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à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ को जड़ से खतà¥à¤® नहीं किया जा सकता, लेकिन उसे पूरी तरह से नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ रखा जा सकता है। à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का इलाज à¤à¥€ है, लेकिन यह पता करना महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है कि किस चीज से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो रही है। यदि यह पता चल जाठतो उसे छोड़ देना चाहिà¤à¥¤ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ वंशानà¥à¤—त और वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त होता है। इसके अलावा खाने-पीने, तà¥à¤µà¤šà¤¾ में कà¥à¤› लगाने, ठंड, धूल, धà¥à¤†à¤‚, रंग और महक से à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की परेशानी होती है। दमा à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के कारण ही होता है। देश में 38 करोड़ लोग à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से पीड़ित हैं। परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ में पà¥à¤°à¤¦à¥‚षण से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ मरीजों की संखà¥à¤¯à¤¾ लगातार बढ़ रही है। à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की वजह से चरà¥à¤® रोग à¤à¥€ बढ़ रहा है। सबसे अधिक à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ औदà¥à¤¯à¥‹à¤—िक पà¥à¤°à¤¦à¥‚षण के चलते बढ़ रही है। इसके अलावा गंदगी और कूड़ा-कचरा à¤à¥€ इसकी वजह है। à¤à¤¸à¥€ जगहों पर मासà¥à¤• लगाकर जाना चाहिà¤à¥¤ यदि आईजीई की मातà¥à¤°à¤¾ 200 यूनिट से अधिक है तो वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से पीड़ित माना जाता है। इसका लेवल बढ़ने पर दमा का लकà¥à¤·à¤£ या फिर तà¥à¤µà¤šà¤¾ में लकà¥à¤·à¤£ दिखाई देने लगता है। à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ नहीं किया गया दमा या हपनी के मरीजों की तकलीफ बढ़ जाती है। à¤à¤¸à¥‡ में मरीज के सीने का आकार बैरल के तरह हो जाता है। यह कहना है शहर के वरीय चेसà¥à¤Ÿ और à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ रोग विशेषजà¥à¤ž डॉ. टीआरबीपीà¤à¤¨ सिंह का। वे शनिवार को दैनिक à¤à¤¾à¤¸à¥à¤•र के हेलà¥à¤¥ काउंसिलिंग में पाठकों को सलाह दे रहे थे। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि हपनी के मरीजों को इनहेलर लेने से राहत मिलती है। वैसे इनहेलर लेने से कोई साइड इफेकà¥à¤Ÿ à¤à¥€ नहीं होता है। डॉ. सिंह ने कहा कि टीबी के मरीजों को दवा का कोरà¥à¤¸ नहीं छोड़ना चाहिà¤à¥¤ साधारण टीबी में छह महीने और à¤à¤®à¤¡à¥€à¤†à¤° टीबी में 27 महीने का कोरà¥à¤¸ नियमित लेना चाहिà¤à¥¤ दवा छूटने पर à¤à¤®à¤¡à¥€à¤†à¤° और à¤à¤•à¥à¤¸à¤¡à¥€à¤†à¤° टीबी होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बढ़ जाती है। à¤à¤®à¤¡à¥€à¤†à¤° और à¤à¤•à¥à¤¸à¤¡à¥€à¤†à¤° का इलाज बी बहà¥à¤¤ महंगा है।
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