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गिलà¥à¤Ÿà¥€ का उपचार - Gilti Ka Upchar in Hindi :-
मेथी गिलà¥à¤Ÿà¥€ को दूर करने में मेथी सकारातà¥à¤®à¤• à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¤¾ है. इसके लिठआपको मेथी के दाने या इसके पतà¥à¤¤à¥‡ को पीसकर लेप बनाना होगा और इसका लेप बन जाने के बाद इसे गिलà¥à¤Ÿà¥€ वाले कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में लगाकर कपड़े से बाà¤à¤§ दें. इसी पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को रोजाना गिलà¥à¤Ÿà¥€ के खतà¥à¤® हो जाने तक दोहराà¤à¤‚.
नीम
नीम की औषधीय उपयोगिता या अनà¥à¤¯ उपयोगिता किसी से छà¥à¤ªà¥€ नहीं है. जाहिर है कई रोगों में नीम के पतà¥à¤¤à¥‡ या नीम के तेल के सीधे-सीधे इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से आप राहत पा सकते हैं. गिलà¥à¤Ÿà¥€ के मरीजों को नीम के पातà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को उबालकर इसका रस पीना चाहिà¤. इसके अलावा इसके पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को पीसकर इसमें थोड़ा गà¥à¥œ मिलाकर गिलà¥à¤Ÿà¥€ वाले सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर लेप करने से à¤à¥€ राहत मिलती है. आप नीम के तेल से मालिश à¤à¥€ कर सकते हैं.
आकड़े का दूध
आकड़े के पौधे का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² à¤à¥€ आप गिलà¥à¤Ÿà¥€ के उपचार में कर सकते हैं. इसके दूध में मिटà¥à¤Ÿà¥€ मिलाकर इसे गिलà¥à¤Ÿà¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में लागà¤à¤‚. à¤à¤¸à¤¾ कà¥à¤› दिनों तक करते रहने से गिलà¥à¤Ÿà¥€ के मरीजों को आराम मिलता है.
गौमूतà¥à¤°
गौमूतà¥à¤° के कई फायदों में से à¤à¤• ये à¤à¥€ है कि आप इसकी सहायता से गिलà¥à¤Ÿà¥€ के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ को कम कर सकते हैं. यदि आप गौमूतà¥à¤° में देवदारॠको पीसकर और इसे हलà¥à¤•ा गरà¥à¤® करके इसका लेप गिलà¥à¤Ÿà¥€ पर लगाà¤à¤‚ तो आपको इस दौरान होने वाले दरà¥à¤¦ से रात मिलेगा.
चà¥à¤¨à¤¾
यदि आप गिलà¥à¤Ÿà¥€ से जलà¥à¤¦ से जलà¥à¤¦ निजात चाहते हैं तो आपको इसके लिठचà¥à¤¨à¤¾ की सहायता लेनी होगी. यदि आप रोजाना रात को सोने से पहले चà¥à¤¨à¤¾ और घी का लेप बनाकर इसे गिलà¥à¤Ÿà¥€ पर लगाà¤à¤‚ तो आपको तà¥à¤°à¤‚त लाठमिलता है.
कचनार की छाल और गोरखमà¥à¤‚डी
कचनार à¤à¤• वृकà¥à¤· है जबकि गोरखमà¥à¤‚डी à¤à¤• घास है. गिलà¥à¤Ÿà¥€ के उपचार में इसका इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करने के लिठकचनार के सà¥à¤–ी छाल को हलà¥à¤•ा पीसकर इसे à¤à¤• गà¥à¤²à¤¾à¤¸ पानी में डालकर 2-3 मिनट तक अचà¥à¤›à¥€ तरह गरà¥à¤® करें. इसके बाद इसमें à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š पीसी हà¥à¤ˆ गोरखमà¥à¤‚डी डालकर पà¥à¤¨à¤ƒ 2-3 मिनट तक उबालें. इसके ठंडा हो जाने पर नियमित रूप से दिन में दो बार लें. इससे गिलà¥à¤Ÿà¥€ में राहत मिलेगी.
बरगद का दूध
बरगद के वृकà¥à¤· का हमारे यहाठधारà¥à¤®à¤¿à¤• महतà¥à¤¤à¥à¤µ à¤à¥€ है. बरगद के दूध का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² आप गिलà¥à¤Ÿà¥€ के उपचार के लिठकर सकते हैं. दरअसल बरगद के पेड़ का दूध जब आप गिलà¥à¤Ÿà¥€ पर लगाते हैं तो आपको इससे काफी राहत मिलती है.
गरम कपड़े की सेकाई
गिलà¥à¤Ÿà¥€ के सरà¥à¤µà¤¾à¤§à¤¿à¤• आसान घरेलॠउपायों में से à¤à¤• ये है कि आप à¤à¤• मोटा कपड़ा लेकर उसे हलà¥à¤•ा गरà¥à¤® करके गिलà¥à¤Ÿà¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ की कम से कम 5 मिनट तक कà¥à¤› दिन तक सिकाई करें. इससे à¤à¥€ गिलà¥à¤Ÿà¥€ से छà¥à¤Ÿà¤•ारा मिलने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ रहती है.
नेनà¥à¤† का पतà¥à¤¤à¤¾
नेनà¥à¤† जिसे कई जगह तोरइ à¤à¥€ कहते हैं, का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² सबà¥à¤œà¥€ के लिठकिया जाता है लेकिन इसके पतà¥à¤¤à¥‡ को आप गिलà¥à¤Ÿà¥€ के उपचार के लिठइसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकते हैं. नेनà¥à¤† के पतà¥à¤¤à¥‡ के रस में गà¥à¥œ मिलाकर इसका लेप बनाà¤à¤‚ और इसे गिलà¥à¤Ÿà¥€ पर लगाà¤à¤‚.
अरंडी का तेल
अरंडी का तेल कई रोगों में औषधि के रूप में इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² होता है. गिलà¥à¤Ÿà¥€ में बà¤à¥€ इसका इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जा सकता है. इसके लिठआपको सà¥à¤¬à¤¹-शाम नियमति रूप से गिलà¥à¤Ÿà¥€ वाले सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर अरंडी के तेल से मालिश करनी होगी.
पà¥à¤¯à¤¾à¤œ
पà¥à¤¯à¤¾à¤œ का उपयोग सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ सलादों आदि में किया जाता रहा है. लेकिन कà¥à¤¯à¤¾ आपको पता है कि इसकी सहायता से गिलà¥à¤Ÿà¥€ को बà¤à¥€ दूर किया जा सकता है. इसके लिठपà¥à¤¯à¤¾à¤œ को मिकà¥à¤¸à¥€ में पीसकर इसे हलà¥à¤•ा à¤à¥‚रा होने तक à¤à¥à¤¨à¥‡à¤‚. इसके बाद इसे गिलà¥à¤Ÿà¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में लगाकर इसे कपड़े से बाà¤à¤§ लें.
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