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शà¥à¤µà¤¸à¤¨ तंतà¥à¤°
मà¥à¤•à¥à¤¤ जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤•ोश विकिपीडिया से
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शà¥à¤µà¤¸à¤¨ तंतà¥à¤° का योजनामूलक चितà¥à¤°
शà¥à¤µà¤¸à¤¨ तंतà¥à¤° (respiratory system) या 'शà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥‹à¤šà¥à¤›à¥à¤µà¤¾à¤¸ तंतà¥à¤°' में सांस संबंधी अंग जैसे नाक, सà¥à¤µà¤°à¤¯à¤‚तà¥à¤° (Larynx), शà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨à¤²à¤¿à¤•ा (Wind Pipe) और फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸ (Lungs) आदि शामिल हैं। शरीर के सà¤à¥€ à¤à¤¾à¤—ों में गैसों का आदान-पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ (gas exchange) इस तंतà¥à¤° का मà¥à¤–à¥à¤¯ कारà¥à¤¯ है।
नाक
सांस लेने के दो रासà¥à¤¤à¥‡ हैं- à¤à¤• सही रासà¥à¤¤à¤¾ दूसरा गलत रासà¥à¤¤à¤¾à¥¤ नाक दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सांस लेना सही रासà¥à¤¤à¤¾ है किनà¥à¤¤à¥ मà¥à¤‚ह से सांस लेना गलत है। हमेशा नाक से ही सांस लेनी चाहिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि नाक के अनà¥à¤¦à¤° छोटे-छोटे बाल होते हैं। ये बाल हवा में मिली धूल को बाहर ही रोक लेते हैं, अनà¥à¤¦à¤° नहीं जाने देते। मà¥à¤‚ह से सांस कà¤à¥€ नहीं लेनी चाहिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि à¤à¤¸à¤¾ करने से हवा (सांस) के साथ धूल और हानिकारक कीटाणॠà¤à¥€ अनà¥à¤¦à¤° चले जाlते हैं।
सांस-नली
यह पà¥à¤°à¤¾à¤¯: साढ़े चार इंच लमà¥à¤¬à¥€, बीच में खोखली à¤à¤• नली होती है, जो गले में टटोली जा सकती है। यह à¤à¥‹à¤œà¤¨ की नली (अनà¥à¤¨ नाल) के साथ गले से नीचे वकà¥à¤·à¤—हर में चली जाती है। वकà¥à¤·à¤—हर में, नीचे के सिरे पर चलकर इसकी दो शाखाà¤à¤‚ हो गई हैं। इसकी à¤à¤• शाखा दाà¤à¤‚ फेफड़े में और दूसरी बाà¤à¤‚ फेफड़े में चली गई है। ये ही दोनों शाखाà¤à¤‚ वायॠनली कहलाती हैं। शà¥à¤µà¤¾à¤¸ नली और वायॠनली फेफड़े में जाने के पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ वायॠपथ हैं।
सà¥à¤µà¤°à¤¯à¤‚तà¥à¤°
जीठके मूल के पीछे, कणà¥à¤ िकासà¥à¤¥à¤¿ के नीचे और कणà¥à¤ के सामने सà¥à¤µà¤°à¤¯à¤‚तà¥à¤° (Larynx) होता है। नाक से ली हà¥à¤ˆ हवा कणà¥à¤ से होती हà¥à¤ˆ इसी में आती है। इसके सिरे पर à¤à¤• ढकà¥à¤•न-सा होता है। जिसे ‘सà¥à¤µà¤° यंतà¥à¤°à¤šà¥à¤›à¤¦â€™ कहते हैं। यह ढकन हर समय खà¥à¤²à¤¾ रहता है किनà¥à¤¤à¥ खाना खाते समय यह ढकà¥à¤•न बनà¥à¤¦ हो जाता है जिससे à¤à¥‹à¤œà¤¨ सà¥à¤µà¤°à¤¯à¤‚तà¥à¤° में न गिरकर, पीछे अनà¥à¤¨à¤ªà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ में गिर पड़ता है। कà¤à¥€-कà¤à¥€ रोगों के कारण या असावधानी से जब à¤à¥‹à¤œà¤¨ या जल का कà¥à¤› अंश सà¥à¤µà¤°à¤¯à¤‚तà¥à¤° में गिर पड़ता है तो बड़े जोर से खांसी आती है। इस खांसी आने का मतलब यह है कि जल या à¤à¥‹à¤œà¤¨ का जो अंश इसमें (सà¥à¤µà¤°à¤¯à¤‚तà¥à¤° में) गिर पड़ा है, यह बाहर निकल जाà¤à¥¤
à¤à¥‹à¤œà¤¨ को हम निगलते हैं तो उस समय सà¥à¤µà¤°à¤¯à¤‚तà¥à¤° ऊपर को उठता और फिर गिरता हà¥à¤† दिखाई देता है। इसमें जब वायॠपà¥à¤°à¤µà¤¿à¤·à¥à¤ होती है तब सà¥à¤µà¤° उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होता है। इस पà¥à¤°à¤•ार यह हमें बोलने में à¤à¥€ बहà¥à¤¤ सहायता पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता है।
फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸
हमारी छाती में दो फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸ (फेफड़े) होते हैं - दायां और बायां। दायां फेफड़ा बाà¤à¤‚ से à¤à¤• इंच छोटा, पर कà¥à¤› अधिक चौड़ा होता है। दाà¤à¤‚ फेफड़े का औसत à¤à¤¾à¤° 23 औंस और बाà¤à¤‚ का 19 औंस होता है। पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के फेफड़े सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸à¥‹à¤‚ से कà¥à¤› à¤à¤¾à¤°à¥€ होते हैं।
फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸ चिकने और कोमल होते हैं। इनके à¤à¥€à¤¤à¤° अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ सूकà¥à¤·à¥à¤® अननà¥à¤¤ कोषà¥à¤ होते हैं जिनको ‘वायॠकोषà¥à¤ ’ (Air cells) कहते हैं। इन वायॠकोषà¥à¤ ों में वायॠà¤à¤°à¥€ होती है। फेफड़े यà¥à¤µà¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में मटियाला और वृदà¥à¤§à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में गहरे रंग का सà¥à¤¯à¤¾à¤¹à¥€ मायल हो जाता है। ये à¤à¥€à¤¤à¤° से सà¥à¤ªà¤‚ज-समान होते हैं।
फेफड़े के कारà¥à¤¯
दोनों फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸à¥‹à¤‚ के मधà¥à¤¯ में हृदय सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ रहता है। पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸ को à¤à¤• à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ घेरे रहती है ताकि फूलते और सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¤à¥‡ वकà¥à¤¤ फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸ बिना किसी रगड़ के कारà¥à¤¯ कर सकें। इस à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ में विकार उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होने पर इसमें शोथ हो जाता है जिसे पà¥à¤²à¥‚रिसी (pleurisy / फà¥à¤ªà¥à¤«à¥à¤¸à¤¾à¤µà¤°à¤£à¤¶à¥‹à¤¥) नामक रोग होना कहते हैं। जब फेफड़ो में शोथ होता है तो इसे [शà¥à¤µà¤¸à¤¨à¥€à¤¶à¥‹à¤¥/शà¥à¤µà¤¸à¤¨à¤¿à¤•ा शोथ] होना कहते हैं। जब फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸à¥‹à¤‚ से कà¥à¤·à¤¯ होता है तब उसे यकà¥à¤·à¥à¤®à¤¾ या कà¥à¤·à¤¯ रोग, तपेदिक, टी.बी. होना कहते हैं।
फेफडों के नीचे à¤à¤• बड़ी à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ होती है जिसे वकà¥à¤·à¥‹à¤¦à¤° मधà¥à¤¯à¤ªà¤Ÿ या डायाफà¥à¤°à¤¾à¤® कहते हैं जो फेफड़ो और उदर के बीच में होती है। सांस लेने पर यह à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ नीचे की तरफ फैलती है जिससे सांस अनà¥à¤¦à¤° à¤à¤°à¤¨à¥‡ पर पेट फूलता है और बाहर निकलने पर वापिस बैठता है।
फेफड़ों का मà¥à¤–à¥à¤¯ काम शरीर के अनà¥à¤¦à¤° वायॠखींचकर ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ उपलबà¥à¤§ कराना तथा इन कोशिकाओं की गतिविधियों से उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होने वाली कारà¥à¤¬à¤¨ डाईऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ नामक वरà¥à¤œà¥à¤¯ गैस को बाहर फेंकना है। यह फेफड़ों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किया जाने वाला फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸à¥€à¤¯ वायॠसंचार कारà¥à¤¯ है जो फेफड़ों को शà¥à¤¦à¥à¤§ और सशकà¥à¤¤ रखता है। यदि वायà¥à¤®à¤£à¥à¤¡à¤² पà¥à¤°à¤¦à¥‚षित हो तो फेफड़ों में दूषित वायॠपहà¥à¤‚चने से फेफड़े शà¥à¤¦à¥à¤§ न रह सकेंगे और विकारगà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ हो जाà¤à¤‚गे।
शà¥à¤µà¤¾à¤¸-कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ दो खणà¥à¤¡à¥‹à¤‚ में होती है। जब सांस अनà¥à¤¦à¤° आती है तब इसे "अंतःशà¥à¤µà¤¸à¤¨" कहते हैं। जब यह शà¥à¤µà¤¾à¤¸ बाहर हो जाती है तब इसे "उचà¥à¤›à¤µà¤¸à¤¨"कहते हैं। पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® विधि में इस सांस को à¤à¥€à¤¤à¤° या बाहर रोका जाता है। सांस रोकने को कà¥à¤®à¥à¤à¤• कहा जाता है। à¤à¥€à¤¤à¤° सांस रोकना आंतरिक कà¥à¤®à¥à¤à¤• और बाहर सांस रोक देना बाहà¥à¤¯ कà¥à¤®à¥à¤à¤• कहलाता है। पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® ‘अषà¥à¤Ÿà¤¾à¤‚ग योग’ के आठअंगों में à¤à¤• अंग है। पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® का नियमित अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ करने से फेफड़े शà¥à¤¦à¥à¤§ और शकà¥à¤¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤²à¥€ बने रहते हैं। फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸ में अनेक सीमानà¥à¤¤ शà¥à¤µà¤¸à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ होती हैं जिनके कई छोटे-छोटे खणà¥à¤¡ होते हैं जो वायॠमारà¥à¤— बनाते हैं। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उलूखल कोशिका कहते हैं। इनमें जो बारीक-बारीक नलिकाà¤à¤‚ होती हैं वे अनेक कोशिकाओं और à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€à¤¦à¤¾à¤° थैलियों के जाल से घिरी होती हैं। यह जाल बहà¥à¤¤ महतà¥à¤¤à¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ कारà¥à¤¯ करता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यहीं पर फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸à¥€à¤¯ धमनी से ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ विहीन रकà¥à¤¤ आता है और ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨à¤¯à¥à¤•à¥à¤¤ होकर वापस फà¥à¤«à¥à¤«à¥à¤¸à¥€à¤¯ शिराओं में पà¥à¤°à¤µà¤¿à¤·à¥à¤ होकर शरीर में लौट जाता है। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से रकà¥à¤¤ शà¥à¤¦à¥à¤§à¥€ होती रहती है। यहीं वह सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ है जहां उलूखल कोशिकाओं में उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ वायॠतथा वाहिकाओं में उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ रकà¥à¤¤ के बीच गैसों का आदान-पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ होता है जिसके लिठसांस का आना-जाना होता है।
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