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सरà¥à¤œà¤°à¥€ की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾
à¤à¤• तरीका यह है कि तà¥à¤µà¤šà¤¾ में à¤à¤• छोटा सा चीरा लगाया जाठऔर फिर लिपोमा को निकाल लिया जाà¤à¥¤ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के दौरान वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को आमतौर पर लोकल à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¥€à¤¯à¤¿à¤¸à¤¾ दिया जाता है और रोगी उसी दिन घर लौटने में सकà¥à¤·à¤® होता है।
बड़े लिपोमा को पूरी तरह से हटाने के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° को अधिक महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ चीरा लगाने की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है। लिपोसकà¥à¤¶à¤¨ का उपयोग करके कà¥à¤› लिपोमा को हटाना à¤à¥€ संà¤à¤µ है। à¤à¤¸à¤¾ करने के लिà¤, डॉकà¥à¤Ÿà¤° को गांठको काटकर और चीरे के माधà¥à¤¯à¤® से à¤à¤• पतली, खोखली टà¥à¤¯à¥‚ब अंदर डालते हैं । वे तब शरीर से वसा कोशिकाओं के दà¥à¤°à¤µà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ को चूसने के लिठटà¥à¤¯à¥‚ब का उपयोग करते हैं।
सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद, डॉकà¥à¤Ÿà¤° आमतौर पर लिपोमा से निकली सामगà¥à¤°à¥€ को विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ के लिठपà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤—शाला में à¤à¥‡à¤œà¤¤à¥‡ हैं। घाव ठीक हो जाने के बाद इस पà¥à¤°à¤•ार के ऑपरेशन अकà¥à¤¸à¤° à¤à¤• छोटा सा निशान छोड़ देते हैं।
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