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पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• गरà¥à¤ संसà¥à¤•ार का महतà¥à¤µ, पà¥à¥‡à¤‚ इसे करने की विधि
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾, पà¥à¤°à¤¸à¤µ के दौरान और जब तक आपका बचà¥à¤šà¤¾ दो वरà¥à¤· का नहीं हो जाता है, तब तक आपको अपने बचà¥à¤šà¥‡ के बारे में सबकà¥à¤› जानने की जरूरत है। पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ शासà¥à¤¤à¥à¤° और आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला के आहार, योग और नियमित शरीर की देखà¤à¤¾à¤² के नà¥à¤¸à¥à¤–े के साथ-साथ पठन सामगà¥à¤°à¥€ और संगीत को सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ के लिठà¤à¥€ निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶ दिठगठहैं और इसे गरà¥à¤à¤¸à¤‚सà¥à¤•ार कहा गया है। तो चलिठआज हम आपको गरà¥à¤à¤¸à¤‚सà¥à¤•ार और उसके लाà¤à¥‹à¤‚ के बारे में विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से बताते हैं।
गरà¥à¤à¤¸à¤‚सà¥à¤•ार कà¥à¤¯à¤¾ है?
हर माता-पिता अपने बचà¥à¤šà¥‡ के लिठसबसे अचà¥à¤›à¤¾ चाहते हैं। बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के बाद à¤à¥€ सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रहने के लिठसà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ आवशà¥à¤¯à¤• है। गरà¥à¤à¤¸à¤‚सà¥à¤•ार ने शिशॠके मानसिक और शारीरिक विकास में योगदान के रूप में लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ की है। गरà¥à¤à¤¸à¤‚सà¥à¤•ार के बारे में पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ के लिखा गया है और इसे आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में à¤à¥€ शामिल किया गया है। संसà¥à¤•ृत में गरà¥à¤ शबà¥à¤¦ गरà¥à¤ में à¤à¥à¤°à¥‚ण को संदरà¥à¤à¤¿à¤¤ करता है, और संसà¥à¤•ार का अरà¥à¤¥ है मन की शिकà¥à¤·à¤¾à¥¤ तो, गरà¥à¤ संसà¥à¤•ार का अरà¥à¤¥ हà¥à¤† अजनà¥à¤®à¥‡ बचà¥à¤šà¥‡ के दिमाग को शिकà¥à¤·à¤¿à¤¤ करने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¥¤à¤ªà¤¾à¤°à¤‚परिक रूप से यह माना जाता है कि गरà¥à¤ में बचà¥à¤šà¥‡ का मानसिक और वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• विकास शà¥à¤°à¥‚ हो जाता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वह मां की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होता है। आदिकाल से ही यह पà¥à¤°à¤¥à¤¾ हिनà¥à¤¦à¥‚ परंपरा का हिसà¥à¤¸à¤¾ रही है और उदाहरण के तौर पर देखे तो गरà¥à¤à¤¸à¤‚सà¥à¤•ार का असर अà¤à¤¿à¤®à¤¨à¥à¤¯à¥, अषà¥à¤Ÿà¤•à¥à¤°à¤¾ और पà¥à¤°à¤¹à¥à¤²à¤¾à¤¦ जैसे पौराणिक चरितà¥à¤°à¥‹à¤‚ पर बहà¥à¤¤ सकारातà¥à¤®à¤• रूप में पड़ा था, जैसा की कहानियों में सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ किया गया है की ये अपनी माता के गरà¥à¤ से ही जà¥à¤žà¤¾à¤¨ अरà¥à¤œà¤¿à¤¤ कर के आये थे।गरà¥à¤à¤¸à¤‚सà¥à¤•ार को बचà¥à¤šà¥‡ को लाठपहà¥à¤‚चाने के लिठमाना जाता है, बलà¥à¤•ि यह केवल बचà¥à¤šà¥‡ पर केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ नहीं है। ये अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करते हैं कि मां सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रहे और मन की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ सकारातà¥à¤®à¤• हो। गरà¥à¤à¤¸à¤‚सà¥à¤•ार के अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ के जरिठगरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं के आहार और जीवन शैली में परिवरà¥à¤¤à¤¨ करने के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ किया जाता है।गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ होने पर गरà¥à¤ संसà¥à¤•ार कब शà¥à¤°à¥‚ करें
गरà¥à¤ संसà¥à¤•ार केवल गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान की जाने वाली देखà¤à¤¾à¤² के बारे में नहीं है, बलà¥à¤•ि गरà¥à¤-धारण से कम से कम à¤à¤• वरà¥à¤· पहले तैयारी शà¥à¤°à¥‚ करने के विषय में है। ‘गरà¥à¤ संसà¥à¤•ार’ सिरà¥à¤« गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ और गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ से संबंधित नहीं है बलà¥à¤•ि इसमें सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ का चरण à¤à¥€ शामिल है, माता-पिता को इसका पालन तब तक करना होता है जब तक बचà¥à¤šà¤¾ लगà¤à¤— 2 वरà¥à¤· का नहीं हो जाता।
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