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साइनस के कारण, लकà¥à¤·à¤£ और घरेलू इलाज : Home remedies for Sinus
साइनस नाक का à¤à¤• रोग है। आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में इसे पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¥à¤¯à¤¾à¤¯ नाम से जाना जाता है। सरà¥à¤¦à¥€ के मौसम में नाक बंद होना, सिर में दरà¥à¤¦ होना, आधे सिर में बहà¥à¤¤ तेज दरà¥à¤¦ होना, नाक से पानी गिरना इस रोग के लकà¥à¤·à¤£ हैं। इसमें रोगी को हलà¥à¤•ा बà¥à¤–ार, आंखों में पलकों के ऊपर या दोनों किनारों पर दरà¥à¤¦ रहता है। तनाव, निराशा के साथ ही चेहरे पर सूजन आ जाती है। इसके मरीज की नाक और गले में कफ जमता रहता है। इस रोग से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ धूल और धà¥à¤†à¤‚ बरà¥à¤¦à¤¾à¤¶à¥à¤¤ नहीं कर सकता। साइनस ही आगे चलकर असà¥à¤¥à¤®à¤¾, दमा जैसी गमà¥à¤à¥€à¤° बीमारियों में à¤à¥€ बदल सकता है। इससे गमà¥à¤à¥€à¤° संकà¥à¤°à¤®à¤£ हो सकता है।
साइनस रोग कà¥à¤¯à¤¾ होता है? (What is Sinusitis?)
साइनस में नाक तो अवरूदà¥à¤§ होती है, साथ ही नाक में कफ आदि का बहाव अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में होता है। à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• सà¥à¤¶à¥à¤°à¥à¤¤ à¤à¤µà¤‚ चरक के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° चिकितà¥à¤¸à¤¾ न करने से सà¤à¥€ तरह के साइनस रोग आगे जाकर ‘दà¥à¤·à¥à¤Ÿ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¥à¤¯à¤¾à¤¯â€™ में बदल जाते हैं और इससे अनà¥à¤¯ रोग à¤à¥€ जनà¥à¤® ले लेते हैं। आम धारणा यह है कि इस रोग में नाक के अनà¥à¤¦à¤° की हडà¥à¤¡à¥€ बढ़ जाती है या तिरछी हो जाती है जिसके कारण शà¥à¤µà¤¾à¤¸ लेने में रà¥à¤•ावट आती है। à¤à¤¸à¥‡ मरीज को जब à¤à¥€ ठणà¥à¤¡à¥€ हवा या धूल, धà¥à¤†à¤ उस हडà¥à¤¡à¥€ पर टकराता है तो वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ परेशान हो जाता है।
वासà¥à¤¤à¤µ में साइनस के संकà¥à¤°à¤®à¤£ होने पर साइनस की à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ में सूजन आ जाती है। सूजन के कारण हवा की जगह साइनस में मवाद या बलगम आदि à¤à¤° जाता है, जिससे साइनस बंद हो जाते हैं। इस वजह से माथे पर, गालों पर ऊपर के जबड़े में दरà¥à¤¦ होने लगता है।
शायद आपको पता नहीं कि साइनस कई पà¥à¤°à¤•ार के होते हैं-
तीवà¥à¤° साइनोसाइटिस (Acute sinusitis)- इस पà¥à¤°à¤•ार में लकà¥à¤·à¤£ अचानक शà¥à¤°à¥‚ होकर दो से चार हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ तक तकलीफ रहती है।
मधà¥à¤¯à¤® तीवà¥à¤° साइनोसाइटिस (Sub Acute sinusitis)- इस पà¥à¤°à¤•ार में साइनस में सूजन चार से बारह हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ तक रहती है।
जीरà¥à¤£ साइनोसाइटिस (Chronic sinusitis)- इस पà¥à¤°à¤•ार में लकà¥à¤·à¤£ बारह हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ से अधिक समय तक रहता है।
आवरà¥à¤¤à¤• साइनोसाइटिस (Recurrent sinusitis)- इस पà¥à¤°à¤•ार में रोगी को सालà¤à¤° बार-बार साइनासाइटिस की समसà¥à¤¯à¤¾ होती रहती है।
साइनस होने के कारण (Causes of Sinus)
जिस तरह मॉरà¥à¤¡à¤¨ मेडिकल साइंस ने साइनà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ को कà¥à¤°à¥‹à¤¨à¤¿à¤• और à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚ट दो तरह का माना है। आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¥à¤¯à¤¾à¤¯ को नव पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¥à¤¯à¤¾à¤¯ ‘à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚ट साइनà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸â€™ और पकà¥à¤µ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¥à¤¯à¤¾à¤¯ ‘कà¥à¤°à¥‹à¤¨à¤¿à¤• साइनà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸â€™ के नाम से जाना जाता है।
दरअसल, हमारे सिर में कई खोखले छिदà¥à¤° (कैविटीज) होते हैं, जो सांस लेने में हमारी मदद करते हैं और सिर को हलà¥à¤•ा रखते हैं। इन छिदà¥à¤°à¥‹à¤‚ को साइनस या वायà¥à¤µà¤¿à¤µà¤° कहा जाता है। जब इन छिदà¥à¤°à¥‹à¤‚ में किसी कारणवश गतिरोध पैदा होता है, तब साइनस की समसà¥à¤¯à¤¾ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होती है। ये छिदà¥à¤° कई कारणों से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकते हैं और बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, फंगल व वायरल इसे गंà¤à¥€à¤° बना देते हैं। à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚ट साइनोसाइटिस दो से चार हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ तक रहता है, जबकि कà¥à¤°à¥‰à¤¨à¤¿à¤• साइनोसाइटिस 12 हफà¥à¤¤à¥‡ या उससे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय तक रहता है। निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित बिंदà¥à¤“ के जरिठजानिठसाइनस की समसà¥à¤¯à¤¾ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होने के सबसे अहम कारण-
जà¥à¤•ाम-साइनस का सबसे सामानà¥à¤¯ कारण जà¥à¤•ाम है, जिसकी वजह से नाक निरंतर बहती है या फिर बंद हो जाती है और सांस लेने में दिकà¥à¤•त होती है। जà¥à¤•ाम à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• होता है, जो किसी और के माधà¥à¤¯à¤® से à¤à¥€ आपको चपेट में ले सकता है। जिन लोगों को लगातार जà¥à¤•ाम होता है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ साइनस होने की आशंका सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है।
पà¥à¤°à¤¦à¥‚षण-साइनस की समसà¥à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¥‚षण के कारण à¤à¥€ हो सकती है। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¥‚षण वाले इलाकों में रहने वाले लोग इस बीमारी की चपेट में जलà¥à¤¦à¥€ आ सकते हैं। धूल के कण, सà¥à¤®à¥‰à¤— और दूषित वायॠके कारण साइनस की समसà¥à¤¯à¤¾ बढ़ सकती है। ये हानिकारक कण सीधे हमारी शà¥à¤µà¤¾à¤¸ नली पर पà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° करते हैं। इससे धीरे-धीरे जà¥à¤•ाम, नाक का बहना और दरà¥à¤¦ आदि समसà¥à¤¯à¤¾ होती है।
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€- बहà¥à¤¤ से लोगों को नाक संबंधी à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की शिकायत रहती है। बाहर की दूषित वायॠके संपरà¥à¤• में आते ही यह समसà¥à¤¯à¤¾ बढ़ जाती है। नाक संबंधी à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ मौसम के कारण à¤à¥€ हो सकती है। सरà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के दरà¥à¤¦, आवाज में बदलाव, सिरदरà¥à¤¦ आदि आम हैं, लेकिन आप इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हलà¥à¤•े में न लें। साइनस इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के साथ दसà¥à¤¤à¤• देता है।
नाक की हडà¥à¤¡à¥€ बढ़ना- नाक की हडà¥à¤¡à¥€ बढ़ने के कारण à¤à¥€ साइनस की समसà¥à¤¯à¤¾ हो जाती है। दरअसल, बचपन या किशोरावसà¥à¤¥à¤¾ में नाक पर चोट लगने या दबने के कारण नाक की हडà¥à¤¡à¥€ à¤à¤• तरफ मà¥à¤¡à¤¼ जाती है, जिससे नाक का आकार टेढ़ा दिखाई देता है। हडà¥à¤¡à¥€ का यह à¤à¥à¤•ाव नाक के छिदà¥à¤° को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है, जिससे साइनस की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है। कोई à¤à¥€ कारण, जो शà¥à¤µà¤¾à¤¸ छिदà¥à¤°à¥‹à¤‚ में अवरोध पैदा करते हैं, उनसे साइनस की समसà¥à¤¯à¤¾ पैदा हो सकती है।
असà¥à¤¥à¤®à¤¾-असà¥à¤¥à¤®à¤¾ सांस संबंधी गंà¤à¥€à¤° बीमारी है, जो फेफड़ों और शà¥à¤µà¤¾à¤¸ नलियों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती है। असà¥à¤¥à¤®à¤¾ से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ मरीज ठीक पà¥à¤°à¤•ार से सांस नहीं ले पाता, जिसके लिठउसे सà¥à¤ªà¥‡à¤¸à¤° की आवशà¥à¤¯à¤•ता पड़ती है। इन हालातों में मरीज को साइनस की समसà¥à¤¯à¤¾ होने के आसार बढ़ जाते हैं।
à¤à¥‹à¤œà¤¨-खान-पान में बरती गई लापरवाही à¤à¥€ साइनस का कारण बन सकती है। à¤à¥‹à¤œà¤¨ की अनियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ व पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी से पाचन तंतà¥à¤° पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होता है, जो आगे चलकर साइनस की समसà¥à¤¯à¤¾ की जड़ बन सकता है।
साइनस होने के लकà¥à¤·à¤£ (Symptoms of Sinus)
साइनस में सिरदरà¥à¤¦ होना तो आम बात होता है लेकिन इसके अलावा à¤à¥€ और à¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£ होते हैं। जैसे-
सिरदरà¥à¤¦-साइनस का सबसे सामानà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ सिरदरà¥à¤¦ है। वायॠविवर (साइनस कैविटीज) बंद होने या सूजन की वजह से सांस लेने में दिकà¥à¤•त होती है। सांस लेने के लिठअतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• जोर लगाना पड़ता है। सांस लेने की यह अवसà¥à¤¥à¤¾ à¤à¤¾à¤°à¥€ सिरदरà¥à¤¦ पैदा करती है, कà¥à¤¯à¥‡à¤‚कि इससे आपके सिर और नसों पर दबाव पड़ता है। इस दरà¥à¤¦ का अनà¥à¤à¤µ आप माथे, गाल की हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और नाक के आस-पास महसूस कर सकते हैं। कई बार यह दरà¥à¤¦ असहनीय अवसà¥à¤¥à¤¾ में पहà¥à¤‚च जाता है।
बà¥à¤–ार और बेचैनी-साइनस के दौरान मरीज को बà¥à¤–ार à¤à¥€ आ सकता है और बेचैनी या घबराहट à¤à¥€ हो सकती है या फिर बà¥à¤–ार आ सकता है। यह जरूरी नहीं कि साइनस के दौरान बà¥à¤–ार आà¤à¥¤
आवाज में बदलाव-साइनस के कारण नाक से तरल पदारà¥à¤¥ निकलता रहता है और दरà¥à¤¦ होता है, जिसका असर आपकी आवाज पर à¤à¥€ पड़ता है। इस दौरान, आपकी आवाज सामानà¥à¤¯ से थोड़ी à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ हो जाती है। आवाज में à¤à¤¾à¤°à¥€à¤ªà¤¨ या धीमापन आ जाता है। आवाज में हो रहे इस बदलाव के जरिठआप साइनस के लकà¥à¤·à¤£ की पहचान कर सकते हैं।
आà¤à¤–ों के ऊपर दरà¥à¤¦-साइनस कैविटीज़ आपकी आंखों के ठीक ऊपर à¤à¥€ होते हैं, जहां सूजन या रà¥à¤•ावट के कारण दरà¥à¤¦ शà¥à¤°à¥‚ हो जाता है। इस लकà¥à¤·à¤£ से आप साइनस की पहचान कर सकते हैं।
सूंघने की शकà¥à¤¤à¤¿ कमजोर होना-खोखले छिदà¥à¤°à¥‹à¤‚ में अवरोध पैदा होने के कारण सूंघने की शकà¥à¤¤à¤¿ पर पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ता है। इस अवसà¥à¤¥à¤¾ में नाक बंद हो जाती है और सूजन के कारण इंदà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ अपना काम ठीक से नहीं कर पाती हैं। इसलिà¤, किसी à¤à¥€ चीज को सूंघने की सामानà¥à¤¯ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ कम हो जाती है।
दांतों में दरà¥à¤¦-साइनस संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण आपके दांतों में à¤à¥€ दरà¥à¤¦ हो सकता है। à¤à¤¸à¤¾ इसलिà¤, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि साइनस कैविटीज़ में बनने वाला तरल पदारà¥à¤¥ मैकà¥à¤¸à¤¿à¤²à¤°à¥€ साइनस (ये खाखले छिदà¥à¤° नाक के पास होते हैं) के पास ऊपरी दांतों पर दबाव डालता है। अगर आपको साइनस की वजह से दांतों में दरà¥à¤¦ होता है।
थकान-चिकितà¥à¤¸à¤•ों का मानना है कि अगर तेज जà¥à¤•ाम के साथ सिरदरà¥à¤¦, नींद न आना, नाक का बार-बार बंद होना और थकान महसूस होती है, तो यह लकà¥à¤·à¤£ साइनस के हैं।
खांसी-तेज खांसी को à¤à¥€ साइनस का मà¥à¤–à¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ माना गया है। साइनस से गले और फेफड़े पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होते हैं, जिससे मरीज खांसी की चपेट में आ जाता है। इसलिà¤, इन लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को हलà¥à¤•े में न लें।
साइनस से बचने के उपाय (Prevention Tips for Sinus)
साइनस के समसà¥à¤¯à¤¾ से बचने के लिठआहार और जीवनशैली में कà¥à¤› फेर-बदल करने की ज़रूरत होती है। जैसे-
कà¥à¤¯à¤¾ खायें-
खजूर, किशमिश, सेब, सोंठ, अजवायन, हींग, लहसà¥à¤¨, लौकी, कदà¥à¤¦à¥‚, मूंग के अलावा ताजा सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सूप पिà¤à¤‚।
सà¥à¤¬à¤¹ खाने से पहले या खाने के बाद रोज à¤à¤• आंवला खाà¤à¤‚।
संकà¥à¤°à¤®à¤£ के दौरान सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में खाà¤à¤‚, आहार में साबà¥à¤¤ अनाज, फलियाà¤, दालें, हलà¥à¤•ी पकी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤, सूप और शीतलन की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से बने तेल (जैतून का तैल)
शिमला मिरà¥à¤š, लहसà¥à¤¨, पà¥à¤¯à¤¾à¤œ और हॉरà¥à¤¸à¤°à¥‡à¤¡à¤¿à¤¶ अपने सूप और आहार में शामिल करें, ये अतिरिकà¥à¤¤ मà¥à¤¯à¥‚कस को पतला करके निकलने में सहायक हेते हैं।
अचà¥à¤›à¥€ तरह साफ पानी अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में पियें।
दस से पंदà¥à¤°à¤¹ तà¥à¤²à¤¸à¥€ के पतà¥à¤¤à¥‡, à¤à¤• टà¥à¤•ड़ा अदरक और दस से पंदà¥à¤°à¤¹ पतà¥à¤¤à¥‡ पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ के लें। सबको पीसकर à¤à¤• गिलास पानी में उबाल लें। जब पानी उबलकर आधा रह जाठतो उसे छान लें और सà¥à¤µà¤¾à¤¦ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° शहद मिलाकर पिà¤à¤‚। इसे पूरे दिन में दो बार (सà¥à¤¬à¤¹ खाने के बाद और रात को सोने से पहले) पीने से साइनस में आराम मिलता है।
कà¥à¤¯à¤¾ न खायें-
मà¥à¤¯à¥‚कस बनाने वाले आहार जैसे कि मैदे की चीजें, अणà¥à¤¡à¥‡, चॉकलेटà¥à¤¸, तले और पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥‡à¤¸à¥à¤¡ आहार, शकà¥à¤•र और डेरी उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦, कैफीन, गनà¥à¤¨à¥‡ का रस, दही, चावल, केला, आइसकà¥à¤°à¥€à¤®, कोलà¥à¤¡ डà¥à¤°à¤¿à¤‚क, तीखा खाने से बचें।
जीवनशैली-
ठणà¥à¤¡à¥€ हवा में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ न घूमें या नाक और मà¥à¤‚ह को ढककर रखें।
हलà¥à¤•े गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ पानी से नहाà¤à¤‚।
साइनस के घरेलू उपाय (Home remedies for Sinus)
सामानà¥à¤¯à¤¤à¤ƒ साइनस की समसà¥à¤¯à¤¾ से निजात पाने के लिठसबसे पहले घरेलू नà¥à¤¸à¥à¤–़ों को ही अपनाया जाता है। यहां हम पतंजली के विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पारित कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ घरेलू उपायों के बारे में बात करेंगे जिनके पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— से साइनस की समसà¥à¤¯à¤¾ को कà¥à¤› हद तक कम किया जा सकता है-
अदरक साइनस के उपचार में फायदेमंद (Benefit of Ginger in Sinusitis in Hindi)
अदरक के अनà¥à¤¦à¤° जिनà¥à¤œà¤¿à¤°à¥‹à¤² (gingerol) नाम का à¤à¤• à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ कंपाउंड पाया जाता है। सदियों से इसका उपयोग पाचन और सांस से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं से छà¥à¤Ÿà¤•ारा पाने के लिठकिया जाता रहा है। इसमें बहà¥à¤¤ से à¤à¤‚टी-ऑकà¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚ट, विटामिन और मिनरल पाठजाते हैं। ये शरीर के इमà¥à¤¯à¥‚नरिसà¥à¤ªà¤¾à¤‚स यानी रोककà¥à¤·à¤® पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं को मजबूती देते हैं। इस मज़बूती के कारण आपका शरीर साइनस के टिशà¥à¤¯à¥‚ में सूजन उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करने वाले कई किसà¥à¤® के वायरल और बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² संकà¥à¤°à¤®à¤£ से लड़ने के लायक बनता है। यह à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के रिà¤à¤•à¥à¤¶à¤¨ को कम करती है और फफूंद को बढ़ने से रोकती है। यह à¤à¤• à¤à¤‚टिफंगल à¤à¤œà¥‡à¤‚ट है। अदरक में पायी जाने वाली खà¥à¤¶à¤¬à¥‚ से नाक की बलगम साफ करने में मदद मिलती है और साइनोसाइटिस से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ दरà¥à¤¦ में à¤à¥€ आराम मिलता है।
रिसरà¥à¤š में पाया गया है कि अदरक उन सà¤à¥€ à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ से अचà¥à¤›à¥€ होती है जो साइनस के लिठहोती है। अदरक, साइनस के दरà¥à¤¦ को पैदा करने वाले सूकà¥à¤·à¥à¤® जीवों को खतà¥à¤® करती है। दो से तीन कप पानी में à¤à¤• अदरक की जड़ को सà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¸ कर के उबालें। फिर 10 मिनट तक ठणà¥à¤¡à¤¾ करें और पियें।
लहसà¥à¤¨ और पà¥à¤¯à¤¾à¤œ का सेवन साइनस के उपचार में फायदेमंद (Benefit of Garlic and Onion in Sinusitis in Hindi)
पà¥à¤¯à¤¾à¤œ और लहसà¥à¤¨ साइनस से पीड़ित लोगों के लिठजड़ी-बूटी का काम करता है। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥‹à¤œà¤¨ में शामिल करने से यह शरीर में बनने वाले बलगम को खतà¥à¤® करने और बलगम को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। पà¥à¤¯à¤¾à¤œ में मौजूद सलà¥à¤«à¤° सरà¥à¤¦à¥€, खांसी और साइनस के संकà¥à¤°à¤®à¤£ के लिठà¤à¤‚टी बैकà¥à¤Ÿà¤¿à¤°à¤¿à¤¯à¤² का काम करता है। पà¥à¤¯à¤¾à¤œ को काटते समय जो महक आती है उससे à¤à¥€ साइनस में काफी आराम मिलता है। लहसून और पà¥à¤¯à¤¾à¤œ का उपयोग करने के लिठदोनों को पानी में उबाल कर à¤à¤¾à¤ª लें। इससे साइनस के दरà¥à¤¦ से आपको और दरà¥à¤¦ वाले सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर सिकाई करें इससे à¤à¥€ दरà¥à¤¦ से राहत मिलती है।
परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में पानी का सेवन साइनस के उपचार में फायदेमंद (Benefit of Intake of Water in Sinusitis in Hindi)
शरीर में परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ जल की कमी कई शारीरिक बीमारियों को दावत दे सकती है, इसलिठदिनà¤à¤° तीन से चार लीटर पानी पीने की सलाह दी जाती है। पानी का संचार शरीर के विषैले ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ को मल-मूतà¥à¤° के जरिठबाहर निकालने में मदद करता है।
हलà¥à¤¦à¥€ साइनस के उपचार में फायदेमंद (Benefit of Turmeric in Sinusitis in Hindi)
à¤à¤• गिलास दूध में à¤à¤• छोटा चमà¥à¤®à¤š हलà¥à¤¦à¥€ और à¤à¤• छोटा चमà¥à¤®à¤š शहद मिलाकर दो हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ तक पीने से काफी राहत मिलती है।
काली मिरà¥à¤š साइनस के उपचार में फायदेमंद (Benefit of Black Pepper in Sinusitis in Hindi)
à¤à¤• कटोरे सूप में à¤à¤• छोटा चमà¥à¤®à¤š काली मिरà¥à¤š पाउडर डालें और धीरे-धीरे पियें। à¤à¤¸à¤¾ हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ में दो-तीन बार दिन में करें। काली मिरà¥à¤š के सेवन से साइनस की सूजन कम हो जाà¤à¤—ी और बलगम सूख जाà¤à¤—ा।
टी टà¥à¤°à¥€ ऑयल साइनस के उपचार में फायदेमंद (Benefit of Tea Tree Oil in Sinusitis in Hindi)
टी टà¥à¤°à¥€ ऑयल में à¤à¤‚टीसेपà¥à¤Ÿà¤¿à¤•, à¤à¤‚टी इंफà¥à¤²à¥ˆà¤®à¤Ÿà¥‹à¤°à¥€ और à¤à¤‚टी माइकà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¿à¤¯à¤² गà¥à¤£ होते हैं, जो कि साइनस के सिरदरà¥à¤¦ को जड़ से खतà¥à¤® करता है। टी टà¥à¤°à¥€ ऑयल की तीन से पाà¤à¤š बूंद को गरम पानी में डालकर उस पानी की à¤à¤¾à¤ª लेनी चाहिà¤à¥¤ à¤à¤¸à¤¾ दिन में दो से तीन बार करने से जलà¥à¤¦à¥€ राहत मिलती है।
दालचीनी साइनस के उपचार में फायदेमंद (Benefit of Cinnamon in Sinusitis in Hindi)
साइनस पैदा करने वाले सूकà¥à¤·à¥à¤®à¤œà¥€à¤µà¥‹à¤‚ को दालचीनी नषà¥à¤Ÿ करने में मदद करती है। à¤à¤• गिलास गरम पानी में à¤à¤• छोटा चमà¥à¤®à¤š दालचीनी पाउडर मिकà¥à¤¸ करें और दिन में à¤à¤• बार पिà¤à¤‚। à¤à¤¸à¤¾ दो हफà¥à¤¤à¥‡ तक करने से ज़रूर आराम मिलता है।
तà¥à¤²à¤¸à¥€ साइनस के उपचार में फायदेमंद (Benefit of Tulsi in Sinusitis in Hindi)
तà¥à¤²à¤¸à¥€ का काढ़ा इस तरह से बनाकर पीने से आराम मिलता है। विधि नीचे लिखित दिया गया है, साथ ही वीडियो में आपको तà¥à¤²à¤¸à¥€ साइनस के लिठकैसे है फायदेमंद यह à¤à¥€ पता चलेगा-
तà¥à¤²à¤¸à¥€ के पतà¥à¤¤à¥‡ – 11 पतà¥à¤¤à¥‡
काली मिरà¥à¤š – 11
मिशà¥à¤°à¥€ – 11
अदरक – 2 गà¥à¤°à¤¾.
पानी – 1 गà¥à¤²à¤¾à¤¸
निरà¥à¤®à¤¾à¤£ à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— विधि- इन सà¤à¥€ दà¥à¤°à¤µà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को 1 गà¥à¤²à¤¾à¤¸ पानी में उबालें। आधा रहने पर छानकर पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤ƒ खाली पेट गरà¥à¤®-गरà¥à¤® (जितना गरà¥à¤® पी सके) लें। पीने के 1 घणà¥à¤Ÿà¥‡ बाद तक सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ न करेंं।
नींबू साइनस के उपचार में फायदेमंद (Benefit of Lemon in Sinusitis in Hindi)
à¤à¤• गिलास पानी में à¤à¤• नींबू निचोड़ कर उसमें à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š शहद मिलाà¤à¤‚। इसे रोग दो से तीन हफà¥à¤¤à¥‡ रोज सà¥à¤¬à¤¹ पियें। नींबू में साइनस के दरà¥à¤¦ को दूर करने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ होती है। साथ ही यह नाक की नली को à¤à¥€ साफ करता है।
मेथी दाना साइनस के उपचार में फायदेमंद (Benefit of Fenugreek in Sinusitis in Hindi)
à¤à¤• बरà¥à¤¤à¤¨ में à¤à¤• गिलास पानी चढ़ा कर उसमें तीन चमà¥à¤®à¤š मेथी के दानें डाल कर उबालें। फिर 10 मिनट के लिये आंच को धीमा कर दें और फिर इस चाय को दिन में दो से तीन बार पियें। à¤à¤¸à¤¾ आपको à¤à¤• हफà¥à¤¤à¥‡ तक लगातार करना होगा।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास कब जाना चाहिठ? (When to See a Doctor?)
अगर साइनस कंजेशन ऊपर बताये गये उपचारों के उपयोग से 10 दिन में ठीक न हो तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° से परामरà¥à¤¶ लें। यह किसी मेडिकल कंडीशन जैसे à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का लकà¥à¤·à¤£ हो सकता है।
अगर आपके नासा सà¥à¤°à¤¾à¤µ का रंग या टेकà¥à¤¸à¤šà¤° बदल जाà¤, अगर आपको हलà¥à¤•ा बà¥à¤–ार या सिरदरà¥à¤¦ हो तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दिखाà¤à¤‚। यह साइनस इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ का संकेत हो सकता है जिसमें इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ का इलाज करने के लिठà¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ लेने की जरूरत होती है।
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