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चोट या सरà¥à¤œà¤°à¥€ के घाव को जलà¥à¤¦à¥€ à¤à¤°à¤¨à¥‡ में मदद करेंगे ये 5 पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक तरीके -
गरà¥à¤® सेंक
चोट या सरà¥à¤œà¤°à¥€ के घाव को पटà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से अचà¥à¤›à¥€ तरह ढककर रखना चाहिà¤, ताकि इंफेकà¥à¤¶à¤¨ न फैले। मगर घाव को तेजी से à¤à¤°à¤¨à¥‡ के लिठआप इसके आसपास की तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर हलà¥à¤•े गरà¥à¤® कपड़े/हॉट वाटर बॉटल आदि से सेंक लगा सकते हैं। गरà¥à¤® तापमान के कारण पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हिसà¥à¤¸à¥‡ में रकà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ (बà¥à¤²à¤¡ सरà¥à¤•à¥à¤²à¥‡à¤¶à¤¨) तेज हो जाता है, जिसके कारण डैमेज सेलà¥à¤¸ जलà¥à¤¦à¥€ रिपेयर होती हैं।
हेलà¥à¤¦à¥€ खाना
घाव को à¤à¤°à¤¨à¥‡ के लिठशरीर तेजी से नठसेलà¥à¤¸ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करे, इसके लिठजरूरी है कि आप अपनी डाइट को अचà¥à¤›à¤¾ रखें। खानपान में कà¥à¤› खास चीजें शामिल करके आप अपने शरीर को नठसेलà¥à¤¸ बनाने के लिठतैयार कर सकते हैं, जैसे- हरी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, मीट, संतरा, पीली सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ और डेयरी उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦ (दूध, पनीर, दही, योगरà¥à¤Ÿ, चीज़ आदि)। ये सà¤à¥€ फूडà¥à¤¸ à¤à¤‚टीऑकà¥à¤¸à¤¿à¤¡à¥‡à¤‚टà¥à¤¸, विटामिनà¥à¤¸ और मिनरलà¥à¤¸ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र होते हैं, इसलिठशरीर के लिठà¤à¥€ फायदेमंद साबित होते हैं।
लहसà¥à¤¨ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— बढ़ा दें
लहसà¥à¤¨ को पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रूप से खून को पतला करने के लिठजाना जाता है। मगर लहसà¥à¤¨ में à¤à¤‚टीबैकà¥à¤Ÿà¥€à¤¯à¤² गà¥à¤£ होते हैं, इसलिठये घाव को इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से बचाता है और बहते खून को रोकता है। इसके अलावा लहसà¥à¤¨ में दरà¥à¤¦à¤¨à¤¿à¤µà¤¾à¤°à¤• गà¥à¤£ à¤à¥€ होते है, इसलिठये दरà¥à¤¦ को à¤à¥€ कम करता है। अगर आपने हाल में कोई सरà¥à¤œà¤°à¥€ करवाई है, तो अपने रोजाना के खाने में लहसà¥à¤¨ की मातà¥à¤°à¤¾ बढ़ा दें। लहसà¥à¤¨ आपके इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® को à¤à¥€ मजबूत बनाता है, जिससे शरीर बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² अटैक से बचा रहता है।
कैमोमाइल की चाय पिà¤à¤‚
कैमोमाइल टी पीने से नरà¥à¤µà¥à¤¸ रिलैकà¥à¤¸ होती हैं, इसलिठये सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸ दूर करने के लिठजानी जाती है। मगर यदि आपको घाव या चोट है, तो à¤à¥€ कैमोमाइल की चाय आपके लिठबहà¥à¤¤ फायदेमंद साबित हो सकती है। इसका कारण यह है कि इस चाय को पीने से इंफेकà¥à¤¶à¤¨ का खतरा कम हो जाता है। इसके अलावा कैमोमाइल को दरà¥à¤¦, सूजन और बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को खतà¥à¤® करने के लिठà¤à¥€ जाना जाता है। चाय पीने के साथ-साथ आप चाहें तो इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किठहà¥à¤ कैमोमाइल टी बैग को अपने घाव पर रखकर इसकी सिंकाई कर सकते हैं।
घाव पर नीम का पेसà¥à¤Ÿ लगाया जा सकता है। नीम में फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ होता है जो कोलेजन का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करता है, जिससे तà¥à¤µà¤šà¤¾ का लचीलापन बना रहता है और घाव जलà¥à¤¦à¥€ à¤à¤°à¤¤à¤¾ है। इसमें à¤à¤‚टीसेपà¥à¤Ÿà¤¿à¤• और जलन विरोधी गà¥à¤£ होते हैं। इसका पेसà¥à¤Ÿ बनाने के लिठनीम का रस और हलà¥à¤¦à¥€ पावडर का उपयोग करें।
रोजाना पटà¥à¤Ÿà¥€ बदलें
घाव को जलà¥à¤¦à¥€ सà¥à¤–ाने और इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के बचाने के लिठजरूरी है कि आप अपने घाव की डà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤‚ग रोजाना कराà¤à¤‚ यानी पटà¥à¤Ÿà¥€ रोजाना बदलें। इस दौरान साफ-सफाई का विशेष खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखें। बेहतर होगा कि किसी पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ हाथों के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ ही आप घाव की मरहम-पटà¥à¤Ÿà¥€ करवाà¤à¤‚।
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