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सेकेंडरी लिवर कैंसर या मेटासà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• लिवर कैंसर
सेकंडरी लिवर कैंसर में कैंसर की कोशिकाओं का विकास किसी अनà¥à¤¯ अंग में शà¥à¤°à¥‚ होता है और ये फैलकर लिवर तक पहà¥à¤‚च जाती हैं और लिवर को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती हैं, इसे मेटासà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• लिवर कैंसर के नाम से à¤à¥€ जाना जाता है।
लिवर कैंसर के अंतिम सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ में मरीज के लिमà¥à¤« नोड और अगल - बगल के अंगों में कैंसर फैल चà¥à¤•ा होता है।
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ 4 लिवर कैंसर
इस चरण में, टà¥à¤¯à¥‚मर किसी à¤à¥€ आकार का हो सकता है और रकà¥à¤¤ वाहिकाओं (नसें) और लिवर के आस-पास के अंगों में फैल सकता है। संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤à¤‚ हैं कि इस सà¥à¤¤à¤° पर à¤à¤• से अधिक टà¥à¤¯à¥‚मर विकसित हो सकते हैं। सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ 4 लिवर कैंसर दो पà¥à¤°à¤•ार का हो सकता है - सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ 4 ठऔर 4 बी।
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ 4 à¤: इस सà¥à¤¤à¤° पर à¤à¤• या à¤à¤• से अधिक टà¥à¤¯à¥‚मर पाया जा सकता है। कैंसर पास के लिमà¥à¤« नोडà¥à¤¸ में बढ़ सकता है, लेकिन यह इस सà¥à¤¤à¤° पर दूर के अंगों तक नहीं पहà¥à¤‚च सकता है।
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ 4 बी: शरीर में à¤à¤• से अधिक टà¥à¤¯à¥‚मर मौजूद हो सकते हैं। यह इस सà¥à¤¤à¤° पर पास के लिमà¥à¤« नोडà¥à¤¸ तक नहीं पहà¥à¤‚च सकता है, लेकिन यह फेफड़ों और हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ जैसे दूर के अंगों में फैल सकता है।
लिवर कैंसर रोगी के लिठजानलेवा हो सकता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह लिवर को अपना काम करने से अकà¥à¤·à¤® कर सकता है। लिवर पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ कारकों का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करके पाचन, रकà¥à¤¤ के विषहरण और संकà¥à¤°à¤®à¤£ से लड़ने में मदद करता है। यदि लिवर इन कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को करने में विफल रहता है, तो यह गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ जोखिम पैदा कर सकता है।
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