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हाइपरटेंशन (Hypertension)
उचà¥â€à¤š रकà¥â€à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के पà¥à¤°à¤•ारउचà¥â€à¤š रकà¥â€à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के लकà¥à¤·à¤£à¤‰à¤šà¥â€à¤š रकà¥â€à¤¤à¤šà¤¾à¤ª का कारण और जोखिम कारकउचà¥â€à¤š रकà¥â€à¤¤à¤šà¤¾à¤ª से बचाव या रोकथामहाई बà¥â€à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° की पहचान कैसे करेंहाई बà¥â€à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° का उपचारलाइफसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤²à¤¹à¤¾à¤‡à¤ªà¤°à¤Ÿà¥‡à¤‚शन का उपचाररोग का निदान और खतरेवैकलà¥à¤ªà¤¿à¤• उपचार
हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° को मेडिकल à¤à¤¾à¤·à¤¾ में हाइपरटेंशन कहते हैं। इसे हिंदी में उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª कहा जाता है। दरअसल, बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° धमनियों की दीवारों पर रकà¥à¤¤ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ लगाया गया बल होता है। हमारा हृदय ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ यà¥à¤•à¥à¤¤ रकà¥à¤¤ को शरीर के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ à¤à¤¾à¤—ों में पहà¥à¤‚चाने के लिठरकà¥â€à¤¤ वाहिकाओं की मदद लेता है, जिसे धमनियों के नाम से जाता है। धमनियों पर जब दबाव बढ़ जाता है तो इसे ही उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª या हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° कहते हैं। यह à¤à¤• सामानà¥â€à¤¯ शारीरिक समसà¥â€à¤¯à¤¾ है, लेकिन ये समसà¥â€à¤¯à¤¾ जब बढ़ जाती है तो यह हृदय रोग और अनà¥â€à¤¯ बीमारियों का कारण बनता है। बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° दो नंबरों से बना हà¥à¤† है जिसे सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° और डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° के नाम से जाना जाता है। सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° हृदय के धड़कने पर दबाव का माप होता है, जबकि डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° दो धड़कनों के बीच में दबाव का माप होता है। इन दोनों को ही मरकरी पà¥à¤°à¤¤à¤¿ मिलीमीटर (mmHg) में मापा जाता है। सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• और डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• बीपी की सामानà¥à¤¯ रीडिंग 120/80 mmHg है। उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª होने की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ तक की जाती है जब सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• रीडिंग 140 mmHg और डायसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• रीडिंग 90 mmHg से अधिक या बराबर होती है।
वैशà¥à¤µà¤¿à¤• सà¥à¤¤à¤° पर, चार वà¥â€à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• को हाइपरटेंशन है। लगà¤à¤— 3 अरब 50 करोड़ लोगों का बà¥â€à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° लेवल 110-115 mmHg से अधिक है, और 87 करोड़ 40 लाख लोगों का सिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤²à¤¿à¤• बà¥â€à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° 140 mmHg से अधिक है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में 20 करोड़ से जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लोग उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के शिकार हैं। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में मौजूद कà¥à¤² उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के मरीजों की अधिकांश आबादी शहरी है (शहर की कà¥à¤² आबादी का 25%-30%) और गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ आबादी में 10%-20% वà¥â€à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ हाई बीपी वाले हैं।
उचà¥â€à¤š रकà¥â€à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के पà¥à¤°à¤•ार
आमतौर पर सामानà¥à¤¯ बà¥â€à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° लेवल 120/80 mmHg से कम या बराबर होता है। 120/80 और 129/89 mmHg के बीच बीपी रीडिंग वाले लोगों को पà¥à¤°à¥€-हाइपरटेनà¥à¤¸à¤¿à¤µ माना जाता है; इन लोगों में बीपी उतना कम à¤à¥€ नहीं है जितना होना चाहिठमगर उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª नहीं माना जाता है।
उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के दो सà¥â€à¤Ÿà¥‡à¤œ हैं:
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ I: जब बीपी रीडिंग 130/80 mmHg हो।
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ II: जब बीपी रीडिंग 130/80 mmHg से अधिक या बराबर हो।
अगर बà¥â€à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° का सà¥â€à¤¤à¤° 180/110 mmHg से अधिक है तो इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को हाइपरटेंसिव कà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¸à¤¿à¤¸ यानी उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª को संकट गà¥à¤°à¤¸à¥â€à¤¤ माना जाता है और मरीजों को ततà¥à¤•ाल चिकितà¥à¤¸à¤¾ सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ लेने की सलाह दी जाती है।
उचà¥â€à¤š रकà¥â€à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के लकà¥à¤·à¤£
उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª या हाई बà¥â€à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° को à¤à¤• साइलेंट किलर के रूप में जाना जाता है; इसलिठबीपी को नियमित रूप से मापा जाना चाहिà¤, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª में कोई चेतावनी लकà¥à¤·à¤£ या संकेत नहीं होते हैं, और कई लोगों को यह पता नहीं होता है कि उनà¥â€à¤¹à¥‡ हाइपरटेंशन है। कà¥à¤› रोगियों को उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के बिना à¤à¥€ हृदय या किडनी रोग हो सकता है।
उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ कà¥à¤› लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में शामिल हैं:
सिरदरà¥à¤¦
नाक से खून आना
दृषà¥à¤Ÿà¤¿ दोष
हारà¥à¤Ÿ रेट का बढ़ जाना
छाती में दरà¥à¤¦
कानों में à¤à¤¨à¤à¤¨à¤¾à¤¹à¤Ÿ की आवाज सà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ देना
उलà¥à¤Ÿà¥€
à¤à¥à¤°à¤® की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿
चिंता
मांसपेशियों में कंपनà¥â€à¤¨
उचà¥â€à¤š रकà¥â€à¤¤à¤šà¤¾à¤ª का कारण और जोखिम कारक
कारण
सेकेंडà¥à¤°à¥€ हाइपरटेंशन होने के कà¥à¤› निमà¥â€à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित कारण हो सकते हैं:
कà¥à¤°à¥‰à¤¨à¤¿à¤• किडनी डिजीज
डायबिटीज
अवरà¥à¤¦à¥à¤§ धमनियां (रीनो वेसà¥à¤•à¥à¤²à¤° डिजीज)
कà¥à¤¶à¤¿à¤‚गà¥à¤œ सिंडà¥à¤°à¥‹à¤®
थायराइड रोग
नींद से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥â€à¤¯à¤¾à¤à¤‚
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾
संकीरà¥à¤£ रकà¥à¤¤ वाहिका जो गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ को रकà¥à¤¤ की आपूरà¥à¤¤à¤¿ करती है
डिकंजेसà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚टà¥à¤¸ (सरà¥à¤¦à¥€ खांसी की दवा), à¤à¤‚टीडिपà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚ट (अवसाद कम करने वाली दवाà¤à¤‚), बरà¥à¤¥ कंटà¥à¤°à¥‹à¤² पिलà¥â€à¤¸ (गरà¥à¤ निरोधक दवाà¤à¤‚) और दरà¥à¤¦ निवारक जैसी कà¥à¤› दवाà¤à¤‚ शरीर के लिठबीपी को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करना मà¥à¤¶à¥à¤•िल बना सकती हैं।
जोखिम
कà¥à¤› कारक हैं जो उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के खतरे को बढ़ाते हैं, जिनसे बचने की सलाह दी जाती है।
वे जोखिम कारक जिनमें बदलाव संà¤à¤µ है:
à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ अनहेलà¥â€à¤¦à¥€ खाना जिसमें अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• सोडियम (Na) होता है और पोटैशियम (K), उचà¥â€à¤š वसा, फलों और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ शामिल नहीं हैं।
मोटापा या अधिक वजन
वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® की कमी
कैफीन, शराब और तंबाकू का बहà¥à¤¤ अधिक सेवन।
कोकीन और मेथामफेटामाइन जैसी अवैध दवाओं का उपयोग। नींद की कमी।
वे जोखिम कारक जिनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ परिवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ नहीं किया जा सकता है:
उमà¥à¤°: रकà¥à¤¤ वाहिकाà¤à¤‚ उमà¥à¤° के साथ मोटी हो जाती हैं, जिससे बà¥â€à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° में वृदà¥à¤§à¤¿ होती है। मिडिल à¤à¤œ वाले पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में संà¤à¤µà¤¤à¤ƒ महिलाओं की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में उचà¥à¤š रकà¥â€à¤¤à¤šà¤¾à¤ª जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ देखा गया है, जबकि बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों की बात करें तो महिलाओं में उचà¥à¤š रकà¥â€à¤¤à¤šà¤¾à¤ª विकसित होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ अधिक होती है।
उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª और आनà¥à¤µà¤¾à¤‚शिकी का पारिवारिक इतिहास।
तनाव
उचà¥â€à¤š रकà¥â€à¤¤à¤šà¤¾à¤ª से बचाव या रोकथाम
जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° लोग साधारण जीवन शैली में बदलाव करके उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª को रोक सकते हैं:
कà¥à¤› आसान à¤à¤•à¥â€à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ जैसे तेज चलना और वे वà¥â€à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® जो हृदय के लिठफायदेमंद हैं।
शरीर का वजन नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ रखें।
अपने आहार में पोटेशियम और फाइबर से à¤à¤°à¤ªà¥‚र खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को शामिल करें।
फलों, सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, और साबà¥à¤¤ अनाज जैसे कम वसा वाले खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को शामिल करें।
पà¥à¤°à¤¤à¤¿ दिन 1500 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® से कम नमक का सेवन बनाठरखें।
खूब पानी पिà¤à¥¤
शराब का सेवन पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में पà¥à¤°à¤¤à¤¿ दिन दो और महिलाओं में पà¥à¤°à¤¤à¤¿ दिन à¤à¤• पैक तक सीमित करें।
धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ से बचें।
योग, धà¥à¤¯à¤¾à¤¨, संगीत और वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® की मदद से तनाव को दूर करें।
नियमित अंतराल पर अपने बà¥â€à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° की जांच करते रहें।
हाई बà¥â€à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° की पहचान कैसे करें
वैसे तो शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में होने वाला हाइपरटेंशन कोई लकà¥à¤·à¤£ नहीं दिखाता है। इसलिठआपको समय- समय पर अपना बीपी चेक करवाते रहना चाहिà¤à¥¤ बीपी चेक करने के लिठआपके डॉकà¥à¤Ÿà¤° सà¥à¤«à¤¿à¤—à¥à¤®à¥‹à¤®à¥ˆà¤¨à¥‹à¤®à¥€à¤Ÿà¤° (रकà¥â€à¤¤à¤šà¤¾à¤ª मापी) और सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¥à¥‹à¤¸à¥à¤•ोप का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— कर सकते है। आजकल बीपी को वेरिफाई करने के लिठइलेकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤• सेंसर à¤à¥€ उपलबà¥à¤§ हैं। इसके साथ-साथ डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपका खान पान, बीपी की फैमिली हिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ और आप कितने à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ रहते हैं यह सब चेक कर सकते है। मरीज को तब डायगà¥à¤¨à¤¾à¤‡à¤œ किया जाता है जब लगातर दो रीडिंग में उनका बीपी हाई होता रहे। इसके अलावा मरीज का बà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ à¤à¥€ किया जाता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं उसे किडनी या हृदय की बीमारी तो नहीं, इसी बहाने उसका डायबिटीज (शà¥à¤—र लेवल) à¤à¥€ चेक किया जाता है। अगर आपके डॉकà¥à¤Ÿà¤° सही से डायगà¥à¤¨à¥‹à¤œ करते हैं तो इससे आपका हाई बीपी कम होगा और इससे जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ रिसà¥à¤• फैकà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ à¤à¥€ कम होने लगेगी।
हाई बà¥â€à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° का उपचार
आपके डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपको कोई à¤à¥€ उपचार बताने से पहले कà¥à¤› फैकà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ जैसे आपकी उमà¥à¤°, मेडिकल हिसà¥â€à¤Ÿà¥à¤°à¥€ (कही आपको पहले से ही कोई बीमारी तो नहीं है), जो आप दवाइयां खा रहे है यह सब चेक करेंगे।
पà¥à¤°à¥€ हाइपरटेंसीव लोगों को बीपी कम करने के लिठकà¥à¤› लाइफसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² बदलाव करने को सà¥à¤à¤¾à¤¯à¤¾ जाता है।
सà¥â€à¤Ÿà¥‡à¤œ-1 में लाइफसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² में बदलावों के साथ-साथ अगर बीपी 130/80 और 140/90 mmHg के बीच रहता है तो बीपी को कम करने के लिठआपको दवाइयां à¤à¥€ दी जा सकती हैं।
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ- 2 में लाइफसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² बदलाओं के साथ साथ आपको दो पà¥à¤°à¤•ार की दवाइयां दी जाती हैं, जिसमें से à¤à¤• डाइयूरेटिक होती है।
गंà¤à¥€à¤° हाइपरटेंशन को à¤à¤• दवाई नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ नहीं कर सकती है इसलिठदो या अधिक दवाइयों को साथ में जोड़ा जाता है। दो दवाइयों को साथ में देने से साइड इफेकà¥à¤Ÿ à¤à¥€ कम होते हैं और आपका बीपी à¤à¥€ कम होता है।
जिन मरीजों को कोई कंटामिटेंट बीमारी नहीं है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ निमà¥à¤¨ दवाई सà¥à¤à¤¾à¤ˆ जाती है।
60 साल के कम लोगों को à¤à¤‚जियोटेंसन रिसेपà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤° बà¥à¤²à¥‰à¤•रà¥à¤¸ दी जाती है। इसके साथ ही कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® चैनल बà¥à¤²à¥‰à¤•र à¤à¥€ कॉमà¥à¤¬à¤¿à¤¨à¥‡à¤¶à¤¨ थेरेपी के दौरान पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— की जा सकती है। इस थेरेपी में डायरेटिकस को à¤à¥€ à¤à¤• तीसरी डà¥à¤°à¤— के रूप में पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया जा सकता है।
60 साल से ऊपर के लोगों में डायरेटिकà¥à¤¸ के साथ-साथ सीसीबी को फरà¥à¤¸à¥à¤Ÿ लाइन उपचार में दिया जा सकता है।
छोटी उमà¥à¤° के लोगों में जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हाई रेनिन हाइपरटेंशन है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ ARB और नà¥à¤¯à¥‚ बेटा बà¥à¤²à¥‰à¤•र देने की सà¥à¤à¤¾à¤ˆ गई है।
जिन लोगों को डायबिटीज या किडनी रोग जैसी पहले से ही बीमारी हैं, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ निमà¥à¤¨ सà¥à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ का पालन करना चाहिà¤à¥¤
डायबिटीज के मरीजों को डाइयूरेटिक के साथ ACE इनà¥à¤¹à¤¿à¤¬à¤¿à¤Ÿà¤° दी जा सकती हैं।
हारà¥à¤Ÿ फेलियर के मरीजों को ACE इनà¥à¤¹à¤¿à¤¬à¤¿à¤Ÿà¤° के साथ साथ डायरेटिकà¥à¤¸, बेटा बà¥à¤²à¥‰à¤•र à¤à¥€ दी जा सकती हैं।
हृदय रोग वाले बीपी के मरीजों को बेटा बà¥à¤²à¥‰à¤•र, ACE इनà¥à¤¹à¤¿à¤¬à¤¿à¤Ÿà¤° और कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® चैनल बà¥à¤²à¥‰à¤•रà¥à¤¸ दी जा सकती है।
लाइफसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤²
अगर आप कà¥à¤› लाइफसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² में बदलाव करते हैं तो इससे आपको दवाइयां लेने की आवशà¥à¤¯à¤•ता कम होगी।
सोडियम का सेवन कम करने और पोटेशियम का सेवन अधिक करने से आपका बीपी कम हो सकता है।
पोटैशियम के सपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚ट लेने की बजाठआप फल और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ खा सकते हैं जिनमें पोटैशियम की मातà¥à¤°à¤¾ अधिक हो।
नियमित रूप से थोड़ी बहà¥à¤¤ à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ करना जैसे बà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤• वॉक करना बीपी के मरीजों के लिठबहà¥à¤¤ लाà¤à¤¦à¤¾à¤¯à¤• हो सकती है।
मोटे लोगों को लो कैलोरी डाइट और à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ करनी चाहिà¤à¥¤
योग, मेडिटेशन आदि तकनीकों का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करके सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸ कम करें।
इन बदलावों के साथ साथ आपको अपनी डॉकà¥à¤Ÿà¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ दी गई दवाइयां à¤à¥€ नियमित रूप से लेनी चाहिà¤à¥¤
हाइपरटेंशन का उपचार
बीटा बà¥à¤²à¥‰à¤•र :
यह दवाइयां आपकी धड़कन की सà¥à¤ªà¥€à¤¡ और फोरà¥à¤¸ कम करके काम करती है।
डाइयूरेटिकà¥â€à¤¸ :
यह शरीर से अधिक नमक और अधिक फà¥à¤²à¥‚इड की मातà¥à¤°à¤¾ कम करती है।
ACE इनà¥à¤¹à¤¿à¤¬à¤¿à¤Ÿà¤° :
यह उस केमिकल को सिंथेसिस होने से रोकती है जो आपकी आरà¥à¤Ÿà¤°à¥€ वॉलà¥à¤¸ को संकीरà¥à¤£ करता है।
कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® चैनल बà¥à¤²à¥‰à¤•र :
यह दवा कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® को कारà¥à¤¡à¤¿à¤à¤• मसल में जाने से रोकती है।
रोग का निदान और खतरे
रोग का निदान
जीवनशैली में कà¥à¤› बदलाव करके और उचित दवाइयां लेकर मरीज आसानी से बीपी को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ कर सकते हैं। बीपी को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ न कर पाने पर रोगियों के सामने दूसरी परेशानी खड़ी हो सकती है:
दिल का दौरा
दृषà¥à¤Ÿà¤¿ दोष
सà¥â€à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤•
पैरों, पेट और पेलà¥à¤µà¤¿à¤• à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में अपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ रकà¥à¤¤ की आपूरà¥à¤¤à¤¿
जटिलताà¤à¤‚
अगर आप बीपी को समय पर नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ नहीं करते हैं तो उससे आपको बहà¥à¤¤ सी मà¥à¤¶à¥à¤•िलें देखने को मिल सकती हैं जैसे :
छाती में दरà¥à¤¦ होना
ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ की कमी होने के कारण हारà¥à¤Ÿ अटैक आना।
जब आपका हृदय परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ बà¥à¤²à¤¡ पंप नहीं कर पाता है उसकी वजह से हारà¥à¤Ÿ फेलियर होना।
अनियमित धड़कन
दिखने में समसà¥à¤¯à¤¾ आना।
सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤•
किडनी फेलियर
अचानक से मृतà¥à¤¯à¥ होना
वैकलà¥à¤ªà¤¿à¤• उपचार
उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के इलाज के लिठसपà¥â€à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚ट और वैकलà¥à¤ªà¤¿à¤• दवाओं का उपयोग किया जाता है। हालांकि, उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के लिठकोई à¤à¥€ उपचार शà¥à¤°à¥‚ करने से पहले à¤à¤• औषधीय चिकितà¥à¤¸à¤• से परामरà¥à¤¶ करना हमेशा बेहतर होता है।
उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª के लिठकà¥à¤› वैकलà¥à¤ªà¤¿à¤• उपचार इस पà¥à¤°à¤•ार हैं:
डारà¥à¤• चॉकलेट
कोको बीनà¥à¤¸ से पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ डारà¥à¤• चॉकलेट फà¥à¤²à¥‡à¤µà¥‹à¤¨à¥‹à¤‡à¤¡à¥à¤¸ और पॉलीफेनोलà¥à¤¸ से यà¥à¤•à¥â€à¤¤ होता है। डारà¥à¤• चॉकलेट की कम मातà¥à¤°à¤¾ के सेवन से बीपी में कमी और रकà¥à¤¤ के कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में सà¥à¤§à¤¾à¤° हो सकता है।
तनाव कम करने के लिठकà¥à¤› उपाय
तनाव को कम करने के लिठतन और मन से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ कà¥à¤› तकनीकों का सहारा लिया जा सकता है।
कà¥à¤› पारंपरिक तकनीक जिसमें शà¥à¤µà¤¾à¤¸, धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ और अनà¥â€à¤¯ मूवमेंट शामिल हैं।
सांस लेने की धीमी तकनीक।
टà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¥‡à¤‚डैंटल मेडिटेशन जिसमें à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ दिन में दो बार बैठता है और आंखों बंद कर मंतà¥à¤°à¥‹à¤šà¥â€à¤šà¤¾à¤° करना है।
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