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संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार- सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ जीवन का आधार
हम अपने आस-पास अकà¥à¤¸à¤° देखते हैं कि कà¥à¤› लोग जरूरत से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मोटे और कà¥à¤› लोग जरूरत से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पतले या कमजोर होते हैं। इसी तरह अनेक बचà¥à¤šà¥‡ छोटी उमà¥à¤° में ही मोटापे और कई बीमारियों के शिकार हो जाते हैं जबकि कà¥à¤› बचà¥à¤šà¥‡ काफी कमजोर या पतले होने की वजह से बीमारियों से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ होते हैं। कà¥à¤¯à¤¾ हमने कà¤à¥€ सोचा है कि à¤à¤¸à¤¾ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होता है ? à¤à¤¸à¤¾ नहीं है कि इस तरह के लोग या बचà¥à¤šà¥‡ खाते-पीते नहीं है या उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ खाने की वसà¥à¤¤à¥à¤à¤‚ नहीं मिलती हैं।
दरअसल इस तरह के मोटापे या बीमारियों की सबसे बड़ी वजह होती है उनका संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार नहीं खाना। यानी खाने में उन पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² नहीं करना जो शरीर को पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ, वसा, विटामिन और खनिज-लवण जैसे पोषक ततà¥à¤µ उपलबà¥à¤§ कराते हैं। संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार नहीं लेने से न केवल शारीरिक और मानसिक विकास बाधित होता है बलà¥à¤•ि वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤•ता à¤à¥€ काफी कम हो जाती है। à¤à¤¸à¥‡ में à¤à¤• सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ तन और मन के साथ ही अनेक गंà¤à¥€à¤° बीमारियों से बचने के लिठसंतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार का सेवन बेहद जरूरी है।
दरअसल संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार वह आहार है जिसमें सà¤à¥€ पोषक ततà¥à¤µ जैसे पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ, वसा, विटामिन, खनिज-लवण और जल शारीरिक जरूरत के हिसाब से उचित मातà¥à¤°à¤¾ में मौजूद हो। संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार न केवल शरीर को सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रखता है बलà¥à¤•ि लंबी उमà¥à¤° à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता है। यह वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के वजन को संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ रखने के साथ ही उतà¥à¤¤à¤® सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥ को बनाठरखने में काफी मददगार होता है। इसके इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से शरीर में रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾à¤“ं का विकास होता है। संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार के लिठजरूरी है कि खाने में सà¤à¥€ खादà¥à¤¯ समूहों जैसे अनाज, दालें, हरी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, फल, डेयरी पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿ, अंडा, मांस, मछली, वसा, मौसम में उपलबà¥à¤§ फल और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सेवन परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में किया जाà¤à¥¤
आमतौर पर किसी à¤à¥‹à¤œà¤¨ को संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ तà¤à¥€ माना जाता है जब उस से पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ शरीर को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होने वाली कà¥à¤² ऊरà¥à¤œà¤¾ का 50 से 60 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ à¤à¤¾à¤— कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ के जरिà¤, 10 से 15 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ à¤à¤¾à¤— पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ के जरिठऔर 20 से 30 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ à¤à¤¾à¤— वसा के जरिठपà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो। à¤à¤• बात जिस पर सà¤à¥€ को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना चाहिठकि आहार में संतà¥à¤²à¤¨ के लिठअतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• मातà¥à¤°à¤¾ में à¤à¥‹à¤œà¤¨ बिलकà¥à¤² जरूरी नहीं है। अधिक à¤à¥‹à¤œà¤¨ हमेशा गंà¤à¥€à¤° बीमारियों और मोटापे का कारण होता है। दरअसल हर वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को उसकी शारीरिक आवशà¥à¤¯à¤•ताओं, आयà¥, लिंग के आधार पर संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार की जरूरत होती है। जैसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ शारीरिक कारà¥à¤¯ करने वाले वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को à¤à¥‹à¤œà¤¨ में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मातà¥à¤°à¤¾ में कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ लेना चाहिà¤à¥¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की शारीरिक वृदà¥à¤§à¤¿ के लिठपà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ जरूरी है। इसी तरह सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठलौह ततà¥à¤µ और कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की जरूरत होती है। इसलिठयह जरूरी है कि शरीर की जरूरत और उमà¥à¤° के हिसाब से संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार लिया जाà¤à¥¤
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