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गिलà¥à¤Ÿà¥€ रोग (à¤à¤‚थà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤¸) जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° गाय, à¤à¥ˆà¤‚स, बकरी और घोड़ों में होता है। इस बीमारी जहरी बà¥à¤–ार के नाम से à¤à¥€ जाना जाता है।
गिलà¥à¤Ÿà¥€ रोग का जीवाणॠबहà¥à¤¤ तेजी से फैलता है और यह लमà¥à¤¬à¥‡ समय तक जीवित रहता है। इस रोग से गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ पशॠके लार, मल, दà¥à¤—à¥à¤§ व अनà¥à¤¸ सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤µ में मौजूद जीवाणॠका संकà¥à¤°à¤®à¤£ दूसरे पशà¥à¤“ं में चला जाता है। अगर पशà¥à¤ªà¤¾à¤²à¤• पहले से ही कà¥à¤› बातों को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें तो काफी हद तक पशà¥à¤“ं को बचाया à¤à¥€ जा सकता है। अगर इस बीमारी से गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ पशॠकी मौत हो गई है तो बिना पोसà¥à¤Ÿà¤®à¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤® किठपांच-छह फीट गहराई में दफन कर देना चाहिà¤à¥¤
लकà¥à¤·à¤£
यह बीमारी à¤à¤• बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से फैलती है।
इससे पीड़ित पशॠसà¥à¤¸à¥à¤¤ हो जाता है।
बीमार पशॠको तेज बà¥à¤–ार हो जाता है।
पेट काफी फूल जाता है।
नाक, पेशाब और मल दà¥à¤µà¤¾à¤° से खून बहने लगता है।
इस तरह करें बचाव
पशॠको रोग निरोधक टीका जरà¥à¤° लगवाà¤à¥¤
टीका लगाने से पशॠको à¤à¤• वरà¥à¤· तक यह रोग नहीं होता है।
अगर पास के गांव में कोई पशॠको यह रोग हà¥à¤† है तो पशà¥à¤ªà¤¾à¤²à¤• आवागमन बंद कर दें।
मरे हà¥à¤ पशॠकी खाल नहीं छà¥à¥œà¤µà¤¾à¤à¤‚ जिससे बीमारी और फैलती है।
पशà¥à¤“ं को मृतà¥à¤¯à¥ के बाद पांच-छह फà¥à¤Ÿ गडà¥à¤¢à¤¾ कर चूना के साथ गाड़ देना चाहिà¤à¥¤
लकà¥à¤·à¤£ दिखने पर पास के पशà¥à¤šà¤¿à¤•ितà¥à¤¸à¤• को संपरà¥à¤• करें।
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