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असà¥à¤¥à¤®à¤¾ है, तो जान लें आपको कà¥à¤¯à¤¾ खाना चाहिठऔर कà¥à¤¯à¤¾ नहीं
असà¥à¤¥à¤®à¤¾ à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ बीमारी है जो रह-रह हो सकती है। à¤à¤¸à¥‡ में आपको अपने खान-पान को लेकर सरà¥à¤¤à¤• रहना चाहिà¤à¥¤ इसलिठजानते हैं असà¥à¤¥à¤®à¤¾ में कà¥à¤¯à¤¾ खाà¤à¤‚ और किन चीजों को खाने से परहेज करें।
जब आप किसी खास बीमारी से पीड़ित होते हैं, तो अपने खानपान का विशेष खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखना जरूरी हो जाता है। कई à¤à¤¸à¥‡ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ होते हैं, जो आपकी बीमारी के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को और à¤à¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बढ़ा सकते हैं, तो कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ फूडà¥à¤¸ होते हैं, जो बीमारी को कम करने में मदद करते हैं। à¤à¤¸à¥€ ही à¤à¤• बीमारी है असà¥à¤¥à¤¾à¤® (Asthma in Hindi)। असà¥à¤¥à¤®à¤¾ में कà¥à¤› चीजों को खाने इसके अटैक को टà¥à¤°à¤¿à¤—र कर सकता है। जैसे कि अगर आप असà¥à¤¥à¤®à¤¾ जैसी बीमारी से गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ हैं, तो इसके लिठà¤à¥€ खानपान की महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका होती है। कà¥à¤› खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का खाना असà¥à¤¥à¤®à¤¾ को तà¥à¤°à¤‚त टà¥à¤°à¤¿à¤—र करता है और सांस लेने की समसà¥à¤¯à¤¾ को बढ़ा देता है। को कà¥à¤› चीजें असà¥à¤¥à¤®à¤¾ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ (symptoms of asthma) को बढ़ा सकते हैं। खासतौर पर ठंडी चीजें या फिà¥à¤° कई बार खटà¥à¤Ÿà¥€ चीजें à¤à¥€ इसे टà¥à¤°à¤¿à¤—र कर सकती है। इसलिठखान-पान को सही रखना दमा के मरीजों के लिठबहà¥à¤¤ कठिन होता है, लेकिन कà¥à¤› खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का सेवन करके सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को काबू में रखा जा सकता है। तो, आइठजानते हैं असà¥à¤¥à¤®à¤¾ में कà¥à¤¯à¤¾ खाà¤à¤‚ और कà¥à¤¯à¤¾ ना खाà¤à¤‚?
असà¥à¤¥à¤®à¤¾ में कà¥à¤¯à¤¾ खाà¤à¤‚ कà¥à¤¯à¤¾ ना खाà¤à¤‚?
बà¥à¤°à¤¾à¤‰à¤¨ राइस
बà¥à¤°à¤¾à¤‰à¤¨ राइस असà¥à¤¥à¤®à¤¾ व फेफड़ों से संबंधी बीमारी से जूठरहे लोगों के डायट का अà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अंग होना चाहिà¤à¥¤ यदि किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की पाचन शकà¥à¤¤à¤¿ कमजोर है, तो बà¥à¤°à¤¾à¤‰à¤¨ राइस पकाते समय खास सावधानी बरतनी चाहिà¤, ताकि चावल को पचाने में आसानी हो। à¤à¤¸à¥‡ लोगों के लिठबà¥à¤°à¤¾à¤‰à¤¨ राइस की खिचड़ी अचà¥à¤›à¤¾ विकलà¥à¤ª है।
दालें
दाल पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ का बेहतरीन सà¥à¤°à¥‹à¤¤ है। काला चना, हरी और पीली मूंग दाल, कà¥à¤²à¤¥à¥€ और सोयाबीन फेफड़ों के लिठबेहतरीन दालें हैं। इनका सकारातà¥à¤®à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ शरीर के अनà¥à¤¯ अंगों पर à¤à¥€ पड़ता है, लेकिन धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि इन दालों को अचà¥à¤›à¥€ तरह पकाना बहà¥à¤¤ जरूरी है, ताकि ये शरीर में आसानी से अवशोषित हो सकें। चूंकि, फेफड़ों और बड़ी आंत की फंकà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤‚ग आपस में जà¥à¥œà¥€ हà¥à¤ˆ होती है, इसलिठपाचन पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को सà¥à¤šà¤¾à¤°à¥‚ रखने के लिठइन दालों को अचà¥à¤›à¥€ तरह पकाना बहà¥à¤¤ जरूरी होता है। जिस à¤à¥€ दाल का रंग गहरा होता है, उसमें कई मिनरलà¥à¤¸ होते हैं और उनसे पाचन संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ नहीं होती हैं।
हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚
हमारे फेफड़ों के लिठहरी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ फायदेमंद होती हैं। जिस तरह पेड़ में पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ बाहर की ओर उगती हैं, उसी तरह फेफड़ा à¤à¥€ शरीर के ऊपरी हिसà¥à¤¸à¥‡ में होता है और बà¥à¤°à¥‹à¤¨à¥à¤•ॉइटल टà¥à¤¯à¥‚बà¥à¤¸ à¤à¥€ पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की तरह फैले होते हैं। फाइबर यà¥à¤•à¥à¤¤ हरी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सेवन करने से फेफड़ों में कफ à¤à¤•तà¥à¤°à¤¿à¤¤ नहीं होता, जिससे असà¥à¤¥à¤®à¤¾ का अटैक होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ कम हो जाती है।
कफ को पतला करने वाली सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚
सफेद और लाल मूली, कदà¥à¤¦à¥‚, बà¥à¤°à¥‹à¤•ोली और रतालू जैसी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सेवन करने से छाती में कफ जमने की आशंका कम होती है। इसके ठीक विपरीत सफेद चावल, पासà¥à¤¤à¤¾, चीज, मकà¥à¤–न, दूध और शकà¥à¤•र शरीर में जाकर कफ में परिवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ हो सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में तीखी और कड़वी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, जैसे-सफेद मूली, लाल मूली, अदरक, हरी पà¥à¤¯à¤¾à¤œ, करेला आदि कफ को गलाने का काम करते हैं। अगर आप अपने फेफड़ों और शरीर से अतिरिकà¥à¤¤ मà¥à¤¯à¥‚कस यानी कफ को कम करने की कोशिश कर रहे हैं तो कड़वी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के साथ मीठी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सेवन जरूर करें।
सेब
बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¥‡à¤¨ में हà¥à¤ à¤à¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ में पाया गया कि जो लोग अनà¥à¤¯ सावधानियों के साथ-साथ सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में दो से पांच सेब का सेवन करते हैं, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ असà¥à¤¥à¤®à¤¾ अटैक होने का खतरा à¤à¤¸à¤¾ न करने वालों की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में 32 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ कम होता है। शोधकरà¥à¤¤à¤¾à¤“ं के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, à¤à¤¸à¤¾ सेब में मौजूद फà¥à¤²à¥ˆà¤µà¥‹à¤¨à¥‰à¤à¤¡à¥à¤¸ के कारण होता है। फà¥à¤²à¥ˆà¤µà¥‹à¤¨à¥‰à¤à¤¡à¥à¤¸ फेफड़ों तक ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ पहà¥à¤‚चाने वाले पाइपà¥à¤¸ को खोल देते हैं।
विटामिन सी यà¥à¤•à¥à¤¤ फूडà¥à¤¸
विटामिन सी à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ à¤à¤‚टीऑकà¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚ट है, जो फà¥à¤°à¥€ रेडिकलà¥à¤¸ से हमारे फेफड़ों की रकà¥à¤·à¤¾ करता है। जापान में हà¥à¤ à¤à¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ से इस बात की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ हà¥à¤ˆ है कि जो लोग à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में विटामिन सी का सेवन करते हैं, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ असà¥à¤¥à¤®à¤¾ का अटैक होने का खतरा कम होता है। सिटà¥à¤°à¤¸ फूटà¥à¤¸, खरबूजा, संतरा, कीवी और बà¥à¤°à¥‹à¤•ोली आदि में विटामिन सी à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में होता है।
बीटा कैरोटीन
बीटा कैरोटीन असà¥à¤¥à¤®à¤¾ के रोगी के लिठबहà¥à¤¤ फायदेमंद होता है। गाजर में यह ततà¥à¤µ à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में पाया जाता है। इसके अलावा खà¥à¤¬à¤¾à¤¨à¥€, चेरी, हरी मिरà¥à¤š, शिमला मिरà¥à¤š और शकरकंद खाना à¤à¥€ लाà¤à¤•ारी है।
असà¥à¤¥à¤®à¤¾ को बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ वाले फूडà¥à¤¸
अंडे, खटà¥à¤Ÿà¥‡ फल, गेहूं, सोया और इससे बने पदारà¥à¤¥ असà¥à¤¥à¤®à¤¾ रोगियों के लिठपरेशानी का सबब बन सकते हैं। असà¥à¤¥à¤®à¤¾ रोगियों को अपने आहार से इन खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को बिलà¥à¤•à¥à¤² हटा देना चाहिà¤à¥¤ कई लोगों के लिठखटà¥à¤Ÿà¥‡ फल और अंडे फायदेमंद हो सकते हैं, लेकिन कई मरीजों में इन खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ से समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ होने लगती हैं। कà¥à¤› लोगों को केला, पपीता, चावल, चीनी और दही से à¤à¥€ असà¥à¤¥à¤®à¤¾ उà¤à¤° जाता है। इसके अलावा तले हà¥à¤ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ से दूरी बनाकर रखना चाहिà¤à¥¤ असà¥à¤¥à¤®à¤¾ के मरीजों को मूंगफली खाने से à¤à¥€ परहेज करना चाहिà¤à¥¤ अधिक नमक का सेवन करना à¤à¥€ सही नहीं होता है। साथ ही जंक फूड और डिबà¥à¤¬à¤¾à¤¬à¤‚द à¤à¥‹à¤œà¤¨, बासी व ठंडा खाना, मकà¥à¤–न आदि à¤à¥€ परेशानी को और à¤à¥€ बà¥à¤¾ सकते हैं। हालांकि, कà¥à¤› à¤à¥€ खाने से पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह जरूर ले लें।
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