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जठरागà¥à¤¨à¤¿ किसे कहते हैं; जानिठपाचन अगà¥à¤¨à¤¿ के पà¥à¤°à¤•ार और इसे तेज करने के उपाय
जठरागà¥à¤¨à¤¿ (Jatharagni) आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ दिया गया à¤à¤• नाम है, जो संसà¥à¤•ृत शबà¥à¤¦ जठर और अगà¥à¤¨à¤¿ से मिलकर बना है, यहां जठर का तातà¥à¤ªà¤°à¥à¤¯ पेट से है। जठरागà¥à¤¨à¤¿ को पाचन अगà¥à¤¨à¤¿ à¤à¥€ कहते हैं।
आपने अकà¥à¤¸à¤° लोगों को "जठरागà¥à¤¨à¤¿" के बारे में बहà¥à¤¤ कà¥à¤› बोलते सà¥à¤¨à¤¾ होगा। लेकिन कà¥à¤¯à¤¾ आपने कà¤à¥€ यह जानने की कोशिश की है कि आखिर वासà¥à¤¤à¤µ में यह कà¥à¤¯à¤¾ है? चिंता न करें, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इस लेख में हम आपको इसकी पूरी जानकारी देंगे। आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• चिकितà¥à¤¸à¤• (डॉ. वरालकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ यनामंदरा (Dr.Varalakshmi Yanamandra) की मानें तो आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में, पाचन अगà¥à¤¨à¤¿ (Digestive Fire) को जठरागà¥à¤¨à¤¿ कहा जाता है, जो हमारे शरीर में à¤à¥‹à¤œà¤¨ के चयापचय (Metabolism) के लिठजिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° होती है। à¤à¤¸à¤¾ कहा जाता है कि यह निचले पेट, गà¥à¤°à¤¹à¤£à¥€, छोटी आंत और अगà¥à¤¨à¥à¤¯à¤¾à¤¶à¤¯ में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ होती है।
मानव शरीर में 13 पà¥à¤°à¤•ार की अगà¥à¤¨à¤¿ होती है, जिसमें से à¤à¤• है जठरागà¥à¤¨à¤¿à¥¤ जठर का अरà¥à¤¥ होता है पेट जबकि अगà¥à¤¨à¤¿ का अरà¥à¤¥ आग होता है। जठरागà¥à¤¨à¤¿ (Jatharagni) पितà¥à¤¤ जैव-ऊरà¥à¤œà¤¾ से आती है जो पà¥à¤°à¤®à¥à¤– अगà¥à¤¨à¤¿ ततà¥à¤µ वाली à¤à¤•मातà¥à¤° जैव-ऊरà¥à¤œà¤¾ है। पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• जीवित जीव में à¤à¤• जठरागà¥à¤¨à¤¿ होती है और यह à¤à¤• मृत पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€ में कारà¥à¤¯ करना बंद कर देता है। आपके पेट और डियोडेनम में मौजूद सà¤à¥€ पाचक à¤à¤‚जाइम और गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤• रस जठरागà¥à¤¨à¤¿ का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ करते हैं।
जठरागà¥à¤¨à¤¿ का संतà¥à¤²à¤¨ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ जरूरी है?
आपके बेहतर सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठयह जरूरी है कि जठरागà¥à¤¨à¤¿ संतà¥à¤²à¤¨ में हो। इसका संतà¥à¤²à¤¨ अचà¥à¤›à¥‡ पाचन और समगà¥à¤° सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ दोनों के लिठआवशà¥à¤¯à¤• है। हालांकि, जठरागà¥à¤¨à¤¿ चार संà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ तरीकों से दोषों से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होने के लिठअतिसंवेदनशील होती है, जिससे यह चार पà¥à¤°à¤•ार के जठरागà¥à¤¨à¤¿ के रूप में उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ होता है। जिसमें शामिल हैं:
1. विशमा अगà¥à¤¨à¤¿ (Vishama Agni), इसमें वात हावी होता है। इससे पाचन परिवरà¥à¤¤à¤¨à¤¶à¥€à¤² और असà¥à¤¥à¤¿à¤° हो जाता है, और हमेशा बदलता रहता है। जिससे अगà¥à¤¨à¤¿ कà¤à¥€ तेज तो कà¤à¥€ धीमी और कमजोर होगी। कई बार इससे अपच की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
2. तीकà¥à¤·à¥à¤£ अगà¥à¤¨à¤¿ (Tikshna Agni), इसमें पितà¥à¤¤ हावी होता है। à¤à¤• बहà¥à¤¤ तीवà¥à¤° और तà¥à¤µà¤°à¤¿à¤¤ पाचन कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ की ओर जाता है, जो बहà¥à¤¤ मजबूत हो सकता है। इससे शरीर के उतà¥à¤¤à¤•ों में जलन और कमजोरी हो सकती है।
3. मंदा अगà¥à¤¨à¤¿ (Manda Agni), इसमें कफ हावी है। इससे रोग होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ रहती है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि पाचन बहà¥à¤¤ धीमा और सà¥à¤¸à¥à¤¤ होता है। मंडा अगà¥à¤¨à¤¿ वाले लोगों को अकà¥à¤¸à¤° अपच का अनà¥à¤à¤µ होगा।
4. समा अगà¥à¤¨à¤¿ (Sama Agni), इसमें तीनों दोषों (वात, पितà¥à¤¤, कफ) का संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ होता है। इससे जठरागà¥à¤¨à¤¿ का पूरा कामकाज होता है और इसे इसकी आदरà¥à¤¶ अवसà¥à¤¥à¤¾ माना जाता है।
जठरागà¥à¤¨à¤¿ को नषà¥à¤Ÿ करती हैं आपकी ये दैनिक आदतें
अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में à¤à¥‹à¤œà¤¨ करना
à¤à¥‚ख न लगने पर खाना
असंगत खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का सेवन
जलà¥à¤¦à¥€ खाने के à¤à¤¾à¤µ से à¤à¥‹à¤œà¤¨ करना
कम à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ करना
अधिक उपवास करना
उपचार के दौरान अनà¥à¤šà¤¿à¤¤ सफाई
गतिहीन जीवनशैली का पालन करना
जठरागà¥à¤¨à¤¿ को बूसà¥à¤Ÿ (तेज) कैसे करें?
सरà¥à¤•ेडियन रिदम का समà¥à¤®à¤¾à¤¨ करें
नियमित à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ करें
गरà¥à¤® पानी पिà¤à¤‚
गरà¥à¤®, गरिषà¥à¤ , तीखे और खटà¥à¤Ÿà¥‡ फूडà¥à¤¸ का सेवन करें।
मन लगाकर उपवास करें।
जठरागà¥à¤¨à¤¿ आपके शरीर में मौजूद आंतरिक पà¥à¤°à¤•ाश है जो आपको पोषण देता है और आपके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ को बनाठरखता है। इसे फलते-फूलते रहनें दें, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि आपका सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ और कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ इस पर निरà¥à¤à¤° है!
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