हार्ट फेल्योर किस उम्र में होता है?HealthPlanet

Posted on Mon 28th Nov 2022 : 15:23

हृदय रोग किसी भी उम्र में हो सकता है, इसलिए दिल का ख़्याल पूरे दिल से रखें

कसरती शरीर और सेहतमंद दिखना इस बात की गारंटी बिल्कुल नहीं है कि आपको दिल से जुड़ी कोई बीमारी नहीं होगी।
हृदय रोग किसी भी उम्र में हो सकता है। इसलिए दिल का ख़्याल रखिए। क्यों और कैसे, जानिए आवरण कथा में विस्तार से।

हाल ही में टीवी कलाकार सिद्धार्थ शुक्ला का महज़ 40 साल की उम्र में हृदयाघात से निधन हो गया। फिर दिल के चर्चे होने लगे। एक समय था जब हृदय रोग को उम्र के साथ जोड़कर देखा जाता था, पर अब दिल किसी का भी बीमार हो सकता है। बच्चों से लेकर युवा तक सब इसकी ज़द में हैं। इंडियन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक़, भारत में 50 फ़ीसदी ऐसे मामले होते हैं जिनमें हार्ट अटैक से मरने वाले पुरुषों की उम्र 50 साल से कम होती है। वहीं 25 फ़ीसदी मामलों में तो 40 से कम की उम्र के लोग भी अपनी जान गंवा बैठते हैं।

दरअसल, रक्तचाप, परिवार में हृदयरोग का इतिहास और तनावपूर्ण जीवनशैली के होते हुए भी युवा व मध्य आयु के लोग नियमित रूप से चेकअप नहीं कराते। जिम जाकर तनाव दूर करने और कसरती शरीर पाने के लिए हर तरह का व्यायाम अपना लेते हैं। साथ ही शरीर सौष्ठव को बढ़ावा देने वाले वो तमाम पाउडर और खाद्य भी नियमित रूप से खाने लगते हैं, जो शायद उनके शरीर के लिए उचित ना हों।

इन्हें अधिक ख़तरा

आमतौर पर मोटापा और अनियमित जीवनशैली को हृदय रोग के सबसे बड़े कारणों के रूप में देखा जाता है, जो कि सही भी है। लेकिन बहुत से लोग जो अपनी फिटनेस के प्रति सजग हैं, नियमित व्यायाम करते हैं, उनमें भी इसका जोखिम देखा गया है। जिन लोगों के परिवार में हृदय रोगों के मामले हुए हों, जो सफ़र ज़्यादा करते हैं, जिन्हें डायबिटीज़, ब्लडप्रेशर है, भारी काम और ज़्यादा एक्सरसाइज़ करते हैं, उनमें हृदय रोग और दिल के दौरे का अधिक ख़तरा है। स्वस्थ हृदय के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना भी ज़रूरी है।

ख़तरा कैसे बनता है?

20 साल से ऊपर के युवाओं में खानपान की लापरवाही से हृदय की धमनियों में थोड़े-बहुत ब्लॉकेज बनने लगते हैं, जो यूं तो तत्काल ख़तरनाक नहीं होते। लेकिन अगर कोई बेहद तनावपूर्ण स्थिति आ जाए, या अचानक कोई सदमा देने वाली घटना हो या कोई संक्रमण ही हो जाए, तो इन ब्लॉकेज के पास क्लॉट जम सकते हैं, जो अवरोध को बढ़ाकर दिल के दौरे में तब्दील कर देते हैं।

क्षमता से ज़्यादा न करें व्यायाम

अति हर चीज़ की बुरी होती है, और यह बात जिम और एक्सरसाइज़ पर भी लागू होती है। अक्सर युवा फिल्मी सितारों जैसी काया पाने के चक्कर में अत्यधिक व्यायाम पर ज़ोर देते हैं। अत्यधिक व्यायाम या भारी सामान उठाने से धमनियों (रक्त वाहिकाओं) पर दबाव बनता है। इसकी गंभीर स्थिति में दिल का दौरा पड़ने का अधिक जोखिम होता है। इसलिए शरीर की सीमाओं को देखते हुए ही व्यायाम या जिम करें। यदि चिकित्सक अधिक व्यायाम ना करने की सलाह देते हैं, तो उसे नज़रअंदाज़ बिल्कुल नहीं करें।

जीवन में अतिरिक्त तनाव न लें

आज के दौर की आपाधापी में अतिरिक्त मानसिक दबाव बढ़ रहा है। कोविड महामारी के बाद से यह स्थिति और भी बिगड़ गई है। ऐसे में लगातार व्यायाम के बावजूद अतिरिक्त तनाव रक्तचाप को प्रभावित कर सकता है, जो हृदय पर दबाव बनाता है। इसलिए अपने निजी और पेशेवर जीवन में तालमेल बिठाएं, उचित मात्रा में नींद लें, शांत वातावरण में वक़्त बिताने के लिए समय निकालें, मित्रों या क़रीबियों के संपर्क में रहें। तनाव को हावी ना होने दें। यदि फिर भी किसी तरह की मानसिक परेशानी का सामना कर रहे हैं तो बिना झिझक के मनोविशेषज्ञ या मनोचिकित्सक से परामर्श लें, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य को नज़रअंदाज़ ना करें।

खानपान पर दें विशेष ध्यान

पौष्टिक आहार के बजाय इस समय जंक फूड का अधिक सेवन हो रहा है। इससे शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ती है और इसका सीधा प्रभाव दिल पर पड़ता है। चाहे जैसी भी स्थिति हो, स्वास्थ्यवर्धक भोजन का सेवन करने की कोशिश करें।

तुरंत बनाएं धूम्रपान से दूरी— धूम्रपान करने वालों को हृदय रोग होने की आशंका अधिक होती है। धूम्रपान करने से हृदय को ख़ून की आपूर्ति करने वाली धमनियों में थक्के जमने के आसार बढ़ जाते हैं। रक्त का हृदय तक संचार ना हो पाना दिल के दौरे की वजह बनता है।

करवाएं वर्जिश से पहले चेकअप

जिम जाना ही फिटनेस का पहला क़दम नहीं है। सबसे पहले व्यक्ति को अपना नॉर्मल चेकअप करवाना चाहिए। शरीर किस स्थिति में है, कितना और किस समय व्यायाम उचित है, किस आनुवंशिक बीमारी का जोखिम है, इन तमाम बातों को देखते हुए ही व्यायाम और डाइट का नियम बनाएं। इसके लिए डॉक्टर और आहार विशेषज्ञ की मदद लें। हृदय रोग की समस्या यदि आनुवंशिक है तो फिट रहने के नियम पहले से तय करें। इसके अलावा यदि रक्तचाप आदि की समस्या है तो खान-पान में बदलाव और व्यायाम थोड़े हल्के किए जा सकते हैं, नहीं तो हृदय रोग का भी जोखिम बढ़ सकता है।

लें काम से बीच-बीच में विराम

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, लंबे समय तक बैठकर काम करने से दिल की बीमारी और स्ट्रोक का ख़तरा बहुत ज़्यादा बढ़ा है। डब्ल्यूएचओ और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के अध्ययन के अनुसार, 2016 में लंबे समय तक काम करने से स्ट्रोक और दिल की बीमारी से 7,45,000 लोगों की मौत हुई थी। लगातार बैठे रहने और काम का तनाव होने के कारण दिल पर असर पड़ रहा है। ऐसे में काम करें, लेकिन बीच-बीच में विराम लें और चले-फिरें।

इसीलिए सावधान किया जाता है कि बहुत ज़्यादा नमक, शक्कर, मैदे से बने खाद्य आदि ना लें। स्वास्थ्यवर्धक भोजन खाएं, चिकित्सक से जांच करवाने के बाद ही जिम ट्रेनर के परामर्श से व्यायाम चुनें और तनावरहित रहते हुए भरपूर नींद लें।

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