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ नहलाते समय बहà¥à¤¤ सावधानी बरतना जरूरी है। नहलाने से न सिरà¥à¤« उनके शरीर के कीटाणॠदूर होते हैं (7), बलà¥à¤•ि बचà¥à¤šà¤¾ तनाव मà¥à¤•à¥à¤¤ होकर आरामदायक हो जाती है (8)। अपने शिशॠको आप हफà¥à¤¤à¥‡ में दो से तीन बार नहला सकते हैं और इसके लिठशिशॠको नहलाने का सही तरीका अपनाना जरूरी है (9)। नवजात शिशॠको आप गीले कपड़े या सà¥à¤ªà¤‚ज से साफ करके सà¥à¤ªà¤‚ज बाथ दे सकते हैं। आप चाहें तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बाथ टब में à¤à¥€ नहला सकते हैं, लेकिन इस दौरान सà¤à¥€ तरह की सावधानियां बरतना जरूरी है, जैसे पानी गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¾ हो और साबà¥à¤¨ या शैमà¥à¤ªà¥‚ बचà¥à¤šà¥‡ की आंखों में न जाठआदि।
6. अपने नवजात शिशॠको कैसे पकड़ें
नवजात शिशॠको सही ढंग से पकड़ना सबसे जरूरी होता है। शिशॠका शरीर बहà¥à¤¤ नाजà¥à¤• होता है और जरा-सी लापरवाही के कारण à¤à¤¾à¤°à¥€ मà¥à¤¶à¥à¤•िल का सामना करना पड़ सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में जरूरी है कि शिशॠको अपनी बाहों में बहà¥à¤¤ सावधानी के साथ उठाया जाà¤à¥¤ इस दौरान उसके सिर और गरà¥à¤¦à¤¨ के नीचे हाथ रख कर सहारा दिया जाà¤à¥¤ वहीं, बचà¥à¤šà¥‡ को हवा में उछालने और जोर से हिलाने आदि से बचें। à¤à¤¸à¤¾ करने से शिशॠको गंà¤à¥€à¤° समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो सकती हैं।
7. नवजात शिशॠकी मालिश करना
नवजात शिशॠकी मालिश करने की पà¥à¤°à¤¥à¤¾ हमारे यहां सदियों से चली आ रही है। शिशॠकी मालिश के जà¥à¥œà¥‡ कई शोध à¤à¥€ उपलबà¥à¤§ हैं, जिनके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° मालिश बचà¥à¤šà¥‡ का तनाव कम करने में मदद करती है। वहीं, मालिश बचà¥à¤šà¥‡ का वजन बà¥à¤¾à¤¨à¥‡, दूध पचाने और मानसिक विकास में à¤à¥€ मदद करती है (11)। इसके लिठआप सà¥à¤Ÿà¥‡à¤ª-बाय-सà¥à¤Ÿà¥‡à¤ª शिशॠकी मालिश की तकनीक अपना सकते हैं। शिशॠकी मालिश के लिठजैतून का तेल, नारियल तेल या अनà¥à¤¯ बेबी ऑयल का उपयोग किया जा सकता है।
8. अपने नवजात शिशॠको संà¤à¤¾à¤²à¤¨à¤¾
इतने छोटे बचà¥à¤šà¥‡ को संà¤à¤¾à¤²à¤¨à¤¾, खासकर पहली बार माता-पिता बनने वाले कपल के लिठथोड़ा मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में आप कà¥à¤› आम बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रख सकते हैं, जैसे – शिशॠको छूने से पहले अपने हाथों को सैनीटाइज करें (10)। यह समà¤à¤¨à¥‡ की कोशिश करें कि बचà¥à¤šà¤¾ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ रो रहा है। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि बचà¥à¤šà¥‡ को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ ठंड या गरà¥à¤®à¥€ न लग रही हो, वह à¤à¥‚खा न हो, उसका डायपर गीला न हो, उसके आसपास à¤à¤¸à¤¾ कà¥à¤› न हो रहा हो जिससे वो चिड़चिड़ा होने लगे। इसके साथ ही यह à¤à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि आप उसका मन बहलाने के लिठउससे बातें करें, उसके पास हलà¥à¤•ा मà¥à¤¯à¥‚जिक बजाà¤à¤‚, उसे à¤à¤• सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ देर तक सà¥à¤²à¤¾à¤ न रखें आदि।
9. शिशॠको सà¥à¤²à¤¾à¤¨à¤¾
यह जानकर शायद आपको हैरानी होगी कि नवजात शिशॠ24 में से 16 घंटे सोता है। अकà¥à¤¸à¤° वो दो से चार घंटों तक लगातार सो सकते हैं, लेकिन पूरी रात सोना उनके लिठमà¥à¤®à¤•िन नहीं हो पाता। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का पेट बहà¥à¤¤ छोटा होता है और दूध बहà¥à¤¤ जलà¥à¤¦à¥€ पच जाता है, जिस कारण उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हर चार घंटे (लगà¤à¤—) में दूध पिलाना जरूरी होता है (10)। अपने बचà¥à¤šà¥‡ को सà¥à¤²à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठआप कà¥à¤› उपाय अपना सकते हैं, जैसे उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हर रोज à¤à¤• समय पर सà¥à¤²à¤¾à¤¨à¥‡ की आदत डलवाना। सà¥à¤²à¤¾à¤¨à¥‡ से पहले उनकी मालिश करके नहलाना और हलà¥à¤•ा मà¥à¤¯à¥‚जिक चलाना, जिससे बचà¥à¤šà¤¾ रिलैकà¥à¤¸ हो जाà¤à¥¤ सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ के नजरिठसे बचà¥à¤šà¥‡ को हमेशा पीठके बल सà¥à¤²à¤¾à¤à¤‚ और उसके चेहरे को खà¥à¤²à¤¾ रखें।
10. शिशॠके नाखून काटना
नवजात शिशॠके नाखून बहà¥à¤¤ मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® होते हैं, लेकिन इसके बावजूद बचà¥à¤šà¥‡ इनसे खà¥à¤¦ को खरोंच लगा सकते हैं। इनके नाखून इतनी जलà¥à¤¦à¥€ बà¥à¤¤à¥‡ हैं कि आपको हफà¥à¤¤à¥‡ में कम से कम à¤à¤• बार शिशॠके नाखून काटना जरूरी होता है। इस कारण यह जरूरी है कि बचà¥à¤šà¥‡ के नाखून छोटे और साफ रखे जाà¤à¤‚। इसका धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखने के लिठबचà¥à¤šà¥‡ को नहलाते समय उसके नाखूनों को à¤à¥€ अचà¥à¤›à¥€ तरह साफ करें। इसके अलावा, बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के नाखून के लिठआने वाली कैंची से à¤à¥€ आप उनके नाखून काट सकते हैं।
लेख के अगले à¤à¤¾à¤— में जानिठशिशॠके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ से जà¥à¥œà¥€ कà¥à¤› अनà¥à¤¯ बातें।
इस बात का पता कैसे लगाà¤à¤‚ कि आपका शिशॠसà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ है?
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