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चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के लकà¥à¤·à¤£, कारण और घरेलू उपचार
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ (chikungunya fever) à¤à¤• वायरल बीमारी है और चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के लकà¥à¤·à¤£ डेंगू से बहà¥à¤¤ मिलते-जà¥à¤²à¤¤à¥‡ हैं। यह रोग à¤à¤¡à¤¿à¤¸ पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿ के मचà¥à¤›à¤° के काटने से होता है। आमतौर पर à¤à¤¸à¥€ बीमारी होने पर चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ है या डेंगू या फिर आम फीवर है यह जानना मà¥à¤¶à¥à¤•िल होता है। इसलिठबà¥à¤–ार होने पर तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास जाना चाहिà¤à¥¤ आइठजानते हैं कि चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होता है, चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के लकà¥à¤·à¤£ (chikungunya ke lakshan) कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ होते हैं और चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के घरेलू उपचार कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ हैं।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ कà¥à¤¯à¤¾ है?
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤• संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• रोग होता है। चिकनगनिया के लकà¥à¤·à¤£ (chikungunya ke lakshan) के रूप में आपको 39 डिगà¥à¤°à¥€ सेलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¸ तक बà¥à¤–ार (जà¥à¤µà¤°) हो जाता है। हाथों और पैरों पर चकतà¥à¤¤à¥‡ बन जाते हैं। शरीर के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ जैसे जोड़ों, सिर और आà¤à¤–ों में दरà¥à¤¦ होता है। इस रोग में बà¥à¤–ार आमतौर पर दो दिन से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नहीं रहता और अचानक समापà¥à¤¤ हो जााता है। चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ विषाणॠà¤à¤• अरà¥à¤¬à¥‹à¤µà¤¿à¤·à¤¾à¤£à¥ है जिसे अलà¥à¤«à¤¾à¤µà¤¿à¤·à¤¾à¤£à¥ परिवार का माना जाता है।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के लकà¥à¤·à¤£ महसूस होने पर ये जांच कराना जरूरी होता है। जांच से ही जान सकते हैं कि चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ हà¥à¤† है कि नहीं-
1- रिवरà¥à¤¸ टà¥à¤°à¤¾à¤‚सà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤ªà¥à¤¶à¤¨ पॉलीमिरेस चेन रियेकà¥à¤¶à¤¨ (Reverse Transcription Polymerase Chain Reaction) चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के जीनà¥à¤¸ को अधिक सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿà¤¤à¤¾ से दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¤¾ है और चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का होना पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤¤ करता है-
2- इमà¥à¤¯à¥‚नोफà¥à¤²à¥‹à¤°à¥‡à¤¸à¥‡à¤¨à¥à¤¸ à¤à¤¸à¥‡à¤¸ (Immunofluoresance assays)
3- हेमागà¥à¤²à¥‚टिनेशन इनà¥à¤¹à¤¿à¤¬à¤¿à¤¶à¤¨ टेसà¥à¤Ÿà¥à¤¸ (Haemagglutination inhibition tests)
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ होने के कारण
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ वायरस à¤à¤• संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ मचà¥à¤›à¤° के काटने से फैलता है। इस रोग को शरीर में आने के बाद 2 से 4 दिन का समय फैलने में लगता है। इस रोग के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ (chikungunya ke lakshan) में बà¥à¤–ार आमतौर पर दो से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दिन तक नहीं चलता है तथा अचानक ही समापà¥à¤¤ à¤à¥€ हो जाता है। मूल रूप से यह रोग उषà¥à¤£à¤•टिबंधीय अफà¥à¤°à¤¿à¤•ा तथा à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾ में पनपता है। यह रोग à¤à¤¡à¤¿à¤¸ पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿ के मचà¥à¤›à¤° मानव शरीर मे फैलाते हैं।
जब कोई वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ वायरस से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ हो तो मचà¥à¤›à¤° à¤à¥€ इस वायरस से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ हो जाता है। यह मचà¥à¤›à¤° दिन के उजाले में काटते हैं। यह रोग मचà¥à¤›à¤° से मानव को और दोबारा मचà¥à¤›à¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ मानव का संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ खून पीने से होता है अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ मानव-मचà¥à¤›à¤°-मानव के चकà¥à¤° में फैलता है। यह रोग विषाणॠमà¥à¤–à¥à¤¯à¤¤ अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से बनà¥à¤¦à¤° में पायें जाते हैं किनà¥à¤¤à¥ मानव शरीर सहित अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤ à¤à¥€ इस से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकती है।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ होने के लकà¥à¤·à¤£ (Symptoms of Chikungunia)
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ को शरीर में आने के बाद फैलने में 4 दिन का समय लगता है और फिर उसके लकà¥à¤·à¤£ समय के साथ नजर आने लगते हैं।
हाथों और पैरों में चकतà¥à¤¤à¥‡ बन जाते हैं।
शरीर के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ जोड़ों में दरà¥à¤¦ होने लगता है जो मनà¥à¤·à¥à¤¯ को कमजोर बना देती है।
यह कà¥à¤› दिनों तक चलता है या कईं हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ तक à¤à¥€ चल सकता है।
मांसपेशियों में दरà¥à¤¦, सिरदरà¥à¤¦ à¤à¤µà¤‚ थकान (chikungunya ke lakshan) का अनà¥à¤à¤µ होता है।
यह बिमारी विशेष रूप से बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤— और यà¥à¤µà¤¾ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अनà¥à¤¬à¤‚धित हो तो अधिक गमà¥à¤à¥€à¤° होता है।
गमà¥à¤à¥€à¤° पीठदरà¥à¤¦
आà¤à¤–ों में पीड़ा à¤à¤µà¤‚ कंजेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ होना
अनिदà¥à¤°à¤¾ तथा निरà¥à¤¬à¤²à¤¤à¤¾ à¤à¥€ शामिल है।
गले में खराश होना
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ से कैसे बचें? (How to Prevent Chikungunia?)
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ से बचने के लिठजीवनशैली और आहार में बदलाव लाना जरूरी होता है। आइये इस बारे में विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से जानते हैं :
जीवनशैली से जà¥à¥œà¥‡ बदलाव
जहाठकहीं जाà¤à¤ वहाठमचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ के काटने से खà¥à¤¦ को बचाà¤à¤à¥¤
यदि आप अपने घर में हैं और मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ से खà¥à¤¦ को बचाना चाहते हैं तो मचà¥à¤›à¤°-दानी के नीचे सोà¤à¤à¥¤
अपने घर के आस-पास या बाहर जो कंटेनर, गडà¥à¤¢à¥‡, बालà¥à¤Ÿà¥€ या गमलों में पानी रà¥à¤•ा होता है उसे खाली करके मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ को पनपने से रोकें।
कीट रेपेलà¥à¤²à¥‡à¤‚टसॠका उपयोग करें जिससे रोधक दीरà¥à¤˜à¤•ालिक सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करते हैं।
कीट से बचाने वाली कà¥à¤°à¥€à¤® का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— सनकà¥à¤°à¥€à¤¨ से पहले करें।
à¤à¤¸à¥‡ कपड़े पहनें जिससे शरीर पूरी तरह से ढ़क जाà¤à¥¤
अगर हो सके तो अपने घर की खिड़की के पास तà¥à¤²à¤¸à¥€ का पौधा रखें।
खूब पानी पिà¤à¤ जिससे आपकी बॉडी हाइडà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ रहे।
अपने घर के किसी कमरे में कपूर जलाà¤à¤, इससे मचà¥à¤›à¤° घर से दूर रहते हैं।
खानपान में बदलाव :
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में आहार के रूप में नारियल पानी का सेवन करना चाहिà¤à¥¤
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में ताजी हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤ खानी चाहिà¤à¥¤
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में आहार के रूप में हरी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सूप पीने को दें।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ रोगी को सेब का सेवन करवाà¤à¤à¥¤
केले का सेवन फायदेमंद है।
चिकà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में विटामिन-सी यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का सेवन करें।
चिकà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में विटामिन-ई à¤à¤µà¤‚ जिंक यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का सेवन करें।
मांसाहारी à¤à¥‹à¤œà¤¨ का सेवन न करें।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ बà¥à¤–ार के इलाज के लिठघरेलू उपाय
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ होने पर उसके लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ सर राहत पाने के लिठघरेलू इलाज करना ही लोग सबसे पहले चाहते हैं। ताकि घर पर आसानी से चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ (chikungunya fever) के परेशानियों से राहत मिल सके।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के उपचार के लिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में पिà¤à¤‚ पानी
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ होने पर रोगी के शरीर में पानी की कमी हो जाती है। पानी शरीर के सà¤à¥€ विषैले पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को बाहर निकालने में मदद करता है । यदि चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ रोगी को पानी कम मातà¥à¤°à¤¾ में पिलाया जाà¤à¤—ा तो उसे डीहाईडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के उपचार के लिठडेयरी पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿà¥à¤¸ का सेवन
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को दूध और डेयरी पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿà¥à¤¸ का सेवन करना चाहिà¤à¥¤ डेयरी उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦ से चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ बà¥à¤–रा पर नियंतà¥à¤°à¤£ पाने में मदद मिलती है।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का उपचार अजवाइन से
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में अजवायन देने की सलाह दी जाती है। अजवायन में थाइमोल नामक à¤à¤• तेल पाया जाता है जो लोकल à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ की तरह काम करता है, जिसके परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प शरीर का दरà¥à¤¦ कम (chikungunya ka ilaj) हो जाता है।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के उपचार के लिठसहजन का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤²
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में सहजन की फलियों का सूप पीने को दिया जाता है। इसके पतà¥à¤¤à¥‡ à¤à¥€ काफी फायदेमंद होते हैं। सहजन के सेवन से मांसपेशियाठमजबूत होती हैं।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के उपचार के लिठहलà¥à¤¦à¥€ का सेवन
हलà¥à¤¦à¥€ हर रोग का रामबाण है, इसे आप दूध में मिलाकर पà¤à¤‚। इससे चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ मनà¥à¤·à¥à¤¯ ठीक हो जाता है। यह उपाय बहà¥à¤¤ लाठदेता है।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की दवा तà¥à¤²à¤¸à¥€
हम सब के घरों में तà¥à¤²à¤¸à¥€ का पौधा औषधि के रूप में इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है। तà¥à¤²à¤¸à¥€ हमारे पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को बढ़ाती है और हमें बिमारियों से बचाती है।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की दवा गिलोय
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ से राहत के लिठगिलोय रस या गिलोय कैपà¥à¤¸à¥‚ल लें। आप à¤à¤• दिन में à¤à¤• गà¥à¤°à¤¾à¤® की खà¥à¤°à¤¾à¤• ले सकते हैं। यह चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के उपचार में मदद करता है।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की दवा पपीता की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚
7 से 8 ताजे पपीते की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ लेकर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ धो लें और उनका पेसà¥à¤Ÿ बना लें। फिर उस रस को निचोड़कर 2-2 चमà¥à¤®à¤š रस 3-3 घणà¥à¤Ÿà¥‡ बाद पिलाà¤à¤à¥¤ इस बà¥à¤–ार में शरीर के पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ तेजी से गिरते हैं और पपीते की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤ पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ को बढ़ाते हैं।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का इलाज अंगूर से
अंगूर के बीजरहित फल को गाय के गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ दूध के साथ पीने से चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का वायरस मर जाता है। यह कारगर उपाय है।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ बà¥à¤–ार के इलाज के लिठलहसà¥à¤¨ का सेवन (Garlic: Home Remedies for Chikungunya in Hindi)
जोड़ों के दरà¥à¤¦ से राहत दिलाने में लहसà¥à¤¨ का कोई मà¥à¤•ाबला नहीं है। इसे पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ जगह पर जितना जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लगाया जाà¤, उतना अचà¥à¤›à¤¾ होता है। यह ना सिरà¥à¤« दरà¥à¤¦ से राहत दिलाता (chikungunya ka ilaj) है, बलà¥à¤•ि सूजन को कम करके रकà¥à¤¤ संचार को बेहतर करता है।
लहसà¥à¤¨ की 10 से 12 कलियां लें और उनका पेसà¥à¤Ÿ बनाकर पानी के साथ पेसà¥à¤Ÿ (गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤‚ड) बना लें। अब इस पेसà¥à¤Ÿ को जोड़ों पर दरà¥à¤¦ वाली जगह पर लगाà¤à¤ और कà¥à¤› घणà¥à¤Ÿà¥‹à¤‚ के लिठछोड़ दें।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ बà¥à¤–ार के इलाज में शहद व नीमà¥à¤¬à¥‚ से फायदा
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का इलाज करने के लिठशहद का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया जा सकता है। इसमें à¤à¤‚टी-बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² व à¤à¤‚टी-माइकà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¿à¤¯à¤² गà¥à¤£ पाठजाते हैं, जो बीमारियों से लड़ने में हमारी मदद करते हैं। वहीं नीमà¥à¤¬à¥‚ बà¥à¤–ार से लड़ने के लिठशरीर की रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को बढ़ाता है।
à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š शहद व आधे नीमà¥à¤¬à¥‚ को à¤à¤• गिलास पानी में मिलाकर इसका सेवन करें। आप पानी को गरà¥à¤® कर उसमें नीमà¥à¤¬à¥‚ व शहद को मिकà¥à¤¸ कर उसकी चाय का सेवन à¤à¥€ कर सकते हैं।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ से राहत पाने के लिठसबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सूप का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤²
सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सूप चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में बहà¥à¤¤ अधिक लाà¤à¤¦à¤¾à¤¯à¤• होता है इसलिठचिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में टमाटर का सूप पिà¤à¤‚ इसके अलावा तरल पदारà¥à¤¥ का सेवन करें।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ बà¥à¤–ार के इलाज ओमेगा-3 फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ से
ओमेगा-3 फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ रोग-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को मजबूत बनाता है। यह हमें दाल, अलसी और अखरोट से पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होता है। इससे चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में लाठमिलता है।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ बà¥à¤–ार के इलाज के लिठखाà¤à¤‚ केला
केले में चीनी की मातà¥à¤°à¤¾ कम होती है और सà¥à¤Ÿà¤¾à¤°à¥à¤š की मातà¥à¤°à¤¾ अधिक होती है। इसके अलावा केले में फाइबर à¤à¥€ बहà¥à¤¤ अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में पाया जाता है। इसके सेवन से पाचन कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ मजबूत रहती है।
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ से राहत पाने के लिठचॉकलेट का सेवन
चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ बà¥à¤–ार के दौरान रोगी को दिन में 2-3 बार चॉकलेट खानी चाहिà¤à¥¤ दिन में 4-6 छेनी और सफेद रसगà¥à¤²à¥à¤²à¥‡ खाने चाहिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि ये कैलोरी बढ़ाने में मददगार (chikungunya ka ilaj) साबित होता है। शà¥à¤—र और बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° हाई पेशेनà¥à¤Ÿà¥à¤¸ को मीठे से परहेज करवाया जाता है।
आइस पैक से चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ से राहत
बरà¥à¤« का पैक सूजन और दरà¥à¤¦ में आराम पहà¥à¤à¤šà¤¾à¤¤à¤¾ है। यह उपाय चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के उपचार के दौरान किया जाना चाहिà¤à¥¤ इससे रोगी को आराम मिलता है।
गाजर चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के उपचार में फायदेमंद
कचà¥à¤šà¥€ गाजर खाने से वह चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के उपचार में बेहद फायदेमंद है। यह शरीर की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को बढ़ाता है और आपको राहत दिलाता है।
नारियल पानी से चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ से आराम
कà¥à¤› दिनों के लिठदिन में दो से तीन बार नारियल पानी का सेवन करें। यह चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के उपचार के दौरान बहà¥à¤¤ ही फायदा दिलाता है।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास कब जाना चा
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चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤• वायरल बिमारी है। चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के लकà¥à¤·à¤£ (chikungunya ke lakshan) डेंगू से मिलते-जà¥à¤²à¤¤à¥‡ होते हैं। इस बीमारी में गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ को तेज बà¥à¤–ार के साथ शरीर में दरà¥à¤¦ होता है। कà¥à¤› दिन तक परहेज करने से या घरेलू उपचार का पालन करने से यह ठीक हो जाता है। यदि नियमित रूप से परहेज à¤à¤µà¤‚ घरेलू उपचार करने पर à¤à¥€ बà¥à¤–ार कम न हो, और शरीर में दरà¥à¤¦ बढ़ जाठतो रोगी को तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ डॉकà¥à¤Ÿà¤° से मिलकर परामरà¥à¤¶ लेना चाहिà¤à¥¤
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