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सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• कà¥à¤¯à¤¾ है!
जीवनशैली में बदलाव के साथ बà¥à¤°à¥‡à¤¨ सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• की समसà¥à¤¯à¤¾ तेजी से बढ़ी है, मगर इसके खतरों से अà¤à¥€ à¤à¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° लोग अनजान हैं। इंडियन सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• असोसिà¤à¤¶à¤¨ की à¤à¤• सà¥à¤Ÿà¤¡à¥€ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, दिलà¥à¤²à¥€ के 45 परà¥à¤¸à¥‡à¤‚ट लोगों को यह à¤à¥€ नहीं पता है कि सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• कà¥à¤¯à¤¾ है? यही वजह है कि इलाज के बेहतर विकलà¥à¤ª उपलबà¥à¤§ होने के बावजूद मरीजों को समय पर सही उपचार नहीं मिल पा रहा है।
इस सà¥à¤Ÿà¤¡à¥€ में दिलà¥à¤²à¥€ के 204 लोगों को शामिल किया गया था, जिसमें 45 परà¥à¤¸à¥‡à¤‚ट लोगों ने बीमारी के बारे में कोई à¤à¥€ जानकारी होने से इनकार किया। 23.5 परà¥à¤¸à¥‡à¤‚ट के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, यह हारà¥à¤Ÿ अटैक का दूसरा नाम है। बीमारी के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के बारे में पूछने पर 68 परà¥à¤¸à¥‡à¤‚ट ने कहा कि शरीर निषà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯ हो जाता है। 23 परà¥à¤¸à¥‡à¤‚ट लोगों के हिसाब से इसमें चेहरा या मà¥à¤‚ह टेढ़ा हो जाता है। यह पूछने पर कि सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• होने के तà¥à¤°à¤‚त बाद कà¥à¤¯à¤¾ करना चाहिà¤? 65.7 परà¥à¤¸à¥‡à¤‚ट ने कहा, तà¥à¤°à¤‚त हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² जाना चाहिà¤à¥¤ 17.6 परà¥à¤¸à¥‡à¤‚ट के हिसाब से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ अंगों की मालिश करनी चाहिठऔर 8.3 परà¥à¤¸à¥‡à¤‚ट के हिसाब से मरीज को कोई गरà¥à¤® चीज पिलानी चाहिà¤à¥¤ जब यह पूछा गया कि सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• के मरीज का इलाज कौन से à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ करते हैं, 64 परà¥à¤¸à¥‡à¤‚ट का कहना था जनरल फिजिशन, 34.8 परà¥à¤¸à¥‡à¤‚ट ने बताया नà¥à¤¯à¥‚रोलॉजिसà¥à¤Ÿà¥¤ यह पूछा गया कि कितने लोगों को पता है कि देश में à¤à¤¸à¥‡ विकलà¥à¤ª मौजूद हैं जिनसे सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• आने के तीन-चार घंटे के à¤à¥€à¤¤à¤° इलाज शà¥à¤°à¥‚ होने पर मरीज को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है तब 90 परà¥à¤¸à¥‡à¤‚ट ने कोई à¤à¥€ जानकारी होने से इनकार किया।
सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• के लकà¥à¤·à¤£
सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• का सबसे आम लकà¥à¤·à¤£ है शरीर के à¤à¤• ओर के हिसà¥à¤¸à¥‡ में कमजोरी या लकवा। हो सकता है कि मरीज अपनी इचà¥à¤›à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° à¤à¤• ओर के हाथ-पैर हिला ही न पाठया उनमें कोई संवेदना ही महसूस न हो। सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• से बोलने में दिकà¥à¤•त हो सकती है और चेहरे की मांस पेशियां कमजोर हो जाती हैं जिससे लार बहने लगती है। सà¥à¤¨à¥à¤¨ पड़ना या à¤à¥à¤°à¤à¥à¤°à¥€ होना à¤à¥€ बहà¥à¤¤ सामानà¥à¤¯ बात है। सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• की वजह से सांस लेने में à¤à¥€ तकलीफ हो सकती है और यहां तक कि मरीज अचेत à¤à¥€ हो सकता है।
फोरà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² के नà¥à¤¯à¥‚रोलॉजी विà¤à¤¾à¤—ाधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· डॉ. संजय सकà¥à¤¸à¥‡à¤¨à¤¾ कहते हैं कि, फिलहाल हर छठा वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ लाइफ में कà¤à¥€ न कà¤à¥€ सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• à¤à¥‡à¤²à¤¤à¤¾ है। दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤° में हर छठसेकंड à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• से मौत होती है। अगर बचाव व इलाज के बारे में लोग जागरूक हो जाà¤à¤‚ तो बहà¥à¤¤ से लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है। इसी उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ से हर साल 29 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर को सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• जागरूकता दिवस मनाया जाता है। इस बार की थीम है, वन इन सिकà¥à¤¸à¥¤ मैकà¥à¤¸ हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² के डॉ. शाकिर हà¥à¤¸à¥ˆà¤¨ कहते हैं कि देश में 60 से ऊपर की उमà¥à¤° के लोगों में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• है। 15 से 59 आयà¥à¤µà¤°à¥à¤— में मृतà¥à¤¯à¥ का पांचवां सबसे बड़ा कारण है। बी. à¤à¤². कपूर हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² के कंसलटेंट डॉ. आनंद कà¥à¤®à¤¾à¤° सकà¥à¤¸à¥‡à¤¨à¤¾ कहते हैं कि सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• का सबसे आम लकà¥à¤·à¤£ है शरीर के à¤à¤• ओर के हिसà¥à¤¸à¥‡ में कमजोरी या लकवा। हो सकता है कि मरीज अपनी इचà¥à¤›à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° à¤à¤• ओर के हाथ-पैर हिला ही न पाठया उनमें कोई संवेदना ही महसूस न हो। सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• से बोलने में दिकà¥à¤•त हो सकती है और चेहरे की मांस पेशियां कमजोर हो जाती हैं जिससे लार बहने लगती है। सà¥à¤¨à¥à¤¨ पड़ना या à¤à¥à¤°à¤à¥à¤°à¥€ होना à¤à¥€ बहà¥à¤¤ सामानà¥à¤¯ बात है। सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• की वजह से सांस लेने में à¤à¥€ तकलीफ हो सकती है और यहां तक कि मरीज अचेत à¤à¥€ हो सकता है।
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