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बà¥à¤°à¥‡à¤¨ टà¥à¤¯à¥‚मर, कारण पता नहीं
आज बà¥à¤°à¥‡à¤¨ टà¥à¤¯à¥‚मर अवेयरनेस डे है। बà¥à¤°à¥‡à¤¨ टà¥à¤¯à¥‚मर यानी हमारे बà¥à¤°à¥‡à¤¨ में गांठका होना। बà¥à¤°à¥‡à¤¨ में जब कोशिकाओं की असामानà¥à¤¯ वृदà¥à¤§à¤¿ होने लगती है, तो बà¥à¤°à¥‡à¤¨ के खास हिसà¥à¤¸à¥‡ में कोशिकाओं का गà¥à¤šà¥à¤›à¤¾ बन जाता है। कोशिकाओं के इसी गà¥à¤šà¥à¤›à¥‡ को बà¥à¤°à¥‡à¤¨ टà¥à¤¯à¥‚मर कहते हैं। यह कई बार कैंसर की गांठमें बदल जाता है।
यह टà¥à¤¯à¥‚मर या गांठकिसी चीज की à¤à¥€ हो सकती है। इस गांठसे हमारे बà¥à¤°à¥‡à¤¨ का कोई à¤à¥€ हिसà¥à¤¸à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकता है। टà¥à¤¯à¥‚मर से शरीर का कौन-सा हिसà¥à¤¸à¤¾ या अंग पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होगा, यह इस बात पर निरà¥à¤à¤° करता है कि टà¥à¤¯à¥‚मर या गांठबà¥à¤°à¥‡à¤¨ के किस हिसà¥à¤¸à¥‡ में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ है। अगर यह गांठबà¥à¤°à¥‡à¤¨ के दाईं तरफ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ है तो हमारे शरीर के बाईं तरफ का हिसà¥à¤¸à¤¾ या अंग पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होगा और अगर टà¥à¤¯à¥‚मर बाईं तरफ है तो इसकी वजह से हमारे शरीर के दाईं तरफ का हिसà¥à¤¸à¤¾ या अंग पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होगा।
बà¥à¤°à¥‡à¤¨ के अलग-अलग हिसà¥à¤¸à¥‡ होते हैं- फà¥à¤°à¤‚टल रीजन, यह आगे की तरफ का हिसà¥à¤¸à¤¾ होता है, टेंपोरल रीजन, पेराइटल रीजन और आॅकà¥à¤¸à¥€à¤ªà¥€à¤Ÿà¤² रीजन। अगर फà¥à¤°à¤‚टल रीजन में टà¥à¤¯à¥‚मर होता है तो वह रोगी के वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ यानी परà¥à¤¸à¤¨à¥ˆà¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। टेंपोरल रीजन में टà¥à¤¯à¥‚मर होने पर वह रोगी की वाणी और याददाशà¥à¤¤ यानी सà¥à¤ªà¥€à¤š और मेमोरी पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। पेराइटल à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में टà¥à¤¯à¥‚मर होने पर वह रोगी के सेंसेशन यानी संवेदनशीलता को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है और आॅकà¥à¤¸à¥€à¤ªà¥€à¤Ÿà¤² à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में टà¥à¤¯à¥‚मर होने पर वह रोगी की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ यानी विजन पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है।
पà¥à¤°à¤•ार : बà¥à¤°à¥‡à¤¨ टà¥à¤¯à¥‚मर कई पà¥à¤°à¤•ार का होता है। अगर टà¥à¤¯à¥‚मर बà¥à¤°à¥‡à¤¨ के बà¥à¤²à¤¾à¥…यल सेल से बॠरहा हो तो वह बà¥à¤²à¤¾à¤¯à¥‹ बà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¥‹à¤®à¤¾ टà¥à¤¯à¥‚मर बन सकता है। सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¤¾à¤‡à¤Ÿ से बॠरहा है तो सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¤¾à¤‡à¤Ÿà¥‹à¤®à¤¾ बन सकता है। वैसà¥à¤•à¥à¤²à¤° टिशà¥à¤¯à¥‚ से बॠरहा है तो à¤à¤®à¤¿à¤‚जियोमा या à¤à¤‚मिंजियोबà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¥‹à¤®à¤¾ बन सकता है। अगर टà¥à¤¯à¥‚मर बà¥à¤°à¥‡à¤¨ के डà¥à¤¯à¥‚रा हिसà¥à¤¸à¥‡ से बà¥à¤¤à¤¾ है तो वह मेंनिंगजोमा टà¥à¤¯à¥‚मर में परिवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ हो सकता है। कà¥à¤› टà¥à¤¯à¥‚मर साधारण यानी बेनाइन होते हैं और कà¥à¤› मेलिगà¥à¤¨à¥‡à¤‚ट यानी कैंसरस होते हैं।
कारण : बà¥à¤°à¥‡à¤¨ टà¥à¤¯à¥‚मर होने का कोई खास कारण अब तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन फिर à¤à¥€ इसके होने का à¤à¤• कारण जेनेटिक डिसआॅरà¥à¤¡à¤° होता है। इसके कारण à¤à¥€ टà¥à¤¯à¥‚मर बनते हैं। कà¥à¤› मामलों में रेडिà¤à¤¶à¤¨ के संपरà¥à¤• में आने से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में बà¥à¤°à¥‡à¤¨ टà¥à¤¯à¥‚मर विकसित हो जाता है। कई बार आॅटो इमà¥à¤¯à¥‚न सपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ के चलते à¤à¥€ बà¥à¤°à¥‡à¤¨ टà¥à¤¯à¥‚मर होता है। अधिकतर मामलों में कारण पता नहीं चल पाता है।
लकà¥à¤·à¤£ : टà¥à¤¯à¥‚मर के आरंà¤à¤¿à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ में होने पर सिरदरà¥à¤¦ होता है, चकà¥à¤•र आते हैं, कà¤à¥€-कà¤à¥€ उलà¥à¤Ÿà¥€ à¤à¥€ आती है। टà¥à¤¯à¥‚मर होने पर रोगी को अकà¥à¤¸à¤° सà¥à¤¬à¤¹-सà¥à¤¬à¤¹ उलà¥à¤Ÿà¥€ होती है। इतना ही नहीं, अगर टà¥à¤¯à¥‚मर बà¥à¤°à¥‡à¤¨ के दाईं ओर होता है तो रोगी के बाà¤à¤‚ हाथ-पैर में कमजोरी महसूस होती है, उसमें à¤à¤¨à¤à¤¨à¤¾à¤¹à¤Ÿ होती है। रोगी को दौरे पड़ने लगते हैं। कई बार तो रोगी बेहोश à¤à¥€ हो जाता है। रोग के बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बॠजाने पर रोगी कोमा में à¤à¥€ जा सकता है।
उपचार : बà¥à¤°à¥‡à¤¨ टà¥à¤¯à¥‚मर की पहचान करने के लिठरोगी का इमेजिंग टेसà¥à¤Ÿ किया जाता है। इस टेसà¥à¤Ÿ के तहत रोगी के बà¥à¤°à¥‡à¤¨ का सीटी सà¥à¤•ैन, à¤à¤®à¤†à¤°à¤†à¤ˆ और पेट सà¥à¤•ैन किया जाता है। इनके बाद सरà¥à¤œà¤°à¥€ की जाती है। अगर रोगी बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤— है तो बेनाइन टà¥à¤¯à¥‚मर होने पर सरà¥à¤œà¤°à¥€ की बजाय दवाओं से उपचार किया जाता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि बेनाइन टà¥à¤¯à¥‚मर धीरे-धीरे बà¥à¤¤à¤¾ है और इससे रोगी की जान को खतरा नहीं होता है। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मामलों में सरà¥à¤œà¤°à¥€ से पहले रोगी को रेडिà¤à¤¶à¤¨ थेरैपी और कीमोथेरेपी दी जाती है। रेडिà¤à¤¶à¤¨ थेरैपी टà¥à¤¯à¥‚मर में वृदà¥à¤§à¤¿ रोक देती है।
अगर बेनाइन टà¥à¤¯à¥‚मर है यानी वह गà¥à¤°à¥‡à¤¡ 1 और 2 का टà¥à¤¯à¥‚मर है और वह सिमà¥à¤ªà¤Ÿà¥‹à¤®à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• à¤à¥€ है। यानी टà¥à¤¯à¥‚मर के साथ रोगी में इसके लकà¥à¤·à¤£ à¤à¥€ दिखाई देते हैं, जैसे à¤à¤• तरफ का लकवा होना, à¤à¤¨à¤à¤¨à¤¾à¤¹à¤Ÿ होना, सिरदरà¥à¤¦ का बेहद तेज और बरà¥à¤¦à¤¾à¤¶à¥à¤¤ के बाहर होना, दृषà¥à¤Ÿà¤¿ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होना, रोशनी कम होना। इस तरह के लकà¥à¤·à¤£ दिखाई देने पर बेनाइन टà¥à¤¯à¥‚मर में à¤à¥€ सरà¥à¤œà¤°à¥€ ही à¤à¤•मातà¥à¤° विकलà¥à¤ª होता है। सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद मरीज 10-15 साल आराम से जी जाते हैं। बेनाइन टà¥à¤¯à¥‚मर के जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मामलों में रोगी ठीक हो जाता है, लेकिन कैंसरस टà¥à¤¯à¥‚मर होने यानी गà¥à¤°à¥‡à¤¡ 3 और 4 के टà¥à¤¯à¥‚मर होने पर आॅपरेशन के बाद à¤à¥€ रोगी का जीवन खतरे में रहता है। इस टà¥à¤¯à¥‚मर की सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद à¤à¥€ रोगी के बचने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नहीं रहती है। कह सकते हैं कि कैंसरस टà¥à¤¯à¥‚मर यानी मैलिगà¥à¤¨à¥‡à¤‚ट टà¥à¤¯à¥‚मर में सरà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤µà¤² रेट बहà¥à¤¤ अचà¥à¤›à¤¾ नहीं होता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि अधिकतर मामलों में कैंसरस टà¥à¤¯à¥‚मर वापस बॠजाता है।
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