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डिलीवरी के बाद कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚ जरूरी होता है मालिश करवाना
मन और शरीर को आराम देने के लिठडिलीवरी के बाद मालिश की जाती है। शरीर में कोई दरà¥à¤¦ हो तो वो à¤à¥€ दूर हो जाता है। अचà¥â€à¤›à¥€ मालिश से शारीरिक, à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥â€à¤®à¤• और मानसिक रूप से लाठमिलता है।
डिलीवरी के बाद कà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚ जरूरी होता है मालिश करवाना
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के नौ महीने महिलाओं के लिठमानसिक और शारीरिक रूप से काफी थकाऊ और चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€à¤ªà¥‚रà¥à¤£ होते हैं। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥â€à¤¥à¤¾ खतà¥â€à¤® होने पर डिलीवरी के बाद à¤à¥€ इससे उबरने में महिलाओं को समय लगता है। डिलीवरी के बाद जलà¥â€à¤¦à¥€ रिकवर करने के लिठमालिश करने की सलाह दी जाती है। डिलीवरी के बाद मालिश से उन मांसपेशियों और ऊतकों को मजबूती मिलती है जो गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥â€à¤¥à¤¾ के दौरान कमजोर हो गई होती हैं।
तो आइठजानते हैं कि डिलीवरी के बाद मालिश करवाने के कà¥â€à¤¯à¤¾ फायदे होते हैं।
​डिलीवरी के बाद कब मालिश करवाà¤à¤‚
जब à¤à¥€ आपको ठीक लगे आप मालिश करवा सकती हैं। आपकी सिजेरियन डिलीवरी हà¥à¤ˆ हो या नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी, पूरी तरह से रिकवर होने में आपको 6 से 8 हफà¥à¤¤à¥‡ का समय लगेगा।
डिलीवरी के पांच दिन बाद मालिश करवा सकती हैं, लेकिन अगर आपकी सिजेरियन डिलीवरी हà¥à¤ˆ है तो घाव को पूरी तरह से à¤à¤°à¤¨à¥‡ दें।
आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में डिलीवरी के बाद महिलाओं को 40 दिन तक पà¥à¤°à¤¸à¥‚ति अवसà¥â€à¤¥à¤¾ में रहना होता है। इस दौरान मालिश करने से महिलाओं की जलà¥â€à¤¦à¥€ रिकवरी होती है।
​मालिश करने के फायदे
डिलीवरी के बाद मालिश करवाने से महिलाओं के शरीर को कई तरह के लाठमिलते हैं, जैसे कि :
पेट की मालिश करने से गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ में जमा गंदगी साफ होती है और गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ को अपने सामानà¥â€à¤¯ आकार में आने में मदद मिलती है। नरम ऊतकों की मालिश से रकà¥â€à¤¤ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ बेहतर होता है और शरीर से अतिरिकà¥â€à¤¤ फà¥à¤²à¥‚इड और विषाकà¥â€à¤¤ पदारà¥à¤¥ बाहर निकलते हैं।
मालिश से बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ के ऊतक उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ होते हैं जिससे आसानी से बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ मिलà¥â€à¤• निकलने में मदद मिलती है। बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ में कोई गांठहो तो वो à¤à¥€ ठीक होती है और बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ की रकà¥â€à¤¤ नलिकाओं के अवरूदà¥à¤§ होने की वजह से होने वाले मैसटिटाइटिस को रोकने में à¤à¥€ मदद मिलती है।
​कब नहीं करवानी चाहिठमालिश
à¤à¤•à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾ या रैशेज होने पर मालिश नहीं करनी चाहिà¤à¥¤ तेल या मसाज पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥â€à¤Ÿà¥à¤¸ को निपà¥à¤ªà¤²à¥à¤¸ पर न लगाà¤à¤‚ और पैराबीन यà¥à¤•à¥â€à¤¤ उतà¥â€à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— न करें।
हाई बà¥â€à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° और हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ जैसी सà¥â€à¤µà¤¾à¤¸à¥â€à¤¥à¥â€à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की मरीजों को मालिश करने वाले वà¥â€à¤¯à¤•à¥â€à¤¤à¤¿ को इसकी जानकारी दे देनी चाहिठताकि इनसे जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° पà¥â€à¤µà¤¾à¤‡à¤‚टà¥à¤¸ को न दबाया जाà¤à¥¤ सूजन, तेज सिरदरà¥à¤¦ में à¤à¥€ मालिश नहीं करवाà¤à¤‚।
मालिश के लिठसही पोजीशन
मालिश के दौरान कई बार पोजीशन बदलने की जरूरत पड़ती है। आप अपनी सहजता के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° à¤à¥€ पोजीशन चà¥à¤¨ सकती हैं। सिजेरियन डिलीवरी में करवट लेकर या बैठकर मालिश करवाना सही रहता है। पीठ, बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥â€à¤Ÿ और पेट को सहारा देने के लिठआप तकिठका इसà¥â€à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² à¤à¥€ कर सकती हैं।
कà¥â€à¤¯à¤¾ सावधानी बरतें
अगर आप सी-सेकà¥â€à¤¶à¤¨ डिलीवरी के बाद मालिश करवाना चाहती हैं तो à¤à¤• से दो हफà¥à¤¤à¥‡ बाद ही करवाà¤à¤‚। ऑपरेशन के बाद डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° से पूछकर ही मालिश शà¥à¤°à¥‚ करवाना बेहतर रहता है। जब आपके घाव पूरी तरह से à¤à¤° जाà¤à¤‚, तà¤à¥€ मालिश करवाना शà¥à¤°à¥‚ करना चाहिà¤à¥¤
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