आपने 9 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों की कौन सी प्रारंभिक विशेषताएं देखीं?HealthPlanet

Posted on Sat 4th Mar 2023 : 14:28

बचपन के शुरूआती क्षण महत्त्वपूर्ण होते हैं - और उनका असर जीवन भर रहता है। शिशु के मस्तिष्क का विकास गर्भावस्था के समय ही शुरू हो जाता है, और गर्भवती माता के स्वास्थ्य, खान-पान, और वातावरण का उस पर प्रभाव पड़ता है। जन्म के बाद, शिशु का मस्तिष्क तेज़ी से विकसित होता है, और उसका शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक स्वास्थ्य, सीखने की क्षमता, और व्यस्क होने पर उसकी कमाने की क्षमता और सफलता को भी प्रभावित करता है।

सबसे शुरूआती वर्ष (0 से 8 वर्ष) बच्चे के विकास के सबसे असाधारण वर्ष होते हैं। जीवन में सब कुछ सीखने की क्षमता इन्ही वर्षों पर निर्भर करती है। इस नींव को ठीक से तैयार करने के कई फायदे हैं: स्कूल में बेहतर शिक्षा प्राप्त करना और उच्च शिक्षा की प्राप्ति, जिससे समाज को महत्त्वपूर्ण सामाजिक तथा आर्थिक लाभ मिलते हैं। शोध बताते हैं कि अच्छी गुणवत्ता की प्रारंभिक बाल शिक्षा और प्रारंभिक बाल विकास कार्यक्रम (ECD), कक्षा में फेल होने और स्कूल से निकल जाने की दर को कम करते है, और हर स्तर पर शिक्षा के परिणाम बेहतर बनाते हैं।

ई सी डी का उद्देश्य है कि सभी छोटे बच्चे, विशेष रूप से सबसे ज्यादा संवेदनशील, को मानवीय परिवेश सहित, गर्भाधान के समय से स्कूल में प्रवेश के समय तक उनकी पूरी क्षमता को प्राप्त करें |

प्रारंभिक बचपन के कई अलग-अलग चरण हैं: गर्भधारण से जन्म, जन्म से 3 वर्ष, जिसमें शुरूआती 1000 दिनों (गर्भधारण से 24 महीने) पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिसके बाद आते हैं प्री-स्कूल और प्री-प्राइमरी वर्ष (3 वर्ष से 5-6 वर्ष, या स्कूल में दाखिले की उम्र)। हालांकि प्रारंभिक बचपन की व्याख्या में 6 से 8 वर्ष भी आते हैं, इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र शुरुआती वर्ष से स्कूल में दाखिले तक की उम्र है। यह चरण स्पष्ट रूप से अलग नहीं हैं, फिर भी बाल विकास के प्रक्षेपपथ पर विशेष संवेदनशील समय के लिए नीतियां बनाने और कार्यक्रम पर प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में सहायक श्रेणियां हैं।

भारत ने बाल अधिकारों पर कन्वेंशन को स्वीकार किया है, जो सदस्य देशों को "बच्चों के अस्तित्व और विकास को अधिकतम संभावित सीमा तक सुनिश्चित करने" के लिए कहता है। यह कन्वेंशन बचपन को गर्भाधारण से आठ साल की उम्र तक की अवधि तक के रूप में परिभाषित करता है।

पांच वर्ष से कम उम्र के 43 प्रतिशत से ज़्यादा बच्चे अपनी क्षमता न परिपूर्ण करने के खतरे में हैं।
रिम्पी रानी, एक आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले के मोतीपुर कला आँगनवाड़ी केंद्र में ग्राम स्वास्थ्य और पोषण दिवस की बैठक में एक बच्चे को खाना खिलाते हुए |

रिम्पी रानी, एक आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले के मोतीपुर कला आँगनवाड़ी केंद्र में ग्राम स्वास्थ्य और पोषण दिवस की बैठक में एक बच्चे को खाना खिलाते हुए / स्तनपान कराते हुए ।

प्रारंभिक बाल विकास (Early Childhood Development (ई सी डी)), जिसे भारत में प्रारंभिक बाल देख-रेख एवं शिक्षा के रूप में जाना जाता है, का तात्पर्य निम्नलिखित है:

एक परिणाम जो किसी बच्चे की स्तिथि बताता है - उचित पोषण, शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक सतर्कता, भावनात्मक मजबूती, सामाजिक योग्यता, और सीखने के लिए तैयारी, तथा

एक प्रक्रिया - एक व्यापक प्रक्रिया जो उचित परिणाम प्राप्त करने हेतु विभिन्न क्षेत्रों के हस्तक्षेपों को साथ लाती है । किसी बच्चे के उत्तम विकास के लिए ज़रूरी तत्त्व हैं: पोषण एवं स्वास्थ्य, स्वच्छता, सुरक्षा, प्रेरणा, जो एक साथ मिल कर 'भरपूर देख भाल' कहलाते हैं। स्वस्थ प्रारंभिक बाल विकास हर बच्चे के लिए महत्त्वपूर्ण है।

विगत वर्षों में, बाल स्वास्थ्य और पोषण के परिणामों में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में 1990 से 2015 तक वैश्विक स्तर पर 53 प्रतिशत की गिरावट की तुलना में 62 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है । अधिक बच्चों को जल्दी स्तनपान शुरू करवाया जा रहा है और उन्हें केवल स्तनपान ही कराया जा रहा है। फिर भी, दुनिया भर के पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मौतों का पांचवा हिस्सा और नवजात शिशुओं की मौतों का चौथा हिस्सा, भारत के पलड़े में आता है। भारत के तकरीबन 38 प्रतिशत बच्चों में बौनापन है। बौनेपन का स्तर ई सी डी का प्रतिनिधि संकेतक माना जाता है। भारत में यह स्तर दर्शाता है कि एक तिहाई से ज़्यादा बच्चे अपनी क्षमता के अनुसार विकसित नहीं हो रहे हैं। हालांकि अधिकतर, 70 प्रतिशत से कुछ अधिक, बच्चे प्री -प्राइमरी शिक्षा प्राप्त करते हैं, प्रारंभिक बाल शिक्षा कार्यक्रमों की गुणवत्ता में बड़ी कमियां हैं। इसका यह मतलब भी है कि सबसे वंचित वर्ग के तकरीबन 2 करोड़ बच्चे प्रीस्कूल नहीं जाते, जिससे उनके जीवित रहने, बढ़ने और विकास पर सबसे ख़राब असर पड़ता है।

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