अंडकोष को मजबूत कैसे करें?HealthPlanet

Posted on Thu 22nd Dec 2022 : 12:20

लिंग और अंडकोष को स्वस्थ रखने के लिए करें ये उपाय -


लिंग को साफ रखें

नहाते समय लिंग की सफाई करना सबसे आसान तरीका है। लिंग के फोर स्किन या ऊपर की चमड़ी को पीछे खींचकर इसके नीचे के हिस्से को अच्छी तरह से धोना बहुत जरूरी है। मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, यदि लिंग के इस हिस्से को ठीक से नहीं साफ किया गया तो लिंग से प्राकृतिक रूप से निकलने वाला स्मेग्मा नामक ल्यूब्रिकेंट, उस हिस्से पर जमा होने लगता है और फिर वहां बैक्टीरिया पनपने लगते हैं।


अंडकोष की जांच खुद करें

हर आदमी को रोजाना अपने अंडकोष की जांच खुद करनी चाहिए। इसे बहुत आसानी से जांचा जा सकता है। दोनों हाथों की उंगलियों और अंगूठे का इस्तेमाल कर अंडकोष को हल्के हल्के दबाएं और चेक करें कि कहीं कोई गांठ तो नहीं है। पुरुषों को नियमित रूप से यह जांच करनी चाहिए ताकि कोई बदलाव होने पर जल्दी पता चल सके। यह टेस्टीकुलर कैंसर (वृषण कैंसर) समेत कई प्रकार की बीमारियों का लक्षण हो सकता है। हर पुरुष को खुद से यह जांच चार हफ्ते में कम से कम एक बार जरूर करनी चाहिए।

सुरक्षित सेक्स करें

यौन संचारित रोग आमतौर पर नजर नहीं आते हैं और अक्सर सालों तक इनके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। क्लैमाइडिया सबसे आम यौन संचारित रोग है जिसके कारण पेशाब करते समय दर्द होता है और अंडकोष सूज जाते हैं। ऐसी ही एक और बीमारी है जननांगों में होने वाली हर्पीस, जिसमें जननांगों के आसपास घाव हो जाता है। इनकी रोकथाम के लिए सुरक्षित यौन संबंध बनाना चाहिए।

जघन क्षेत्र की साफ़ सफाई ध्यान से करें

कई पुरुष अपनी पेट और जांघ के बीच वाले हिस्से (groin) को शेव करते हैं। शरीर के इस हिस्से को ठीक से और पूरी सावधानी से संवारना चाहिए और खासकर अंडकोष का ख़ास खयाल रखना चाहिए। इसमें एक छोटा सा कट लगने पर भी काफी दर्द हो सकता है, इसके अलावा बैक्टीरिया या अन्य रोगाणु भी पैदा हो सकते हैं, जिससे अंडकोष में बीमारी हो सकती है.

स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं

स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से लिंग भी स्वस्थ रहता है। उत्तेजना या इरेक्शन को कई चीजें प्रभावित करती हैं, जैसे, मोटापा, धूम्रपान, अधिक शराब का सेवन और तनाव। नियमित एक्सरसाइज करने और रात को अच्छी नींद लेने से लिंग स्वस्थ रहता है।

एक आसन हर रोज : शरीर के निचले हिस्‍से को मजबूत बनाता है गरुड़ासन :-

गरुड़ासन -

गरुड़ासन योग खड़े होकर करने वाले योग में एक महत्वपूर्ण योगाभ्यास है। यह अंडकोष एवं गुदा के लिए बहुत लाभकारी योगाभ्यास है। इस आसन में हाथ एक-दूसरे में गूंथ लिए जाते हैं और छाती के सामने इस प्रकार रखे जाते हैं, जैसे गरुड़ की चोंच होती है, इसलिए इस आसन को गरुड़ासन कहा जाता है।

गरुड़ासन योग विधि-

सबसे पहले आप सीधे खड़े हों।

दाएं पांव को बाएं पांव के ऊपर से दूसरी ओर ले जाएं। अगर आपकी जांघ मोटी है तो शुरुआत में इसे करने में परेशानी हो सकती है। दूसरी तरफ पतली कमर और पतले जांघ वाले इसको आसानी से कर सकते हैं।

बाहों को रस्सी के समान एक दूसरे में गूंथ दें।

आपस में गुंथे हुए हाथों को गरुड़ की चोंच के समान छाती के आगे रखें। घुटने को मोड़कर संतुलन बनाएं।

बाएं पांव को दाएं पांव के ऊपर से ले जाकर इसे दूसरी ओर भी करें।

यह आधा चक्र हुआ।

फिर दूसरे तरफ से करें।

अब एक चक्र हुआ।

इस तरह से आप तीन से पांच चक्र करें।

गरुड़ासन योग के लाभ-

इस आसन के अभ्यास से मन और शरीर के बीच सामंजस्‍य स्‍थापित होता है जिससे मन को अपार शांति मिलती है।

इसके नियमित अभ्यास से अंडकोष (Testicle) को बढ़ने से रोक जा सकता है।

यह पैरों और जांघों को मजबूत बनाता है।

इसका नियमित अभ्यास से गुदा, मलाशय तथा मूत्राशय के रोगियों को आराम पहुंचता है।

यह जोड़ों की सक्रियता बढ़ाता है, घुटनों, पैरों एवं जोड़ों का दर्द दूर करता है।

यह आपके हाथों को मजबूत बनाता है और कोहनी के दर्द से छुटकारा दिलाता है।

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