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बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को बोतल से दूध पिलाने से हो सकते हैं ये 5 नà¥à¤•सान -
1. डायरिया का खतरा (Risk of Diarrhea)
बोतल से दूध पिलाने में शिशॠको डायरिया का खतरा होता है। बोतल का निपà¥à¤ªà¤² जरà¥à¤®à¥à¤¸ को शरीर के अंदर पहà¥à¤‚चाने का सबसे बड़ा सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ है। यहां माइकà¥à¤°à¥‹à¤‘रà¥à¤—ैनिसà¥à¤® (Microorganism) चिपक सकते हैं और दूध पिलाते समय बचà¥à¤šà¥‡ के शरीर में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ कर सकते है। अगर शिशॠपहले से ही किसी अनà¥à¤¯ बीमारी का शिकार है या फिर अंडरवेट है तो à¤à¤¸à¥‡ में डायरिया जानलेवा हो à¤à¥€ साबित हो सकता है। शिशà¥à¤“ं को सेहत के साथ कोई à¤à¥€ रिसà¥à¤• नहीं लेना चाहिठइसलिठदूध को बोतल से पिलाने को नजरंदाज करना चाहिà¤à¥¤
2. माइकà¥à¤°à¥‹à¤ªà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• जोखिम (Risk of Microplastic)
बेबी बॉटल यानी शिशॠको दूध पिलाने वाली ये बोतल पॉलीपà¥à¤°à¥‹à¤²à¥€à¤¨ (Polyproline) से बनाई जाती है। बोतल का निपà¥à¤ªà¤² जहां से बचà¥à¤šà¤¾ दूध पीता है वह इसी पॉलीपà¥à¤°à¥‹à¤²à¥€à¤¨ से बनी होती है, जो कि à¤à¤• थरà¥à¤®à¥‹à¤ªà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• पॉलिमर (Thermoplastic Polymer) है। साल 2020 की à¤à¤• रिपोरà¥à¤Ÿ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• इन बोतलों से शिशॠको दूध पिलाने से माइकà¥à¤°à¥‹à¤ªà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• à¤à¤•à¥à¤¸à¥à¤ªà¥‹à¤œà¤¼à¤° (Microplastic Exposure) हो सकता है। खासकर जब इन बोतलों मे गरम दूध डाला जाठतो इनसे मिकà¥à¤°à¥‹à¤ªà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• रिलीज़ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है। यह शिशॠकी सेहत के लिठबहà¥à¤¤ नà¥à¤•सानदायक हो सकता है। इससे शिशॠमें विकास की गति à¤à¥€ धीमी हो सकती है।
3. पोषण की कमी (Lack of Nutrients)
मां के दूध मे बहà¥à¤¤ सारे पोषण ततà¥à¤µ मौजूद होते हैं, जो शिशॠके शारीरिक और मानसिक विकास के लिठबहà¥à¤¤ जरूरी होते हैं। मां के दूध से बचà¥à¤šà¥‡ को पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रूप से कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, विटामिन, मैगà¥à¤¨à¥‡à¤¶à¤¿à¤¯à¤® और कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ आदि मिलते हैं। जबकि बोतल के दूध में ये सब मौजूद नहीं होते। इससे शिशॠमें पोषण की कमी हो सकती है। पोषण की कमी का शिकार होने से शिशॠअनà¥à¤¯ बीमारियों की चपेट के आ सकता है। शिशॠकी विकास पà¥à¤°à¤—ति धीमी पड़ सकती है।
4. फेफड़ों में दिकà¥à¤•त (Can Cause Lung Problem)
बोतल से दूध पिलाने में चोकिंग का सबसे ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खतरा होता है। कई बार बचà¥à¤šà¥‡ दूध पीते-पीते सो जाते हैं और दूध से à¤à¤°à¥€ बोतल उनके मà¥à¤‚ह में ही लगी रह जाती है। इससे बचà¥à¤šà¥‡ का दम घà¥à¤Ÿ सकता है। इससे दूध बचà¥à¤šà¥‡ के गले में अटककर हवा को बà¥à¤²à¥‰à¤• कर सकता है। बचà¥à¤šà¥‡ को सांस लेने मे कठिनाई हो सकती है और फेफड़ों से संबंधित समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो सकती है। इसलिठअगर बचà¥à¤šà¥‡ को बोतल से दूध पिला रही हैं तो इस बात का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि आप बचà¥à¤šà¥‡ के आस पास ही रहें, जिससे इस तरह की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ न बन सके।
5. इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® पड़ सकता है सà¥à¤²à¥‹ (Immune System get Slow)
मां के दूध में इमà¥à¤¯à¥‚निटी बूसà¥à¤Ÿ करने वाले पोषक ततà¥à¤µ पाठजाते हैं, जैसे कि विटामिन ठविटामिन सी पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ आदि। ये सà¤à¥€ नà¥à¤¯à¥‚टà¥à¤°à¥€à¤à¤‚ट फॉरà¥à¤®à¥‚ला मिलकर यानी बॉटल से पिलाठजाने वाले दूध में नही मिलते। वहीं बोतल से पीये गठदूध में नà¥à¤•सानदायक ततà¥à¤µ हो सकते हैं। इससे दूध में मौजूद नà¥à¤¯à¥‚टà¥à¤°à¥€à¤à¤‚टà¥à¤¸ ठीक से अवशोषित नहीं हो पाते हैं। जिससे इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® कमजोर और धीमा पड़ सकता है।
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