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आपके शिशॠके à¤à¥‹à¤œà¤¨ के लिठ12 पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• सà¥à¤à¤¾à¤µà¥¤
हर नठमाता-पिता के लिठ6 महीने के बाद अपने बचà¥à¤šà¥‡à¤‚ को कà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥‹à¤œà¤¨ खिलाया जाठऔर कैसे खिलाया जाठइसका निरà¥à¤£à¤¯ लेना काफ़ी तनावपूरà¥à¤£ और à¤à¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ करनेवाला हो सकता हैं।
शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ बालपन पोषण को लेकर à¥à¥‡à¤° सारे विवाद है, और शिशà¥à¤“ं केà¤à¥‹à¤œà¤¨ को लेकर कà¥à¤› पहलà¥à¤“ं पर विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ राय हैं। हम आपके और आपके शिशॠके उस परिवरà¥à¤¤à¤¨ को आसान बनाने के लिठयहां हैं।
नीचे कà¥à¤› सामानà¥à¤¯ संकेत दिठगठहै, जिनका उपयोग आप अपने शिशॠका à¤à¥‹à¤œà¤¨ बनाने के लिठकर सकते है, जो केवल सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ ही नहीं बलà¥à¤•ि बेहद पोषक à¤à¥€ हैं :
1. पहले सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨, बाद में ठोस पदारà¥à¤¥ ।
आपका शिशॠठोस खादà¥à¤¯ पाने से पहले पूरà¥à¤£ रूप से सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ या फॉरà¥à¤®à¥‚ला पर निरà¥à¤à¤° होना चाहिठताकि ठोस खादà¥à¤¯ खाने से पहले वह सारे आवशà¥à¤¯à¤• पोषक ततà¥à¤µ और सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करनेवाले ततà¥à¤µ पा सके। नौ मास के करीब अकà¥à¤¸à¤° यह विपरीत हो जाता है और à¤à¥‹à¤œà¤¨ पहले आता हैं।
2. दà¥à¤°à¤µ पदारà¥à¤¥ से पà¥à¤¯à¥‚री से लमà¥à¤ªà¥à¤¸ और बमà¥à¤ªà¥à¤¸
पदारà¥à¤¥ से पà¥à¤¯à¥‚री से लमà¥à¤ªà¥à¤¸ और बमà¥à¤ªà¥à¤¸ पूरà¥à¤£ दà¥à¤°à¤µ के नियमित सà¥à¤µà¤¾à¤¦ से ठोस खादà¥à¤¯ तक का परिवरà¥à¤¤à¤¨ काफ़ी मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो सकता हैं। "à¤à¥‹à¤œà¤¨" गाà¥à¤¾ सà¥à¤µà¤¾à¤¦ और बनावट के साथ रंग में à¤à¥€ à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ होता हैं। यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करना आवशà¥à¤¯à¤• है कि सारे आहार या तो पकाठहà¥à¤ हों या पीसे हà¥à¤ हों (हाथों से, बà¥à¤²à¥‡à¤‚डर या बेबी फूड उपकरणों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾) पतले दही के समान चिकने तरल पेसà¥à¤Ÿ में (सà¥à¤¤à¤¨ दूध या फारà¥à¤®à¥‚ला का उपयोग à¤à¥‹à¤œà¤¨ को पतला बनाने के लिठकिया जा सकता हैं)। आप अपने शिशॠकी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं को समà¤à¤¨à¥‡ के लिठआप हर 3-5 दिन में उसे नठपà¥à¤°à¤•ार का à¤à¥‹à¤œà¤¨ दे सकते हैं।
3. à¤à¤¸à¥‡ शà¥à¤°à¥‚ करें जैसे कि आप जारी रखना चाहते है
हो सकता है आपका शिशॠकेवल à¤à¤• चमचà¥à¤š à¤à¥‹à¤œà¤¨ ही लें। इसलिठआवशà¥à¤¯à¤• है कि आप गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ को बनाठरखे। हमेशा घने पोषक ततà¥à¤µ वाले आहार और बिना मिलावट वाले आहार का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ करे, आपके शिशॠकी आहार की गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ मेंसमà¤à¥Œà¤¤à¤¾ नहीं किया जा सकता हैं।यह ननà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठà¤à¥€ सतà¥à¤¯ है, जिनकी à¤à¥‚ख जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है लेकिन पेट अपेकà¥à¤·à¤¾à¤•ृत छोटे होते हैं।जब आपका बचà¥à¤šà¤¾ अधिक सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° हो जाता है, तो जो à¤à¥‹à¤œà¤¨ उसे मिलता है वह मायने रखता है कà¥à¤¯à¥‹à¤•ि वासà¥à¤¤à¤µ में जो खाया जाà¤à¤—ा उसपर आपका नियंतà¥à¤°à¤£ कम हो सकता हैं।लगातार दृॠबने रहें और धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखे कि जब आपका शिशॠà¤à¥‹à¤œà¤¨ कर रहा हो तब आप अपना धैरà¥à¤¯ न खोये, à¤à¤²à¥‡ ही अनà¥à¤à¤µ कितना à¤à¥€ निराशाजनक कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ न हों।इस समय उनके लिठà¤à¤• अचà¥à¤›à¤¾ पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾à¤¸à¥à¤°à¥‹à¤¤ बनना आपके शिशॠको à¤à¥‹à¤œà¤¨ काल में मदद कर सकता हैं।
4. आहार के बीच अंतराल न रखे
अपने शिशॠको गà¥à¤¸à¥à¤¸à¤¾à¤¤à¥‡ देखना काफ़ी निराशाजनक हों सकता हैं। à¤à¥‚लना, छोड़ना या फिर आहार में देरी आपको माता-पिता के रूप में मà¥à¤¶à¥à¤•िल में डाल सकता है। दिनà¤à¤° पोषक ततà¥à¤µà¥‹ की नियमित पूरà¥à¤¤à¤¿à¤¸à¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करती है कि आपका शिशॠसारी आवशà¥à¤¯à¤• शकà¥à¤¤à¤¿ पा रहा है साथ ही साथ बà¥à¤¤à¥‡ दिमाग और शरीर के लिठà¤à¥€ बेहतर नींव बना रहा हैं।
5. आयरन की अचà¥à¤›à¥€ खà¥à¤°à¤¾à¤•
6 मास के करीब आपके शिशॠके शरीर मे आयरन की मातà¥à¤°à¤¾ कम हो सकती है । सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ विकास के लिठआयरन की अचà¥à¤›à¥€ आपूरà¥à¤¤à¤¿ आवशà¥à¤¯à¤• हैं। अधिकांश बेबी सीरियलà¥à¤¸ में आयरन होता है इसलिठआप सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करें कि आप उचित मे निवेश करें । आपके शिशॠके लिठà¤à¥‹à¤œà¤¨ जिसमें आयरन की पà¥à¤°à¤šà¥à¤° मातà¥à¤°à¤¾ हो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपने बचà¥à¤šà¥‡ के à¤à¥‹à¤œà¤¨ में शामिल करने के बारे में अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें।
6. मैला लेकिन मजेदार
खाना खाने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को अपने शिशॠके लिठà¤à¤• सकारातà¥à¤®à¤• और सà¥à¤–द अनà¥à¤à¤µ बनाà¤à¤ । à¤à¤²à¥‡ ही आप सोंचे फिर à¤à¥€ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गनà¥à¤¦à¤¾ होने दे और खाने के साथ खेलने दे, छूकर और बनावट को महसूस करकर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚पता लगाने दे । गंदगी करने के लिठजà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° माता-पिता अपने शिशॠको डाटेंगे पर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ निहारना सीखें ! यह दिनचरà¥à¤¯à¤¾ को उतना रोमांचक बनाने मे मदद करेगा जितना आपका शिशॠउसे बनाना चाहे । à¤à¤¸à¥‡ समय के लिठबिब और कà¥à¤› बेबी वाइपस सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤œà¤¨à¤• होते हैं।
7. अपना समय
ले à¤à¤• बार में à¤à¤• ही नया आहार दें और 3-5 दिनों के दौरान विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ विकलà¥à¤ªà¥‹ को आजमाये । इससे यदि आपके शिशॠको किसी आहार से रिà¤à¤•à¥à¤¶à¤¨ / à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है तो कारण का पता लगाना आसान होगा । आप यह à¤à¥€ जान पाà¤à¤‚गे कि आपके शिशॠको कौन से आहार पसंद है और कौन से उनके पà¥à¤°à¤¿à¤¯ है ।
8. शà¥à¤·à¥à¤•, गरà¥à¤®,या ठंडा
जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° शिशॠआहार का तापमान सामानà¥à¤¯ तापमान के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° पसंद करते है, फिर à¤à¥€ कà¥à¤› इसे हलà¥à¤•ा गरà¥à¤® पसंद करते है, उदाहरण के लिà¤. शरीर का तापमान (सà¥à¤¤à¤¨ दूध लगà¤à¤— इसी तापमान का होता है) । अपने शिशॠके बरà¥à¤¤à¤¨ को गरà¥à¤® पानी के बरà¥à¤¤à¤¨ में रखे और उसे इचà¥à¤›à¤¿à¤¤ तापमान तक गरà¥à¤® होने दे । और हां, निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ रूप से शिशॠके आहार को गरà¥à¤® करने के लिठमायकà¥à¤°à¥‹à¤µà¥‡à¤µ के इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से बचें ।
9. पानी के उपà¤à¥‹à¤— का महतà¥à¤µ
शिशà¥à¤“ं की गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ वयसà¥à¤•ो की à¤à¤¾à¤‚ति आहार के पाचन पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ अवशेष उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ को संचालन में निपà¥à¤£ नही होती हैं । जब आपका शिशॠठोस आहार लेना शà¥à¤°à¥ करता है, तब यह अधिक आवशà¥à¤¯à¤• हो जाता है कि आप अपने शिशॠदà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पिये जाने वाले पानी की मातà¥à¤°à¤¾ का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें खासकर तब जब सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के बदले ठोस आहार दिया जाता है । शिशà¥à¤“ं में पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ लगने की गतिविधी पूरी तरह विकसित नही होती है इसलिये यह आवशà¥à¤¯à¤• है कि आप अपने शिशॠको निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ अंतराल में पानी पिलाते रहें । सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करे कि शिशà¥à¤“ं के बोतल / चà¥à¤¸à¤¨à¥‡à¤µà¤¾à¤²à¥‡ कप आसानी से दिखने वाली जगह पर रखे हो और उनकी सामगà¥à¤°à¥€à¤®à¤¾à¤¤à¥à¤°à¤¾ को दिन à¤à¤¾à¤° जांचते रहे ।
10. फलो का रस
आमतौर पर माता-पिता बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को फलों का रस उनकी विटामिन C की आपूरà¥à¤¤à¤¿ को पूरा करने के लिठदेते है । हालांकि दूध, फलो का रस और पानी à¤à¤• साल से कम आयॠवाले शिशà¥à¤“ं के लिठतीन महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤¨ दà¥à¤°à¤µ पदारà¥à¤¥à¥ हैं, फिर à¤à¥€ पानी जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ आवशà¥à¤¯à¤• हैं । हालांकि फलो के रस की कà¥à¤› मातà¥à¤°à¤¾ सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है (संतà¥à¤²à¤¨ में), जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मातà¥à¤°à¤¾ पेट के विकारों की समसà¥à¤¯à¤¾ का कारण हो सकता है, पतला मल, आपके बचà¥à¤šà¥‡ की à¤à¥‚ख और गंà¤à¥€à¤° मामलों में उनके शारीरिकविकास पर पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ सकता हैं। शिशà¥à¤“ं के आहार-संबंधी सà¥à¤à¤¾à¤µ :
उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ 6 महीने से पहले किसी à¤à¥€ फल का रस नहीं देना चाहिà¤à¥¤
उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤¸à¥€ बोतल या बरà¥à¤¤à¤¨ में रस नहीं देना चाहिठजिससे रस आसानी से निकलता हो, कà¥à¤¯à¥‹à¤•ि उससे शिशॠदिन à¤à¤° उसका सेवन कर सकते हैं।
सोते समय उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ रस नही देना चाहिठ।
11. गाय का दूध शà¥à¤°à¥‚ करने का सही समय
आमतौर पर, जब तक आपका शिशॠà¤à¤• साल के करीब न हो जाठतब तक उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गाय का दूध नही देना चाहिà¤, ताकि à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के खतरे को कम किया जा सके या सà¥à¤¤à¥à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨, फारà¥à¤®à¥‚ला और आहार परकोई असर न पड़े।
12 . दूध के परà¥à¤¯à¤¾à¤¯
à¤à¤• साल के बाद दूध के दूसरे विकलà¥à¤ª बà¥à¤¿à¤¯à¤¾ विकलà¥à¤ª हो सकते हैं। बहà¥à¤¤ सारे कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® से परिपूरà¥à¤£ होते है, किसी à¤à¥€ कमी को पूरा करने के लिठबहà¥à¤¤ सारे कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® से परिपूरà¥à¤£ होते है । à¤à¤¸à¥‡ पेय à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के दà¥à¤°à¤µà¥‹à¤‚ केसाथ साथ पोषण à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करते हैऔर शिशॠजिनमें लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸ असहिषà¥à¤£à¥à¤¤à¤¾ या à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ और संवेदनशीलता होती है उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ लाठपंहà¥à¤šà¤¾ सकते हैं।
कà¥à¤› विकलà¥à¤ªà¥‹à¤‚ में शामिल हैं:
सोया, इनमे से बहà¥à¤¤ सारे अब कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® से परिपूरà¥à¤£ होते है (उनका चयन करे जो मूल सोयाबीन से बने होते हैं)
नट, जैसे कि बादाम का दूध (आवशà¥à¤¯à¤• वसा और कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की मातà¥à¤°à¤¾ अधिक होती हैं)।
जौ (विशेष रूप से निमà¥à¤¨ गà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤•ेमिया इंडेकà¥à¤¸ और तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° के लिठà¤à¥€ अचà¥à¤›à¤¾ माना जाता है)।
चावल (काफी मीठा à¤à¥€ हो सकता है)
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