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परिचय
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€-पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में रकà¥à¤¤à¤¦à¥à¤°à¤µà¥à¤¯ यानि हिमोगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¥€à¤¨à¤•ा पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ कम होता है। लगà¤à¤— ६०-à¥à¥¦% महिलाओं को à¤à¤¨à¤¿à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ रकà¥à¤¤à¤¾à¤²à¥à¤ªà¤¤à¤¾ की बीमारी होती है। इसका कारण हमारे à¤à¥‹à¤œà¤¨ में लोह, फॉलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡,विटामिन बी-१२ और पà¥à¤°à¤¥à¤¿à¤¨à¥‹à¤‚की कमी होती है। गरीबी कषà¥à¤Ÿà¤®à¤¯ जीवन तथा निकृषà¥à¤Ÿ आहार और इस रोगका कारण होता है। रकà¥à¤¤à¤¾à¤²à¥à¤ªà¤¤à¤¾ से कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾, रोग कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ और उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ कम हो जाते है। यह बीमारी धीरे-धीरे बà¥à¤¤à¥€ है। अत: इसकी आदत सी पड़ जाती है। हम इस बीमारी का पता लगाकर, उपचार कर सकते है। लोह पà¥à¤°à¤¥à¤¿à¤¨ की कमी होनेवाली यह बीमारी सारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• है। लेकिन हिमोगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¥€à¤¨ कम होनेवाला à¤à¤• और बीमारी का पà¥à¤°à¤•ार आनà¥à¤µà¤‚शिक है। इसे सिकलसेल अनीमिया कहते है। ये कà¥à¤› जनजातियों में नजर आता है।
अनीमिया – अधिक जानकारी
लोह पà¥à¤°à¤¥à¤¿à¤¨ तथा फॉलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ की कमी इस रोग के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण है। ये ततà¥à¤¤à¥à¤µ रकà¥à¤¤ की लाल कोशिकाओं में हिमोगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¥€à¤¨ रंजक तैयार करने हेतॠलगतें है। इन ततà¥à¤¤à¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी से रंजक पदारà¥à¤¥ कम होकर फीका दिखता है।
केवल शाकाहारी लोगो में लोह कमतरता होती है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की शाकाहार में लोह का कà¥à¤·à¤¾à¤° कम होता है, और कम उपयà¥à¤•à¥à¤¤ होता है।
à¤à¥‹à¤œà¤¨ में पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‰à¤‚, दालों की कमतरता से लोह कम पड़ता है। पतà¥à¤¤à¤¾à¤—ोà¤à¥€ या चाय जैसे पदारà¥à¤¥ à¤à¥‹à¤œà¤¨ में शामिल हो तब लोह को पाचन संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में रà¥à¤•ावट पैदा करते है।
शरीर से रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤µ होते रहने से कà¥à¤² हिमोगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¥€à¤¨ कम पड़ जाता है। माहवारी में रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤µ अधिक होना, बारबार पà¥à¤°à¤¸à¤µ होना, अरà¥à¤¶, जठरवà¥à¤°à¤£, आंतो में हà¥à¤•कृमी आदि कारणों से खून की हानि होती है।
कैंसर तथा खून का कैंसर, हिमोफिलिया, मलेरिया, उसी पà¥à¤°à¤•ार तीवà¥à¤° जंतà¥à¤¦à¥‹à¤· टी.बी. – कà¥à¤·à¤¯à¤°à¥‹à¤— के कारण à¤à¥€ रकà¥à¤¤à¤¦à¥à¤°à¤µà¥à¤¯ कम पड़ता है।
उपचार
इसके लिये अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¤¸à¥‡ मिले।
अतिगंà¤à¥€à¤° बीमारी में पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ उपचार आवशà¥à¤¯à¤• है। कà¥à¤› लोगों को लोहकà¥à¤·à¤¾à¤° के इंजेकà¥à¤¶à¤¨ या खून देना पड़ता है।
- लोहकà¥à¤·à¤¾à¤° तथा फॉलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ की गोलियॉं खाने से धीरे-धीरे रकà¥à¤¤à¤¦à¥à¤°à¤µà¥à¤¯ बढता है। रकà¥à¤¤à¤¦à¥à¤°à¤µà¥à¤¯ कम से कम १२ गà¥à¤°à¤¾à¤® तक आने तक गोलियां चालू रखना चाहिये। साथ ही खाने में पà¥à¤°à¤¥à¤¿à¤¨à¥‹à¤‚ की मातà¥à¤°à¤¾ बà¥à¤¾à¤¨à¥€ चाहिये। इसके लिये दालें, मà¥à¤à¤—फली, सोयाबीन, और संà¤à¤µ हो तो अंडे, मांस, मछली, पनीर आदी अवशà¥à¤¯ खाये।
- लोहकà¥à¤·à¤¾à¤° के लिये टॉनिक महंगे पड़ते है। इनमें लोहकà¥à¤·à¤¾à¤° à¤à¥€ वैसे कम ही होता है। उसकी अपेकà¥à¤·à¤¾ गोलियां और ससà¥à¤¤à¥€ पड़ती है।
à¤à¤¨à¤¿à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ अगर किसी बीमारी की वजहसे हो तो उस ओर विशेष धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दे।
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