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अचानक à¤à¤Ÿà¤•े लगते हैं, कà¤à¥€-कà¤à¥€ शरीर पर नियंतà¥à¤°à¤£ नहीं रहता? ये हैं पारà¥à¤•िंसंस के संकेत
पारà¥à¤•िंसंस रोग हमारे तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° यानी नरà¥à¤µà¤¸ सिसà¥à¤Ÿà¤® से संबंधित à¤à¤• बीमारी है। जिसमें पीड़ित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को अपने शरीर के कà¥à¤› अंगों में सà¥à¤¨à¥à¤¨à¤¤à¤¾ या अचानक à¤à¤Ÿà¤•े महसूस होने की दिकà¥à¤•त होने लगती है। आमतौर पर इस बीमारी की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ शरीर के किसी हिसà¥à¤¸à¥‡ में कंपनà¥à¤¨ के साथ होती है।
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पारà¥à¤•िंसंस रोग à¤à¤• टà¥à¤°à¥‡à¤®à¤° डिजीज है, जिसमें वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के शरीर के किसी हिसà¥à¤¸à¥‡ में कंपनà¥à¤¨ या हिलना और à¤à¤Ÿà¤•े लगने जैसी दिकà¥à¤•त होने लगती है, जिस पर वह वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ चाहकर à¤à¥€ नियंतà¥à¤°à¤£ नहीं कर पाता। इस बीमारी से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होती है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनके काम करने की गति बहà¥à¤¤ धीमी हो जाती है...
पारà¥à¤•िंसंस का शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ चरण
-वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ हंसना चाहता है लेकिन इसके लिठउसे अपने चेहरे से पूरा सहयोग नहीं मिल पाता है। वॉकिंग के दौरान उसका कोई à¤à¤• हाथ सामानà¥à¤¯ तरीके से मूवेंट नहीं करता है।
- जब किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के शरीर में पारà¥à¤•िंसंस रोग की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ हो रही होती है तो पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• चरण में उस वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ का अपने कà¥à¤› मनोà¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ पर नियंतà¥à¤°à¤£ नहीं रहता है। जैसे, अपने चेहरे से अपनी à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¨à¥‡ में उसे दिकà¥à¤•त होती है।
-कई बार यह दिकà¥à¤•त केवल हाथ में कंपकंपी होने से à¤à¥€ शà¥à¤°à¥‚ होती है। समसà¥à¤¯à¤¾ इस की बात है कि इन लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को हमारे समाज में शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ सà¥à¤¤à¤° पर गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ से नहीं लिया जाता और धीरे-धीरे यह बीमारी खतरनाक रूप ले लेती है।
पारà¥à¤•िंसंस के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£
टà¥à¤°à¥‡à¤®à¤°à¥à¤¸: कंपकंपी आना, लगातार अंग में कंपनà¥à¤¨ होना या टà¥à¤°à¥‡à¤®à¤° उस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को कहते हैं, जब किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की इचà¥à¤›à¤¾ के विरà¥à¤¦à¥à¤§ उसके शरीर का कोई हिसà¥à¤¸à¤¾ हिलने लगता है और खà¥à¤¦ ही शांत à¤à¥€ हो जाता है।
-टà¥à¤°à¥‡à¤®à¤° की दिकà¥à¤•त आमतौर पर हाथों में होती है। इसमें वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ का हाथ या उंगलियां अचानक कंपकंपाने लगती हैं और कई बार उंगलियां या अंगूठा किसी à¤à¤• तरफ à¤à¥à¤•ने या घूम जाने की दिकà¥à¤•त à¤à¥€ हो सकती है।
-हालांकि यह दिकà¥à¤•त पीड़ित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ हाथ को थपथपाने, शांत करने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करने और हलà¥à¤•ा दबाव डालने पर ठीक हो जाती है। à¤à¤¸à¤¾ आमतौर पर तब होता है, जब हाथ आराम की अवसà¥à¤¥à¤¾ में या किसी à¤à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ में देर तक रहता है।
चाल का धीमा हो जाना
-सामानà¥à¤¯ तौर पर पारà¥à¤•िंसंस के लकà¥à¤·à¤£ हाथ से शà¥à¤°à¥‚ होते हैं और धीरे-धीरे बढ़ते रहते हैं। अगर वकà¥à¤¤ पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ ना दिया जाठतो यह बीमारी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के चलने-फिरने की गति को धीमा कर देती है।
-रोगी के कदम पहले की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में छोटे हो जाते हैं। कई बार कà¥à¤°à¥à¤¸à¥€ से उठने में à¤à¥€ दिकà¥à¤•त होती है। चलते समय कई बार पैरों ना उठा पाने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में पैरों को घसीटना पड़ता है।
मसलà¥à¤¸ का सखà¥à¤¤ होना
- पारà¥à¤•िंसंस की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में शरीर के किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हिसà¥à¤¸à¥‡ की मांसपेशियां सामानà¥à¤¯ से अधिक सखà¥à¤¤ होने लगती हैं। धीरे-धीरे इनकी ये सà¥à¤Ÿà¤¿à¤«à¤¨à¥‡à¤¸ और अधिक बढ़ सकती है।
-इससे वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को मसलà¥à¤¸ में दरà¥à¤¦ की दिकà¥à¤•त बनी रह सकती है। साथ ही गति करने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ à¤à¥€ धीमी हो जाती है।
संतà¥à¤²à¤¨ बनाने में समसà¥à¤¯à¤¾
-पारà¥à¤•िंसंस के रोगी को तà¥à¤°à¤‚त खड़े होने या बैठने में दिकà¥à¤•त होती है। कई बार उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ खड़े होने और बैठने के सही पॉशà¥à¤šà¤° को फॉलो करने में दिकà¥à¤•त होती है।
-कà¥à¤› रोगियों को पलकें à¤à¤ªà¤•ाने में दिकà¥à¤•त, हाथ हिलाने में दिकà¥à¤•त या सामानà¥à¤¯ मूवमेंटà¥à¤¸ में à¤à¥€ परेशानी होने लगती है।
बोलने और लिखने में दिकà¥à¤•त होना
-कà¥à¤› लोगों में पारà¥à¤•िंसंस ने कारण सà¥à¤ªà¥€à¤š संबंधी दिकà¥à¤•तें होने लगती हैं। जैसे, आवाज धीमी होना, बोलते वकà¥à¤¤ परेशानी होना, शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ को पहले की तरह कà¥à¤²à¤¿à¤¯à¤° ना बोल पाना ।
-पारà¥à¤•िंसंस के कारण गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को लेखन में à¤à¥€ दिकà¥à¤•त होती है। या तो कà¥à¤› à¤à¥€ साफ-साफ लिखने में वे पूरी तरह असमरà¥à¤¥ हो जाते हैं या फिर लिखने के दौरान उनके शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ का आकार बहà¥à¤¤ छोटा होने लगता है।
पारà¥à¤•िंसंस बीमारी के मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण
- पारà¥à¤•िंसंस की बीमारी आमतौर पर तब होती है, जब किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° संबंधी कोशिकाà¤à¤‚ कमजोर पड़ने लगती हैं।
-कà¥à¤› सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में नरà¥à¤µà¤¸ सिसà¥à¤Ÿà¤® की ये कोशिकाà¤à¤‚ टूटने या मरने à¤à¥€ लगती हैं। कई बार बॉडी में जरूरी हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨à¥à¤¸ का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ सही मातà¥à¤°à¤¾ में ना होने पर à¤à¥€ पारà¥à¤•िंसंस की दिकà¥à¤•त हो सकती है।
-लेवी बॉडीज (Lewy Bodies)पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ से बनी उन सेलà¥à¤¸ का जमाव होता है, जो नरà¥à¤µà¤¸ सिसà¥à¤Ÿà¤® के अंदर जमा होती हैं। ये à¤à¥€ पारà¥à¤•िंसंस डिजीज का कारण बन सकती हैं।
-बढ़ती उमà¥à¤° à¤à¥€ पारà¥à¤•िंसंस का खतरा बढ़ने की वजह होती है। आमतौर पर यह बीमारी 60 साल की उमà¥à¤° के आस-पास शà¥à¤°à¥‚ होती है। हालांकि यà¥à¤µà¤¾à¤“ं में यह बीमारी बहà¥à¤¤ दà¥à¤°à¥à¤²à¤ होती है।
-हेलà¥à¤¥ à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ का कहना है कि पारà¥à¤•िंसंस की बीमारी महिलाओं की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में अधिक होती है। खासतौर पर हरà¥à¤¬à¤¿à¤¸à¤¾à¤‡à¤Ÿà¥à¤¸ और कीटनाशकों के अधिक संपरà¥à¤• में रहने पर इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
पूरी तरह ठीक नहीं होती
-पारà¥à¤•िंसन रोग पूरी तरह ठीक नहीं हो पाता है। हालांकि पेशंट की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में बहà¥à¤¤ अधिक सà¥à¤§à¤¾à¤° की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ जरूर रहती है।
-इलाज और कà¥à¤› थेरेपीज के जरिठइस बीमारी को इतना नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया जा सकता है कि आप अपनी सामानà¥à¤¯ दिनचरà¥à¤¯à¤¾ के सà¤à¥€ कारà¥à¤¯ ठीक से कर पाà¤à¤‚।
-हो सकता है कि आपके डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपके बà¥à¤°à¥‡à¤¨ के किसी हिसà¥à¤¸à¥‡ की सरà¥à¤œà¤°à¥€ कराने का सà¥à¤à¤¾à¤µ à¤à¥€ आपको दें। à¤à¤¸à¥‡ सà¥à¤à¤¾à¤µ रोगी की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पर निरà¥à¤à¤° करते हैं। किसी को ऑपरेशन की जरूरत हो सकती है, जबकि किसी का उपचार केवल दवाओं से à¤à¥€ हो सकता है।
-हमारा मकसद इस बात को लेकर आपको जागरूक करना है कि जब शरीर में इस तरह के लकà¥à¤·à¤£ दिखें तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अनदेखा करने के बजाय तà¥à¤°à¤‚त इलाज कराà¤à¤‚। ताकि बीमारी गंà¤à¥€à¤° रूप ना ले सके।
होती हैं इस तरह की दिकà¥à¤•तें
- जिन लोगों को पारà¥à¤•िंसंस की बीमारी हो जाती है उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि हर पेशंट को यहां बताई गई सà¤à¥€ दिकà¥à¤•तें हों।
-सोचने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ कमजोर होना: पारà¥à¤•िंसंस की दिकà¥à¤•त होने पर रोगी को सोचने-समà¤à¤¨à¥‡ और चीजों को याद रखने में दिकà¥à¤•त होने लगती है।
-डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨: पारà¥à¤•िंसंस में मरीज को डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ हो सकता है। या उसका अपनी à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं पर नियंतà¥à¤°à¤£ नहीं रहता है। à¤à¤¸à¤¾ कई बार रोग के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ सà¥à¤¤à¤° पर à¤à¥€ हो सकता है। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का इलाज काफी मददगार होता है।
-निगलने में दिकà¥à¤•त होना: जैसे-जैसे यह बीमारी बढ़ती जाती है, रोगी को होनेवाली समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ à¤à¥€ बढ़ने लगती हैं। कà¥à¤› लोगों का पानी और खाना निगलने में à¤à¥€ परेशानी हो सकती है।
-नींद से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ दिकà¥à¤•तें: इस बीमारी में नींद से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ ससà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ होना बेहद सामानà¥à¤¯ बात है। रोगी को रात के वकà¥à¤¤ कई बार नींद टूटने की शिकायत होती है साथ ही दिन में कई बार नींद की गहरी à¤à¤ªà¤•ियां आ सकती हैं।
-पेशाब से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚: पारà¥à¤•िंसंस के कारण रोगी को बà¥à¤²à¥‡à¤¡à¤° से संबंधित समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो सकती हैं। इस कारण बार-बार पेशाब आना, पेशाब पर नियंतà¥à¤°à¤£ ना कर पाना या पेशाब करने में दिकà¥à¤•त होना जैसी तकलीफें होती हैं।
कà¥à¤› रोगियों को होती हैं ये समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚
पारà¥à¤•िंसंस के कारण à¤à¤• तरफ जहां कà¥à¤› लोगों को शारीरिक समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ होती हैं, वहीं कà¥à¤› लोगों को इंदà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ à¤à¥€ हो सकती हैं। इनमें कà¥à¤› समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ इस पà¥à¤°à¤•ार हैं...
-थकान रहना: पारà¥à¤•िंसंस के कà¥à¤› रोगी हर समय खà¥à¤¦ को थका हà¥à¤† महसूस करते हैं। खासतौर पर शाम के वकà¥à¤¤ उनकी हालत à¤à¤¸à¥€ हो जाती है, जैसे किसी ने उनकी सारी ऊरà¥à¤œà¤¾ खींच ली हो। आमतौर पर इस दिकà¥à¤•त की वजह वे समठनहीं पाते।
- बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° की समसà¥à¤¯à¤¾: कà¥à¤› लोगों में पारà¥à¤•िंसंस के कारण बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ होने लगती हैं। इनमें बीपी हाई होना और बीपी लो होना कोई à¤à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ हो सकती है।
-सूंघने में दिकà¥à¤•त होना: कई बार पारà¥à¤•िंसंस के मरीज को चीजों की सà¥à¤®à¥‡à¤² पहचानने में दिकà¥à¤•त होती है। तो कà¤à¥€-कà¤à¥€ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सà¥à¤®à¥‡à¤² पता ही नहीं लगती है। à¤à¤¸à¤¾ सूंघने की शकà¥à¤¤à¤¿ कमजोर होने का कारण होता है।
-सेकà¥à¤¶à¥à¤…ल डिसफंकà¥à¤¶à¤¨: पारà¥à¤•िंसंस के मरीजों की सेकà¥à¤¸ लाइफ à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होती है। इनकी सेकà¥à¤¸ में रà¥à¤šà¤¿ कम हो जाती है या फिर तà¥à¤°à¤‚त सà¥à¤–लित होने की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
- दरà¥à¤¦ बना रहना: पारà¥à¤•िंसंस के रोगियों को शरीर के कà¥à¤› खास हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में हर समय दरà¥à¤¦ बने रहने की शिकायत हो सकती है। वहीं कà¥à¤› लोगों को पूरे शरीर में ही हर समय दरà¥à¤¦ बना रह सकता है।
पारà¥à¤•िंसंस की रोकथाम के तरीके
-पारà¥à¤•िंसंस का खतरा उन लोगों में अधिक होता है, जिनकी फैमिली हिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ में यह दिकà¥à¤•त हो और ये लोग सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ जीवन शैली à¤à¥€ नहीं अपना रहे होते हैं।
-तनाव से दूर रहने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करें। अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• तनाव होने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में बॉडी में हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨à¥à¤¸ का असंतà¥à¤²à¤¨ हो जाता है, जो आपको इस बीमारी की तरफ धकेल सकता है।
-हेलà¥à¤¦à¥€ डायट और योग हर तरह की बीमारी से बचाव का तरीका हैं। इसलिठयह जरूरी है कि आप सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ जीवन शैली को अपनाà¤à¤‚।
-हालांकि पारà¥à¤•िंसंस का रोग होता कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ है, यह अà¤à¥€ तक पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है। इस बीमारी से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ अलग-अलग रिसरà¥à¤š में यह बात सामने आई है कि योग करना, खà¥à¤¶ रहना और à¤à¤°à¥‹à¤¬à¤¿à¤• à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ करके इस बीमारी से बचाव संà¤à¤µ है।
इलाज से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ बातें
-जैसा कि हम आपको पहले ही बता चà¥à¤•े हैं कि इस बीमारी के पूरी तरह ठीक होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ नहीं होती है। लेकिन इसे बहà¥à¤¤ हद तक नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया जा सकता है। ताकि रोगी à¤à¤• सामानà¥à¤¯ जीवन जी सके।
- लेकिन अगर आपको ऊपर बताठगठलकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में से कोई à¤à¥€ दिकà¥à¤•त अपने आपमें महसूस हो रही हो तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° को जरूर दिखाà¤à¤‚। ताकि बढ़ने से पहले ही इस बीमारी को रोका जा सके। साथ ही यदि आपके शरीर में कोई और दिकà¥à¤•त पनप रही हो तो उसे दूर किया जा सके।
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