ज्यादा सोचने से कौन सी बीमारी बनती है?HealthPlanet

Posted on Thu 1st Dec 2022 : 11:58

बहुत ज़्यादा सोचने से हो सकती हैं ये 6 बीमारियां !

क्या आप भी 'चिंतामणी' बने रहते हैं?
 क्या आपको लाइने छोड़क-छोड़कर पढ़ने की आदत है? क्या आप चिंता और रातभर जागने जैसी परेशानियां महसूस होती हैं? क्या आपको कम से कम एक बार ‘बहुत ज़्यादा सोचने वाला’ होने का आरोप लगाया गया है? अगर यह सारी बातें आपसे जुड़ी हुई हैं, तो यह साफ हो गया है कि आप बहुत ज़्यादा सोचनेवाले लोगों में से हैं। ऐसे लोग न चाहते हुए भी हर छोटी-बड़ी चीज़ के बारे में बहुत कुछ सोचते हैं और उसका विश्लेषण भी करते हैं। दरअसल इनके लिए, शांत रहना या एक समय में एक बात के बारे में सोचना असंभव है। लेकिन याद रखें, लगातार सोचते रहना और चिंता सिर्फ आपके मानसिक शांति को बिगाड़ने का काम करेगी। जब आपका मन लगातार परेशान होता है, तो आपके शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन की बढ़ोतरी होती रहती है, जो आपकी सेहत को बहुत ज़्यादा प्रभावित करता है। आप खुद ही पढ़ें और समझें कि किस तरह बहुत ज़्यादा सोचने से आपकी सेहत को नुकसान होता है।

1.यह आपके मस्तिष्क को प्रभावित करता है
आप शायद यह कहें कि यह बात किसे नहीं पता लेकिन सोच और तनाव के सबसे बड़े शिकारों में से एक मस्तिष्क है। तनाव का आपके दिमाग पर गहरा असर पड़ता है। कोर्टिसोल आपके मस्तिष्क की हिप्पोकैम्पस (hippocampus) कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है और उन्हें खत्म कर सकता है। बहुत ज़्यादा सोचने से दिमाग के काम करने के तरीके में बदलाव आ सकता है क्योंकि यह उसकी कनेक्टिविटी में बदलाव का कारण बन सकता है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के एक रिसर्चर बर्कले ने यह भी बताया कि लगातार तनाव चिंता और मूड स्विंग जैसी मानसिक समस्याओं का कारण बनता है।1


2.यह आपके पाचन तंत्र को प्रभावित करता है
बहुत ज़्यादा सोचने से तनाव पैदा कर सकता है, जिसका असर आपके पाचन तंत्र पर भी पड़ सकता है। जठरांत्र या गैस्ट्रोइंस्टेटाइनल समस्याएं जैसे पेट में जलन, इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम, जठरांत्र के काम करने के तरीके में बदलाव और गैस्ट्रिक सीक्रेशन में परिवर्तन, इंस्टेटाइनल पर्मीबिलिटी और आंतों की सूक्ष्मजीविका में परिवर्तन भी तनाव के कारण होता है।.

3.यह आपके दिल को प्रभावित करता है
सोच और चिंता से आपके दिल की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है और वह आपको कई बीमारियों के ख़तरे में डाल सकता है। छाती के दर्द, टैचीकार्डिया (tachycardia), चक्कर आना ऐसी ही कुछ समस्याएं हैं जो बहुत अधिक सोचने की वजह से होती हैं। डिप्रेशन, लत और सोने से जुड़ी परेशानियां लगातार चिंता करने की आदत का नतीज़ा होती हैं और ये समस्याएं लगातार कठिन भी होती रहती हैं।.

4.यह आपकी त्वचा पर बुरा असर डाल सकता है
लगातार चिंता, तनाव और बहुत अधिक सोचने से आपकी स्किन या त्वचा भी प्रभावित होती है। चिंता के कारण भावनात्मक तनाव बढ़ सकता है या यह सोरायसीस (alopecia), एपोटीक डर्माटिटाइस (areata) गंभीर खुजली, एलोपेशिया एरियाटा (alopecia areata), और सीब्रोरहाइक डर्माटाइटिस (seborrheic dermatitis) जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है। तनाव शरीर में सूजन का भी कारण बनता है, जो त्वचा पर दानों या पिम्पल के रुप में दिखायी पड़ती है।.

5.यह प्रतिरक्षा प्रणाली को गड़बड़ा सकता है
क्या आपने गौर किया है कि जब आप तनाव या चिंतित होते हैं तो आप अक्सर बीमार पड़ जाते हैं? ऐसा इसलिए है क्योंकि तनाव शरीर में कोर्टिसोल को उत्पन्न करता करता है, जिससे रोगप्रतिरोधक प्रणाली कमज़ोर हो जाती है। जब आपके शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था दब जाती है, तो यह संक्रमण और रोगों की संभावना बढ़ने की वजह बन जाता है।.

6.यह कैंसर के खतरे को बढ़ाता है
ज़्यादा सोचने से हाइपोथैलेमिक-पिट्यूटरी-एड्रेनल एक्सिस के निरंतर सक्रिय होने और तनाव होता है। इसकी वजह से आपका इम्यून रिस्पॉन्स कमज़ोर हो जाता है और इसके चलते कुछ विशेष प्रकार के कैंसर की संभावना बन जाती है।.

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