क्या यूरिक एसिड गाउट में मदद करता है?HealthPlanet

Posted on Mon 5th Dec 2022 : 13:46

यूरिक एसिड और इसके कारण होने वाली गाउट की दिक्कत को कम करने में भी इससे लाभ मिलता है। प्राणायाम से शरीर में रसायनों का संतुलन बेहतर बना रहता है जिससे यूरिक एसिड के लेवल को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है


प्राणायाम से पा सकते हैं लाभ

योग विशेषज्ञों के मुताबिक सभी लोगों को दिनचर्या में प्राणायाम के अभ्यास को जरूर शामिल करना चाहिए, इससे सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य ही नहीं कई प्रकार की शारीरिक समस्याओं में भी लाभ पाया जा सकता है। यूरिक एसिड और इसके कारण होने वाली गाउट की दिक्कत को कम करने में भी इससे लाभ मिलता है। प्राणायाम से शरीर में रसायनों का संतुलन बेहतर बना रहता है जिससे यूरिक एसिड के लेवल को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।

गोमुखासन का अभ्यास

गोमुखासन को विशेषज्ञ अत्यंत लाभकारी अभ्यासों में से एक मानते हैं। पीठ एवं बांहों की मांसपेशियां को मजबूत बनाने के साथ-साथ बढ़े हुए यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए गोमुखासन योग का अभ्यास करना फायदेमंद हो सकता है। इसे गाउट की समस्या में आराम दिलाने और जोड़ों के लिए भी कारगर अभ्यास के तौर पर जाना जाता है। गोमुखासन के नियमित अभ्यास से थकान, तनाव और चिंता भी कम होती है।


उष्ट्रासन योग का करिए अभ्यास

यूरिक एसिड के बढ़ जाने के कारण एड़ी, कमर, गर्दन, घुटने आदि में तेज दर्द होता है। इस तरह की समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए उष्ट्रासन योग के अभ्यास को लाभदायक माना जाता है। पेट के निचले हिस्से से अतिरिक्त चर्बी कम करने के साथ कमर और कंधों को मजबूत बनाने में भी इस योग को काफी कारगर माना जाता है। उष्ट्रासन से गर्दन और पीठ के दर्द को कम करने में भी लाभ पाया जा सकता है।

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