शुक्राणु निल होने पर क्या करें?HealthPlanet

Posted on Fri 14th Oct 2022 : 09:16

पुरुषों में निःसंतानता के कारण शुक्राणु की खराब क्वालिटी, कम संख्या और निल शुक्राणु होता है। वीर्य में स्पर्म काउंट कम होने या निल शुक्राणु के कारण महिला के गर्भधारण होने में समस्या आती है।
निल शुक्राणु क्या है?

निल शुक्राणु जिसे एज़ूस्पर्मिया भी कहा जाता है, यह पुरषों में बांझपन का आम कारण है। निल शुक्राणु की समस्या में पुरुष के सीमेन यानि वीर्य में शुक्राणु की संख्या शून्य हो जाती है। जिस कारण से महिला का गर्भधारण नहीं हो पाता है।

एज़ूस्पर्मिया के दो प्रकार होते है: ऑब्सट्रक्टिव (OA) और नॉन-ऑब्स्ट्रक्टिव (NOA)
निल शुक्राणु के कारण (Nil Shukranu Ke Karan)

पुरुषों में निल शुक्राणु कई कारणों से हो सकते है -

संक्रमण यानि इन्फेक्शन
टेस्टिकल पर गर्मी के कारण वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाती है। ज्यादा तंग अन्डर वीयर, गरम पानी से स्नान करना, बहुत देर तक गरम पानी के टब में बैठने और मोटापा होने से निल शुक्राणु की समस्या हो सकती है।
बार-बार वीर्य संख्लन करना
अधिक रेडिएशन (Radiation) और X- Ray के सम्पर्क में आना
प्रोस्टेट ग्लैंड की समस्या
अधिक शारीरिक और मानसिक परिश्रम करना
शरीर में ज़िन्क तत्व की कमी होना
धूम्रपान व शराब का सेवन करना
तनाव

निल शुक्राणु का इलाज (Nil Shukranu Ka Ilaj)

निल शुक्राणु का उपचार समस्या के प्रकार पर निर्भर करेगा।

नॉन-ऑब्सट्रक्टिव एजूस्पर्मिया के इलाज के लिए डॉक्टर आपको कुछ सुझाव दे सकते है जैसे जीवन शैली में बदलाव करें, दवाइयां, विषाक्त पदार्थों से बचना शुरू करें। कुछ अन्य निल शुक्राणु उपचार भी उपलब्ध है जैसे-

सर्जरी - जन्मजात अनुपस्थिति की समस्या को छोड़कर, अवरोधक एज़ोस्पर्मिया यानि के अन्य सभी कारणों को माइक्रोसर्जरी या एंडोस्कोपिक (Endoscopic) सर्जरी से ठीक किया जा सकता है।
हॉर्मोन ट्रीटमेंट - कुछ मामलों में हॉर्मोन टीटमेंट की मदद से निल शुक्राणु का इलाज किया जाता है।
Varicocelectomy - यदि कसी पुरुष को वैरीकोसेल की समस्या है तो उन्हें वारिकसेलेक्टोमी की सलाह दी जा सकती है। यह एक सर्जरी है जो पुरुषों के प्रजनन अंग में बढ़ी हुई नसों को हटाने के लिए की जाती है।

ऑब्सट्रक्टिव एजूस्पर्मिया यानि अवरोध की समस्याओं वाले रोगी गर्भधारण करने के लिए असिस्टेड रिप्रोडक्टिव तकनीक के साथ शुक्राणु पुनर्प्राप्ति का चयन कर सकते हैं।

आई यू आई (IUI) : अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान यानि इंट्रा यूटराइन इनसेमिनेशन की प्रक्रिया में शुक्राणु को लैब में साफ करने के बाद सीधे महिला साथी के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है।
आई वी एफ (IVF) : इन-विट्रो फर्टिलाइज़ेशन की प्रक्रिया में महिला के अंडे और पुरुष के शुक्राणु को एक प्रयोगशाला में फर्टिलाइज़ किया जाता है। जिससे एक भ्रूण बनता है और फिर इस भ्रूण को महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है।
आई सी एस आई (ICSI) : इंट्रा साइटोप्लास्मिक स्पर्म इंजेक्शन, आई वी एफ की एडवांस्ड तकनीक है, जिसमें एक स्वस्थ शुक्राणु को महिला के अंडे में इंजेक्ट किया जाता है।
डोनर स्पर्म के साथ आई वी एफ : इस प्रक्रिया में एक डोनर पुरुष के शुक्राणु के साथ महिला के अंडे को फर्टिलाइज़ किया जाता है, फिर भ्रूण को महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है।

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