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कंचनर (Bauhinia variegata) आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ के इलाज के लिठउपयोग की जाने वाली सबसे असरदार जड़ी-बूटी है। यह फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ को सिकोड़ने में मदद करती है। आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में, कंचनर गà¥à¤—à¥à¤—à¥à¤²à¥ नाम का à¤à¤• सूतà¥à¤° है, जिसे गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को रोकने के लिठमानी जाती है।
गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ (Uterine fibroids) सौमà¥à¤¯ टà¥à¤¯à¥‚मर (non-cancerous growth) होते हैं जो गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ में बढ़ते हैं और ये हैवी पीरियड (अधिक बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग), दरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤• सेकà¥à¤¸ और कà¥à¤°à¥ˆà¤®à¥à¤ªà¤¿à¤‚ग यानी à¤à¤‚ठन का कारण बनते हैं। आम à¤à¤¾à¤·à¤¾ में इसे रसौली की समसà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ कहा जाता है। फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ किसी à¤à¥€ संखà¥à¤¯à¤¾ में हो सकते हैं और उनके आकार à¤à¥€ à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ होते हैं। इसे मेडिकल साइंस में लेयोमायोमा à¤à¥€ कहा जाता है। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में महिलाओं को बार-बार गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ और यहां तक कि बांà¤à¤ªà¤¨ की समसà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ हो सकती है। गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ संखà¥à¤¯à¤¾ और आकार के साथ इनके सà¤à¥€ में लकà¥à¤·à¤£ à¤à¥€ à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ होते हैं। सà¤à¥€ महिलाओं में गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ के लकà¥à¤·à¤£ नहीं होते हैं। यह आमतौर पर दरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤• नहीं होता है और कई महिलाओं को तो ये à¤à¥€ नहीं पता होता है कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ है या नहीं। फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ के कारण अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ से आयरन की कमी वाला à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ हो जाता है।
अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ 30 वरà¥à¤· से अधिक उमà¥à¤° की 20-50% महिलाओं में देखा जाता है जो बिना किसी लकà¥à¤·à¤£ के उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होने के कारण अनियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ हो सकते हैं। उनकी हेलà¥à¤¥ कंडीशन के आधार पर गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के हो सकते हैं। बहरहाल, यहां हम आपको इस समसà¥à¤¯à¤¾ को दूर करने के लिठकà¥à¤› आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• जड़ी-बूटियों के जरिठघरेलू नà¥à¤¸à¥à¤–े बता रहे हैं।
​कंचनर (Bauhinia variegata)
कंचनर (Bauhinia variegata) आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ के इलाज के लिठउपयोग की जाने वाली सबसे असरदार जड़ी-बूटी है। यह फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ को सिकोड़ने में मदद करती है। आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में, कंचनर गà¥à¤—à¥à¤—à¥à¤²à¥ नाम का à¤à¤• सूतà¥à¤° है, जिसे गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को रोकने के लिठमानी जाती है। कांचनार की छाल का काढ़ा इस समसà¥à¤¯à¤¾ का समाधान कर सकता है।
आमतौर पर आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• चिकितà¥à¤¸à¤• इसकी छाल के काढ़े की सलाह देते हैं। 10 गà¥à¤°à¤¾à¤® छाल के चूरà¥à¤£ और 160 गà¥à¤°à¤¾à¤® पानी से छाल का काढ़ा तैयार किया जाता है। हालांकि, इसे आजमाने से पहले आप किसी आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• चिकितà¥à¤¸à¤• से परामरà¥à¤¶ लें। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि हर à¤à¤• मामला अलग हो सकता है और उपचार के लिठà¤à¤• अलग दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है।
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बà¥à¤²à¥ˆà¤• कोहोश (Actaea racemosa)
बà¥à¤²à¥ˆà¤• कोहोश (à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‡à¤¯à¤¾ रेसमोसा) बà¥à¤²à¥ˆà¤• कोहोश (à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‡à¤¯à¤¾ रेसमोसा)
बà¥à¤²à¥ˆà¤• कोहोश à¤à¤• अदà¥à¤à¥à¤¤ पौधा है जो सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ रोग संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं से निपटता है। यह à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ के सà¥à¤¤à¤° को कम करके और पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨ के सà¥à¤¤à¤° को बढ़ाकर महिला पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ के समà¥à¤šà¤¿à¤¤ कारà¥à¤¯ करता है। à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ के सà¥à¤°à¤¾à¤µ में कमी फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ के विकास को रोकता है और फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ के सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¨à¥‡ का कारण बनता है।
à¤à¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ में, यह पाया गया कि आइसोपà¥à¤°à¥‹à¤ªà¥‡à¤¨à¥‹à¤²à¤¿à¤• बà¥à¤²à¥ˆà¤• कोहोश रजोनिवृतà¥à¤¤à¤¿ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ वाली महिलाओं में गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ के इलाज में अधिक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ है और फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ के आकार को कम करके रजोनिवृतà¥à¤¤à¤¿ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ से राहत देता है। काले कोहोश की जड़ का चूरà¥à¤£ रोजाना चाय या टैबलेट के रूप में सेवन करने से फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ से पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रूप से छà¥à¤Ÿà¤•ारा मिलता है।
​डोंग कà¥à¤µà¤¾à¤ˆ (Angelica Sinensis)
डोंग कà¥à¤µà¤¾à¤ˆ (à¤à¤‚जेलिका साइनेंसिस) डोंग कà¥à¤µà¤¾à¤ˆ (à¤à¤‚जेलिका साइनेंसिस)
डोंग कà¥à¤µà¤¾à¤ˆ à¤à¤• अनà¥à¤¯ महिला-अनà¥à¤•ूल जड़ी बूटी है जिसका उपयोग महिलाओं से संबंधित समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के इलाज के लिठकिया जाता है। यह शरीर में रकà¥à¤¤ परिसंचरण में सà¥à¤§à¤¾à¤° करता है, सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ ऊतकों के विकास की अनà¥à¤®à¤¤à¤¿ देता है और शरीर में किसी à¤à¥€ अनावशà¥à¤¯à¤• ऊतक वृदà¥à¤§à¤¿ को रोकता है।
यह शरीर से विषाकà¥à¤¤ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को निकालता है और इस पà¥à¤°à¤•ार à¤à¤• पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रकà¥à¤¤ शोधक के रूप में कारà¥à¤¯ करता है। गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं को डोंग कà¥à¤µà¤¾à¤ˆ नहीं लेनी चाहिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ की मांसपेशियों पर काम करती है। डोंग कà¥à¤µà¤¾à¤ˆ टैबलेट, कà¥à¤°à¥€à¤®, लोशन, टिंचर और सूखे पाउडर के रूप में उपलबà¥à¤§ है। इसके लंबे समय तक उपयोग या उचà¥à¤š खà¥à¤°à¤¾à¤• लेने से बचना चाहिà¤à¥¤
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चेसà¥à¤Ÿ बेरी (Vitex agnus-castus)
शà¥à¤¦à¥à¤§ बेरी को आमतौर पर विटेकà¥à¤¸ के रूप में जाना जाता है। यह à¤à¤• पारंपरिक जड़ी बूटी है जिसका उपयोग सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ रोग संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं जैसे कि मासिक धरà¥à¤® से पहले के लकà¥à¤·à¤£ (पीà¤à¤®à¤à¤¸), à¤à¤¾à¤°à¥€ रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ, दरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤• माहवारी, रजोनिवृतà¥à¤¤à¤¿ और गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ से निपटने के लिठकिया जाता है।
इसमें à¤à¤• diterpenoids नामक à¤à¤• रसायन होता है जो पिटà¥à¤¯à¥‚टरी गà¥à¤°à¤‚थि को उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ करने वाले डोपामाइन के सà¥à¤°à¤¾à¤µ को बढ़ाता है। इससे पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨ के सà¥à¤¤à¤° में वृदà¥à¤§à¤¿ होती है और शरीर में à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ का सà¥à¤¤à¤° कम हो जाता है, जिससे फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ के आकार में कमी आती है।
इस पौधे की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और फूलों का उपयोग औषधियां और जड़ी-बूटी तैयार करने के लिठकिया जाता है। बेहतर परिणाम दिखाने के लिठVitex को लंबा समय लगता है। चैसà¥à¤Ÿ बेरी हरà¥à¤¬ टैबलेट, कैपà¥à¤¸à¥‚ल, चाय, पाउडर या टिंचर के रूप में उपलबà¥à¤§ है। बेरी के अरà¥à¤• की 30-50 बूंदें दिन में तीन बार लें।
बेहतर परिणाम के लिठइसका नियमित रूप से तीन महीने या उससे अधिक समय तक सेवन करें। गरà¥à¤à¤¨à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• गोलियों का उपयोग करते समय चेसà¥à¤Ÿ बेरी जड़ी बूटी का उपयोग न करें । यदि आप गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ हैं तो चैसà¥à¤Ÿ बेरी जड़ी बूटियों को लेने से पहले चिकितà¥à¤¸à¤•ीय सलाह लें।
हलà¥à¤¦à¥€ (Curcuma longa)
हलà¥à¤¦à¥€ à¤à¤• लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ मसाला है जिसके कई औषधीय लाठà¤à¥€ हैं। करकà¥à¤¯à¥‚मिन इस पौधे का सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ ततà¥à¤µ है जो जड़ों को पीला रंग पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता है। अपने à¤à¤‚टी-माइकà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¿à¤¯à¤² और à¤à¤‚टी-इंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ गà¥à¤£à¥‹à¤‚ के कारण, हलà¥à¤¦à¥€ का उपयोग घाव, तà¥à¤µà¤šà¤¾ के संकà¥à¤°à¤®à¤£, खांसी और सरà¥à¤¦à¥€ के इलाज के लिठà¤à¤• à¤à¤‚टीसेपà¥à¤Ÿà¤¿à¤• के रूप में किया जाता है।
हलà¥à¤¦à¥€ का उपयोग गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ से निपटने के लिठà¤à¥€ किया जाता है। यह अंतःसà¥à¤°à¤¾à¤µà¥€ तंतà¥à¤° पर कारà¥à¤¯ करके फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ के आकार को कम कर सकता है। विटà¥à¤°à¥‹ सà¥à¤Ÿà¤¡à¥€ में पाया गया कि हलà¥à¤¦à¥€ में पाया जाने वाला करकà¥à¤¯à¥‚मिन लेयोमायोमा कोशिकाओं के पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤° को रोकता है और इस पà¥à¤°à¤•ार निषà¥à¤•रà¥à¤· निकाला है कि हलà¥à¤¦à¥€ को गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ लेयोमायोमा के इलाज के लिठवैकलà¥à¤ªà¤¿à¤• चिकितà¥à¤¸à¤¾ के रूप में इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जा सकता है।
सबà¥à¤œà¥€ में हलà¥à¤¦à¥€ मसाले के अलावा आप हलà¥à¤¦à¥€ पाउडर यà¥à¤•à¥à¤¤ कैपà¥à¤¸à¥‚ल à¤à¥€ ले सकती हैं। इसते अतिकà¥à¤¤ हलà¥à¤¦à¥€ का दूध, काढ़ा और चाय में à¤à¥€ इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सेवन कर सकते हैं।
​अदरक (Zingiber officinalis)
अदरक की जड़ à¤à¤• अदà¥à¤à¥à¤¤ जड़ी बूटी है और आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में औषधि के रूप में पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— की जाती है। यह पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ को बढ़ाता है और खांसी और सरà¥à¤¦à¥€ के इलाज के लिठपà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया जाता है। यह पूरे शरीर में बà¥à¤²à¤¡ सरà¥à¤•à¥à¤²à¥‡à¤¶à¤¨ में सà¥à¤§à¤¾à¤° करता है। इसमें à¤à¤‚टी-माइकà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¿à¤¯à¤², à¤à¤‚टी-इंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ और à¤à¤‚टी-ऑकà¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤µ गà¥à¤£ होते हैं। आमतौर पर लोग अदरक की चाय पीते हैं लेकिन आप गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ को ठीक करने के लिठइसकी जड़ा का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया जाता है।
इसके लिठआप 1 इंच लंबी ताजा अदरक की जड़ लें और 2 कप पानी में उबाल लें। इसे 10 मिनट के लिठà¤à¤¸à¥‡ ही छोड़ दें और इसके बाद इसे पिà¤à¤‚। सà¥à¤µà¤¾à¤¦ बढ़ाने के लिठआप इसमें शहद और इलायची मिला सकते हैं। इस चाय का सेवन दिन में 2 बार किया जा सकता है। यह गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को दूर करने में à¤à¥€ मदद करता है। अधिक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ परिणामों के लिठलहसà¥à¤¨ को à¤à¥€ चाय में मिलाया जा सकता है।
​सिंहपरà¥à¤£à¥€ (Taraxicum officinalis)
सिंहपरà¥à¤£à¥€ (टैराकà¥à¤¸à¤¿à¤•म ऑफिसिनैलिस) सिंहपरà¥à¤£à¥€ (टैराकà¥à¤¸à¤¿à¤•म ऑफिसिनैलिस)
डंडेलियन पौधे का उपयोग पारंपरिक औषधीय पौधे के रूप में किया जाता है जिसका उपयोग रकà¥à¤¤ को डिटॉकà¥à¤¸à¥€à¤«à¤¾à¤ˆ करने और हारà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤² संतà¥à¤²à¤¨ बनाठरखने के लिठकिया जाता है। गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ में फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ का विकास हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ के सà¥à¤°à¤¾à¤µ में वृदà¥à¤§à¤¿ के कारण होता है। डंडेलियन जड़ी बूटी à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ के सà¥à¤¤à¤° को कम करती है और शरीर को पोषण देती है।
यह फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ के इलाज के लिठसबसे अचà¥à¤›à¥€ दवाओं में से à¤à¤• मानी जाती है। यह शरीर को पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रूप से डिटॉकà¥à¤¸à¥€à¤«à¤¾à¤ˆ करता है और शरीर को साफ करता है। यह शरीर से अतिरिकà¥à¤¤ à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ को बाहर निकालता है और फाइबà¥à¤°à¥‰à¤à¤¡ को शà¥à¤°à¤¿à¤‚क करता है। डेढ़ कप गरà¥à¤® पानी में 3 चमà¥à¤®à¤š सिंहपरà¥à¤£à¥€ जड़ों की चाय तैयार की जा सकती है। मिशà¥à¤°à¤£ को 15 मिनट तक à¤à¤¸à¥‡ ही रहने दें और फिर छान लें। आराम पाने के लिठरोजाना 3 कप चाय पिà¤à¤‚।
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