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टीबी के इलाज में पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ मानी जाती है ये चीजें, आजमायें 7 घरेलू उपाय
टीबी, तपेदिक या कà¥à¤·à¤¯ रोग à¤à¤• आम और कई मामलों में घातक संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• बीमारी है, जो टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥â€à¤¯à¥à¤²à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के कारण होती है. कà¥à¤·à¤¯ रोग आम तौर पर फेफड़ों पर हमला करता है, मगर धीरे धीरे यह शरीर के अनà¥à¤¯ à¤à¤¾à¤—ों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करने लगता है. फेफड़ों के अलावा बà¥à¤°à¥‡à¤¨, यूटरस, लिवर, किडनी, गले और मà¥à¤‚ह आदि में à¤à¥€ टीबी हो सकती है. सबसे कॉमन फेफड़ों का टीबी है, जो हवा के माधà¥à¤¯à¤® से लोगों के बीच फैलती है. टीबी के
मरीज खांसी, छींक या किसी अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤•ार से हवा के माधà¥à¤¯à¤® से अपना लार संचारित कर देते हैं.
बताया जाता है कि फेफड़ों के अलावा दूसरी कोई टीबी à¤à¤• से दूसरे में नहीं फैलती. मगर टीबी à¤à¤• खतरनाक बीमारी है. यह शरीर के जिस हिसà¥à¤¸à¥‡ में होती है, सही इलाज न हो तो उसे बेकार कर देती है. टीबी संकà¥à¤°à¤®à¤£ के लकà¥à¤·à¤£, खून-वाली थूक के साथ पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ खांसी, बà¥à¤–ार, रात को पसीना आना और वजन घटना हैं. थकावट होना, वजन घटना और सांस लेने में परेशानी होना à¤à¥€ टीबी के लकà¥à¤·à¤£ होते हैं. इसलिठटीबी के आसार नजर आने पर जांच करा लेनी चाहिà¤. टीबी के इलाज का कोरà¥à¤¸ पूरा करना बेहद जरूरी है. कà¥à¤› चीजें इलाज में तेजी ला सकती हैं. आज हम आपको कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ घरेलॠउपाय बताà¤à¤‚गे, जो टीबी की बीमारी को जलà¥à¤¦ ठीक करने में कारगर हो सकते हैं.
इन चीजों से ला सकते हैं टीबी के इलाज में तेजी
दूध- तपेदिक के रोगियों के लिठदूध काफी अचà¥à¤›à¤¾ माना जाता है. दूध, कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® के सरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® सà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• है. तपेदिक के इलाज के लिठकैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है. à¤à¤¸à¥‡ में तपेदिक और इसके लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के इलाज में काफी सहायक होता है. हालांकि कà¥à¤› रोगियों को दूध या दूध उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ से बचने की सलाह à¤à¥€ दी जाती है.
गà¥à¤°à¥€à¤¨ टी- गà¥à¤°à¥€à¤¨ टी को à¤à¤‚टीऑकà¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚ट से à¤à¤°à¤ªà¥‚र माना जाता है. कहा जाता है कि यह शरीर की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को बेहतर बनाने में मदद करती है. गà¥à¤°à¥€à¤¨ टी में मौजूद पॉलीफेनोल, तपेदिक के बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से लड़ने में सकà¥à¤·à¤® माने जाते हैं.
लहसà¥à¤¨- लहसà¥à¤¨ में सलà¥à¤«à¥à¤¯à¥‚रिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ होता है. यह तपेदिक से पीड़ित लोगों के लिठबहà¥à¤¤ अचà¥à¤›à¤¾ माना जाता है. यह तपेदिक पैदा करने वाले बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से लड़ने में à¤à¥€ लहसà¥à¤¨ कारगार होता है. रोगाणà¥à¤°à¥‹à¤§à¥€ गà¥à¤£ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र लहसà¥à¤¨, पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ को à¤à¥€ बढ़ावा दे सकता है.
पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¤¾- पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ में à¤à¤‚टी-बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² गà¥à¤£ पाठजाते हैं, जो तपेदिक से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ ऊतकों के उपचार में मददगार साबित हो सकते हैं.
आंवला- आंवला में जीवाणà¥à¤°à¥‹à¤§à¥€ गà¥à¤£ होते हैं. इसे पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ को मजबूत बनाने और बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से लड़ने के लिठपà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤•ारी माना जाता है. आंवला के सेवन से संपूरà¥à¤£ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है.
काली मिरà¥à¤š- काली मिरà¥à¤š को फेफड़ों को साफ करने और बलगम उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ को कम करने में लाà¤à¤•ारी माना जाता है. तपेदिक के कारण होने वाले सीने के दरà¥à¤¦ से à¤à¥€ काली मिरà¥à¤š राहत दिलाने में मददगार होती है. यह छींक और खांसी में à¤à¥€ आरामदायक होती है.
अनानास- अनानास को à¤à¥€ तपेदिक के इलाज में लाà¤à¤¦à¤¾à¤¯à¤• बताया जाता है. अनानास का रस बलगम गठन को कम करता है और साथ ही तेजी से रिकवरी देता है.
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