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पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ के नियम और उपाय ….!
* पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• दमà¥à¤ªà¤¤à¤¿ चाहता हैं कि उसके कम से कम à¤à¤• पà¥à¤¤à¥à¤° अवसà¥à¤¯ हो | पà¥à¤¤à¥à¤° कि चाह में अनेक दमà¥à¤ªà¤¤à¤¿ कई कनà¥à¤¯à¤¾à¤“ को जनà¥à¤® देते रहते हैं और पà¥à¤¤à¥à¤° कि चाह में अपने परिवार को बढ़ाते चले जाते हैं |
* निराश दमà¥à¤ªà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठटोने – टोटको के साथ हे दरà¥à¤œà¤¼à¤¨à¥‹ औषधिया à¤à¥€ यहाठदी जा रही हैं | इनमे से अधिकांश औषधियों का चयन पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ गà¥à¤°à¤‚थो से किया गया हैं और वैदà¥à¤¯à¥‹à¤‚ à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤—करà¥à¤¤à¤¾ इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पूरà¥à¤£ सफल और अनà¥à¤à¤µ सिदà¥à¤§ à¤à¥€ मानते हैं | कà¥à¤› मंतà¥à¤°à¥‹ के विधान से à¤à¥€ और निषà¥à¤ ां पूरà¥à¤µà¤• किया गया बà¥à¤°à¤¤ à¤à¥€ फलदायी होता है …!
* कà¥à¤› राते ये à¤à¥€ है जिसमे हमें समà¥à¤à¥‹à¤— करने से बचना चाहिठ.. जैसे अषà¥à¤Ÿà¤®à¥€, à¤à¤•ादशी, तà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤¦à¤¶à¥€, चतà¥à¤°à¥à¤¦à¤¶à¥€, पूरà¥à¤£à¤¿à¤®à¤¾ और अमवाशà¥à¤¯à¤¾ .चनà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾à¤µà¤¤à¥€ ऋषि का कथन है कि लड़का-लड़की का जनà¥à¤® गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ के समय सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€-पà¥à¤°à¥à¤· के दायां-बायां शà¥à¤µà¤¾à¤¸ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, पिंगला-तूड़ा नाड़ी, सूरà¥à¤¯à¤¸à¥à¤µà¤° तथा चनà¥à¤¦à¥à¤°à¤¸à¥à¤µà¤° की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पर निरà¥à¤à¤° करता है।गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ के समय सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ का दाहिना शà¥à¤µà¤¾à¤¸ चले तो पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ तथा बायां शà¥à¤µà¤¾à¤¸ चले तो पà¥à¤¤à¥à¤° होगा।
* यदि आप पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करना चाहते हैं और वह à¤à¥€ गà¥à¤£à¤µà¤¾à¤¨, तो हम आपकी सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ के लिठहम यहाठमाहवारी के बाद की विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ रातà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ जानकारी दे रहे हैं।मासिक धरà¥à¤® शà¥à¤°à¥‚ होने के पà¥à¤°à¤¥à¤® चार दिवसों में संà¤à¥‹à¤— से पà¥à¤°à¥‚ष रà¥à¤—à¥à¤£à¤¤à¤¾(रोग ) को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होता है. पांचवी रातà¥à¤°à¤¿ से संतान उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करने की विधि करनी चाहिठ.
* इस समय में पà¥à¤°à¥‚ष का दायां à¤à¤µà¤® सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ का बांया सà¥à¤µà¤° ही चलना चाहिये, यह अतà¥à¤¯à¤‚त अनà¥à¤à¥‚त और अचूक उपाय है जो खाली नही जाता. इसमे धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देने वाली बात यह है कि पà¥à¤°à¥à¤· का जब दाहिना सà¥à¤µà¤° चलता है तब उसका दाहिना अंडकोशः अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं का विसरà¥à¤œà¤¨ करता है जिससे कि अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में पà¥à¤²à¥à¤²à¤¿à¤— शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ निकलते हैं. अत: पà¥à¤¤à¥à¤° ही उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होता है.
* अगर दंपति की जनà¥à¤®à¤•à¥à¤‚डली के दोषों से संतान पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होने में दिकà¥à¤•त आरही हो तो बाधा दूर करने के लिये संतान गोपाल के सवा लाख जप करने चाहिये. यदि संतान मे सूरà¥à¤¯ बाधा कारक बन रहा हो तो हरिवंश पà¥à¤°à¤¾à¤£ का शà¥à¤°à¤µà¤£ करें, राहॠबाधक हो तो कà¥à¤¨à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¨ से, केतॠबाधक हो तो गोदान से, शनि या अमंगल बाधक बन रहे हों तो रूदà¥à¤°à¤¾à¤à¤¿à¤·à¥‡à¤• से संतान पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ में आने वाली बाधायें दूर की जा सकती हैं.
* मासिक सà¥à¤°à¤¾à¤µ अंतिम दिन (ऋतà¥à¤•ाल) के बाद 6, 8, 10, 12, 14 à¤à¤µà¤‚ 16वीं रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ से पà¥à¤¤à¥à¤° तथा 5, 7, 9, 11, 13 à¤à¤µà¤‚ 15वीं रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ से कनà¥à¤¯à¤¾ जनà¥à¤® लेती है।
१- चौथी रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से पैदा पà¥à¤¤à¥à¤° अलà¥à¤ªà¤¾à¤¯à¥ और दरिदà¥à¤° होता है।
२- पाà¤à¤šà¤µà¥€à¤‚ रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से जनà¥à¤®à¥€ कनà¥à¤¯à¤¾ à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में सिरà¥à¤« लड़की पैदा करेगी।
३- छठवीं रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से मधà¥à¤¯à¤® आयॠवाला पà¥à¤¤à¥à¤° जनà¥à¤® लेगा।
४- सातवीं रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से पैदा होने वाली कनà¥à¤¯à¤¾ बांठहोगी।
५- आठवीं रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से पैदा पà¥à¤¤à¥à¤° à¤à¤¶à¥à¤µà¤°à¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¥€ होता है।
६- नौवीं रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से à¤à¤¶à¥à¤µà¤°à¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¤¿à¤¨à¥€ पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ पैदा होती है।
à¥- दसवीं रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से चतà¥à¤° पà¥à¤¤à¥à¤° का जनà¥à¤® होता है।
८- गà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤¹à¤µà¥€à¤‚ रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से चरितà¥à¤°à¤¹à¥€à¤¨ पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ पैदा होती है।
९- बारहवीं रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® पà¥à¤¤à¥à¤° जनà¥à¤® लेता है।
१०- तेरहवीं रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से वरà¥à¤£à¤¸à¤‚कर पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ जनà¥à¤® लेती है।
११- चौदहवीं रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से उतà¥à¤¤à¤® पà¥à¤¤à¥à¤° का जनà¥à¤® होता है।
१२- पंदà¥à¤°à¤¹à¤µà¥€à¤‚ रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¤µà¤¤à¥€ पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ पैदा होती है।
१३- सोलहवीं रातà¥à¤°à¤¿ के गरà¥à¤ से सरà¥à¤µà¤—à¥à¤£ संपनà¥à¤¨, पà¥à¤¤à¥à¤° पैदा होता है।
* सहवास से निवृतà¥à¤¤ होते ही पतà¥à¤¨à¥€ को दाहिनी करवट से 10-15 मिनट लेटे रहना चाहिà¤, à¤à¤® दम से नहीं उठना चाहिà¤à¥¤
संतान गोपाल मंतà¥à¤° :-* पति-पतà¥à¤¨à¥€ दोनों सà¥à¤¬à¤¹ सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ कर पूरी पवितà¥à¤°à¤¤à¤¾ के साथ इस मंतà¥à¤° का जप तà¥à¤²à¤¸à¥€ की माला से करें।
†ॠशà¥à¤°à¥€à¤‚ हà¥à¤°à¥€à¤‚ कà¥à¤²à¥€à¤‚ गà¥à¤²à¥Œà¤‚ देवकीसà¥à¤¤ गोविनà¥à¤¦ वासà¥à¤¦à¥‡à¤µ जगतà¥à¤ªà¤¤à¥‡ देहि मे तनयं कृषà¥à¤£ तà¥à¤µà¤¾à¤®à¤¹à¤‚ शरणं गतः ।â€
* इस मंतà¥à¤° का बार रोज 108 जाप करे और मंतà¥à¤° जप के बाद à¤à¤—वान से समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ à¤à¤¾à¤µ से निरोग, दीरà¥à¤˜à¤œà¥€à¤µà¥€, अचà¥à¤›à¥‡ चरितà¥à¤°à¤µà¤¾à¤²à¤¾, सेहतमंद पà¥à¤¤à¥à¤° की कामना करें।
* अपने कमरे में शà¥à¤°à¥€ कृषà¥à¤£ à¤à¤—वान की बाल रूप की फोटो लगाये या लडà¥à¤¡à¥‚ गोपाल को रोज माखन मिसरी की à¤à¥‹à¤— अरà¥à¤ªà¤£ करे.
* कई बार पà¥à¤°à¤¾à¤¯à¤ƒ देखने में आया है की विवाह के वरà¥à¤·à¥‹ बाद à¤à¥€ गरà¥à¤ धारण नहीं हो पाता या बार-बार गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ हो जाता है, जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤· में इस समसà¥à¤¯à¤¾ या दोष का à¤à¤• पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण पति या पतà¥à¤¨à¥€ की कà¥à¤‚डली में संतान दोष अथवा पितृ दोष हो सकता है या घर का वासà¥à¤¤à¥à¤¦à¥‹à¤· à¤à¥€ होता है, जिसके कारण गरà¥à¤ धारण नहीं हो पाता या बार-बार गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ हो जाता है
पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ का गणपति मंतà¥à¤° :-
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शà¥à¤°à¥€ गणपति की मूरà¥à¤¤à¤¿ पर संतान पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ की इचà¥à¤›à¥à¤• महिला पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ सà¥à¤¨à¤¾à¤¨à¤¾à¤¦à¤¿ से निवृत होकर à¤à¤• माह तक बिलà¥à¤¬ फल चढ़ाकर इस मंतà¥à¤° की 11 माला पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ जपने से संतान पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ होती है।
| ॠपारà¥à¤µà¤¤à¥€à¤ªà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¨à¤‚दनाय नम: |
पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ के लिठमंतà¥à¤° संतान गणपति सà¥à¤¤à¥‹à¤¤à¥à¤°:-
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पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ के लिठसंतान गणपति सà¥à¤¤à¥‹à¤¤à¥à¤°
नमो सà¥à¤¤à¥ गणनाथाय सिदà¥à¤§à¤¿à¤¬à¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤¯à¥à¤¤à¤¾à¤¯ च ।
सरà¥à¤µà¤ªà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¯ देवाय पà¥à¤¤à¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¦à¥à¤§à¤¿à¤ªà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¯ च ।।
गà¥à¤°à¥‚दराय गà¥à¤°à¤µà¥‡ गोपà¥à¤¤à¥à¤°à¥‡ गà¥à¤¹à¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤¿à¤¤à¤¾à¤¯ ते ।
गोपà¥à¤¯à¤¾à¤¯ गोपिताशेषà¤à¥à¤µà¤¨à¤¾ चिदातà¥à¤®à¤¨à¥‡ ।।
विŸवमूलाय à¤à¤µà¥à¤¯à¤¾à¤¯ विŸवसृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•राय ते ।
नमो नमसà¥à¤¤à¥‡ सतà¥à¤¯à¤¾à¤¯ सतà¥à¤¯à¤ªà¥‚रà¥à¤£à¤¾à¤¯ शà¥à¤£à¥à¤¡à¤¿à¤¨à¥‡ ।।
à¤à¤•दनà¥à¤¤à¤¾à¤¯ शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤¯ सà¥à¤®à¥à¤–ाय नमो नम: ।
पà¥à¤°à¤ªà¤¨à¥à¤¨à¤œà¤¨à¤ªà¤¾à¤²à¤¾à¤¯ पà¥à¤°à¤£à¤¤à¤¾à¤°à¥à¤¤à¤¿à¤µà¤¿à¤¨à¤¾à¤¶à¤¿à¤¨à¥‡ ।।
शरणं à¤à¤µ देवेश संतति सà¥à¤¦à¥ƒà¤¢à¤¾à¤‚ कà¥à¤°à¥‚ ।
à¤à¤µà¤·à¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤à¤¿ च ये पà¥à¤¤à¥à¤°à¤¾ मतà¥à¤•à¥à¤²à¥‡ गणनायक ।।
ते सरà¥à¤µà¥‡ तव पूजारà¥à¤¥à¥‡ निरता: सà¥à¤¯à¥à¤°à¥à¤µà¤°à¥‹ मत: ।
पà¥à¤¤à¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¦à¤®à¤¿à¤¦à¤‚ सà¥à¤¤à¥‹à¤¤à¥à¤°à¤‚ सरà¥à¤µà¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§à¤ªà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¯à¤•मॠ।।
शिब महिमा सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ से पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤—:-
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* सावन में à¤à¤—वान पारà¥à¤¥à¤¿à¤µ लिंग के अà¤à¤¿à¤·à¥‡à¤• करना और शिव की पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨à¤¤à¤¾ के लिठशिव सà¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ और सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ का पाठकरने का विशेष महतà¥à¤µ है। इन सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤à¥‹à¤‚ में शिव महिमà¥à¤° सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ सबसे पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ माना जाता है। इस सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ का पूरा पाठतो शà¥à¤ फल देने वाला है ही, बलà¥à¤•ि यह à¤à¤¸à¤¾ देव सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ है, जिसका कामना विशेष की पूरà¥à¤¤à¤¿ के लिठपà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— à¤à¥€ निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ फल देने वाला होता है। शिव महिमà¥à¤° सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ के इन पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤—ों में à¤à¤• है – पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤—। पà¥à¤¤à¥à¤° की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ दांपतà¥à¤¯ जीवन का सबसे बड़ा सà¥à¤– माना जाता है। इसलिठहर दंपतà¥à¤¤à¤¿ ईशà¥à¤µà¤° से पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ की कामना करता है। अनेक नि:संतान दंपतà¥à¤¤à¤¿ à¤à¥€ पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ के लिठधारà¥à¤®à¤¿à¤• उपाय अपनाते हैं। शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में शिव महिमà¥à¤° सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ के पाठसे पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ का उपाय बताया है।
जानते है पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— विधि –
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* पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ का यह उपाय विशेष तौर पर सावन माह से शà¥à¤°à¥ करें।
* सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ और पà¥à¤°à¥à¤· दोनों सà¥à¤¬à¤¹ जलà¥à¤¦à¥€ उठे। सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ इस दिन उपवास रखे।
* पति-पतà¥à¤¨à¥€ दोनों साथ मिलकर गेंहू के आटे से ११ पारà¥à¤¥à¤¿à¤µ लिंग बनाà¤à¥¤ पारà¥à¤¥à¤¿à¤µ लिंग विशेष मिटà¥à¤Ÿà¥€ के बनाठजाते हैं।
* पारà¥à¤¥à¤¿à¤µ लिंग को बनाने के बाद इनका शिव महिमà¥à¤° सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ के शà¥à¤²à¥‹à¤•ों से पूजा और अà¤à¤¿à¤·à¥‡à¤• के ११ पाठसà¥à¤µà¤¯à¤‚ करें। अगर à¤à¤¸à¤¾ संà¤à¤µ न हो तो पूजा और अà¤à¤¿à¤·à¥‡à¤• के लिठसबसे शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ उपाय है कि यह करà¥à¤® किसी विदà¥à¤µà¤¾à¤¨ बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¤£ से कराà¤à¤‚। पारà¥à¤¥à¤¿à¤µ लिंग निरà¥à¤®à¤¾à¤£ और पूजा à¤à¥€ बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¤£ के बताठअनà¥à¤¸à¤¾à¤° कर सकते हैं।
* पारà¥à¤¥à¤¿à¤µ लिंग के अà¤à¤¿à¤·à¥‡à¤• का पवितà¥à¤° जल पति-पतà¥à¤¨à¥€ दोनों पीà¤à¤‚ और शिव से पà¥à¤¤à¥à¤° पाने के लिठपà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ करें।
* यह पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— २१ या ४१ दिन तक पूरी शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ और à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ से करने पर शिव कृपा से पà¥à¤¤à¥à¤° जनà¥à¤® की कामना शीघà¥à¤° ही पूरी होती है।
पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ के कà¥à¤› उपाय:-
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* यदि कनà¥à¤¯à¤¾ के बाद पà¥à¤¤à¥à¤° कि कामना हो तो ये पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करें – उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हà¥à¤ˆ कनà¥à¤¯à¤¾ का विदिवत पूजन करें | उसे नमसà¥à¤•ार करें और बनà¥à¤§à¥ – बांधवों को खीर à¤à¤µà¤‚ जलेबी का à¤à¥‹à¤œà¤¨ कराठ| à¤à¤¸à¤¾ करने से à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में पà¥à¤¤à¥à¤° अवसà¥à¤¯ होता हैं |
* जिस सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ के पहली संतान लड़का हो, उस लड़के कि नाल जो नि: संतान सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ खोलती हैं, वह अवसà¥à¤¯ ही पà¥à¤¤à¥à¤° रतà¥à¤¨ से विà¤à¥‚षित होगी |
* पीपल का वृकà¥à¤· जिस शमी के उपर उग रहा हो, उस वृकà¥à¤· के नीचे जाकर पति – पतà¥à¤¨à¥€ दोनों अपनी मनोकामना पà¥à¤°à¤•ट करते हà¥à¤ वृकà¥à¤· का सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ वॠपà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® कर यह संकलà¥à¤ª करे कि †गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ होने तथा पà¥à¤‚सवन के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ जब पà¥à¤¤à¥à¤°à¤°à¤¤à¥à¤¨ की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ होगी, तब | मà¥à¤‚डन – संसà¥à¤•ार | यहीं पर आक की छाया में बैठकर कराà¤à¤—े | इस टोटके को करने से बंधà¥à¤¯à¤¾ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ à¤à¥€ पà¥à¤¤à¥à¤° – रतà¥à¤¨ को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर लेती हैं |
* पà¥à¤·à¥à¤¯ नकà¥à¤·à¤¤à¥à¤° में असगनà¥à¤§ की जड़ को उखाड़कर गाय के दूध के साथ सिल पर पीसकर पीने से दूध का आहार, ऋतà¥à¤•ाल के उपरांत शà¥à¤¦à¥à¤§ होने पर पीते रहने से, सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ की पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ की अà¤à¤¿à¤²à¤¾à¤·à¤¾ अवसà¥à¤¯ पूरण हो जाती हैं |
* पलाश (टेशू) के पांच कोमल पतà¥à¤¤à¥‡ किसी सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ के दूध में पीसे और जो बांठसà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ मासिक धरà¥à¤® के चोथे दिन सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ करके उसे खा लेगी, वह निशà¥à¤šà¤¯ हैं पà¥à¤¤à¥à¤° की माता बनने का सोà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करती हैं | ताकतवर और गोरे पà¥à¤¤à¥à¤° के लिठगरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ सà¥â€à¤¤à¥à¤°à¥€ को पलाश के à¤à¤• पतà¥â€à¤¤à¥‡ को लेकर पीसकर गाय के दूध के साथ रोज पीना चाहिà¤à¥¤
शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ और मनचाही संतान पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ के लिठकरें यह उपाय:-
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* यदि किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को संतान पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ में समसà¥à¤¯à¤¾ आ रही हो, तो à¤à¤¸à¥‡ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ इस लेख में लिखे गये सरल उपायों को अपना कर संतान की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ अति ही सहजता के साथ कर सकते हैं। किंतॠउपायों को अति सावधानी से व शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ के साथ करना अति आवशà¥à¤¯à¤• होता है।
उपाय निमà¥à¤¨à¤µà¤¤ हैं:
* दंपति को गà¥à¤°à¥à¤µà¤¾à¤° का वà¥à¤°à¤¤ रखना चाहिà¤à¥¤
* गà¥à¤°à¥à¤µà¤¾à¤° के दिन पीले वसà¥à¤¤à¥à¤° धारण करें, पीली वसà¥à¤¤à¥à¤“ं का दान करें यथासंà¤à¤µ पीला à¤à¥‹à¤œà¤¨ ही करें।
* माता बनने की इचà¥à¤›à¥à¤• महिला को चाहिठगà¥à¤°à¥à¤µà¤¾à¤° के दिन गेंहू के आटे की 2 मोटी लोई बनाकर उसमें à¤à¥€à¤—ी चने की दाल और थोड़ी सी हलà¥à¤¦à¥€ मिलाकर नियमपूरà¥à¤µà¤• गाय को खिलाà¤à¤‚।
* शà¥à¤•à¥à¤² पकà¥à¤· में बरगद के पतà¥à¤¤à¥‡ को धोकर साफ करके उस पर कà¥à¤‚कà¥à¤® से सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¤à¤¿à¤• बनाकर उस पर थोड़े से चावल और à¤à¤• सà¥à¤ªà¤¾à¤°à¥€ रखकर सूरà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥à¤¤ से पहले किसी मंदिर में अरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ कर दें और पà¥à¤°à¤à¥ से संतान का वरदान देने के लिठपà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ करें निशà¥à¤šà¤¯ ही संतान की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ होगी ।
* गà¥à¤°à¥à¤µà¤¾à¤° के दिन पीले धागे में पीली कौड़ी को कमर में बांधने से संतान पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ का पà¥à¤°à¤¬à¤² योग बनता है।
* माता बनने की इचà¥à¤›à¥à¤• महिला को पारद शिवलिंग का रोजाना दूध से अà¤à¤¿à¤·à¥‡à¤• करें उतà¥à¤¤à¤® संतान की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ होगी ।
* हर गà¥à¤°à¥à¤µà¤¾à¤° को à¤à¤¿à¤–ारियों को गà¥à¤¡à¤¼ का दान देने से à¤à¥€ संतान सà¥à¤– पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होता है ।
* पूरà¥à¤µà¤¾à¤«à¤¾à¤²à¥à¤—à¥à¤¨à¥€ नकà¥à¤·à¤¤à¥à¤° में आम की जड़ को लाकर उसे दूध में घिसकर सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ को पिलाà¤à¤‚ यह सिदà¥à¤§ à¤à¤‚वम परीकà¥à¤·à¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— है ।
* रविवार को छोड़कर अनà¥à¤¯ सà¤à¥€ दिन निसंतान सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ यदि पीपल पर दीपक जलाठऔर उसकी परिकà¥à¤°à¤®à¤¾ करते हà¥à¤ संतान की पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ करें उसकी इचà¥à¤›à¤¾ अति शीघà¥à¤° पूरी होगी ।
* शà¥à¤µà¥‡à¤¤ लकà¥à¤·à¥à¤®à¤£à¤¾ बूटी की 21 गोली बनाकर उसे नियमपूरà¥à¤µà¤• गाय के दूध के साथ लेने से संतान सà¥à¤– की अवशà¥à¤¯ ही पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ होती है ।
* उतà¥à¤¤à¤° फालà¥à¤—à¥à¤¨à¥€ नकà¥à¤·à¤¤à¥à¤° में नीम की जड़ लाकर सदैव अपने पास रखने से निसंतान दमà¥à¤ªà¤¤à¤¿ को संतान सà¥à¤– अवशà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होता है ।
* नींबू की जड़ को दूध में पीसकर उसमे शà¥à¤¦à¥à¤§ देशी घी मिला कर सेवन करने से पà¥à¤¤à¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बड़ जाती है ।
* पहली बार बà¥à¤¯à¤¾à¤¹à¥€ गाय के दूध के साथ नागकेसर के चूरà¥à¤£ का लगातार 7 दिन सेवन करने से संतान पà¥à¤¤à¥à¤° उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होता है ।
* सवि ( सांवा) का à¤à¤¾à¤¤ और मà¥à¤‚ग की दाल खाने से बांठपन दूर होता है और पà¥à¤¤à¥à¤° रतà¥à¤¨ की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ होती है ।
* गरà¥à¤ का जब तीसरा महीना चल रहा हो तो गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ को शनिवार को थोडा सा जायफल और गà¥à¤¡à¤¼ मिलाकर खिलाने से अवशà¥à¤¯ ही पà¥à¤¤à¥à¤° रतà¥à¤¨ की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ होगी ।
* पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ चावल को धोकर à¤à¤¿à¤—ो दें बनाने से पहले उसके पानी को अलग करके उसमें नीबूं की जड़ को महीन पीसकर उस पानी को सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ पी कर अपने पति से समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§ बनाये वह सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ कनà¥à¤¯à¤¾ को जनà¥à¤® देगी ।
* संतान पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ के लिठपति-पतà¥à¤¨à¥€ दोनों को रामेशà¥à¤µà¤°à¤®à¥ की यातà¥à¤°à¤¾ करनी चाहिठतथा वहां सरà¥à¤ª-पूजन करवाना चाहिà¤à¥¤ इस कारà¥à¤¯ को करने से संतान-दोष समापà¥à¤¤ होता है।
* सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ में कमी के कारण संतान होने में बाधा आ रही हो, तो लाल गाय व बछड़े की सेवा करनी चाहिà¤à¥¤ लाल या à¤à¥‚रा कà¥à¤¤à¥à¤¤à¤¾ पालना à¤à¥€ शà¥à¤ रहता है।
* यदि विवाह के दस या बारह वरà¥à¤· बाद à¤à¥€ संतान न हो, तो मदार की जड़ को शà¥à¤•à¥à¤°à¤µà¤¾à¤° को उखाड़ लें। उसे कमर में बांधने से सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ अवशà¥à¤¯ ही गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ हो जाà¤à¤—ी।
* जब गरà¥à¤ धारण हो गया हो, तो चांदी की à¤à¤• बांसà¥à¤°à¥€ बनाकर राधा-कृषà¥à¤£ के मंदिर में पति-पतà¥à¤¨à¥€ दोनों गà¥à¤°à¥à¤µà¤¾à¤° के दिन चà¥à¤¾à¤¯à¥‡à¤‚ तो गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ का à¤à¤¯/खतरा नहीं होता।
* यदि बार-बार गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ होता है, तो शà¥à¤•à¥à¤°à¤µà¤¾à¤° के दिन à¤à¤• गोमती चकà¥à¤° लाल वसà¥à¤¤à¥à¤° में सिलकर गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला के कमर पर बांध दें। गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ नहीं होगा।
* जिन सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के सिरà¥à¤« कनà¥à¤¯à¤¾ ही होती है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ शà¥à¤•à¥à¤° मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¾ पहना दी जाये, तो à¤à¤• वरà¥à¤· के अंदर ही पà¥à¤¤à¥à¤°-रतà¥à¤¨ की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ होगी।
* यदि बचà¥à¤šà¥‡ न होते हों या होते ही मर जाते हों, तो मंगलवार के दिन मिटà¥à¤Ÿà¥€ की हांडी में शहद à¤à¤°à¤•र शà¥à¤®à¤¶à¤¾à¤¨ में दबायें।
विशेष :-
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à¤à¤¾à¤°à¤¤ में पितृ सतà¥â€à¤¤à¤¾à¤¤à¥â€à¤®à¤• परिवार होने तथा लगà¤à¤— सà¤à¥€ धरà¥à¤®à¥‹à¤‚ में पà¥à¤¤à¥à¤° को विशेषाधिकार पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किये जाने के कारण जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मॉं-बाप की अà¤à¤¿à¤²à¤¾à¤·à¤¾ रहती है कि उनके आंगन में लड़के की किलकारियां अवशà¥â€à¤¯ गूंजे। इसी चाहत का फायदा उठाकर जहां बहà¥à¤¤ से नीम-हकीम लोगों की जेबें ढीली करते रहते हैं, वही बाबा, सà¥â€à¤µà¤¾à¤®à¥€ और तांतà¥à¤°à¤¿à¤•ों को लोगों का शोषण करने का सौà¤à¤¾à¤—à¥â€à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥â€à¤¤ होता रहा है। हालांकि बदलते समय के साथ लड़कियों ने अपनी योगà¥â€à¤¯à¤¤à¤¾ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ यह सिदà¥à¤§ कर दिया है कि वे लड़कों से किसी मामले में कम नहीं होतीं, बावजूद इसके यह à¤à¥‡à¤¡à¤¼à¤šà¤¾à¤² जारी है।
लिखे गठसà¤à¥€ पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— में जो उचित लगे आप किसी पे बà¥à¤§à¤¿ विवेक से निषà¥à¤ ां पूरà¥à¤µà¤• संकलà¥à¤ª के साथ पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करे और बाकी पà¥à¤°à¤à¥ पे छोड दे
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