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शरीर में आतà¥à¤®à¤¾ कहाठविदà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ है ?
बà¥à¤²à¥‰à¤— दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ Ravi Kant
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वà¥à¤¯à¥‚ज
आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• डायरी में जोड़ें।
शरीर में आतà¥à¤®à¤¾ कहाठविदà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ है
कृपया अंत तक अवशà¥à¤¯ पà¥à¥‡à¤‚ तथा विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ रखें कि शीरà¥à¤·à¤• का उतà¥à¤¤à¤° आपको अवशà¥à¤¯ मिलेगा.
सनातन धरà¥à¤®à¤—à¥à¤°à¤‚थों के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° कण-कण में ईशà¥à¤µà¤° अथवा सृषà¥à¤Ÿà¤¿ विदà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ है. यदि हर कण में ईशà¥à¤µà¤° विदà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ है तो हमें मंदिरों में ईशà¥à¤µà¤° के दरà¥à¤¶à¤¨ हेतॠकà¥à¤¯à¥‹à¤‚ अपने शरीर को कषà¥à¤Ÿ देकर जाना पड़ता है ! कण तो हर जगह हैं. हमारे पैरों के नीचे, हमारे आसपास की वसà¥à¤¤à¥à¤“ं में, यहाठतक कि हम सà¥à¤µà¤¯à¤‚ à¤à¥€ कण-कण के जà¥à¥œà¥‡ होने के कारण ही à¤à¤• शरीर रूप में विदà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ हैं. इस लेख में मैं अà¤à¥€ गà¥à¤°à¤‚थों à¤à¤µà¤‚ समà¥à¤¬à¤‚धित शà¥à¤²à¥‹à¤•ों को उदà¥à¤§à¥ƒà¤¤ नहीं करूà¤à¤—ा कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वे अà¤à¥€ मेरे पास (जिस सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर मैं यह लेख लिख रहा हूà¤, उस सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर) उपलबà¥à¤§ नहीं हैं तथा इन कठिन शà¥à¤²à¥‹à¤•ों à¤à¤µà¤‚ उनमें पà¥à¤°à¤¯à¥à¤•à¥à¤¤ कà¥à¤²à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ संसà¥à¤•ृत शबà¥à¤¦à¤¾à¤µà¤²à¥€ का अरà¥à¤¥ अधिकांश लोगों को समठनही आ सकता है. शासà¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¥‹à¤‚ का गूॠअधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ कर आये विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ धरà¥à¤®à¥‹à¤‚ à¤à¤µà¤‚ पंथों के विदà¥à¤µà¤¾à¤¨à¥ à¤à¥€ कठिन शबà¥à¤¦à¤¾à¤µà¤²à¥€ का अरà¥à¤¥ अपनी समठके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° करते हैं तथा उनकी विवेचना करने पर अरà¥à¤¥ का अनरà¥à¤¥ साकà¥à¤·à¤¾à¤¤ दिखता à¤à¥€ है. तरà¥à¤• समà¤à¤¨à¤¾ कठिन होता है किनà¥à¤¤à¥ कà¥à¤¤à¤°à¥à¤• ततà¥à¤•ाल à¤à¤µà¤‚ आसानी से मानने योगà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤ होते हैं. सनातन धरà¥à¤® के सà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤œà¤¿à¤¤ विखंडन हेतॠतरà¥à¤• अथवा शासà¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥ करने आये विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ धरà¥à¤®à¥‹à¤‚ à¤à¤µà¤‚ पंथों के लोग à¤à¤•मत होकर à¤à¤¾à¤µà¤¾à¤°à¥à¤¥ का अनरà¥à¤¥ कर देते हैं तथा समाज, जो कि सनातन अथवा हिनà¥à¤¦à¥‚ होने की सतही परंपरा या सही शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में कहें तो फॉरà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ ही निरà¥à¤µà¤¾à¤¹ कर रहा है, ततà¥à¤•ाल अपने गà¥à¤°à¤‚थों के विरà¥à¤¦à¥à¤§ विदà¥à¤µà¤¾à¤¨à¥ हो जाता है à¤à¤µà¤‚ अनà¥à¤¯ को à¤à¥€ यही उपदेश पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करने लगता है. अचà¥à¤›à¥€ बातें, सतà¥à¤¯ या नियम कठिन होते हैं, इनका सà¥à¤µà¤¯à¤‚ पालन करना à¤à¤µà¤‚ दूसरों को à¤à¥€ इनके लिठबाधà¥à¤¯ करना à¤à¥€ कठिन होता है. बà¥à¤°à¥€ बातें, असतà¥à¤¯ तथा नियमों का उलà¥à¤²à¤‚घन आसान होता है तथा इनमें आनंद à¤à¥€ ततà¥à¤•ाल मिलता है. इसलिठइनका पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° या कहें दूसरों को पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करना हर किसी के लिठआसान होता है. हम सà¥à¤µà¤¯à¤‚ तो संसà¥à¤•ृत जानते नहीं, धरà¥à¤®à¤—à¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ पà¥à¤¤à¥‡ नहीं, और यदि पà¥à¤¤à¥‡ à¤à¥€ हों तो उनका शाबà¥à¤¦à¤¿à¤• अरà¥à¤¥ ससंदरà¥à¤ समà¤à¤¤à¥‡ नहीं, अतः दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° से ततà¥à¤•ाल पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होकर असतà¥à¤¯ को ही सतà¥à¤¯ मान लेते हैं. विधरà¥à¤®à¥€ अथवा सनातन धरà¥à¤® के सà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤œà¤¿à¤¤ विरोधी हमारे धरà¥à¤®à¤¶à¥à¤²à¥‹à¤•ों, नीतिशà¥à¤²à¥‹à¤•ों à¤à¤µà¤‚ बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤µà¤¾à¤•à¥à¤¯à¥‹à¤‚ के अंश ही पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करते हैं तथा अपने धरà¥à¤®à¤—à¥à¤°à¤‚थों, ऋषि मà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का उपहास करते हैं अथवा वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚/ अरà¥à¤¥ की अपेकà¥à¤·à¤¾ अलग ही अरà¥à¤¥ से लोगों को à¤à¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ करते हैं. इसका सटीक उदाहरण है महातà¥à¤®à¤¾ गाà¤à¤§à¥€ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अहिंसा के उपदेश के लिठपà¥à¤°à¤¯à¥à¤•à¥à¤¤ नीतिवाकà¥à¤¯ – “अहिंसा परमोधरà¥à¤®à¤ƒâ€. मेरा विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ है तथा बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ के ततà¥à¤•ालीन वृतà¥à¤¤à¤¾à¤‚त जो सतà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करते हैं कि इस शà¥à¤²à¥‹à¤• के छà¥à¤ªà¤¾à¤¯à¥‡ गठअंश – “धरà¥à¤®à¤¹à¤¿à¤‚सा तथैव च†तथा कà¥à¤› अनà¥à¤¯ वितà¥à¤¤à¥€à¤¯ कारणों से अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ को à¤à¤¾à¤°à¤¤ को सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° करना पड़ा था. कहने का अरà¥à¤¥ यह है कि सनातन अथवा हिनà¥à¤¦à¥‚ धरà¥à¤® ने तो ततà¥à¤•ाल “अहिंसा परमोधरà¥à¤®à¤ƒâ€ आतà¥à¤®à¤¸à¤¾à¤¤ कर लिया और अहिंसा को अपनी नपà¥à¤‚सकता ढकने का à¤à¤• बहाना या ढाल बना लिया जबकि हिनà¥à¤¦à¥‚ विरोधियों (जिनमें वे नाम से हिनà¥à¤¦à¥‚ किनà¥à¤¤à¥ उनका वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• धरà¥à¤® कà¥à¤› और है) तथा छदà¥à¤®à¤§à¤°à¥à¤®à¤¨à¤¿à¤°à¤ªà¥‡à¤•à¥à¤·à¤¤à¤¾ की पताका उठाये लोगों ने सनातन धरà¥à¤® तथा धरà¥à¤®à¤—à¥à¤°à¥à¤“ं पर शैकà¥à¤·à¤£à¤¿à¤•, सामाजिक à¤à¤µà¤‚ नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤• रूप से निरà¥à¤®à¤® पà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° किये हैं. बाकी धरà¥à¤®à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¥€ अपने धरà¥à¤®à¤—à¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ à¤à¤µà¤‚ आचरण अनà¥à¤§à¤°à¥‚प से मानते हैं जबकि हम हिनà¥à¤¦à¥‚ अथवा सनातन धरà¥à¤® के अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¥€ इसे सिरà¥à¤« रिवाज के सà¥à¤¤à¤° पर ही मना कर अपने को हिनà¥à¤¦à¥‚ कहते नहीं लजाते !! विडमà¥à¤¬à¤¨à¤¾ ही है !!
हमारा धरà¥à¤® à¤à¤µà¤‚ धरà¥à¤®à¤—à¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ कितने वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• तथà¥à¤¯à¥‹à¤‚ पर आधारित हैं, शायद यह वरà¥à¤£à¤¨ करना आवशà¥à¤¯à¤• नहीं. पृथà¥à¤µà¥€, सूरà¥à¤¯ à¤à¤µà¤‚ बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤£à¥à¤¡ की आयà¥, सूरà¥à¤¯ से पृथà¥à¤µà¥€ की दूरी, धà¥à¤µà¤¨à¤¿ तथा पà¥à¤°à¤•ाश की गति, गà¥à¤°à¥à¤¤à¥à¤µ, पृथà¥à¤µà¥€, चनà¥à¤¦à¥à¤° तथा अनà¥à¤¯ गà¥à¤°à¤¹à¥‹à¤‚ की घूरà¥à¤£à¤¨ à¤à¤µà¤‚ परिकà¥à¤°à¤®à¤¾ की गति, नकà¥à¤·à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ à¤à¤µà¤‚ असंखà¥à¤¯ à¤à¤¸à¥€ वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• गणनाà¤à¤ केवल सनातन धरà¥à¤®à¤—à¥à¤°à¤‚थों में मिलती हैं. विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ परमाणॠके तीन अवयवों (इलेकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤¨, नà¥à¤¯à¥‚टà¥à¤°à¥‰à¤¨, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥‰à¤¨) के à¤à¥‡à¤¦ तक पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ कर पाया है जबकि सनातन धरà¥à¤®à¤—à¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ अणॠके छठे उपà¤à¥‡à¤¦ अथवा सूकà¥à¤·à¥à¤® अवयव अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ इलेकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤¨, नà¥à¤¯à¥‚टà¥à¤°à¥‰à¤¨, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥‰à¤¨ के चार उपà¤à¥‡à¤¦ अथवा सूकà¥à¤·à¥à¤® अवयव नीचे तक का वरà¥à¤£à¤¨ करते हैं.
हमारे धरà¥à¤®à¤—à¥à¤°à¤‚थों के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° हर कण में ईशà¥à¤µà¤° के अंश विदà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ हैं. यह अंश साकार ईशà¥à¤µà¤° के परे शकà¥à¤¤à¤¿ अथवा ऊरà¥à¤œà¤¾ रूप में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ है. जिन वसà¥à¤¤à¥à¤“ं, कणों को हम निरà¥à¤œà¥€à¤µ मानते हैं जैसे पतà¥à¤¥à¤°, रेत, जल की बूंद इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿, उनमें à¤à¥€ आतà¥à¤®à¤¾ विदà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ है. हमारे सनातन धरà¥à¤®à¤—à¥à¤°à¤‚थों के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° आतà¥à¤®à¤¾ के à¤à¥€ उपà¤à¥‡à¤¦ अथवा सूकà¥à¤·à¥à¤® अवयव हैं. इनमें से आतà¥à¤®à¤¾ के दो उपà¤à¥‡à¤¦ जागृत तथा सà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में हर कण में विदà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ हैं. जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हम जीवित मानते हैं, वे आतà¥à¤®à¤¾ की जागृतावसà¥à¤¥à¤¾ में होते हैं तथा पतà¥à¤¥à¤°, रेत, जल की बूंद तथा अनà¥à¤¯ हर निरà¥à¤œà¥€à¤µ मानी जानी वाली वसà¥à¤¤à¥ में यही आतà¥à¤®à¤¾ सà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में विदà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ रहती है. अब पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ यह है कि हर कण में आतà¥à¤®à¤¾ होने का पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ कà¥à¤¯à¤¾ है ? यदि आप मानें कि à¤à¤• शरीर में à¤à¤• ही आतà¥à¤®à¤¾ रहती है जिसके शरीर तà¥à¤¯à¤¾à¤—ने से जीवित ततà¥à¤•ाल निरà¥à¤œà¥€à¤µ में परिवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ हो जाता है तो मैं इसका विरोध करता हूà¤. यदि पेड़-पौधों को à¤à¥€ à¤à¤• शरीर मानें तो यह देखिये कि à¤à¤• पेड़ के किसी à¤à¥€ अंग अथवा टहनी/ टà¥à¤•ड़े को उसके अनà¥à¤•ूल परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ किया जाये तो पà¥à¤¨à¤ƒ à¤à¤• या कई पेड़-पौधे उग जाते हैं !! यहाठआतà¥à¤®à¤¾ à¤à¤• ही कहाठरही ? पेड़ पौधों में नेतà¥à¤° नहीं होते किनà¥à¤¤à¥ यदि किसी बेल (कà¥à¤°à¥€à¤ªà¤°) को देखें तो वह बिना नेतà¥à¤° ही सà¥à¤µà¤¤à¤ƒ जहाठà¤à¥€ रसà¥à¤¸à¥€ अथवा ऊपर चà¥à¤¨à¥‡ का साधन उपलबà¥à¤§ हो, उसकी तरफ मà¥à¥œ जाती है और अंततः उसके सहारे विसà¥à¤¤à¤¾à¤° तथा जीवनकà¥à¤°à¤® बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में रत हो जाती है. यह उसके हर अंश, हर कण, हर अणॠमें सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ आतà¥à¤®à¤¾ की पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ से ही होता है.
विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ का छातà¥à¤° होने के नाते पà¥à¤¾ था कि अमीबा, हाइडà¥à¤°à¤¾ तथा अनंत सूकà¥à¤·à¥à¤®à¤¦à¤°à¥à¤¶à¥€ जीव होते हैं जो à¤à¤• ही जीव से विà¤à¤¾à¤œà¤¿à¤¤ हो कर सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° जीव के रूप में जीवित रहते हैं और अपना जीवनकà¥à¤°à¤® इसी आधार पर चलाते बढाते रहते हैं. यहाठà¤à¥€ आतà¥à¤®à¤¾ à¤à¤• ही कहाठरही ? मानव में शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ में à¤à¤• आतà¥à¤®à¤¾ होती है. डिमà¥à¤¬ अथवा सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ के अंडाणॠमें सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° à¤à¤µà¤‚ अलग आतà¥à¤®à¤¾ विदà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ होती है. दोनों के संयोग से मानव शरीर की संरचना पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚ठहोती है. किनà¥à¤¤à¥ मानव शरीर के पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• अंग के पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• अणॠमें सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° आतà¥à¤®à¤¾ होती है जिसे संचालित करने की ऊरà¥à¤œà¤¾, कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ तथा पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤£à¥à¤¡ (का अंश) अथवा सूकà¥à¤·à¥à¤® ऊरà¥à¤œà¤¾ जिसे हम à¤à¥Œà¤¤à¤¿à¤• अथवा वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• रूप से आतà¥à¤®à¤¾ मानते हैं, उसके पास रहती है. इसे दूसरे सरल शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में इस पà¥à¤°à¤•ार से समठसकते हैं कि सूरà¥à¤¯ अगà¥à¤¨à¤¿ तथा अथाह ऊरà¥à¤œà¤¾ का à¤à¤• पिणà¥à¤¡ है जिसके हर बिंदॠमें अनंत ऊरà¥à¤œà¤¾ विदà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ है. किनà¥à¤¤à¥ यह अनंत ऊरà¥à¤œà¤¾ सूरà¥à¤¯ के मूलततà¥à¤µ कà¥à¤°à¥‹à¤¡ अथवा कोर के बिना शूनà¥à¤¯ हो जाती है. सूरà¥à¤¯ अथवा किसी à¤à¥€ तारे की कोर अपनी मृतà¥à¤¯à¥ के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ अनंत ऋणातà¥à¤®à¤• ऊरà¥à¤œà¤¾ तथा परम घनतà¥à¤µ का पिणà¥à¤¡ बन जाता है जिसे हम वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• रूप से बà¥à¤²à¥ˆà¤•होल (बà¥à¤²à¥ˆà¤• होल) के नाम से जानते हैं. वह समसà¥à¤¤ उतà¥à¤¸à¤°à¥à¤œà¤¿à¤¤ ऊरà¥à¤œà¤¾ को पà¥à¤¨à¤ƒ अवशोषित कर पà¥à¤¨à¤ƒ ऊरà¥à¤œà¤¾ का सà¥à¤°à¥‹à¤¤ बनने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में रत हो जाता है. इसी पà¥à¤°à¤•ार से मानव शरीर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤£à¥à¤¡ से अनंत ऊरà¥à¤œà¤¾ जिससे शरीर के अनà¥à¤¯ अवयव संचालित होते हैं के शरीर से निरà¥à¤—म के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ अनà¥à¤¯ अणॠà¤à¥€ अपनी ऊरà¥à¤œà¤¾ तà¥à¤¯à¤¾à¤— कर सजीव से निरà¥à¤œà¥€à¤µ होने लगते हैं अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ चेतनावसà¥à¤¥à¤¾ से सà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो जाते हैं. इसी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को हम मृतà¥à¤¯à¥ घोषित करते हैं. हमारा सूकà¥à¤·à¥à¤® शरीर यदि ईशà¥à¤µà¤° में लीन नहीं हो पाया तो पà¥à¤¨à¤ƒ ऊरà¥à¤œà¤¾ अवशोषित करने की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में लग जाता है और परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ ऊरà¥à¤œà¤¾ समेटने के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ पà¥à¤¨à¤°à¥à¤œà¤¨à¥à¤® के माधà¥à¤¯à¤® से सà¥à¤¥à¥‚लशरीर के रूप में फिर मानव अथवा किसी अनà¥à¤¯ रूप में जनà¥à¤® लेता है. यही जà¥à¤žà¤¾à¤¨ हमारे धरà¥à¤®à¤—à¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ हमें देते हैं कि जीवनकाल में अचà¥à¤›à¥‡ à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤£à¥à¤¯ कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के माधà¥à¤¯à¤® से साकारातà¥à¤®à¤• ऊरà¥à¤œà¤¾ अरà¥à¤œà¤¿à¤¤ कर के हम अनंत ऊरà¥à¤œà¤¾ के अथाह सà¥à¤°à¥‹à¤¤ ईशà¥à¤µà¤° में लीन हो सकते हैं. यही हमारे मानव सà¥à¤µà¤°à¥à¤ª में जनà¥à¤® लेने का उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ à¤à¥€ है.
पà¥à¤°à¤¿à¤¯ मितà¥à¤°à¥‹à¤‚ à¤à¤µà¤‚ बहनों, सनातन धरà¥à¤® विसà¥à¤¤à¥ƒà¤¤ है तथा हर वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• कसौटी पर खरा उतरता है. इसे सिरà¥à¤« अंधà¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ का साधन न मान कर इस जà¥à¤žà¤¾à¤¨ को अनंत ऊरà¥à¤œà¤¾ के à¤à¤£à¥à¤¡à¤¾à¤° ईशà¥à¤µà¤° से मिलन का साधन होने का विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ रखिये. अपनी मातृà¤à¤¾à¤·à¤¾, अपनी देवà¤à¤¾à¤·à¤¾ (संसà¥à¤•ृत) तथा अपने धरà¥à¤®à¤—à¥à¤°à¤‚थों का अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ कीजिये. अपने जीवन का सही अà¤à¤¿à¤ªà¥à¤°à¤¾à¤¯ या उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ न à¤à¥‚लिà¤. कण कण में ईशà¥à¤µà¤° है, अतः दूसरों को à¤à¥€ उसी ईशà¥à¤µà¤° का अंश मानकर हरà¤à¤• को उचित महतà¥à¤¤à¥à¤µ दीजिये. अपना जीवन सारà¥à¤¥à¤• कीजिये.
|| जय à¤à¤¾à¤°à¤¤ जय à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€ ||
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