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तà¥à¤µà¤šà¤¾ के रोग बहà¥à¤¤ आम हैं
आà¤à¤¤à¥‹à¤‚ और फेफड़ों जैसे तà¥à¤µà¤šà¤¾ का à¤à¥€ लगातार कीटाणà¥à¤“, परजीवियों, à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ करने वाले ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ और चोट से सामना होता रहता है। इसलिठतà¥à¤µà¤šà¤¾ के रोग बहà¥à¤¤ आम हैं। गॉंव में तà¥à¤µà¤šà¤¾ के संकà¥à¤°à¤®à¤£ और रोग बहà¥à¤¤ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होते है। पामा, सà¥à¤•ैबीज़, दाद, जूठआदि से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होना, पायोडरमा और कà¥à¤·à¥à¤ रोग काफी आम है। कही कही सà¥à¤•ैबीज़, दाद और जà¥à¤à¤ इतने आम हैं कि लोग इन पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ à¤à¥€ नहीं देते। इसके अलावा तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर चोटें लगना और à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ à¤à¥€ काफी आम है। तà¥à¤µà¤šà¤¾ के ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° संकà¥à¤°à¤®à¤£ तो रहने के हालात सà¥à¤§à¤°à¤¨à¥‡ से ही कम हो सकते हैं। नहाने धोने के लिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ पानी मिलना, पहनने के लिठज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कपड़े मिलना, बेहतर घर और सà¥à¤µà¤šà¥à¤›à¤¤à¤¾ के बारे में बेहतर समठबनना महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। चूà¤à¤•ि तà¥à¤µà¤šà¤¾ के रोग आसानी से दिखाई देते हैं, इनसे डर और घृणा होती है। इनमें से कई बीमारियों बार-बार होती है। इन बीमारियों में सà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¥‰à¤à¤¡à¤¸ का ज़रूरत से ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² होता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि सà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¥‰à¤‡à¤¡ जलà¥à¤¦à¥€ से आराम पहà¥à¤à¤šà¤¾à¤¤à¥‡ हैं। सà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¥‰à¤‡à¤¡ जो उस समय तो बीमारी में असà¥à¤¥à¤¾à¤ˆ आराम दिला देते है, परनà¥à¤¤à¥ दीरà¥à¤˜ काल के लिठअसल में बीमारी बढ़ा देते हैं।
तà¥à¤µà¤šà¤¾ रोगो के उपयà¥à¤•à¥à¤¤ निदान और इलाज तà¤à¥€ समà¥à¤à¤µ है अगर हमारे पास परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ जानकारी और अनà¥à¤à¤µ हो। सà¥à¤•ैबीज और दाद जैसी आम बीमारियों का à¤à¥€ अकà¥à¤¸à¤° ठीक से निदान और उपचार नहीं हो पाता। ज़ाहिर है तà¥à¤µà¤šà¤¾ की अलग अलग बीमारियों के लिठअलग-अलग इलाजों की ज़रूरत होती है। जैसे कि सà¥à¤•ैबीज, फफूà¤à¤¦ रोधी दवाई से ठीक नहीं हो सकता और à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ रोगाणॠनाशक दवाइयों से ठीक नहीं हो सकती।
तà¥à¤µà¤šà¤¾ की परतें
तà¥à¤µà¤šà¤¾ की दो परतें होती हैं। बाहय à¤à¤ªà¥€à¤¡à¤°à¥à¤®à¤¿à¤¸ में कोशिकाओं की पॉंच तहे होती हैं। ये कोशिकाà¤à¤ घिसती रहती हैं अत - शरीर से इनका बार-बार बदलते रहना ज़रूरी होता है। à¤à¤ªà¥€à¤¡à¤°à¥à¤®à¤¿à¤¸ में न तो खून की पहà¥à¤à¤š होती है और न ही तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाà¤à¤à¥¤ à¤à¤ªà¥€à¤¡à¤°à¥à¤®à¤¿à¤¸ पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ को गà¥à¤°à¤¹à¤£ करने के लिठऔर तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठनीचे की परत यानि डरà¥à¤®à¤¿à¤¸ पर निरà¥à¤à¤° रहती है।
à¤à¤ªà¥€à¤¡à¤°à¥à¤®à¤¿à¤¸ और मैलेनिन
à¤à¤ªà¥€à¤¡à¤°à¥à¤®à¤¿à¤¸ में मैलेनिन नाम का à¤à¤• रंजक होता है और तà¥à¤µà¤šà¤¾ का रंग इसी रंजक के कारण होता है। जितनी ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मैलेनिन की मातà¥à¤°à¤¾ होती है तà¥à¤µà¤šà¤¾ का रंग उतना ही ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गहरा होता है। तà¥à¤µà¤šà¤¾ में कितना मैलेनिन होगा ये वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के गà¥à¤£à¤¸à¥‚तà¥à¤°à¥‹à¤‚ से तय होता है। सूरà¥à¤¯ की रोशनी से कà¥à¤› हद तक ही मैलेनिन की मातà¥à¤°à¤¾ बढ़ती है। इसलिठà¤à¤• ठणà¥à¤¡à¥‡ देश में रह रहे किसी काले वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की तà¥à¤µà¤šà¤¾ गोरी नहीं हो सकती हालॉंकि तà¥à¤µà¤šà¤¾ का रंग थोड़ा हलà¥à¤•ा हो सकता है। इसी तरह गरà¥à¤® देश में रह रहा à¤à¤• गोरे वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की तà¥à¤µà¤šà¤¾ का रंग काला नहीं हो सकता, थोड़ा गहरा ज़रूर हो सकता है। साधारणतय सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में औरतों में पà¥à¤°à¥‚षों के मà¥à¤•ाबले औरतोठमें कम मैलेनिन होता है। तà¥à¤µà¤šà¤¾ का रंग कैरोटनि से à¤à¥€ नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ होता है। कैरोटेन तà¥à¤µà¤šà¤¾ के नीचे सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ वसा की परत में पाया जाता है। इससे रंग में थोड़ा सा पीलापन आ जाता है। दूसरी परत के खून के संचरण से à¤à¥€ तà¥à¤µà¤šà¤¾ को रंग और चमकीलापन मिलता है।
डरà¥à¤®à¤¿à¤¸
डरà¥à¤®à¤¿à¤¸ में कोशिकाà¤à¤ और रेशे दोनों होते है। इसमें धमनियों और खून की सूकà¥à¤·à¥à¤® नलियों का जाल, तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाà¤à¤, पसीने की गà¥à¤°à¤‚थियॉं, और तेल सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करने वाली तेलीय गà¥à¤°à¤‚थियॉं, बालों और पेशियों के जाल सà¤à¥€ होते हैं। इन सà¤à¥€ के कà¥à¤› न कà¥à¤› खास काम होते हैं। पसीने की गà¥à¤°à¤‚थियॉं शरीर में पानी की मातà¥à¤°à¤¾ और तापमान को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका अदा करती है। कà¥à¤› गà¥à¤°à¤‚थियॉं à¤à¤• तेलीय पदारà¥à¤¥ सà¥à¤¤à¥à¤°à¤µà¤¿à¤¤ करती है। यह तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर फैल जाता है और उसको सूखने व चटखने से बचाता है। साबà¥à¤¨ इस परत को हटा देते हैं और तà¥à¤µà¤šà¤¾ को सूखा देते हैं। तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाà¤à¤ दवाब, गरà¥à¤®à¥€, सरà¥à¤¦à¥€ और दरà¥à¤¦ की संवेदना को गà¥à¤°à¤¹à¤£ करती है।
अलग-अलग जगहों जैसे हथेलियॉà¤, तलवे, चेहरे और शरीर के आगे व पीछे के à¤à¤¾à¤— की तà¥à¤µà¤šà¤¾ की मोटाई अलग-अलग होती है। इन सब जगहों में तà¥à¤µà¤šà¤¾ की संवेदनशीलता à¤à¥€ अलग-अलग होती है। हमें शरीर के सामने के हिसà¥à¤¸à¥‡ में मचà¥à¤›à¤° के काटने का अहसास शरीर के पिछले à¤à¤¾à¤— की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जलà¥à¤¦à¥€ व ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ तीवà¥à¤°à¤¤à¤¾ से होता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यहॉं की तà¥à¤µà¤šà¤¾ के तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाà¤à¤ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती हैं।
खà¥à¤œà¤²à¥€ वाली बीमारियाà¤
खà¥à¤œà¤²à¥€ के कई कारण होते है खà¥à¤œà¤²à¥€ तà¥à¤µà¤šà¤¾ की आम शिकायत होती है जो कि सà¥à¤•ैबीज, जà¥à¤“, दाद, पायोडरमा, तेज गरà¥à¤®à¥€, कीड़े के काटने, à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ या तà¥à¤µà¤šà¤¾ के सूख जाने से हो सकती है।
इलाज खà¥à¤œà¤²à¥€ के कारण पर निरà¥à¤à¤° करता है। हम कà¥à¤› समय के लिठखà¥à¤œà¤²à¥€ को किसी à¤à¤¨à¥à¤Ÿà¥€à¤¹à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤®à¤¿à¤¨ दवा (जैसे सीपीà¤à¤®) दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ कर सकते हैं। सीपीà¤à¤® ससà¥à¤¤à¤¾ होता है, असरकारी à¤à¥€ होता है परनà¥à¤¤à¥ इससे थोड़ी सà¥à¤¸à¥à¤¤à¥€ सी आने लगती है। अनà¥à¤¯ दवाइयों जैसे सैटà¥à¤°à¥€à¤œà¥€à¤¨ या टरà¥à¤«à¥‡à¤¨à¤¡à¥€à¤¨ से सà¥à¤¸à¥à¤¤à¥€ नहीं होती पर ये थोड़ी महॅंगी होती है।
सà¥à¤•ैबीज़ (बड़ी खà¥à¤œà¤²à¥€)
खाज यानी सà¥à¤•ैबीज़ à¤à¤• छोटे से कीड़े से होता है। यह तà¥à¤µà¤šà¤¾ में घà¥à¤¸ जाता हे और वहॉं अपनी संखà¥à¤¯à¤¾ बढ़ाता है। ये कीड़ा मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® गीली तà¥à¤µà¤šà¤¾ में घà¥à¤¸ जाता है। बीमारी सीधे समà¥à¤ªà¤°à¥à¤•, कपड़ो या बिसà¥à¤¤à¤° से फैलती है। यह à¤à¤• छूत का रोग है और बहà¥à¤¤ ही तेजी से à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में फैलता है।
चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ लकà¥à¤·à¤£
इसमें मà¥à¤–à¥à¤¯ शिकायत खà¥à¤œà¤²à¥€ की होती है। खà¥à¤œà¤²à¥€ शाम के समय शà¥à¤°à¥‚ होती है और आमतौर पर दिन के समय में कम होती है। शरीर पर केवल कà¥à¤› ही कीड़े होने पर à¤à¥€ खà¥à¤œà¤²à¥€ होती है। सà¥à¤•ैबीज़ अकà¥à¤¸à¤° हाथ से शà¥à¤°à¥‚ होती है। बाद में ये कीड़े कलाइयों, कोहनियों, बगलों, धड़, कमर, जनन अंगो और औरतों में सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में à¤à¥€ पहà¥à¤à¤š जाते हैं। वयसà¥à¤•ों में चेहरा और खोपड़ी आमतौर पर इसके पà¥à¤°à¤•ोप से बच जाते हैं। आपके तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर बिल दिख सकते है। परनà¥à¤¤à¥ कीड़े बहà¥à¤¤ छोटे होते हैं और तà¥à¤µà¤šà¤¾ के अनà¥à¤¦à¤° घà¥à¤¸à¥‡ रहते है। घावों में खासतौर पर शाम को बहà¥à¤¤ à¤à¤¯à¤‚कर खà¥à¤œà¤²à¥€ होती है।
सà¥à¤•ैबीज़ के घाव सूखे हà¥à¤ होते है। अगर उनमें बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से कोई संकà¥à¤°à¤®à¤£ हो जाठतो वो काफी खराब से दिखने लगते हैं कà¥à¤¯à¥‹à¤•ि उनमें पीप होती है। संकà¥à¤°à¤®à¤£ से बà¥à¤–ार à¤à¥€ हो जाता है। सà¥à¤•ैबीज़ à¤à¤• सामाजिक समसà¥à¤¯à¤¾ है और आमतौर पर साफ रहन-सहन के अà¤à¤¾à¤µ में हो जाती है। वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त सफाई का अà¤à¤¾à¤µ, पानी की कमी, थोड़ी सी जगह में बहà¥à¤¤ से लोगों का रहना, बिसà¥à¤¤à¤°à¥‡ व कपड़े मिल-बॉंट कर इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करना और सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ न देना सà¥à¤•ैबीज़ के फैलाने के मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण है। साफ है कि असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¤• या दो रोगियों को इलाज करना काफी नहीं है। हमें पूरे समूह का ही इलाज करना पड़ेगा यही तरीका पूरे समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ में सà¥à¤•ैबीज़ के चकà¥à¤° को तोड़ सकेगा।
इलाज
सफाई और सà¥à¤•ैबीज़ की दवा (परमेथà¥à¤°à¥€à¤¨ ५%) का à¤à¤• घोल तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर लगाना असरकारी होता है। यह दवा लगाते हà¥à¤ आà¤à¤–ें को बचाना चाहिà¤à¥¤ दवाई शरीर पर ८-१२ घणà¥à¤Ÿà¥‡ लगी रहने दें और फिर धो लें। कपड़ो व बिसà¥à¤¤à¤°à¥‹à¤‚ को साफ करने को लेकर à¤à¥€ सलाह दें या तो कपड़े पानी में 15 मिनट के लिठउबाले जा सकते हैं या फिर दिन à¤à¤° धूप में रखे जा सकते हैं या फिर इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गामा बीà¤à¤šà¤¸à¥€ पाउडर छिडककर बाद में धो ले। समà¥à¤ªà¤°à¥à¤• में आने वाली अनà¥à¤¯ चीज़ों का शोधन à¤à¥€ इसी तरह करें नहीं तो सà¥à¤•ैबीज़ दो सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में फिर से हो जाà¤à¤—ी।
परमेथà¥à¤°à¥€à¤¨ मलà¥à¤¹à¤® मेहंगा होता है, इसलिठअधिकांश मरीजों को अà¤à¥€ à¤à¥€ लिंडेन लोशन से ही इलाज कराया जाता है| इसे आà¤à¤– और मà¥à¤à¤¹ के आस पास न लगाà¤à¤| गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला और शिशà¥à¤“ं में परमेथà¥à¤°à¥€à¤¨ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बेहतर होता है|
खà¥à¤œà¤²à¥€ का इलाज
खà¥à¤œà¤²à¥€ के इलाज के लिठसीपीà¤à¤® की गोलियॉं लें (देखें दवाइयों वाली सारणी)। सà¥à¤•ैबीज़ में संकà¥à¤°à¤®à¤£ होने पर पॉंच दिनो का à¤à¤¨à¥à¤Ÿà¥€à¤¬à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² दवाइयों का कोरà¥à¤¸ दे। जैसे कोटà¥à¤°à¥€à¤®à¤¾à¤•à¥à¤¸à¤¾à¤œà¥‹à¤² या à¤à¤®à¥‹à¤•à¥à¤¸à¥€à¤¸à¤¿à¤²à¥€à¤¨ या टैटà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‡à¤•à¥à¤²à¥€à¤¨ और उसके बाद परमेथà¥à¤°à¥€à¤¨ लगाà¤à¤à¥¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का इलाज à¤à¥€ इसी तरह करें परनà¥à¤¤à¥ उनà¥à¤¹à¥‡ टैटà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‡à¤•à¥à¤²à¥€à¤¨ न दे।
आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦
दà¥à¤µà¤¦à¥à¤°à¥à¤¹à¤° लेप या महा-मारीचà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¥€ तेल लगाने से तà¥à¤µà¤šà¤¾ को फायदा होता है। आरोगà¥à¤¯à¤µà¤°à¥à¤§à¤¿à¤¨à¥€ और मंजिषà¥à¤ ा दवाइयॉं साथ-साथ देने से फायदा होता है। सà¥à¤•ैबीज़ के इलाज के लिये नीम का तेल à¤à¥€ फायदेमनà¥à¤¦ होता है।
जूà¤à¤à¤
जूà¤à¤à¤ à¤à¤¸à¥‡ कीड़े हैं जो शरीर के बालों वाले à¤à¤¾à¤— में रहना पसनà¥à¤¦ करते हैं। इसिलिये ये सिर के बालों, पलकों के बालों या जघन के बालों में पाये जाते है। ये बालों में अणà¥à¤¡à¥‡ देते हैं और इन अणà¥à¤¡à¥‹à¤‚ से फिर और जूà¤à¤à¤ निकल आते हैं। जूà¤à¤à¤ खून पर पलते हैं और तà¥à¤µà¤šà¤¾ से इसे चूसते हैं। इससे खà¥à¤œà¤²à¥€ और बेआरामी होती है। आमतौर पर रात के समय खà¥à¤œà¤²à¥€ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है और जिस वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के जूà¤à¤à¤ हो रहे हो उसका कॅंगा और कपड़े इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करने से अनà¥à¤¯ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को फैलते हैं। à¤à¤• जूà¤à¤† à¤à¥€ काफी खà¥à¤œà¤²à¥€ कर सकता है। आमतौर पर शरीर पर होने वाले जूà¤à¤à¤ जघन में होने वाले जूà¤à¤“ं से अलग होते हैं।
इलाज
परà¥à¤®à¥‡à¤¥à¥à¤°à¥€à¤¨ १% लोशन लगाना जूà¤à¤“ं का सबसे अचà¥à¤›à¤¾ इलाज है। इसे रात को लगाà¤à¤à¥¤ सà¥à¤¬à¤¹ मरे हà¥à¤ जूà¤à¤“ं को निकालने के लिठà¤à¤• महीन कॅंघे का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें। उसेक बाद सिर धो लेने से बची हà¥à¤ दवाई निकल जाती है। हर सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ दवाई लगाà¤à¤ जब तक कि सारे जूà¤à¤à¤ न निकल जाà¤à¤à¥¤ जूà¤à¤“ं से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ कपड़ो को बीà¤à¤šà¤¸à¥€ पाउडर लगाकर à¤à¤¾à¤¡à¤¼ कर बाद में धो लें या कपडे उबाल लें व धूप में सà¥à¤–ा लें। परà¥à¤®à¥‡à¤¥à¥à¤°à¤¿à¤¨ उपलबà¥à¤§ न हो तो लिंडेन लोशन लगाया जा सकता है।
घरेलू इलाज
शरीफा के बीज़ों का पाउडर बालों के तेल में मिलाकर लगाने से जूओं से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ मिल सकती है। आमतौर पर à¤à¤• बार लगाने पर ही फायदा हो जाता है। परनà¥à¤¤à¥ à¤à¤• हफà¥à¤¤à¥‡ बाद यह इलाज दोहराया जा सकता है। शरीफा की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का लेप à¤à¥€ रात à¤à¤° के लिठबालों में लगाने से फायदा हो सकता है। à¤à¤• और घरेलू इलाज है तेल में मिलाकर कपूर लगाना। दूसरे दिन बाल धोकर काढ़ने से मरे हà¥à¤ जूà¤à¤à¤ और लीखें निकल जाती हैं।
पलकों के जूà¤à¤à¤
अगर पलकों के बालों में जूà¤à¤à¤ हो जाà¤à¤ तो इसके लिठखास धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देने की ज़रूरत होती है। इस हालत में हम बीà¤à¤šà¤¸à¥€ (लिंडेन) नहीं लगा सकते हैं। बारीक चिमटी की मदद से जूà¤à¤à¤ निकाले। पिलोकारà¥à¤ªà¤¿à¤¨ मलहम लगाने से जूà¤à¤“ं की पकड़ कमजोर पड़ जाती है और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ निकालना आसान हो जाता है।
दाद
दाद à¤à¤• फफूà¤à¤¦ का संकà¥à¤°à¤®à¤£ है जिसमें गोल-गोल दाग हो जाते हैं। दाद शरीर के किसी à¤à¥€ हिसà¥à¤¸à¥‡ पर यहॉं तक कि खोपड़ी पर à¤à¥€ हो सकते है। इसमें बहà¥à¤¤ खà¥à¤œà¤²à¥€ होती है।
कारण और फैलाव
बडी खà¥à¤œà¤²à¥€ की तरह यह संकà¥à¤°à¤®à¤£ à¤à¥€ असà¥à¤µà¤šà¥à¤› हालातों में समà¥à¤ªà¤°à¥à¤• होने से होता है।
चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ लकà¥à¤·à¤£
दाद में à¤à¥€ à¤à¤¯à¤‚कर खà¥à¤œà¤²à¥€ होती है। दाद के दाग गोलाकार होते हैं और उनके बीच में à¤à¤• साफ दिखने वाला हिसà¥à¤¸à¤¾ होता है। बाहर का घेरा शोथगà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ (खà¥à¤°à¤¦à¥à¤°à¤¾, लाल) दिखता है और उसमें लगातार खà¥à¤œà¤²à¥€ होती है।
इलाज
दाद के लिठसबसे असरकारी फफूà¤à¤¦ रोधी दवा मिकानाजोल मलहम है। इसके अलावा निसà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿà¤¿à¤¨, हेमाइसिन और सेलीसिलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ का à¤à¥€ इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² होता है। विटफीलà¥à¤¡ मलहम में सैलीसिलिक अमà¥à¤² और बैनà¥à¤œà¤¾à¤‡à¤• अमà¥à¤² होते हैं। यह à¤à¤• ससà¥à¤¤à¥€ और असरकारी दवा है। दाद के निशान न रहने के कम से कम दो हफà¥à¤¤à¥‡ बाद तक दवा का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करना हैं। अगर दाद उपरी दवा से ठीक नहीं होते हैं तो फफूà¤à¤¦ रोधी गोली (जैसे गà¥à¤°à¤¿à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤«à¤²à¥à¤µà¤¿à¤¨) खानी पड़ती है। आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में लताकरनà¥à¤œ के तेल का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² फायदेमनà¥à¤¦ बताया गया है। आà¤à¤¤à¥‹à¤‚ की सफाई à¤à¥€ मददगार हो सकती है। मेदक का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जा सकता है जैसे कि तà¥à¤°à¤¿à¤«à¤²à¤¾ चूरण या अरणà¥à¤¡ का तेल। अमलतास की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का लेप दिन में दो बार करना à¤à¥€ à¤à¤• इलाज है। खाने में नमक कम हो।
तà¥à¤µà¤šà¤¾ के à¤à¤• और फफूà¤à¤¦ वाले संकà¥à¤°à¤®à¤£ में खà¥à¤œà¤²à¥€ नहीं होती, इसे टीनिया वरà¥à¤¸à¥€à¤•ोलर कहते हैं। इसमें पीठके ऊपरी हिसà¥à¤¸à¥‡ व छाती में हलà¥à¤•े धबà¥à¤¬à¥‡ पड़ जाते हैं। यह फफूà¤à¤¦ à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ संकà¥à¤°à¤®à¤£ है जो बहà¥à¤¤ चिरकारी होता है और जिस पर किसी à¤à¥€ दवा का आसानी से असर नहीं पड़ता। इसके चार हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ के लिठकà¥à¤²à¥‹à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤®à¤à¥‹à¤² मलहम लगाà¤à¤à¥¤ दिन में दो बार मलà¥à¤¹à¤® को अचà¥à¤›à¥€ तरह चमडीपर घिस कर लगाà¤à¤à¥¤
नाखूनों में फफूà¤à¤¦ का संकà¥à¤°à¤®à¤£
à¤à¤• तरह की फफूà¤à¤¦ नाखूनों पर असर डालती है। इस बीमारी में à¤à¥€ दवाई आसानी से असर नहीं करती खà¥à¤œà¤²à¥€ और नाखूनों के आस पास का रंग उड़ जाना इस बीमारी के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– लकà¥à¤·à¤£ हैं छ: माह तक गà¥à¤°à¤¿à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤«à¤²à¥à¤µà¤¿à¤¨ की गोलियॉं लेने से बीमारी में फायदा होता हैं। लेकिन यह डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° ही करे।
मदà¥à¤°à¤¾ पैर
यह à¤à¤• फफूà¤à¤¦ का संकà¥à¤°à¤®à¤£ है जिसमें तà¥à¤µà¤šà¤¾ और उसके नीचे के ऊतकों पर असर होता है। इसमें आमतौर पर पैर पर असर होता है। यह à¤à¤¾à¤°à¤¤ के कà¥à¤› हिसà¥à¤¸à¥‡ और अनà¥à¤¯ उषà¥à¤£ देशों में होता है। नंगे पैर चलना इस बीमारी का सबसे आम कारण है। फफूà¤à¤¦ से तà¥à¤µà¤šà¤¾ और उसके नीचे के ऊतकों में लगातार शोथ होता रहता है। यह à¤à¤• दरà¥à¤¦à¤°à¤¹à¤¿à¤¤ गॉंठके रूप में शà¥à¤°à¥‚ होता है। धीरे-धीरे और गॉंठे बन जाती हैं और उसमें से सà¥à¤°à¤¾à¤µ निकलने लगता है इससे छोटे-छोटे छेंद (साइनस) हो जाते हैं। इन साइनसों में से फफूà¤à¤¦ के कण निकलने लगते हैं। पैर फूलने लगता है और यह चकà¥à¤° कई सालों तक चलता रहता है। पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ छेंद ठीक हो जाते हैं और नठबन जाते हैं। पैर à¤à¤¾à¤°à¥€ हो जाता है और वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ बड़ी मà¥à¤¶à¥à¤•िल से चल पाता है। इलाज मà¥à¤¶à¥à¤•िल है। किसी तà¥à¤µà¤šà¤¾à¤°à¥‹à¤— विशेषजà¥à¤ž को दिखाया जाना चाहिà¤à¥¤
पायोडरमा
पायोडरमा तà¥à¤µà¤šà¤¾ में बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से होने वाला संकà¥à¤°à¤®à¤£ है। सà¥à¤•ैबीज़ और à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की तरह पहले से हà¥à¤ घावों में पीप बन सकती है। यह पूरी तरह से अपने आप à¤à¥€ बन सकती है। पामा याने सà¥à¤•ैबीज़, à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से होने वाला à¤à¤•à¥à¤œà¤¼à¥€à¤®à¤¾, जखà¥à¤® आदि सà¤à¥€ में बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से समà¥à¤ªà¤°à¥à¤• होने से हो सकता है। पायोडरमा बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में काफी आम है।
चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ लकà¥à¤·à¤£
संकà¥à¤°à¤®à¤£ हो जाने पर तà¥à¤µà¤šà¤¾ सूज जाती है, लाल हो जाती है और उसमें खà¥à¤œà¤²à¥€ होती है। तà¥à¤µà¤šà¤¾ के घावों में से पीप निकलने लगती है। उस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° की गिलà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‰à¤‚ सूज जाती हैं और उनमें दरà¥à¤¦ होता है।
इलाज
घावों पर संकà¥à¤°à¤®à¤£à¤°à¥‹à¤§à¥€ दवा लगाà¤à¤à¥¤ जेंशन वायोलेट काफी ससà¥à¤¤à¤¾ होता है। लेकिन फà¥à¤°à¥‡à¤®à¤¾à¤¸à¥‡à¤Ÿà¥€à¤¨ या नाईटà¥à¤°à¥‹à¤«à¥à¤¯à¥‚रेंनटोà¤à¤¨ मलहम जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ असरकारी होता हैं। नीम का तेल à¤à¥€ फायदेमनà¥à¤¦ होता है। यह à¤à¤• असरकारी इलाज है खासकर उस समय जब पीप निकल रही हो। आमतौर पर इलाज à¤à¤• सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ चलता रहना चाहिà¤à¥¤
मà¥à¤à¤¹ से खाने वाली दवाई
अगर गिलà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में सूजन हो या à¤à¤¸à¤¾ लगे है कि संकà¥à¤°à¤®à¤£ फैल रहा है तो रोगाणॠनाशक दवाइयॉं (जैसे à¤à¤®à¥‰à¤•à¥à¤¸à¤¿à¤¸à¤¿à¤²à¤¿à¤¨ या कोटà¥à¤°à¥€à¤®à¥‹à¤•à¥à¤¸à¤¾à¤œà¥‹à¤²) पॉंच से सात दिनो तक पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करे। इसके साथ à¤à¤¸à¥à¤ªà¤°à¥€à¤¨ और आईबà¥à¤°à¥‚फेन दरà¥à¤¦ और सूजन को कम करते हैं।
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€
मनà¥à¤·à¥à¤¯ का शरीर रोज़ ही कई चीज़ों से समà¥à¤ªà¤°à¥à¤• में आता है। इनमें से कà¥à¤› चीज़ें à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ करने वाली हो सकती है। à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ असल में शरीर के पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ तंतà¥à¤° का इन चीज़ों के लिठपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है। इन ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ को à¤à¤²à¤œà¥‡à¤‚स या à¤à¤¨à¥à¤Ÿà¥€à¤œà¥‡à¤¨ कहते है। धूल, कण, परागकण, खाने की कोई चीज़ या कà¤à¥€-कà¤à¥€ सूरज की रोशनी à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ पैदा कर सकती है। लगà¤à¤— कोई à¤à¥€ चीज़ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ कर सकती है और इससे शरीर का कोई à¤à¥€ à¤à¤¾à¤— पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकता है। तà¥à¤µà¤šà¤¾ उनमें से à¤à¤• है।
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• तà¥à¤µà¤šà¤¾à¤¶à¥‹à¤¥ या à¤à¤•à¥à¤œà¤¼à¥€à¤®à¤¾
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• डरà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¤¾à¤ˆà¤Ÿà¤¿à¤¸ (à¤à¤•à¥à¤œà¤¼à¥€à¤®à¤¾) à¤à¤• बहà¥à¤¤ ही आम बीमारी है। यह दो तरह की हो सकती है। समà¥à¤ªà¤°à¥à¤• à¤à¤•à¥à¤œà¤¼à¥€à¤®à¤¾ और à¤à¤•à¥à¤œà¤¼à¥€à¤®à¤¾ (यानि किसी à¤à¥€ तरह के à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ करने वाले ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ जैसे खाने की चीज़ों या धूल आदि के लिठशरीर की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¥¤)
हर वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के लिठअलग-अलग चीज़ें à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ करने वाली साबित हो सकती है। कà¥à¤› लोगों को किसी पदारà¥à¤¥ जैसे कॉंगà¥à¤°à¥‡à¤¸ घास या पारà¥à¤¥à¥€à¤¨à¤¿à¤¯à¤® से जबररà¥à¤¦à¤¸à¥à¤¤ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो सकती है। लेकिन कई और लोग इसे आसानी से सह सकते हैं। हर मामले में à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ करने वाले कारक की जॉंच करना मà¥à¤¶à¥à¤•िल होता है। कà¥à¤› चीज़ें अकà¥à¤¸à¤° ही à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का कारण बनती रहती है चांदनी घास à¤à¤• बहà¥à¤¤ ही आम à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ करने वाली चीज़ है, à¤à¤¸à¤¾ इसलिठà¤à¥€ है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह इस देश के लिठनई है। चांदनी घास साठऔर सतà¥à¤¤à¤° के दशक में विदेशों से गेहूठके आयात के साथ à¤à¤¾à¤°à¤¤ में आई थी।
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ समय के चलते कम या ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो सकती है। यह à¤à¥€ ज़रूरी नहीं है कि à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ हमेशा ही किसी पदारà¥à¤¥ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• रहे। आज जो पदारà¥à¤¥ किसी के लिठà¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€à¤• न à¤à¥€ हो तो कल वो à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€à¤• हो सकता हे। इसी तरह आज शरीर को जिस चीज से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होती है कल उससे à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होना बनà¥à¤¦ à¤à¥€ हो सकती है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि कà¥à¤› अवधी में शरीर उसे सहना सीख सकता है। à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की समसà¥à¤¯à¤¾ कई अनà¥à¤¯ कारकों के कारण तीवà¥à¤° à¤à¥€ हो सकती है और बार-बार होने वाली à¤à¥€à¥¤ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की गमà¥à¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ à¤à¥€ अलग-अलग होती है और यह कà¤à¥€-कà¤à¥€ जानलेवा à¤à¥€ हो सकती है जेसे कि पैंसलीन दिठजाने पर बहà¥à¤¤ तीवà¥à¤° पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•िया होना। कई दवाइयों से गमà¥à¤à¥€à¤° à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•िया हो सकती है। कई à¤à¤• सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से चिरकारी à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• डरमेटाइटिस हो सकती है। विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ फूलों के परागकण, à¤à¥‚ॅसी धूल, सूरज की रोशनी, कीड़े मारने की दवाइयॉं, खाने की चीज़ें और कपड़े à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ करने वाली आम चीज़ें हैं।
चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ लकà¥à¤·à¤£
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• तà¥à¤µà¤šà¤¾ शोथ डरà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¤¾à¤ˆà¤Ÿà¤¿à¤¸ तà¥à¤µà¤šà¤¾ का शोथ है और इससे आमतौर पर बेहद खà¥à¤œà¤²à¥€ होती है। कई बार यह संकà¥à¤°à¤®à¤£ वाले डरà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¤¾à¤ˆà¤Ÿà¤¿à¤¸ जैसा लग सकता है। संकà¥à¤°à¤®à¤£ वाले à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• डरà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¤¾à¤ˆà¤Ÿà¤¿à¤¸ में गिलटियॉं हो सकती है। चिरकारी डरमेटाइटिस से तà¥à¤µà¤šà¤¾ मोटी हो सकती है व काली पड़ सकती है। à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होकर खतम à¤à¥€ हो सकती है और इसकी गमà¥à¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ à¤à¥€ कई कारकों पर निरà¥à¤à¤° करती है। à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• तà¥à¤µà¤šà¤¾ शोथ के कà¥à¤› पà¥à¤°à¤•ार यहॉं दिये है।
अरà¥à¤Ÿà¥€à¤•ेरिया - पितà¥à¤¤à¥€
पूरे शरीर पर लाल दाने होने और उनमें खà¥à¤œà¤²à¥€ होने की हालत को अरà¥à¤Ÿà¥€à¤•ेरिया या पितà¥à¤¤à¥€ कहते है। यह किसी दवा के लिठपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ या कोई और à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो सकती है।
सेबोरेहिक डरà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸
यह वो बीमारी है जिसमें शरीर के कà¥à¤› à¤à¤¾à¤— बहà¥à¤¤ से तेलीय पदारà¥à¤¥ सà¥à¤°à¤µà¤¿à¤¤ करने लगते है। यह केवल खोपड़ी, चेहरे, कानो के ऊपर, सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ के नीचे, कनà¥à¤§à¥‹à¤‚ के बीच में, बगलों या जॉंघों में होता है।
नवजात शिशà¥à¤“ं में à¤à¤•à¥à¤œà¤¼à¥€à¤®à¤¾
यह चेहरे और धड़ पर चकतà¥à¤¤à¥‹ के रूप में देखा जा सकता है। नैपकीन से होने वाले चकतà¥à¤¤à¥‡ à¤à¥€ इसके उदाहरण है।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में होने वाला à¤à¤•à¥à¤œà¤¼à¥€à¤®à¤¾
बहà¥à¤¤ से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को à¤à¤•à¥à¤œà¤¼à¥€à¤®à¤¾ हो सकता है। पैरों और कोहनियों में चकतà¥à¤¤à¥‡ हो सकते है। यह आमतौर पर बचà¥à¤šà¥‡ के पॉंच साल का होने तक ठीक हो जाते हैं।
इलाज
गमà¥à¤à¥€à¤° और गहन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ में तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ और किसी कà¥à¤¶à¤² वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¤¨à¥à¤Ÿà¥€à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• दवाइयों (जैसे सीपीà¤à¤® और सà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¥‰à¤à¤¡) के इनà¥à¤œà¥ˆà¤•à¥à¤¶à¤¨ ज़रूरी होता है। कम गमà¥à¤à¥€à¤° (हलà¥à¤•ी) à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के लिठज़रूरी होता है कि à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ को दबाया जाà¤à¤à¥¤ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ वाली जगह पर सà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¥‰à¤à¤¡ यà¥à¤•à¥à¤¤ मलहम और साथ में अà¤à¤Ÿà¥€ हिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤®à¤¿à¤¨ (जैसे सीपीà¤à¤®) की गोलियॉं देना इलाज में शामिल है। परनà¥à¤¤à¥ इस इलाज से केवल असà¥à¤¥à¤¾à¤ˆ आराम हो सकता है। सà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¥‰à¤à¤¡ अगर दो तीन दिनों से ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लमà¥à¤¬à¥‡ समय तक दिठजाà¤à¤ तो इनसे नà¥à¤•सान हो सकता है। खà¥à¤œà¤²à¥€ को सीपीà¤à¤® की गोलियों से ठीक करें। हलà¥à¤•ी फà¥à¤²à¤•ी à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का इलाज ज़रूरी नहीं है।
पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक उपाय
कीड़े के काटने पर उस सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर खेत की मिटà¥à¤Ÿà¥€ का लेप करें।
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