स्किन फंगस के क्या कारण होते हैं?HealthPlanet

Posted on Sat 17th Dec 2022 : 17:15

फंगल इंफेक्शन क्यों होता है और क्या हैं इसके लक्षण? डर्मेटोलॉजिस्ट से जानें इलाज और बचाव के टिप्स

फंगल इंफेक्शन के कारण शरीर में लाल तरह के दाग या चकते उभर जाते हैं, जहां हमेशा खुजली होती है। इसे हम दाग या रिंगवार्म भी कहते हैं। यह शरीर की नमी और गर्मी वाले जगह पर होती है। बगल, कूल्हे और जांघ में ज्यादा फंगल इंफेक्शन होता है। यह इंफेक्शन एक से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। जिस व्यक्ति को फंगल इंफेक्शन है उसके पहने कपड़े, तौलिया का इस्तेमाल करने से इंफेक्शन दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। इसके लिए हमें दूसरे के सामान इत्यादि का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। जमशेदपुर के स्किन स्पेशलिस्ट व बिष्टुपुर तुलसी भवन में प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे राजीव ठाकुर ने कहा- फंगल इन्फेक्शन का इलाज अगर नहीं कराएंगे तो यह बार-बार होगा, जो शरीर के लिए काफी नुकसानदायक है। ज्यादातर यह बीमारी बारिश के मौसम में होती है।

दिन में एक बार जरूर नहाएं
डॉक्चर बताते हैं कि फंगल इंफेक्शन से बचने के लिए हमें अपने शरीर को साफ रखना जरूरी है। इसलिए रोज नहाना चाहिए। अगर ज्यादा पसीना आपको हो रहा है तो दिन में दो बार नहाना चाहिए। जिम में वर्कआउट करने के बाद भी नहाना चाहिए, क्योंकि अगर पसीना आपके शरीर में रह गया है तो फंगल इंफेक्शन हो सकता है। ध्यान रखें कि आपके शरीर पर पानी इकट्ठा न हो। हमेशा माइल्ड साबुन से नहाना चाहिए। अगर आपको फंगल इंफेक्शन है और आप हार्श साबुन का इस्तेमाल कर रहे हैं तो स्किन खराब हो जाएगी। इससे इंफेक्शन बार-बार हो सकता है। नहाने के बाद हमेशा शरीर को पोछना चाहिए। अगर शरीर पर पानी रह जाएगा तो फंगल इंफेक्शन हो सकता है।

तौलिये को नहाने के बाद दो घंटे तक धूप में सुखा लें। अगर धूप में नहीं सुखाएंगे तो इसमें थोड़ी बहुत नमी रह जाएगी, जिससे तौलिया फंगस का घर बन सकता है। इससे इंफेक्शन फैल सकता है। बीमारी से बताव के लिए टाइट कपड़ों को नहीं पहनना चाहिए। इससे ज्यादा पसीना आता है। हमेशा सूती कपड़े पहनें, इससे फंगल इंफेक्शन का खतरा कम रहता है। कपड़े रोजाना गर्म पानी से धोएं। इसे आयरन करके पहनें, जिससे अगर कपड़े में बैक्टीरिया हैं तो वह हीट से मर जाएंगे। इसके अलावा हर उम्र के लोगों को नाखून काट कर रखना चाहिए। अगर नाखून नहीं काटेंगे तो इंफेक्शन वाली जगह पर खुजली करने से यह नाखून में आ जाएगा। इसके बाद शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाएगा। फंगल इंफेक्शन वाली जगह पर खुजली न करें। क्योंकि अगर हम खुजली करेंगे तो यह इंफेक्शन शरीर के अन्य अंगों में फैल जाएगा।  
बिना डॉक्टरी सलाह के फंगल इंफेक्शन को ठीक करने के लिए कोई क्रीम न लगाएं
इसके इलाज के लिए ज्यादातर लोग बिना स्किन स्पेशलिस्ट की सलाह लिए केमिस्ट से जाकर क्रीम लेते हैं। कैमिस्ट आपको स्टेरायड क्रीम देंगे, जिसे लगाने से इंफेक्शन कुछ दिन में खत्म हो जाएगा। लेकिन यह जड़ से खत्म नहीं होता है कुछ दिन बाद फिर हो जाता है। बार-बार इस क्रीम को फंगल इंफेक्शन वाली जगह पर लगाते हैं तो वहां की स्किन खराब हो जाती है। इसके लिए कोई इंजेक्शन नहीं है। अगर आपको कोई इंजेक्शन लेने की सलाह दें रहे हैं तो डॉक्टर के पास जाकर परामर्श लें। फंगल इंफेक्शन होने पर हमेशा स्किन स्पेशलिस्ट से सलाह लेकर ही कोई दवा या क्रीम लगाएं।


फंगल इंफेक्शन के लक्षण

स्किन का लाल हो जाना, चकत्तों का पड़ जाना
बार बार खुजली होना
फफोले और छाले का खुजली वाले जगह पर हो जाना
खुजली वाली जगह पर डंक मारने जैसा एहसास होना
खुजली वाली जगह पर जलन होना
पस वाली फुंसियों का निकलना


इससे बचाव के लिए इन चीजों का रखें ध्यान

रोजाना नहाएं, ज्यादा पसीना आने पर दो बार नहाएं
गीले और ठंडे कपड़े को नहीं पहनें
नहाने व बारिश में भीगने के बाद शरीर को पूरी तरह सुखाएं
आयरन किए साफ कपड़े को पहनें
पैरों में इंफेक्शन होता है तो जूते को नहीं पहनें
माइल्ड साबुन का इस्तेमाल करें
दूसरे व्यक्ति के कपड़े, तौलिया, साबुन, कंघी का इस्तेमाल न करें
सूती और ढीले कपड़े पहनें, टाइट कपड़े को न पहनें  
डायबिटीज के मरीज ज्यादा सावधानी बरतें
डॉक्टरी सलाह के बिना किसी भी क्रीम को प्रभावित जगह पर नहीं लगाएं  
कपड़ों को गर्म पानी से धोएं
नाखूनों को काटकर रखें
खुजली नहीं करें, इससे इंफेक्शन फैलता है
अगर दवा लें रहे है तो इंफेक्शन के छूटने के एक सप्ताह बाद तक उसे खाएं। नहीं तो दोबारा इंफेक्शन फिर से हो सकता है
क्रीम को इंफेक्शन के बाहर तक लगाएं

हल्के में न लें बीमारी, लें डॉक्टरी सलाह

अगर आपको फंगल इंफेक्शन हो गया है तो तुरंत स्किन के डॉक्टर से मिलें। उसके बाद ही किसी दवा या क्रीम का इस्तेमाल करें। आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ परामर्श के लिए है। यदि आप भी इस बीमारी से ग्रसित हैं तो इसे हल्के में लेने की बजाय डॉक्टर की सलाह लेकर इलाज करवाएं। नहीं तो ये बीमारी ठीक ही नहीं होगी।

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