कुपोषण कितने प्रकार के होते हैं?HealthPlanet

Posted on Thu 8th Dec 2022 : 14:53

कुपोषण के प्रकार (types of malnutrition)

कुपोषण का कारण सिर्फ पोषक तत्वों की कमी होना ही नहीं बल्कि अधिक मात्रा में लेना भी हो सकता हैं. कुपोषण निम्न प्रकार के हो सकते हैं:
तीव्र कुपोषण (एक्यूट मालन्यूट्रिशन) –

जब वजन में बहुत ज्यादा कमी आती हैं, तब ये कुपोषण होता हैं. इसके कारण 3 प्रकार के कुपोषण संभव है
1.मरसेमस-

इस बीमारी में शरीर में वसा तेजी से कम होने लगती हैं,और ऊतक(टिश्यू)भयंकर ख़राब होने लगते हैं. इसके कारण शरीर का प्रतिरक्षा तन्त्र कमजोर होने लगता हैं.
2. क्वाशियोरकोर –

इस बीमारी में बॉडी फ्लूइड शरीर से बाहर नहीं निकल पाता हैं, जिस कारण स्किन और बालों के रंग में परिवर्तन आने लगता हैं, मोटापा, डायरिया, मसल मॉस का कम होना,रोग प्रतिरक्षा तन्त्र का कमजोर होना, वजन बढ़ना और विकास अवरुद्ध होना, घुटनों, पैरो और शरीर के निचले हिस्से में सुजनहोना भी इसके लक्ष्ण है,
3. मर्सेमिक क्वाशियोकोर–

यह मरसेमस और क्वाशियोकोर का मिश्रित रूप हैं जिसमे दोनों रोगों के लक्ष्ण दिखाई देते है.
क्रोनिक कुपोषण–

ये बिमारी उन लोगो में पाई जाती हैं जो लम्बे समय तक कुपोषण से पीड़ित होते है,इसके परिणाम भी काफी लम्बे समय तक परिलक्षित होते हैं.यदि गर्भवती महिला को पूरा पोषण नहीं मिलता, तो यह होने वाले बच्चे में जन्म के पहले ही शुरू हो जाता हैं,जिसका मतलब यह होता हैं की बच्चा जन्म के समय से ही कमजोर होता हैं.इसके अलावा यदि नवजात को माँ का दूध ना मिले तो भी कुपोषण की सम्भावना बनी रहती हैं.
विकास अवरुद्ध कुपोषण (ग्रोथ फैलियर मालन्यूट्रीशन)–

इसमें रोगी का वजन और लम्बाई उम्र की आवश्यकता अनुसार बढ़ नहीं पाते हैं.
सूक्ष्म पोषक कुपोषण:-

रोगी के शरीर में जब विटामिन A,B,C और D,फोलेट,आयरन,आयोडीन,जिंक और कैल्शियम जैसे खनिज तत्वों की कमी हो जाती है. ये सभी विटामिन्स और खनिज शरीर के लिए बहुत आवश्यक हैं.

आयरन की कमी से एनीमिया हो जाता है, दिमाग का विकास नहीं हो पाता और हृदय की गति पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता हैं. आयोडीन की कमी से थायराइड ग्रन्थि पर प्रभाव पड़ता हैं और मानसिक विकृति की संभावना भी बढ़ जाती हैं.
सेलेनियम की कमी से हृदय और परिसंचरण तन्त्र पर विपरीत प्रभाव पड़ता है,इससे ओस्टियोअर्थराइटिस होने की भी संभावना रहती हैं और प्रतिरक्षा तन्त्र भी कमजोर होता हैं.
विटामिन बी12 की कमी से लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण कम हो जाता हैं और तंत्रिकाएं भी विकृत होने लगती हैं. विटामिन A की कमी से दृष्टि कमजोर होने लगती हैं,हड्डियों का विकास भी नहीं हो पाता और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होने लगती हैं.
यदि शरीर में विटामिन D की कमी हो जाए,तो रिकेट्स और अन्य हड्डी सम्बन्धित समस्या भी हो सकती हैं. फोलेट या विटामिन बी 9 कम होने पर एनीमिया हो सकता हैं और विकास दर भी कम हो जाती हैं.जिंक की कमी होने पर एनीमिया के साथ संवेदी बोध भी कम हो जाता है

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