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रिफà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ इरर (नजर का कमजोर होना) आंखों से संबंधित à¤à¤• बहà¥à¤¤ ही आम समसà¥à¤¯à¤¾ है।
इसमें निकटदृषà¥à¤Ÿà¤¿ दोष (मायोपिया), दूरदृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤¦à¥‹à¤· (हायपरोपिया) और à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® (दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¥ˆà¤·à¤®à¥à¤¯) को समà¥à¤®à¤¿à¤²à¤¿à¤¤ किया जाता है। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ रिफà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ इरर/अपरवरà¥à¤¤à¤• तà¥à¤°à¥à¤Ÿà¤¿ इसलिठकहा जाता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इन तीनों ही समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं में यह महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ होता है कि आपकी आंखें पà¥à¤°à¤•ाश को कैसे रिफà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤Ÿ या अपवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ होती हैं।
निकटदृषà¥à¤Ÿà¤¿ दोष और दूरदृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤¦à¥‹à¤· के मामले काफी अधिक होते हैं, इसलिठअधिकतर लोगों को इसके बारे में जानकारी होती है, लेकिन à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® के बारे में कम ही लोग जानते हैं।
à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤®, जनà¥à¤®à¤œà¤¾à¤¤ होता है या बाद में विकसित हो सकता है।
इसका पूरी तरह उपचार संà¤à¤µ है, इसलिठà¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® के लकà¥à¤·à¤£ दिखने पर तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दिखाà¤à¤‚, थोड़ी सी à¤à¥€ लापरवाही आपको à¤à¥ˆà¤‚गा बना सकती है।
जानिठकà¥à¤¯à¤¾ होता है à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤®?
à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤®, आंखों से संबंधित à¤à¤• समसà¥à¤¯à¤¾ है, जो कोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ (जो आंखों की सबसे बाहरी सतह होती है) की आकृति में गड़बड़ी होने से होती है।
जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® होता है, उनका लेंस या कोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का करà¥à¤µ या घà¥à¤®à¤¾à¤µ अनियमित हो जाता है, जिससे आंख से पà¥à¤°à¤•ाश के गà¥à¤œà¤°à¤¨à¥‡ या रिफà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤Ÿ होने का तरीका बदल जाता है। इससे दृषà¥à¤Ÿà¤¿ धà¥à¤‚धली, असà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ या विकृत हो जाती है।
आंखों की सामानà¥à¤¯ बनावट में थोड़ा सा करà¥à¤µ या घà¥à¤®à¤¾à¤µ तो होता ही है, लेकिन जब यह आसामानà¥à¤¯ हो जाठतो आंखों की सामानà¥à¤¯ कारà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होती है।
à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® को चशà¥à¤®à¥‡, कांटेकà¥à¤Ÿ लेंस या सरà¥à¤œà¤°à¥€ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ आसानी से ठीक किया जा सकता है।
पà¥à¤°à¤•ार
à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® का वरà¥à¤—ीकरण कई पà¥à¤°à¤•ार से किया जा सकता है।
आंखों की संरचना में विकृति के आधार पर
आंखों की संरचना में विकृति के आधार पर à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® दो पà¥à¤°à¤•ार का होता है;
1. कोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤² à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤®
कोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤² à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® तब होता है, जब कोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की आकृति/घà¥à¤®à¤¾à¤µ खराब हो जाती है।
2. लेंटीकà¥à¤¯à¥à¤²à¤° à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤®
लेंटीकà¥à¤¯à¥à¤²à¤° à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® तब होता है जब लेंस की आकृति में खराबी आ जाती है।
रिफà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ इरर के आधार पर
यह बहà¥à¤¤ सामानà¥à¤¯ है कि निकटदृषà¥à¤Ÿà¤¿ दोष (मायोपिया) या दूरदृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤¦à¥‹à¤· (हाइपरओपिया) के साथ à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® à¤à¥€ हो। इसके आधार पर à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¥à¤® का वरà¥à¤—ीकरण तीन तरह से किया जाता है
1. मायोपिक à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤®
यह तब होता है जब à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® निकट दृषà¥à¤Ÿà¤¿ दोष के साथ होता है और कोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के दोनों घà¥à¤®à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ (करà¥à¤µà¥à¤¸) के फोकस, रेटिना के सामने केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ होते हैं।
2. हाइपरओपिक à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤®
जब दूर-दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤¦à¥‹à¤· और à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® साथ-साथ होते हैं और कोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के दोनों घà¥à¤®à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ (करà¥à¤µà¥à¤¸) के फोकस, रेटिना के पीछे केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ होते हैं, तो इसे हाइपरओपिक à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® कहते हैं।
3. मिकà¥à¤¸à¥à¤¡ à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤®
मिकà¥à¤¸à¥à¤¡ à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® में दोनों घà¥à¤®à¤¾à¤µ अलग-अलग कारणों से होते हैं; à¤à¤• घà¥à¤®à¤¾à¤µ दूरदृषà¥à¤Ÿà¤¿ दोष के कारण होता है और दूसरा निकट दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤¦à¥‹à¤· के काऱण।
वकà¥à¤°à¥‹à¤‚/करà¥à¤µà¥à¤¸ (घà¥à¤®à¤¾à¤µà¥‹à¤‚) की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के आधार पर
1. रेगà¥à¤¯à¥à¤²à¤° à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤®
जब दोनों घà¥à¤®à¤¾à¤µ à¤à¤•-दूसरे से 90 डिगà¥à¤°à¥€ के कोण पर होते हैं, तो इसे रेगà¥à¤¯à¥à¤²à¤° या नियमित à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® कहते हैं।
2. इरà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¯à¥à¤²à¤° à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤®
जब दोनों घà¥à¤®à¤¾à¤µ, अनियमित होते हैं, यानी 90 डिगà¥à¤°à¥€ पर नहीं होते हैं तो यह à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® इरà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¯à¥à¤²à¤° या अनियमित होता है।
इरà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¯à¥à¤²à¤° à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤®, किसी टà¥à¤°à¥‰à¤®à¤¾, सरà¥à¤œà¤°à¥€ या आंखों से संबंधित किसी समसà¥à¤¯à¤¾ के कारण हो सकता है, जिसे केरैटोकोनस कहते हैं, जहां कोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ धीरे-धीरे पतला होने लगता है।
कारण
à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® का सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ कारण तो पता नहीं है, लेकिन अनà¥à¤µà¤¾à¤‚शिकी इसका à¤à¤• बहà¥à¤¤ बड़ा कारण मानी जाती है।
यह अकà¥à¤¸à¤° जनà¥à¤® से ही मौजूद होता है, लेकिन यह जीवन में बाद में à¤à¥€ विकसित हो सकता है। इसका कारण आंखों में चोट लगना, बीमारी या सरà¥à¤œà¤°à¥€ हो सकता है।
यह अकà¥à¤¸à¤° निकटदृषà¥à¤Ÿà¤¿ दोष या दूर दृषà¥à¤Ÿà¤¿ दोष के साथ होता है।
कम रोशनी में पढ़ने या नजदीक से टीवी देखने से à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® नहीं होता है।
अधिक खतरा किनको है ?
à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤®, बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ और वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤•ों में हो सकता है। à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है, अगर आपको निमà¥à¤¨ में से कोई à¤à¤• समसà¥à¤¯à¤¾ हो:
à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® या आंखों से संबंधित दूसरी समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का पारिवारिक इतिहास, जैसे केरटोकोनस(कोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का डिजनरेशन)।
कोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ कà¥à¤·à¤¤à¤¿à¤—à¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ हो जाना या पतला हो जाना।
निकट दृषà¥à¤Ÿà¤¿ दोष, जिससे दूर की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• धà¥à¤‚धली हो जाती है।
दूर दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤¦à¥‹à¤·, जिससे पास की चीजें सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ दिखाई नहीं देती हैं।
कà¥à¤› निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤•ार की आई सरà¥à¤œà¤°à¥€, जैसे मोतियाबिंद सरà¥à¤œà¤°à¥€ (धà¥à¤‚धले लेंस को सरà¥à¤œà¤°à¥€ से निकालना)
लकà¥à¤·à¤£
à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® के लकà¥à¤·à¤£, अलग-अलग लोगों में अलग-अलग हो सकते हैं। कà¥à¤› लोगों में कोई लकà¥à¤·à¤£ दिखाई नहीं देते हैं। à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤®, के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में समà¥à¤®à¤¿à¤²à¤¿à¤¤ हैं:
दूर या पास, दोनों सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में दृषà¥à¤Ÿà¤¿ धà¥à¤‚धली, विकृत और असà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ हो जाना।
रात को देखने में परेशानी आना।
à¤à¥ˆà¤‚गापन।
आंखों में जलन।
सिरदरà¥à¤¦à¥¤
आंखों में तनाव और खिंचाव; विशेषकर जब आंखों को काफी देर तक à¤à¤• ही चीज पर केनà¥à¤¦à¥à¤°à¤¿à¤¤ करना होता है, जैसे पढ़ने या कमà¥à¤ªà¥à¤¯à¥à¤Ÿà¤° पर काम करने के दौरान।
अगर आपमें, यह लकà¥à¤·à¤£ दिखें तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दिखाà¤à¤‚। कà¥à¤› लकà¥à¤·à¤£ दूसरी सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं या दृषà¥à¤Ÿà¤¿ संबंधी अनà¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के कारण à¤à¥€ दिखाई दे सकते हैं।
डायगà¥à¤¨à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ (मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन)
à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® के लकà¥à¤·à¤£ धीरे-धीरे दिखाई देते हैं। अगर आपकी दृषà¥à¤Ÿà¤¿ में परिवरà¥à¤¤à¤¨ दिखे तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास जाà¤à¤‚।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ जांचे कर के पता लगाà¤à¤—ा कि आपको à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® है या नहीं। इन जांचों में समà¥à¤®à¤¿à¤²à¤¿à¤¤ हैं:
विजà¥à¤…ल à¤à¤•à¥à¤¯à¥à¤Ÿà¥€ टेसà¥à¤Ÿ (आंखो की नजर की जांच)
इसमें à¤à¤• चारà¥à¤Ÿ पर लिखे, अकà¥à¤·à¤°à¥‹à¤‚ को पढ़ने के लिठकहा जाता है। यह अकà¥à¤·à¤° हर अगली लाइन के साथ धीरे-धीरे छोटे होते जाते हैं।
à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤• डायल
à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤• डायल à¤à¤• चारà¥à¤Ÿ होता है, जिसमें रेखाओं की à¤à¤• शà¥à¤°à¥ƒà¤‚खला होती है। जिन लोगों की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ ठीक होती है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ रेखाà¤à¤‚ सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ रूप से दिखाई देती हैं, लेकिन जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® होता है उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ रेखाà¤à¤‚ सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ रूप से दिखाई नहीं देती हैं।
फोरोपà¥à¤Ÿà¤°
इसमें जांच के दौरान कई लेंस लगाठजाà¤à¤‚गे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आपको किस लेंस से सबसे सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ दिखाई देता है।
ऑटोरिफà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤°
इस यंतà¥à¤° के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ आंखों पर पà¥à¤°à¤•ाश डाला जाता है, यह देखने के लिठजब यह रिफà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤Ÿ या अपवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ होता है तो इसमें कà¥à¤¯à¤¾ परिवरà¥à¤¤à¤¨ होता है। इससे आंखों के लिठसही लेंस चà¥à¤¨à¤¨à¥‡ में सहायता मिलती है।
करैटोमीटर या ऑपà¥à¤¥à¥‡à¤²à¤®à¥‹à¤®à¥€à¤Ÿà¤°
यह यंतà¥à¤° कोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की सतह से अपवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤•ाश को मापता है। यह कोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के करà¥à¤µ या घà¥à¤®à¤¾à¤µ का वà¥à¤¯à¤¾à¤¸ मापता है और इससे असामानà¥à¤¯ घà¥à¤®à¤¾à¤µ की डिगà¥à¤°à¥€ का पता लगाने में सहायता मिलती है।
उपचार
चशà¥à¤®à¥‡ या कांटेकà¥à¤Ÿ लेंस के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® के सà¤à¥€ मामलों को ठीक किया जा सकता है, गंà¤à¥€à¤° मामलों में ही सरà¥à¤œà¤°à¥€ की जरूरत पड़ती है।
लेकिन अगर समसà¥à¤¯à¤¾ मामूली है और आपको आंखों से संबंधित कोई दूसरी कोई समसà¥à¤¯à¤¾ नहीं है तो आपको उपचार की जरूरत नहीं होती।
करेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤µ लेंस आई गà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥‡à¤¸ (चशà¥à¤®à¤¾)
आई गà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥‡à¤¸ या चशà¥à¤®à¥‡ में à¤à¤¸à¥‡ लेंसों का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है, जो आंखों में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करने वाले पà¥à¤°à¤•ाश को ठीक तरह से अपवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ करे और ठीक तरह से देखने में सहायता करे।
टोरिक कांटेकà¥à¤Ÿ लेंस
à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® रोगियों को विशेष पà¥à¤°à¤•ार के मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® कांटेकà¥à¤Ÿ लेंस लगाने की सलाह दी जाती है, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ टोरिक लेंसेस कहा जाता है। ये पà¥à¤°à¤•ाश को सही दिशा में मोड़ते हैं।
आरà¥à¤¥à¥‹à¤•ेरैटोलॉजी (आरà¥à¤¥à¥‹-के)
à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® के गंà¤à¥€à¤° मामलों में रिज़िड (सखà¥à¤¤/कड़े) लेंस लगाने को कहा जाता है, इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ रात को सोते समय लगाना होता है, और ये कोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ को पà¥à¤¨à¤ƒ सही आकार देते हैं।
इस नठआकार को बनाठरखने के लिठइन लेंसों को लगातार पहनना होता है, लेकिन आपको रोज-रोज इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पहनने की जरूरत नहीं पड़ती है। इस तकनीक को आरà¥à¤¥à¥‹à¤•ेरैटोलॉजी कहते हैं, लेकिन यह तकनीक सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ रूप से दृषà¥à¤Ÿà¤¿ को ठीक नहीं करती है।
अगर इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पहनना बंद कर दिया जाता है तो यह समसà¥à¤¯à¤¾ वापस वैसी ही हो जाती है।
रिफà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ सरà¥à¤œà¤°à¥€ (चशà¥à¤®à¤¾ उतारने की सरà¥à¤œà¤°à¥€)
कोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का आकार बदलने के लिठरिफà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ सरà¥à¤œà¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¥€ की जाती हैं। इन रिफà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ सरà¥à¤œà¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में लेसिक, पीआरके और सबसे आधà¥à¤¨à¤¿à¤• तकनीक (कोंटयूरा विजन) समà¥à¤®à¤¿à¤²à¤¿à¤¤ है। इसके लिठआंखें सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ होना चाहिà¤, रेटिना से संबंधित कोई समसà¥à¤¯à¤¾ नहीं होना चाहिठया कोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ पर कोई घाव के निशान नहीं होना चाहिà¤à¥¤
रिफà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ सरà¥à¤œà¤°à¥€ दृषà¥à¤Ÿà¤¿ को सà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¤à¥€ है और चशà¥à¤®à¥‡ या कांटेकà¥à¤Ÿ लेंसों की आवशà¥à¤¯à¤•ता को कम करती है। इसमें लेज़र बीम का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है।
कोंटयूरा विजन सरà¥à¤œà¤°à¥€, à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® के उपचार के लिठसबसे सफल रिफà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ सरà¥à¤œà¤°à¥€ है ।
कब कराà¤à¤‚ आंखों की जांच?
6 महीने की उमà¥à¤° में।
3 साल की उमà¥à¤° में।
6 साल की उमà¥à¤° में।
इसके बाद हर दो साल में। जिन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को आंखों से संबंधित समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का खतरा अधिक है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हर साल जांच करानी चाहिà¤à¥¤
वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤•ों को हर दो साल में अपनी आंखों की जांच करानी चाहिà¤, लेकिन अगर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ डायबिटीज है तो हर वरà¥à¤· या छह महीने में कराà¤à¤‚।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤®
कई बचà¥à¤šà¥‡ à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤—à¥à¤®à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤œà¤¼à¥à¤® के साथ जनà¥à¤® लेते हैं, और अकà¥à¤¸à¤° उनके à¤à¤• साल के होने तक यह समसà¥à¤¯à¤¾ अपने आप ठीक हो जाती है।
बचà¥à¤šà¥‡ अपनी समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के बारे में नहीं बता पाते, इसलिठछह महीने की उमà¥à¤° में ही उनकी आंखों की जांच करा लेनी चाहिà¤à¥¤
अगर डायगà¥à¤¨à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ कराकर उपचार न कराया जाठतो न केवल उनकी आंखों की समसà¥à¤¯à¤¾ गंà¤à¥€à¤° हो जाà¤à¤—ी बलà¥à¤•ि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सीखने à¤à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ आà¤à¤—ी जिससे वो लरà¥à¤¨à¤¿à¤‚ग डिसआरà¥à¤¡à¤° के शिकार हो सकते हैं।
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