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पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚ट महिला के पहला टीका कब लगता है?
पहला टीका गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ पता चलने के तà¥à¤°à¤‚त बाद लगाया जाता है। वहीं, दूसरा टीका à¤à¤• महीने बाद लगाया जाता है। दूसरा टीका तीसरे या चौथे महीने में à¤à¥€ लग सकता है।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में टीकाकरण कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ जरूरी है? | Pregnancy Me Tikakaran
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान महिलाओं के शरीर में विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ तरह के बदलाव आते हैं। इस दौरान उनका शरीर संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• रोगों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ संवेदनशील हो जाता है। à¤à¤¸à¥‡ में गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान मां और शिशॠकी रकà¥à¤·à¤¾ के लिठसिरà¥à¤« पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• à¤à¥‹à¤œà¤¨ और वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® ही काफी नहीं है। कà¥à¤› अनà¥à¤¯ बातों पर à¤à¥€ गौर करने की जरूरत है और टीकाकरण उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ में से à¤à¤• है। गरà¥à¤ में पल रहे शिशॠके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की देखà¤à¤¾à¤² और सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ के लिठगरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ मां को टीके जरूर लगवाने चाहिà¤à¥¤ टीकाकरण से मां और शिशॠदोनों कई पà¥à¤°à¤•ार के संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• रोगों से बचे रहते हैं। टीके लगने से गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला का शरीर à¤à¤‚टीबॉडी बना लेता है, जो बॉडीगारà¥à¤¡ की तरह काम करता है। यह मां के जरिठशिशॠको à¤à¥€ संकà¥à¤°à¤®à¤£ से बचाने में मदद कर सकता है (1)। यही कारण है कि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान टीकाकरण जरूरी है।
सà¤à¥€ गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं को गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान कà¥à¤› गंà¤à¥€à¤° बीमारियों से बचाने के लिठटीका लगवाने की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है। साथ ही डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह से कà¥à¤› अनà¥à¤¯ टीके à¤à¥€ लगवाने चाहिठ:
टीडैप वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ (Tdap) :
टिटनेस, डिपà¥à¤¥à¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ और परà¥à¤Ÿà¥à¤¸à¤¿à¤¸ बहà¥à¤¤ गंà¤à¥€à¤° बीमारियां हैं। गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं और शिशॠको इनसे बचाने के लिठहर गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान Tdap वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ जरूर देनी चाहिà¤à¥¤ इस टीके को लगाने से शिशॠको à¤à¤•साथ टेटनस, काली खांसी और डिपà¥à¤¥à¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से बचाया जा सकता है (6)। इसके अलावा, गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ को टिटनेस टॉकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ (टीटी) के 2 टीके लगाठजाते हैं। टिटनेस टॉकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ का उपयोग टिटनेस के खिलाफ रकà¥à¤·à¤¾ के लिठकिया जाता है। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• दिनों में टीटी-1 का टीका लगाया जाता है और इसके चार हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ के बाद टीटी-2 टीका लगाया जाता है। इसके बाद अगर अगले तीन वरà¥à¤· के अंदर महिला फिर से गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ होती है, तो उसे इस बार सिरà¥à¤« बूसà¥à¤Ÿà¤° टीटी का टीका ही लगाया जाà¤à¤—ा।
इंफà¥à¤²à¥à¤à¤‚जा का टीका :
गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं (दो सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद) की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€, हृदय और फेफड़े फà¥à¤²à¥‚ के कारण पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकते हैं। इससे गंà¤à¥€à¤° बीमारी होने का खतरा रहता है। यह गरà¥à¤ में पल रहे शिशॠके लिठà¤à¥€ हानिकारक हो सकता है। इसलिà¤, इंफà¥à¤²à¥à¤à¤‚जा का टीका लगवाना जरूरी है। अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨à¥‹à¤‚ से पता चलता है कि गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं को दिया जाने वाला इनà¥à¤«à¥à¤²à¥à¤à¤‚जा का टीका 6 महीने की आयॠतक के शिशà¥à¤“ं की इनà¥à¤«à¥à¤²à¥‚à¤à¤‚जा नामक बीमारी को 63% तक कम कर देता है (8)।
वà¥à¤¹à¥‚पिंग कफ (काली खांसी) का टीका :
निमोनिया और मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• की सूजन जैसी की गंà¤à¥€à¤° जटिलताओं के कारण वà¥à¤¹à¥‚पिंग कफ अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤â€Œâ€Œ काली खांसी होती है। यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ गरà¥à¤ में पल रहे शिशॠके लिठखतरनाक हो सकती है (8)। डॉकà¥à¤Ÿà¤°, तीसरी तिमाही (गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के 27 और 36 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के बीच) में जलà¥à¤¦ से जलà¥à¤¦ यह टीका लगवाने की सलाह देते हैं (2)। वैसे Tdap टीके में ही इस रोग का टीका शामिल होता है।
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