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35 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ की गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में à¤à¥à¤°à¥‚ण विकास
आपका शिशॠअब à¤à¤• बड़े खरबूजे जितना à¤à¤¾à¤°à¥€ हो गया है, लगà¤à¤— 2.4 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤®à¥¤ उसकी लंबाई करीबन 46.2 सें.मी. (18.2 इंच) हो गई है। अगले कà¥à¤› हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ में उसका पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ करीब 28 से 30 गà¥à¤°à¤¾à¤® वजन बढ़ेगा।
संà¤à¤µ है कि आप केवल अपने पेट को देखकर ही यह बता पाà¤à¤‚ कि शिशॠकिस तरह की हलचल कर रहा है। गरà¥à¤ में शिशॠकिस अवसà¥à¤¥à¤¾ में है, इस आधार पर आप शिशॠके उलटने-पलटने पर उसका उतार-चढ़ाव देख सकेंगी या फिर हिचकियां आने पर आप लयबदà¥à¤§ हरकत महसूस कर सकती हैं।
चूंकि अब शिशॠबड़ा होता जा रहा है, उसकी हलचल पर आपको थोड़ा असहज महसूस हो सकता है।जैसे-जैसे आपका शिशॠगरà¥à¤ में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जगह घेरने लगता है, उसके चारों तरफ मौजूद à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ सà¥à¤µà¤¤: घटने लगता है। हालांकि, आपकी गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ अब जलà¥à¤¦ ही समापà¥à¤¤ होने वाली है, मगर अब à¤à¥€ आपके शिशॠको जनà¥à¤® से पहले थोड़ा-बहà¥à¤¤ विकास करना है।
35वेंं सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में शिशॠके जनà¥à¤® के कारण
समय से पहले पà¥à¤°à¤¸à¤µ होने के यह कà¥à¤› कारण हो सकते हैं:
ADVERTISEMENTS
माठके गरà¥à¤ में जà¥à¤¡à¤¼à¤µà¤¾à¤‚ या तीन बचà¥à¤šà¥‡ पल रहे होते हैं।
बचà¥à¤šà¤¾ गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ (सरà¥à¤µà¤¿à¤•à¥à¤¸) से पूरी तरह से सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ तरीके से जà¥à¥œà¤¾ न हो।
गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ का उपयà¥à¤•à¥à¤¤ न होना और जलन महसूस करना।
गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² के अलग होने से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ ।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान माठडà¥à¤°à¤—à¥à¤¸, शराब और सिगरेट का सेवन करती हो।
बीमारी के कारण à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¸à¤µ जलà¥à¤¦à¥€ हो सकता है।
35वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में जनà¥à¤®à¥‡ शिशà¥à¤“ं में जटिलताà¤à¤‚
समय से पहले जनà¥à¤®à¥‡ शिशà¥à¤“ं में होने वाली जटिलताà¤à¤‚ इस पà¥à¤°à¤•ार हैं :
1. पीलिया
समय से पहले जनà¥à¤®à¥‡ शिशà¥à¤“ं के कà¥à¤› अंग अविकसित रह जाते हैं और यकृत (लिवर) उनमें से à¤à¤• है। यह लाल रकà¥à¤¤ कोशिकाओं को उतने पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ ढंग से संसाधित नहीं कर पाता है जितना कि इसे करना चाहिà¤à¥¤ इस पà¥à¤°à¤•ार बचà¥à¤šà¥‡ में पीलिया होने का खतरा बॠजाता है। यदि इसका समय पर इलाज न किया जाà¤, तो पीलिया मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करना शà¥à¤°à¥‚ कर देता है और इससे आगे अनà¥à¤¯ जटिलताà¤à¤‚ पैदा होने लगती हैं।
2. संकà¥à¤°à¤®à¤£
समय से पूरà¥à¤µ जनà¥à¤®à¥‡ बचà¥à¤šà¥‡ माठसे रोग-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•ारक (à¤à¤‚टीबॉडीज) पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ नहीं कर पाते हैं। इस कारण उनके लिठहानिकारक बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ और वायरस से लड़ना मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो जाता है। इलाज के बावजूद à¤à¥€ संकà¥à¤°à¤®à¤£ के बà¥à¤¨à¥‡ का खतरा रहता है।
3. सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ की समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚
हालांकि चूसना और निगलना सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हैं, लेकिन समय से पहले जनà¥à¤®à¤¾ शिशॠउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ ठीक से करने में विफल हो सकता है।
4. सांस लेने में तकलीफ
बचà¥à¤šà¥‡ के फेफड़े अविकसित रह जाते है और लà¥à¤¬à¥à¤°à¤¿à¤•ेंट में कमी होने के कारण यह सरà¥à¤«à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¥‡à¤‚ट उनके ऊतकों को ढक देते हैं। ये लà¥à¤¬à¥à¤°à¤¿à¤•ेंट बचà¥à¤šà¥‡ के लिठबहà¥à¤¤ आवशà¥à¤¯à¤• होते हैं, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि जब बचà¥à¤šà¤¾ सांस लेता है, तो ये ऊतकों को à¤à¤•-दूसरे से चिपकने से रोकने में मदद करते हैं। जब फेफड़ों की मांसपेशियां कमजोर होती हैं तो बचà¥à¤šà¥‡ को सांस लेने में तकलीफ होती है।
5. वजन बढ़ने में परेशानी
समय से पहले जनà¥à¤® लेने वाले शिशà¥à¤“ं का वजन 2 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® से कम होता है। जनà¥à¤® के समय बचà¥à¤šà¥‡ का कम वजन होना और इसके साथ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ संबंधित परेशानियां उसके वजन बढ़ने में समसà¥à¤¯à¤¾ पैदा कर सकती हैं।
6. शरीर का असà¥à¤¥à¤¿à¤° तापमान
शरीर के आंतरिक तापमान के सà¥à¤¤à¤° को सही रखकर शरीर का आदरà¥à¤¶ वजन और फैट का सही पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ शिशॠको सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रखने के लिठआवशà¥à¤¯à¤• है। फैट की अनà¥à¤ªà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ से हाइपोथरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ हो जाता है और यह इनकà¥à¤¯à¥‚बेटर या बिजली से चलने वाले गरà¥à¤® बिसà¥à¤¤à¤°à¥‹à¤‚ को आवशà¥à¤¯à¤• बना देता है।
35वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में जनà¥à¤®à¥‡ शिशॠके जीवित बचने की दर कà¥à¤¯à¤¾ है
35वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में जनà¥à¤® लेने वाले शिशà¥à¤“ं में से 99% जीवित रहते हैं। इसलिà¤, चिंता की कोई बात नहीं है।
हालांकि, 35वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में जनà¥à¤®à¤¾ शिशॠà¤à¤• पूरà¥à¤£-विकसित बचà¥à¤šà¥‡ जैसा दिखता है, फिर à¤à¥€ वह समय से पूरà¥à¤µ जनà¥à¤®à¤¾ माना जाता है और उसे बढ़ने के लिठसही देखà¤à¤¾à¤² की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है।
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