गले के लिए कौन सा योग करें?HealthPlanet

Posted on Tue 6th Dec 2022 : 10:40

गले की सभी समस्याओं में बहुत फायदेमंद हैं ये 4 योगासन, योग एक्सपर्ट से जानें करने का तरीका

गले में खराश, दर्द कफ आदि के लिए कई योगासन हैं जो इस परेशानी को दूर करते हैं। एक्सपर्ट भोली ने वे आसन बताए हैं। जिनसे खराब गला ठीक हो जाता है। 


बदलते मौसम में गले में खराश जैसी परेशानियां होने लगती हैं। कई बार ज्यादा बोल लेने से भी गला खराब हो जाता है। या फिर तेज बोलने या चीखने की वजह से गले में दर्द होने लगता है। गले की खराबी का अलग-अलग कारण हो सकते हैं। लेकिन योग एक ऐसी साधना है जिससे खराब गला भी ठीक हो जाता है और आप जब इन योगासनों का अभ्यास करते हैं तो कुछ दिनों में गले की परेशानियां ठीक होने लगती हैं। योग एक्सपर्ट भोली परिहार बता रही हैं कि जब गले को ठीक करने वाले योगासन करते हैं तो उससे गले की मांसपेशियों रिलैक्स होती हैं। गले की ग्रंथियां सक्रिय होती हैं, जिससे गले की समस्याएं दूर होती हैं। इनोसेंस योगा की योग एक्सपर्ट भोली परिहार से जानते हैं कि वे कौन से योगासन हैं जिनसे गले की परेशानियां ठीक हो सकती हैं।


सिंहासन (simhasana)

सिंहासन करने से गले की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। जब हम तेजी से जीभ को बाहर निकालते हैं, तब हमारी गर्दन में खिंचाव महसूस होता है। जिससे हमारी गले की मांसपेशियां एक्टिव हो जाती हैं और गर्म हो जाती हैं। इसके कारण गले में खराश, दर्द, कफ, जलन, छाले आदि परेशानियां ठीक होती हैं। यह आसन हमारे जबड़े को भी मजबूती देता है।  
करने का तरीका

अपने दोनों पैरों को मोड़कर एड़ियां बाहर की तरफ कर दें और पंजों पर बैठ जाएं। यह कुछ वज्रासन जैसी स्थिति होगी।
पैर का लेफ्ट अंगूठा राइट अंगूठे के ऊपर रहेगा।
कमर, गर्दन को सीधा रखते हुए अपने दोनों हाथों को घुटने पर रख लें।
कुछ देर विश्राम करें और अपने शरीर को सिंहासन के लिए तैयार करें और उसी स्थिति में अपने दोनों घुटनों को आपस में दूर कर लें। 
दोनों हाथों की उंगलियां अंदर की तरफ होंगी और हथेलियों को घुटनों के बीच में रख दें।  
सामने की ओर देखें, उसके बाद लंबी गहरी सांस अंदर लें व सांस छोड़ते हुए हल्का सा अपने शरीर को आगे की ओर छुका दें। 
अपनी जीभ को बाहर निकालते हुए शेर की तरह दहाड़ें। 
इसमें अपनी दोनों खुली हुई आंखों से माथे के बीचों बीच देखने की कोशिश करें। जीभ को तेजी से बाहर निकालें। इस स्थिति में 5-10 सैकेंड होल्ड करें। 
इस दहाड़ने की क्रिया को 5-6 बार दोहराएं। हर क्रिया के बाद 5-6 सैकेंड होल्ड करें। 

2. उष्ट्रासन (ushtrasana)

उष्ट्रासन करने से गर्दन पीछे की ओर होती है जिसकी वजह से गले की मांसपेशियों में खिंचाव आता है। जिससे गर्दन वाले हिस्से में रक्त का संचार बढ़ जाता है। साथ ही साथ यह हमारे ट्रेकिया (गले का पाइप) पर खिंचाव डालता है और हमारे मुंह की ग्रंथियां एक्टिव हो जाती हैं। जिसकी वजह से हमारा सलाइवा इंप्रूव होता है। और की ग्रंथियों का दर्द कम होता है। इसकी वजह से हमारे गले की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इनकी वजह से गले में चुभन से लेकर अन्य रोग जैसे सूजन आना, गले में दर्द होना आदि को दूर करता है। 


करने का तरीका 

दोनों घुटनों को मोड़ते हुए पंजों पर बैठ जाएं।
दोनों हाथों को कमर पर रखें। सांस भरते हुए घुटनों के बल खड़े हो जाएं।
दोनों घुटनों के बीच में कंधे के बराबर गैप कर लें। 
सांस भरते हुए दोनों हाथों को आसमान की ओर ले जाएं और एक-एक करके अपनी एड़ी को पकड़ने की कोशिश करें। 
सांस छोड़ते हुए धीरे से वापस आएं। 
इस आसन में 30 सैकेंड होल्ड करें। 


3. हलासन (halasana)

हलासन को करते हुए हमारे गले के पीछे वले हिस्से में अच्छा खिंचाव आता है। गर्दन के दर्द को कम करता है। गर्दन की अकड़न भी कम करता है। गले की थायराइड ग्लैंड को एक्टिव करता है। अगर किसी को थायरॉयड की समस्या है तो उसके लिए यह आसन अत्यंत लाभकारी है। यह आसन कफ की समस्या को दूर करता है। हमारे चेहरे को भी ग्लोइंग बनाता है।


करने का तरीका

अपनी मैट पर आराम से पीठ के बल लेट जाएं। 
अपने दोनों हाथों को कमर के बगल में रखें। धीरे से अपनी उंगलियों को जमीन की तरफ मोड दें। ध्यान रहे आपकी कमर वाला हिस्सा जमीन पर ही रहेगा। 
अपने दोनों पैरों को सामान्य सांसें लेते हुए 90 डिग्री पर ले आएं। 
धीरे से कमर को ऊपर उठाते हुए अपने दोनों हाथों से अपनी कमर को सहारा दें। 
आपके दोनों पैर आसमान की तरफ रहेंगे। धीरे से अपनी सांस छोड़ते हुए अपने दोनों पैरों को धीरे-धीरे सिर वाले हिस्से की तरफ जमीन पर रख लें। 
कमर के सहारे को हटाते हुए दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में इंटरलॉक कर लें। 
इस आसन को करते हुए आपको गर्दन में दर्द महसूस होगा जोकि सामान्य है। 
इस आसन में अपनी क्षमतानुसार होल्ड करें। 
कमर को सहारा देते हुए पैरों को आसमान की और फिर से ले जाएं और धीरे से वापस आ जाएं।
दोनों पैरों को खोल दें और हथेलियों का रुख आसमान की तरफ कर लें और कुछ देर विश्राम करें। 

सावधानी

जिन लोगों को सर्वाइकल की समस्या है, वह इस आसन को न करें। 
जिन लोगों का वजन बहुत ज्यादा है वह इस आसन को किसी की देखरेख में करें। 


4. किंग-कोबरा आसन (king cobra)

यह आसन करने से हमारे छाती व गले वाले हिस्से में रक्त संचार बढ़ने से हमारे गले व फेफड़ों से संबंधित परेशानियां खत्म होती हैं। यह आसन गले की मांसपेशियों को फ्लैक्सिबल व मजबूत बनाता है। साथ ही साथ हमारे गर्दन के फैट को भी कम करता है। यह हमारे गले के फंक्शन को ठीक बेहतर करता है।


करने का तरीका

अपनी मैट पर पेट के बल लेट जाएं। अपने दोनों पैरों को आपस में जोड़ लें। 
पंजे बाहर की तरफ रहेंगे। अपने दोनों हाथों को कंधे के नीचे रख लें औ उंगलियां फैला लें। 
अपने हाथों से सहारा लेते हुए अपनी छाती को आसमान की ओर उठाएं, धीरे अपने दोनों घुटनों को पीछे से मोड़ते हुए सिर के पास लाएं। इसमें गर्दन को पीछे की तरफ खींचें। 
अपने सिर व पैर वाले हिस्से को ज्यादा से ज्यादा पास लाने की केशिश करें। बगल से अपनी कोहनियों को हल्का सा मोड़ कर रखें। जिससे आपका छाती वाला हिस्सा ज्यादा से ज्यादा खुल पाए।
सांस छोड़ते हुए वापस आ जाएं और पैरों सीधा कर लें, हाथों को ढीला छोड़ दें। और कुछ देर विश्राम करें।
इस आसन में अपनी क्षमता अनुसार ही होल्ड करें।  

सावधानी

गर्भवती महिलाएं इस आसन को न करें। 
जिन लोगों को लोअर बैक पेन है, वे भी इस आसन को न करें। 

योग के माध्यम से कई बीमारियां ठीक हो जाती हैं। अगर आपको भी गले में दिक्कते है, यहां बताए गए योगासन कर सकते हैं। 

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