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à¤à¥‹à¤œà¤¨ में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की मातà¥à¤°à¤¾ निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करने के लिà¤, मानकीकृत विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• विधियों का होना महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। कई तरीके मौजूद हैं जिनका उपयोग विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ खादà¥à¤¯ उदà¥à¤¯à¥‹à¤—ों में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ सामगà¥à¤°à¥€ की मातà¥à¤°à¤¾ निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करने के लिठकिया जाता है, जिसमें केलà¥à¤¡à¤¾à¤², लोरी, बà¥à¤°à¥ˆà¤¡à¤«à¥‹à¤°à¥à¤¡ और कà¥à¤² अमीनो à¤à¤¸à¤¿à¤¡ सामगà¥à¤°à¥€ विधियाठशामिल हैं। खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ की पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ सामगà¥à¤°à¥€ का सही निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤£ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है, जैसा कि दूध के मामले में होता है, यह खादà¥à¤¯ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦ के आरà¥à¤¥à¤¿à¤• मूलà¥à¤¯ को निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करता है और यह वैकलà¥à¤ªà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ के लिठनठउदà¥à¤¯à¥‹à¤—ों की आरà¥à¤¥à¤¿à¤• वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¥à¤¯à¤¤à¤¾ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है। यह संपादकीय विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤£ विधियों का अवलोकन पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता है और उनके फायदे और नà¥à¤•सान का वरà¥à¤£à¤¨ करता है।
कीवरà¥à¤¡à¥à¤¸: पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, अमीनो à¤à¤¸à¤¿à¤¡, केजेलà¥à¤¡à¤¹à¤², डà¥à¤®à¤¾à¤¸, लोरी, बà¥à¤°à¥ˆà¤¡à¤«à¥‹à¤°à¥à¤¡, बीसीà¤, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ डाइजेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¬à¤¿à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ करेकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¡ à¤à¤®à¤¿à¤¨à¥‹ à¤à¤¸à¤¿à¤¡ सà¥à¤•ोर (पीडीसीà¤à¤à¤à¤¸), डाइजेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¬à¤² इनडिसिबल अमीनो à¤à¤¸à¤¿à¤¡ सà¥à¤•ोर (डीआईà¤à¤à¤à¤¸), मसल मास
पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ का पà¥à¤°à¤•ार और गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ जिसका हम उपà¤à¥‹à¤— करते हैं, हमारे सामानà¥à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ और à¤à¤²à¤¾à¤ˆ के लिठमहतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। आहार में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ à¤à¤• ऊरà¥à¤œà¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¤à¤¾ है, लेकिन इसके अनà¥à¤¯ उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ à¤à¥€ हैं, जिसमें सेलà¥à¤²à¤° à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और à¤à¤‚जाइम गतिविधि में जैव-रसायनों का मारà¥à¤— शामिल है। इसके अलावा, उमà¥à¤° बढ़ने वाली वैशà¥à¤µà¤¿à¤• आबादी में सरकोपेनिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिठआहार में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ का परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ सेवन à¤à¤• आवशà¥à¤¯à¤• पोषण कारक है। हमारे 50 के दशक में मांसपेशियों की ताकत और दà¥à¤°à¤µà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ दोनों में तेजी से गिरावट आती है और मांसपेशियों के दà¥à¤°à¤µà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ का 30-50% नà¥à¤•सान अकà¥à¤¸à¤° 40-80 साल की उमà¥à¤° के बीच देखा जाता है [ 1 ]। पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ को पोषण कारक के रूप में पहचाना जाता है जो धीमा कर सकता है और यहां तक ​​कि मांसपेशियों की ताकत और दà¥à¤°à¤µà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ के नà¥à¤•सान को रोक सकता है, लेकिन मांसपेशियों के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पर मानव आहार हसà¥à¤¤à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ª अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨à¥‹à¤‚ ने आज तक बड़े पैमाने पर पशà¥-सà¥à¤°à¥‹à¤¤ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दिया है [2 ]। सà¥à¤¥à¤²à¥€à¤¯ और समà¥à¤¦à¥à¤°à¥€ पौधों के पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ सहित उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ पर सीमित जानकारी उपलबà¥à¤§ है। à¤à¥‹à¤œà¤¨ में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की मातà¥à¤°à¤¾ निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करने के लिà¤, मानकीकृत विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• विधियों का होना महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ सामगà¥à¤°à¥€ की मातà¥à¤°à¤¾ निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करने के लिठविà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ खादà¥à¤¯ उदà¥à¤¯à¥‹à¤—ों में उपयोग की जाने वाली कई विधियाठमौजूद हैं और इनमें केजेलà¥à¤¡à¤¹à¤², लोरी, बà¥à¤°à¥ˆà¤¡à¤«à¥‹à¤°à¥à¤¡ और कà¥à¤² अमीनो à¤à¤¸à¤¿à¤¡ सामगà¥à¤°à¥€ विधियाठशामिल हैं। खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ सामगà¥à¤°à¥€ का सही निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤£ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है, जैसा कि अकà¥à¤¸à¤° दूध और गेहूं के मामले में होता है, यह खादà¥à¤¯ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦ के आरà¥à¤¥à¤¿à¤• मूलà¥à¤¯ को निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करता है ।
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