आंखों से काले बिंदु दिखाई दें तो क्या समझें?HealthPlanet

Posted on Mon 12th Dec 2022 : 09:19

तेज रोशनी और क्लियर व्यू होने पर भी आंखों के सामने काले-काले पार्टिकल्स तैरते दिखाई दे रहे हैं। ऐसा दीवार का रंग बिल्कुल सफेद और अासमान के सामने भी देखने पर ये पार्टिकल्स दिखाई दे रहे हैं। यानी नजरों के सामने काले-काले डॉट्स दिखाई दे रहे हैं। तो इन्हें इग्नोर नहीं करें। यह आंखों की प्रॉब्लम फ्लोटर होती है। यह बीमारी होने पर पेशेंट्स को फ्लोटर इस तरह दिखाई देते हैं। जैसे पानी में गंदगी तैर रही है। शुरुआती स्टेज में इसका इलाज शुरू नहीं करवाने पर विजन लॉस भी हो सकता है। इस बीमारी में आंखों के पिछले हिस्से में ट्रांसपेरेंट जैली होती है। इस विट्रस जैली में पार्टिकल्स आने से ये फ्लोट करते हुए दिखते हैं।

खून की नसों के पार्टिकल्स निकलकर आंखों में आते हैं

डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के पेशेंट्स में अक्सर यह बीमारी होती है। इन पेशेंट्स में ब्लड वैसल्स यानी खून की नसों के पार्टिकल्स निकलकर आंखों में आ जाते हैं। ये ट्रांसपेरेंट होने की वजह से बिल्कुल क्लियर दिखाई देते हैं। बीस से पच्चीस परसेंट लोगों में ओल्ड एज में भी यह बीमारी हो सकती है। आंखों में चोट लगने से पार्टिकल्स दिखते हैं। इसके अलावा जिन लोगों को चश्मे का नंबर बढ़ चुका है। उनमें यह प्रॉब्लम देखी जाती है। रेटिना में छेद होने से यह बीमारी ज्यादा गंभीर हो सकती है, लेकिन रेटिना में छेद होने से पार्टिकल्स बाहर आ सकते हैं, इसलिए किसी भी पेशेंट्स को फ्लोटर दिखाई दें तो यह जरूर चैक करें, ऐसा किस कारण से हो रहा है। छेद होना सबसे ज्यादा गंभीर है। इस छेद को लेजर से भर दिया जाता है। वहीं, रेटिना के अपनी जगह से हटने पर रोशनी जा सकती है, इसलिए यह बीमारी होने पर पेशेंट्स का रेटिना अच्छी तरह से चैक करना चाहिए। रेटिना में कोई छेद और ब्लड वैसल्स में लीकेज नहीं हो रहा है। लीकेज होने पर इसे भी लेजर से सील कर देते हैं।

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