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मनà¥à¤·à¥à¤¯ कितनी गरà¥à¤®à¥€ सह सकता है? इस पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ का उतà¥à¤¤à¤° à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨-à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ देशों व कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ के लोगों के लिठअलग-अलग हो सकता है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ व दकà¥à¤·à¤¿à¤£à¥€ देशों के लोग जितनी गरà¥à¤®à¥€ सह सकते हैं, वह ठंडे देशों के लोगों के लिठअसहनीय हो सकती है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में ही कई सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ पर तापमान 46-47 डिगà¥à¤°à¥€-सेलसियस तक पहà¥à¤à¤š जाता है। मधà¥à¤¯ आसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ का तापमान तो कई बार 50 डिगà¥à¤°à¥€ से. से à¤à¥€ अधिक हो जाता है। धरती पर सब से अधिक तापमान 57 डिगà¥à¤°à¥€ से. रिकारà¥à¤¡ किया गया है।
वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤•ों ने à¤à¤¸à¥‡ पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— à¤à¥€ किठहैं कि मनà¥à¤·à¥à¤¯ का शरीर अधिकतम कितना तापमान सहन कर सकता है। पता लगा है कि नमी रहित हवा में शरीर को धीरे-धीरे गरम किया जाठतो यह पानी के उबाल-बिंदॠ(100 डिगà¥à¤°à¥€ से.) से कहीं अधिक 160 डिगà¥à¤°à¥€ से. तक का तापमान सहन कर सकता है। à¤à¤¸à¤¾ बà¥à¤²à¥ˆà¤•डेन तथा चेंटरी नाम के दो अंगà¥à¤°à¥‡à¤œ वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤•ों ने पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कर के दिखाया। इस पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— के लिठवे बà¥à¤°à¥‡à¤¡ (डबà¥à¤²à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€) बनाने वाली à¤à¤• बेकरी में à¤à¤Ÿà¥à¤Ÿà¥€ बाल कर कई घंटे वहाठवà¥à¤¯à¤¤à¥€à¤¤ करते थे। उस कमरे की हवा इतनी गरà¥à¤® थी कि उसमें अंडा उबाला जा सकता था और कबाब à¤à¥‚ना जा सकता था। परंतॠकाम करने वाले आदमियों को वहाठकà¥à¤› नहीठहोता था।
मनà¥à¤·à¥à¤¯ के शरीर की इस सहनशीलता का राज कà¥à¤¯à¤¾ है? असल में हमारा शरीर इस तापमान का à¤à¤• अंश à¤à¥€ गà¥à¤°à¤¹à¤£ नहीठकरता। शरीर अपना साधारण तापमान सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रखता है। इस गरà¥à¤®à¥€ के विरà¥à¤¦à¥à¤§ उसका हथियार है– पसीना।पसीने का वाषà¥à¤ªà¥€à¤•रण हवा की उस परत का ताप हज़म कर जाता है, जो हमारी चमड़ी के समà¥à¤ªà¤°à¥à¤• में आती है।इसलिठही उस हवा का तापमान सहने योगà¥à¤¯ सà¥à¤¤à¤° तक कम हो जाता है। इसके लिठदो शरà¥à¤¤à¥‡à¤‚ है। à¤à¤• तो शरीर गरà¥à¤®à¥€ के सà¥à¤°à¥‹à¤¤ के सीधे समà¥à¤ªà¤°à¥à¤• में न आठतथा दूसरा हवा पूरी तरह खà¥à¤¶à¥à¤• हो।
हवा की नमी हमारे शरीर की गरà¥à¤®à¥€ सहन करने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ पर गहरा पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ डालती है। हम मई-जून के दौरान 42-43 डिगà¥à¤°à¥€-से. के तापमान पर उतना असहज महसूस नहीं करते, जितना जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ-अगसà¥à¤¤ में इससे कहीं कम तापमान में करते हैं। मई-जून में हवा खà¥à¤¶à¥à¤• होती है व पसीने का वाषà¥à¤ªà¥€à¤•रण तेजी से होता है। जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ-अगसà¥à¤¤ में हवा में बहà¥à¤¤ अधिक नमी होती है, जिससे वाषà¥à¤ªà¥€à¤•रण की गति बहà¥à¤¤ धीमी हो जाती है।
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