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Skin disorder prevention: चरà¥à¤® रोग आंतरिक और बाहà¥à¤¯ संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण होता है। यह कई पà¥à¤°à¤•ार के होते हैं।
महिलाओं में ये कई बार अवसाद का कारण à¤à¥€ बन जाता है। गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में दाद, खà¥à¤œà¤²à¥€, मà¥à¤¹à¤¾à¤‚से जैसी तà¥à¤µà¤šà¤¾ संबंधित बिमारियों से लगà¤à¤— हर कोई पीड़ित होता है। लेकिन कà¥à¤› बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखकर इसके जोखिम से बचा जा सकता है।
तà¥à¤µà¤šà¤¾ से संबंधित रोगो को चरà¥à¤® रोग कहा जाता है। संकà¥à¤°à¤®à¤£, à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€, कैमिकल(मेकअप पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿà¥à¤¸ ), कमजोर इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® के वजह से तà¥à¤µà¤šà¤¾ संबंधी परेशानियां हो सकती है। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° चरà¥à¤® रोगों में दाद, खाज, खà¥à¤œà¤²à¥€, सोरायसिस, सफेद दाग, बिमारियां उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होती है। महिलाओं में चरà¥à¤® रोग अवसाद का कारण à¤à¥€ बन जाता है। हालांकि सà¥à¤•िन संबंधित रोगों का उपचार संà¤à¤µ है लेकिन इसे पूरी तरह से ठीक होने में काफी समय लगता है।
इसे लेकर आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ डॉकà¥à¤Ÿà¤° वैशाली ने चरà¥à¤® रोग से पीड़ित मरीजों के लिठकà¥à¤› आसान से टिपà¥à¤¸ शेयर किठहैं। यह चरà¥à¤® रोग को जलà¥à¤¦à¥€ खतà¥à¤® करने में मदद कर सकता है। वह बताती हैं कि सà¥à¤•िन संबंधित बीमारियां पूरी तरह से ठीक होने में काफी समय लगती हैं। इस दौरान आपका खान-पान महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¤¾ है। à¤à¤¸à¥‡ में चरà¥à¤® रोग के मरीजों को कà¥à¤› खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को खाने से बचना चाहिà¤à¥¤
चरà¥à¤® रोगियों के लिठये खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ बढ़ा सकते हैं दिकà¥à¤•त
​मसालेदार और जंक फूड से करें परहेज
डॉकà¥à¤Ÿà¤° वैशाली बताती हैं कि अगर कोई वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ चरà¥à¤® रोग से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ है तो उसे मसालेदार और जंक फूड खाने से बचना चाहिà¤à¥¤ यह खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ शरीर में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ घंटों तक बने रहते हैं और चयापचय की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को बाधित करते है। जिसके वजह से चेहरे पर मà¥à¤¹à¤¾à¤‚से निकल सकते हैं।
​चरà¥à¤® रोगियों के लिठफायदेमंद नहीं है डेयरी पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿà¥à¤¸
आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° तà¥à¤µà¤šà¤¾ संबंधित रोग के मरीजों को दूध, दही, बटर जैसे डेयरी पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿà¥à¤¸ का सेवन नहीं करना चाहिà¤à¥¤ इनके पचान में अधिक समय लगता है। जिसका असर सà¥à¤•िन पर कई तरह से दिखने लगता है।
​खटà¥à¤Ÿà¤¾ खाना बढ़ा सकता है दिकà¥à¤•त
आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ विशेषजà¥à¤ž बताती हैं कि आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° खटà¥à¤Ÿà¥‡ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ शरीर में पितà¥à¤¤ को बढ़ावा देते हैं। शरीर में पितà¥à¤¤ की जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मातà¥à¤°à¤¾ खून को अशà¥à¤¦à¥à¤§ करने का काम करती है। जिसका परिणाम सà¥à¤•िन से संबंधित बीमारियों के रूप में देखने के लिठमिल सकता है।
​तिल के सेवन से बचें
तà¥à¤µà¤šà¤¾ संबंधित रोग के मरीजों को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मातà¥à¤°à¤¾ में तिल का सेवन नहीं करना चाहिà¤à¥¤ इसका अधिकता शरीर में पाचन तंतà¥à¤° में असंतà¥à¤²à¤¨ और पेट में चरà¥à¤¬à¥€ का कारण बन सकता है।
​गà¥à¤¡à¤¼ का सेवन à¤à¥€ है खराब
आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ विशेषजà¥à¤ž बताती हैं कि आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° चरà¥à¤® रोग के मरीजों के लिठगà¥à¤¡à¤¼ का सेवन à¤à¥€ खराबी कर सकता है। गà¥à¤¡à¤¼ शरीर में गरà¥à¤®à¥€ पैदा करता है। इसकी अधिकता à¤à¥€ खटà¥à¤Ÿà¥‡ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ की तरह ही खून को अशà¥à¤¦à¥à¤§ करने का काम करती है।
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