किस ब्लड ग्रुप के बच्चे एक साथ नहीं होने चाहिए?HealthPlanet

Posted on Wed 12th Oct 2022 : 09:56

ब्लड ग्रुप मुख्यत: चार तरह के होते हैं: ए, बी, एबी और ओ। हर किसी का ब्लड ग्रुप इन चार समूहों में से ही होता है। यदि आपका और आपके पति का ब्लड ग्रुप अलग है, तो इससे फर्क नहीं पड़ता। फर्क आपके रीसस फैक्टर से पड़ता है - आप रीसस-पॉजिटिव (आरएचडी-पॉजिटिव) हैं या रीसस-नेगेटिव (आरएचडी-नेगेटिव)।

जो लोग आरएचडी-पॉजिटिव है, उनकी लाल रक्त कोशिकाओं में एक प्रोटीन होता है, जिसे डी एंटीजेन कहा जाता है। यदि आप आरएचडी-नेगेटिव हैं, तो यह प्रोटीन नहीं होता।

यदि आप आरएचडी-नेगेटिव हैं, तो इस बात की काफी संभावना होती है कि आपका खून आपके आरएचडी-पॉजिटिव शिशु के खून के प्रति प्रतिक्रिया कर सकता है। यदि गर्भावस्था या जन्म के दौरान आपके शिशु को थोड़ा बहुत खून आपके खून में मिल जाए, तो आपकी अगली गर्भावस्थाओं में शिशुओं को खतरा हो सकता है। आपकी रोग प्रतिरोधक प्रणाली (इम्यून सिस्टम) इस आरएच-पॉजिटिव खून के खिलाफ एंटीबॉडीज बनाना शुरु कर देगी। यदि ऐसा हो, तो आप आरएच-संवेदनशील हो जाएंगी।

मान लीजिए कि भविष्य में आपके गर्भ में एक और आरएचडी-पॉजिटिव शिशु हो। ऐसे मामले में आपके शरीर में बनी एंटीबॉडीज आपके शिशु की लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला कर सकती हैं। इससे शिशु को एनीमिया, पीलिया और दुर्भाग्यवश मस्तिष्क को भी नुकसान हो सकता है।

इसके खिलाफ सुरक्षा के लिए रीसस-नेगेटिव (आरएचडी-नेगेटिव) वाली सभी गर्भवती महिलाओं को 28 सप्ताह की गर्भावस्था से एंटी-डी इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन दिए जाते हैं। यह इंजेक्शन शिशु को रीसस असंगति से होने वाले नुकसान से सुरक्षा देगा।

रीसस फैक्टर आनुवांशिक होता है और यह माता-पिता से मिलता है। एशियाई मूल के करीब 90 प्रतिशत व्यक्ति आरएचडी-पॉजिटिव होते हैं।

अधिकांश लोगों के आरएचडी-पॉजिटिव होने का कारण यह है कि हम रीसस वंशाणु (जीन) की दो प्रतियां या कॉपी विरासत में प्राप्त करते हैं, एक माता से और एक पिता से। ये वंशाणु या तो पॉजिटिव होते हैं या नेगेटिव। पॉजिटिव वंशाणु प्रबल होता है और हमेशा वही सफल होता है।

अगर आपका शिशु दो पॉजिटिव वंशाणु प्राप्त करता है, तो वह भी आरएचडी-पॉजिटिव ही होगा।
अगर आपका शिशु एक पॉजिटिव और एक नेगेटिव वंशाणु प्राप्त करता है, तो भी वह आरएचडी-पॉजिटिव होता है।
अगर आपका शिशु दो नेगेटिव वंशाणु प्राप्त करता है, तो वह आरएचडी-नेगेटिव होगा।

शिशु के आरएचडी-पॉजिटिव होने की संभावना निम्नांकित है:

यदि दोनों माता और पिता आरएचडी-पॉजिटिव हैं (++ और ++ या ++ और +-), तो उनका शिशु भी आरएचडी-पॉजिटिव होगा। क्योंकि चाहे माता या पिता में से किसी एक का वंशाणु नेगेटिव है, तो भी यह दूसरे के पॉजिटिव वंशाणु से हार जाता है।
यदि माता और पिता दोनों ही आरएचडी-पॉजिटिव है, मगर दोनों में एक पॉजिटिव और एक नेगेटिव वंशाणु है (+- और +-), तो ऐसे में चार में से तीन संभावना होती है कि शिशु भी आरएचडी-पॉजिटिव होगा। हालांकि, यदि माता और पिता दोनों ही शिशु को नेगेटिव वंशाणु पारित करें, तो ऐसे कुछ माता-पिता की संतान भी आरएचडी-नेगेटिव होगी।
यदि माता या पिता में से किसी एक का वंशाणु आरएचडी-नेगेटिव है और दूसरा आरएचडी-पॉजिटिव है, मगर उनमें नेगेटिव वंशाणु भी है (-- और +-), तो ऐसे में 50/50 संभावना होती है कि शिशु आरएचडी-पॉजिटिव भी हो सकता है और आरएचडी-नेगेटिव भी।
यदि दोनों माता-पिता आरएचडी-नेगेटिव हैं (-- और --), तो आपके किसी भी शिशु के आरएचडी-पॉजिटिव होने की कोई संभावना नहीं होती है। क्योंकि माता-पिता दोनों में से कोई भी पॉजिटिव वंशाणु पारित नहीं करेगा।

ब्लड ग्रुप का पता लगाने के लिए गर्भावस्था की शुरुआत में ही खून की जांचें करवाई जाती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि रीसस फैक्टर से उत्पन्न होने वाली जटिलताओं को रोका जा सकता है। यदि जरुरी हुआ तो डॉक्टर आपको एंटी-डी इंजेक्शन दे देंगी।



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