Login
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
बड़ों की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की रोग-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ कमजोर होती है (1)। इस कारण वो आसानी से कई तरह की बीमारी या संकà¥à¤°à¤®à¤£ के चपेट में आ जाते हैं। इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ में से à¤à¤• है यूटीआई यानी यूरिनरी टà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿ इंफेकà¥à¤¶à¤¨ (Urinary tract infection)। यह मूतà¥à¤°à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— से संबंधित संकà¥à¤°à¤®à¤£ होता है। अगर वकà¥à¤¤ रहते इस पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ न दिया गया, तो यह गंà¤à¥€à¤° रूप à¤à¥€ ले सकता है। इसलिà¤, मॉमजंकà¥à¤¶à¤¨ के इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में हम बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने से संबंधित सà¤à¥€ जरूरी जानकारियां देने की कोशिश कर रहे हैं। हम बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने के कारण, लकà¥à¤·à¤£, इलाज और à¤à¤¸à¥€ ही कई अनà¥à¤¯ जानकारियां दे रहे हैं।
लेख की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के बारे में जानने से करते हैं।
यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ कà¥à¤¯à¤¾ है और यह बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में होना कितना आम है?
यूटीआई (Urinary tract infections) मूतà¥à¤° मारà¥à¤— संकà¥à¤°à¤®à¤£ होता है। यह बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ (रोगाणà¥) के कारण होता है, जो मूतà¥à¤° मारà¥à¤— के à¤à¤• हिसà¥à¤¸à¥‡ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। इन बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के कारण किडनी (kidney) व मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ (bladder) में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ हो सकता है। वहीं, बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की बात करें, तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ यूटीआई की समसà¥à¤¯à¤¾ होना सामानà¥à¤¯ है (2) (3)।
अब जानते है कि यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने के पीछे मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण कà¥à¤¯à¤¾ हैं।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने के कारण
यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से मà¥à¤–à¥à¤¯ इस पà¥à¤°à¤•ार हैं (3):
यह बीमारी बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के कारण होती है। ये बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ गà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾à¤‚गों के आसपास हो सकते हैं और फिर मूतà¥à¤°à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— तक फैल जाते हैं।
वेसिकोराइटरल रिफà¥à¤²à¤•à¥à¤¸ मूतà¥à¤°à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— की समसà¥à¤¯à¤¾ होती है। इसके कारण à¤à¥€ यूटीआई हो सकता है। यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ शिशॠके जनà¥à¤® के समय उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो सकती है। इसमें यूरिन गलत दिशा यानी मूतà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹à¤¿à¤¨à¥€ और गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ में वापस फà¥à¤²à¥‹ होने लगता है
मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• या तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° की बीमारियां (जैसे कि मायेलोमेनिंगोसेले-myelomeningocele), रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ की चोट व हाइडà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥‡à¤«à¤²à¤¸ (hydrocephalus) के कारण। ये बीमारियां मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ को खाली करने में मà¥à¤¶à¥à¤•िल पैदा कर सकती है।
लड़कियों में बबल बाथ या टाइट-फिटिंग कपड़े पहनने के कारण à¤à¤¸à¤¾ हो सकता है।
मूतà¥à¤° पथ के आकार में परिवरà¥à¤¤à¤¨ या कोई जनà¥à¤® दोष।
अकà¥à¤¸à¤° दिन के वकà¥à¤¤ पेशाब कम करना।
बाथरूम जाने के बाद बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के पीछे (गà¥à¤¦à¥‡ -anus) से आगे तक साफ करने के कारण à¤à¤¸à¤¾ हो सकता है।
नोट : लड़कों के मà¥à¤•ाबले लड़कियों को यूटीआई की समसà¥à¤¯à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है। à¤à¤¸à¤¾ 3 साल की उमà¥à¤° के आसपास हो सकता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसी उमà¥à¤° से बचà¥à¤šà¥‡ शौचालय जाने का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ शà¥à¤°à¥‚ करते हैं।
आगे आप बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के बारे में पढेंगे।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के लकà¥à¤·à¤£
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने के लकà¥à¤·à¤£ कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार हैं (3)।
बà¥à¤–ार होना।
मतली और उलà¥à¤Ÿà¥€ आना।
à¤à¥‚ख नहीं लगना।
पेशाब में खून आना।
बार-बार पेशाब आना।
पेशाब करते समय दरà¥à¤¦ या जलन महसूस होना।
निचले शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ या पीठके निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में दबाव या दरà¥à¤¦ का अनà¥à¤à¤µ होना।
टॉयलेट टà¥à¤°à¥‡à¤¨à¤¿à¤‚ग के बाद à¤à¥€ बिसà¥à¤¤à¤° गीला करना।
वजन न बà¥à¤¨à¤¾
इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ तक फैलने पर कà¥à¤› इस तरह के लकà¥à¤·à¤£ नजर आ सकते हैं:
ठंड लगना और शरीर में कंपकंपी होना।
बà¥à¤–ार आना।
तà¥à¤µà¤šà¤¾ का गरà¥à¤® या लाल होना।
मतली और उलà¥à¤Ÿà¥€ होना।
पीठमें दरà¥à¤¦ होना।
पेट में गंà¤à¥€à¤° दरà¥à¤¦ होना।
आगे हम बता रहे हैं कि यूटीआई के कारण बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो सकती हैं।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से होने वाली जटिलताà¤à¤‚
यूटीआई के चलते बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को निमà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार की समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का सामना करना पड़ सकता है (4):
खून में संकà¥à¤°à¤®à¤£ (सेपà¥à¤¸à¤¿à¤¸ – Sepsis) – हालांकि, इसका खतरा बड़ों में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है, लेकिन बेहतर है कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को लेकर à¤à¥€ सावधानी बरती जाà¤, ताकि वो इसका शिकार न बनें।
किडनी की समसà¥à¤¯à¤¾ या कà¥à¤·à¤¤à¤¿à¥¤
किडनी का संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥¤
लेख के इस à¤à¤¾à¤— में जानिठकि यूटीआई का पता लगाने के लिठकिस-किस पà¥à¤°à¤•ार की जांच की जाती हैं।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ का निदान
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में यूटीआई का पता लगाने के लिठनिमà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के टेसà¥à¤Ÿ किठजा सकते हैं (2)
डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह – डॉकà¥à¤Ÿà¤° सबसे पहले बचà¥à¤šà¥‡ या बचà¥à¤šà¥‡ के माता-पिता से बचà¥à¤šà¥‡ के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥ से संबंधित कà¥à¤› सवाल पूछ सकते हैं। उसके बाद यूरिन टेसà¥à¤Ÿ की सलाह दे सकते हैं। मूतà¥à¤° के नमूने की जांच पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤—शाला में माइकà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोप से की जाती है।
यूरोडायनामिक (Urodynamics) – यह à¤à¤• परीकà¥à¤·à¤£ है, जिसका उपयोग यह आंकलन करने के लिठकिया जाता है कि बचà¥à¤šà¥‡ के मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ (bladder) और मूतà¥à¤°à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं (5)।
सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¥à¤•ोपी (Cystoscopy) – इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° कैमरे की मदद से मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ और मूतà¥à¤°à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— को देखकर इंफेकà¥à¤¶à¤¨ का पता लगा सकते हैं (6)।
जांच के लिठयूरिन का नमूना कैसे लिया जाता है, यह बचà¥à¤šà¥‡ की उमà¥à¤° पर निरà¥à¤à¤° करता है। जो बचà¥à¤šà¥‡ बहà¥à¤¤ छोटे होते हैं और सà¥à¤µà¤¯à¤‚ से टॉयलेट नहीं जाते हैं, à¤à¤¸à¥‡ बचà¥à¤šà¥‡ का सैंपल लेना कठिन हो सकता है। बहà¥à¤¤ छोटे बचà¥à¤šà¥‡ में मूतà¥à¤° का नमूना लेने के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ तरीके होते हैं, जो इस पà¥à¤°à¤•ार हैं (3):
यूरिन कलेकà¥à¤¶à¤¨ बैग – मूतà¥à¤° के नमूने के लिठà¤à¤• विशेष पà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• की थैली बचà¥à¤šà¥‡ के लिंग या योनि के संपरà¥à¤• में रखी जाती है। हालांकि, यह तरीका पूरी तरह उपयोगी नहीं है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इससे मूतà¥à¤° का नमूना दूषित हो सकता है।
कैथेटराइजà¥à¤¡ सà¥à¤ªà¥‡à¤¸à¤¿à¤®à¥‡à¤¨ यूरिन कलà¥à¤šà¤° (Catheterized specimen urine culture) – इसमें à¤à¤• पà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• टà¥à¤¯à¥‚ब (कैथेटर) लड़कों के लिंग से जोड़ी जाती है और लड़कियों के मूतà¥à¤°à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— में डाली जाती है। इससे सीधा मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ से मूतà¥à¤° को à¤à¤•तà¥à¤° किया जा सकता है।
सà¥à¤ªà¤°à¤ªà¥à¤¯à¥‚बिक यूरिन कलेकà¥à¤¶à¤¨ (Suprapubic urine collection) – इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में à¤à¤• सà¥à¤ˆ को निचले पेट की तà¥à¤µà¤šà¤¾ और मांसपेशियों के माधà¥à¤¯à¤® से मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ तक पहà¥à¤‚चाया जाता है। इसका उपयोग à¤à¥€ मूतà¥à¤° के सैंपल लेने के लिठकिया जाता है।
अगर बचà¥à¤šà¥‡ को पहली बार यूटीआई हà¥à¤† है, तो संकà¥à¤°à¤®à¤£ का कारण जानने के लिठया गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ की कà¥à¤·à¤¤à¤¿ की जांच के लिठइमेजिंग परीकà¥à¤·à¤£ किया जा सकता है। ये परीकà¥à¤·à¤£ निमà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के होते हैं :
किडनी का अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड
बचà¥à¤šà¥‡ के पेशाब करते समय लिया गया à¤à¤•à¥à¤¸-रे (voiding cystourethrogram)
चलिà¤, अब जानते हैं कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ का इलाज किस तरह किया जा सकता है।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ का इलाज
यूटीआई से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार इलाज किया जा सकता है (3)।
यूटीआई के दौरान बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की किडनी को सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रखने के लिठà¤à¤‚टीबायोटिक दवाà¤à¤‚ दी जा सकती हैं।
अगर शिशॠकाफी छोटे हैं और दवा खाने में असमरà¥à¤¥ हैं, तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ कर नसों में इंजेकà¥à¤¶à¤¨ के जरिठà¤à¤‚टीबायोटिक दिठजा सकते हैं।
जब यूटीआई का इलाज चल रहा हो, तो बचà¥à¤šà¥‡ को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पेय पदारà¥à¤¥ का सेवन कराà¤à¤‚।
कà¥à¤› बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठयूटीआई के इलाज में काफी समय लग सकता है। खासतौर पर जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बार-बार यह बीमारी हो रही हो, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इस समसà¥à¤¯à¤¾ के इलाज के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° 6 महीने से 2 साल तक à¤à¤‚टीबायोटिक दवा दे सकते हैं।
à¤à¤‚टीबायोटिक कोरà¥à¤¸ पूरा होने के बाद डॉकà¥à¤Ÿà¤° फिर से यूरिन टेसà¥à¤Ÿ कर सकते हैं, ताकि यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ किया जा सके कि समसà¥à¤¯à¤¾ पूरी तरह से खतà¥à¤® हà¥à¤ˆ है या नहीं।
नोट: उचित à¤à¤‚टीबायोटिक दवाई के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करें। बिना डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह के बचà¥à¤šà¥‡ को कोई à¤à¥€ दवाई न दें।
आइà¤, अब जानते हैं कि यूटीआई से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ बचà¥à¤šà¥‡ का रखरखाव कैसे करना चाहिà¤à¥¤
यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से पीड़ित बचà¥à¤šà¥‡ की घर में कैसे देखà¤à¤¾à¤² करें?
यूटीआई से पीड़ित बचà¥à¤šà¥‡ पर अधिक धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देने की जरूरत होती है। यहां हम कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ ही टिपà¥à¤¸ दे रहे हैं
बचà¥à¤šà¥‡ को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पेय पदारà¥à¤¥ दें और बार-बार पेशाब करने के लिठकहें।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° से पूछें कि बचà¥à¤šà¥‡ को कितना तरल पदारà¥à¤¥ पीने की आवशà¥à¤¯à¤•ता है।
जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण बचà¥à¤šà¥‡ के पेट में दरà¥à¤¦ हो सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में बचà¥à¤šà¥‡ की पीठया पेट पर à¤à¤• हीटिंग पैड रखें, ताकि दरà¥à¤¦ से थोड़ी राहत मिले। साथ ही धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि इस बारे में à¤à¤• बार डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह à¤à¥€ जरूर लें।
यूटीआई में बचà¥à¤šà¥‡ को बà¥à¤–ार à¤à¥€ आ सकता है, à¤à¤¸à¥‡ में बचà¥à¤šà¥‡ को बà¥à¤–ार होने पर उसके तापमान की जांच करें। शरीर का तापमान अधिक होने पर तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° को संपरà¥à¤• करें।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° की दी गई दवाई को सही समय पर देते रहें और नियमित रूप से डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह à¤à¥€ लें।
बचà¥à¤šà¤¾ कितनी बार पेशाब जा रहा है और बचà¥à¤šà¥‡ के पेशाब का रंग व गंध कैसी है, इसका धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें।
बचà¥à¤šà¥‡ से पूछें कि पेशाब करते समय दरà¥à¤¦ या जलन महसूस होता है या नहीं।
बचà¥à¤šà¥‡ की डाइट पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें। बेहतर है कि डॉकà¥à¤Ÿà¤° से पूछें कि बचà¥à¤šà¥‡ के लिठकौन से आहार सही हैं।
आइà¤, अब बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में यूरिन टà¥à¤°à¥ˆà¤• इंफेकà¥à¤¶à¤¨ को होने से रोकने के उपाय जानते हैं।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने से कैसे बचाà¤à¤‚?
यूरिन टà¥à¤°à¥ˆà¤• इंफेकà¥à¤¶à¤¨ को होने से रोकने के लिठआप इन उपायों को अपना सकते हैं (3):
छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को बबल बाथ कराने से बचें।
अपने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को अधिक टाइट अंडरवीयर और कपड़े न पहनाà¤à¤‚।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ तरल पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को शामिल करें।
बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से बचाव के लिठबचà¥à¤šà¥‡ के जननांगों को साफ रखें।
बचà¥à¤šà¥‡ को हर दिन कई बार बाथरूम जाने के बारे में बताà¤à¤‚। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सिखाà¤à¤‚ कि वह पेशाब को रोककर न रखें।
बचà¥à¤šà¥‡ को बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से बचाने के लिठबचà¥à¤šà¥‡ के जननांग को आगे से पीछे तक साफ करें।
यूटीआई के संबंध में अनà¥à¤¯ जानकारी के लिठपढ़ते रहें यह आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल
डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास कब जाà¤à¤‚
कà¥à¤› मामलों में यूटीआई गंà¤à¥€à¤° रूप à¤à¥€ ले सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में आपको तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह लेने की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है। इसलिà¤, नीचे हम आपको जानकारी दे रहे हैं कि इस समसà¥à¤¯à¤¾ के दौरान कब आपको डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह की जरूरत हो सकती है (3)।
अगर उपचार के बाद à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‡ में यूटीआई लकà¥à¤·à¤£ जारी रहते हैं या 6 महीने में दो बार से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ यूटीआई की समसà¥à¤¯à¤¾ होती है, तो तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करें।
अगर बचà¥à¤šà¥‡ में यूटीआई के लकà¥à¤·à¤£ गंà¤à¥€à¤° हो जाते हैं।
बचà¥à¤šà¥‡ में नठलकà¥à¤·à¤£ नजर आते हैं, जैसे –
पीठदरà¥à¤¦ या पेट दरà¥à¤¦à¥¤
अगर बचà¥à¤šà¥‡ को बदबूदार, खूनी या अलग रंग का मूतà¥à¤° आता है।
शिशà¥à¤“ं को 100.4 डिगà¥à¤°à¥€ फारेनहाइट (38 डिगà¥à¤°à¥€ सेलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¸) बà¥à¤–ार या बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को 101 डिगà¥à¤°à¥€ फारेनहाइट (38.3 डिगà¥à¤°à¥€ सेलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¸) से अधिक बà¥à¤–ार होता है।
पेट में, पेट के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में, नाà¤à¤¿ के नीचे या पीठके निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में दरà¥à¤¦ होता है।
अगर लगातार बà¥à¤–ार हो और बà¥à¤–ार कम न हो रहा हो।
बार-बार पेशाब आना या रात के दौरान à¤à¥€ बार-बार पेशाब के लिठजाना।
उलà¥à¤Ÿà¥€ हो।
अकà¥à¤¸à¤° पूछे जाने वाले सवाल
कà¥à¤¯à¤¾ करें अगर बचà¥à¤šà¥‡ को बार-बार यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होता है?
अगर बचà¥à¤šà¥‡ को बार-बार यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ हो रहा है, तो बिना देर किठडॉकà¥à¤Ÿà¤° से चेकअप करवाà¤à¤‚। डॉकà¥à¤Ÿà¤° बचà¥à¤šà¥‡ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को देखते हà¥à¤ उचित उपचार बता सकते हैं।
यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ को ठीक होने में कितना समय लगता है?
यूरिन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ का उपचार शà¥à¤°à¥‚ होने के बाद दो से तीन दिन में इसके लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में सà¥à¤§à¤¾à¤° देखा जा सकता है। सही तरीके से उपचार होने पर यह à¤à¤• हफà¥à¤¤à¥‡ में ठीक हो सकता है (2)। हालांकि, यह बचà¥à¤šà¥‡ के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯, सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ और बीमारी की गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ पर निरà¥à¤à¤° करता है। हो सकता है कि यह कà¥à¤› बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में जलà¥à¤¦à¥€ ठीक हो और कà¥à¤› बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में ठीक होने में थोड़ा वकà¥à¤¤ लगे।
इस लेख के माधà¥à¤¯à¤® से यह तो सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ गया होगा कि यूटीआई गंà¤à¥€à¤° बीमारी है और बचà¥à¤šà¥‡ इसकी चपेट में आसानी से आ जाते हैं। इसलिà¤, जरूरत है बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को इससे बचाठरखने की। इसके लिठआरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में बताई गई काम की बातों में धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखें। साथ ही इस लेख को अपने परिवार व दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ के साथ शेयर कर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ यूटीआई के संबंध में जागरूक करें।
| --------------------------- | --------------------------- |