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जागरण संवाददाता, à¤à¤¾à¤—लपà¥à¤°à¥¤ दैनिक जागरण कारà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में आयोजित पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ पहर में शिशॠरोग विशेषजà¥à¤ž ने पाठकों की समसà¥à¤¯à¤¾ का समाधान टेलीफोन के माधà¥à¤¯à¤® से किया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को बोतल से दूध पिलाना खतरनाक है। इससे संकà¥à¤°à¤®à¤£ होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ रहती है। डायरिया और पेचिस जैसी खतरनाक बीमारी हो सकती है।
कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि दूध पिलाने से पहले बोतल और नेपल की अचà¥à¤›à¥€ तरह से सफाई नहीं की जाती। साफ कटोरी और चमà¥à¤®à¤š से दूध पिलाने में कोई खतरा नहीं है। वैसे मां का दूध ही बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठसरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® आहार है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कà¥à¤› à¤à¥€ खिलाने से पहले हाथ की सफाई अचà¥à¤›à¥€ तरह से करनी चाहिà¤à¥¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के हाथों की à¤à¥€ समय-समय पर सफाई करते रहें। दरअसल, बचà¥à¤šà¥‡ बार-बार अंगà¥à¤²à¥€ मà¥à¤‚ह में लेते हैं। इसलिठसाफ-सफाई जरूरी है। अगर, डायरिया हो à¤à¥€ जाय तो ओआरà¤à¤¸ के अलावा पानी पिलाते रहें ताकि पानी की कमी नहीं हो।
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