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तà¥à¤²à¤¸à¥€ सांस के रोग में à¤à¥€ फायदेमंद है तà¥à¤²à¤¸à¥€ के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ का रस शहद में डालकर पीने से आराम मिलता है। अदरक चबाने या गरà¥à¤® पानी में डालकर पीने से शà¥à¤µà¤¾à¤‚स नलिका में संकà¥à¤°à¤®à¤£ खतà¥à¤® हो जाता है। सांस के मरीजों को चाहिठकि पानी में शहद डालकर à¤à¤¾à¤ª लें। पानी में शहद डालकर à¤à¤¾à¤‚प लेने आराम मिलेगा।
असà¥à¤¥à¤®à¤¾ और सांस की समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं से निपटने के लिठइन हरà¥à¤¬à¤² नà¥à¤¸à¥à¤–ों का करें इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤²-
लहसà¥à¤¨ कई गà¥à¤£à¥‹à¤‚ का खज़ाना
हमारी रसोई में सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के साथ उपयोग में लाया जाने वाला लहसà¥à¤¨ सिरà¥à¤« à¤à¤• मसाला नहीं लेकिन औषधीय गà¥à¤£à¥‹à¤‚ का à¤à¤• ख़ज़ाना à¤à¥€ है। लहसà¥à¤¨ के à¤à¤£à¥à¤Ÿà¥€à¤¬à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤°à¤¿à¤¯à¤² गà¥à¤£à¥‹à¤‚ को आधà¥à¤¨à¤¿à¤• विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ à¤à¥€ मानता है, लहसà¥à¤¨ का सेवन बैकà¥à¤Ÿà¤¿à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ जनित रोगों, दसà¥à¤¤, घावों, सरà¥à¤¦à¥€-खांसी और बà¥à¤–ार आदि में बहà¥à¤¤ फायदा करता है। लहसà¥à¤¨ की 2 कचà¥à¤šà¥€ कलियां सà¥à¤¬à¤¹ खाली पेट चबाने के बाद आधे घणà¥à¤Ÿà¥‡ से मà¥à¤²à¥‡à¤ ी नामक जड़ी-बूटी का आधा चमà¥à¤®à¤š सेवन दो महीने तक लगातार करने से ठंड के दौरान आकà¥à¤°à¤®à¤• होने वाली दमा जैसी घातक बीमारी में बेहद राहत मिलती है सदैव की छà¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¥€ मिल जाती है।
अजवायन व लौंग फायदेमंद
ठंड में असà¥à¤¥à¤®à¤¾ के रोगी को यदि अजवायन के बीज और लौंग की समान मातà¥à¤°à¤¾ का 5 गà¥à¤°à¤¾à¤® चूरà¥à¤£ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ दिया जाठतो काफी फ़ायदा होता है। यदि बीजों को à¤à¥‚नकर à¤à¤• सूती कपड़े मे लपेट लिया जाठऔर रात तकिये के नजदीक रखा जाठतो दमा, सरà¥à¤¦à¥€, खांसी के रोगियों को रात को नींद में सांस लेने मे तकलीफ़ नहीं होती है।
कफ को दूर करे अडूसा की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚
अडूसा की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के रस को शहद में मिलाकर रोगी को दिया जाता है जिससे असà¥à¤¥à¤®à¤¾ में अतिशीघà¥à¤° आराम मिलता है। पातालकोट के आदिवासी टीबी के मरीजों को अडूसा की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का काढ़ा बनाकर 100 मिली रोज पीने की सलाह देते हैं, दरअसल अडूसा शरीर में जाकर फेफड़ों में जमी कफ और गंदगी को बाहर निकालता है।
कई रोगों की दवा बड़ी इलायची
बड़ी इलायची खाने से खांसी, दमा, हिचकी आदि रोगों से छà¥à¤Ÿà¤•ारा मिलता है। बड़ी इलायची, खजूर व अंगूर की समान मातà¥à¤°à¤¾ लेकर, कà¥à¤šà¤²à¤•र शहद में चाटने से खांसी, दमा और शारीरिक कमजोरी à¤à¥€ दूर होती है।
सांस फूलना दूर करें पान व पालक का जूस
डाà¤à¤—-गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ के आदिवासियों के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° पान के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ के साथ अशोक के बीजों का चूरà¥à¤£ की à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š मातà¥à¤°à¤¾ चबाने से सांस फूलने की शिकायत और दमा में आराम मिलता है। पालक के à¤à¤• गिलास जूस में सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° सेंधा नमक मिलाकर सेवन करने से दमा और शà¥à¤µà¤¾à¤¸ रोगों में खूब लाठमिलता है।
खांसी दूर करे गेंदा का फूल व उसके बीज
डाà¤à¤—-गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ के आदिवासियों के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° यदि गेंदा के फ़ूलों को सà¥à¤–ा लिया जाठऔर इसके बीजों को à¤à¤•तà¥à¤° कर मिशà¥à¤°à¥€ के दानों के साथ समान मातà¥à¤°à¤¾ (5 गà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤•) का सेवन तीन दिन तक किया जाठतो जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दमा और खांसी की शिकायत है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ काफ़ी फ़ायदा होता है।
अंगूर का रस गà¥à¤£à¤•ारी
लगà¤à¤— 50 गà¥à¤°à¤¾à¤® अंगूर का रस गरà¥à¤® करके सà¥à¤µà¤¾à¤¸ या दमा के रोगी को पिलाया जाठतो सांस लेने की गति सामानà¥à¤¯ हो जाती है।
दमा में फायदेमंद अनंतमूल की जड़ें
दमा के रोगी यदि अनंतमूल की जड़ों और अडूसा के पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की समान मातà¥à¤°à¤¾ (3-3 गà¥à¤°à¤¾à¤®) लेकर दूध में उबालकर लें तो फ़ायदा होता है, à¤à¤¸à¤¾ कम से कम à¤à¤• सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक किया जाना जरूरी है।
टांसिलà¥à¤¸ में फायदेमंद बच व बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¥€
बच, बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¥€, पिपली, हरà¥à¤°à¤¾ और अडूसा की समान मातà¥à¤°à¤¾ को पीसकर इस मिशà¥à¤°à¤£ को लेने से गले की समसà¥à¤¯à¤¾ जैसे गला बैठजाना, टांसिलà¥à¤¸ आदि में अतिशीघà¥à¤° आराम मिलता है। सरà¥à¤¦à¥€ और खांसी में लटजीरा के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ का रस तैयार कर पातालकोट के आदिवासी हरà¥à¤¬à¤² जानकार रोगियों को देते है, इनके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° यह अतà¥à¤¯à¤‚त गà¥à¤£à¤•ारी है।
à¤à¤¿à¤‚डी के बीज गà¥à¤£à¤•ारी
à¤à¤¿à¤‚डी के बीजों को आदिवासियों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¤•तà¥à¤° कर सà¥à¤–ाया जाता है और बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को इसका चूरà¥à¤£ खिलाया जाता है, माना जाता है कि ये बीज पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨à¤¯à¥à¤•à¥à¤¤ होते है और ठंड के मौसम में उतà¥à¤¤à¤® सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिये बेहतर होते हैं।
खांसी दूर करे बहेड़ा
पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ खांसी में 100 गà¥à¤°à¤¾à¤® बहेड़ा के फलों के छिलके लें, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ धीमी आंच में तवे पर à¤à¥‚न लीजिठऔर इसके बाद पीस कर चूरà¥à¤£ बना लीजिà¤à¥¤ इस चूरà¥à¤£ का à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š शहद के साथ दिन में तीन से चार सेवन बहà¥à¤¤ लाà¤à¤•ारी है।
सरà¥à¤¦à¥€ में आराम दिलाठà¤à¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾ व नीलगिरी का तेल
मकà¥à¤•ा के à¤à¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¥‡ को जलाकर उसकी राख तैयार कर ली जाठऔर इसे पीस लिया जाà¤, इसमें अपने सà¥à¤µà¤¾à¤¦ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° सेंधा नमक डालकर दिन में 4 बार à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š फ़ांकी लेने से खांसी, कफ़ और सरà¥à¤¦à¥€ में आराम मिलता है। नीलगिरी का तेल à¤à¤• सूती कपड़े में लगा दिया जाठऔर सरà¥à¤¦à¥€ और खांसी होने पर सूंघा जाठतो आराम मिलता है। गले में दरà¥à¤¦ होने पर à¤à¥€ ये फायदा करता है। मेथी की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का ताजा रस, अदरख और शहद को धीमी आंच पर कà¥à¤› देर गरà¥à¤® करके रोगी को पिलाने से असà¥à¤¥à¤®à¤¾ रोग में आराम मिलता है। à¤à¤• गिलास पानी में à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š लहसà¥à¤¨ का रस मिलाà¤à¤‚ और इसे 3 महीने तक दिन में दो बार लगातार दिया जाठतो असà¥à¤¥à¤®à¤¾ में राहत मिलती है।
तà¥à¤²à¤¸à¥€ दूर करे असà¥à¤¥à¤®à¤¾
गरà¥à¤® पानी में तà¥à¤²à¤¸à¥€ के 5 से 10 पतà¥à¤¤à¥‡ मिलाà¤à¤‚ और सेवन करें, यह सांस लेना आसान करता है। इसी पà¥à¤°à¤•ार तà¥à¤²à¤¸à¥€ का रस, अदरक रस और शहद का समान मिशà¥à¤°à¤£ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š के हिसाब से लेना असà¥à¤¥à¤®à¤¾ पीड़ित लोगों के लिठअचà¥à¤›à¤¾ होता है।
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